आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की बीना का विवाह धूमधाम से हुआ। इस आयोजन को संपन्न कराने में सोशल मीडिया के जरिये लधियाघाटी संगठन ने आर्थिक मदद व सामग्री जुटाई। वहीं ग्रामीणों की एकजुटता से गांव की बेटी के विदाई खुशी के बहे आंसुओं के साथ हुई।
पाटी ब्लाक, के साल गांव की रहने वाली बीना बोहरा (19 वर्ष) की शादी में आर्थिक तंगी आड़े आ रही थी। बीना के पिता वासुदेव बोहरा मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं। उनकी माता सुलोचना देवी जूनियर हाईस्कूल साल में भोजन माता है। बीना की चार बहनें पुष्पा (15), निर्मला (13), आरूषी (8) और काजल (5) हैं। आर्थिक परेशानी होने के कारण परिवार के सामने सबसे बड़ी बेटी की शादी कराना मुश्किल हो रहा था।
जो पैसा मां कमाती वह पिता आदि के इलाज में खर्च हो जाता है। ऐसे में मदद को आगे आया लधियाघाटी संगठन। जो 2008 से क्षेत्र में सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़कर भागीदारी कर रहा है। पिछले दो वर्षों से सोशल मीडिया के जरिये उन्होंने क्षेत्र के जरूरतमंदों की सहायता की है। संगठन ने साल गांव, रीठा साहिब के वासुदेव बोहरा की कन्या की शादी करने का संकल्प लिया है।
क्षेत्रवासियों से मदद की अपील की। सोशल मीडिया के माध्यम से जनप्रतिनिधियों, सरकारी, व प्राइवेट नौकरी कर रहे, बिजनेसमैन व जागरूक लोग उनकी मदद को आगे आए। संगठन ने शादी के लिए 80 हजार की धनराशि जुटाई और शनिवार को धूमधाम से बीना का विवाह प्रताप सिंह के साथ संपन्न हुआ। बरात नैनीताल जनपद में ओखलकांडा ब्लाक के झड़गांव पहुंची।
संगठन के पंडित कृष्ण चंद्र शास्त्री, कृष्ण चंद्र भट्ट ने विवाह संपन्न कराने में खास भूमिका निभाई और दानदाताओं का भी आभार जताया। बिटिया को हंसी-खुशी विदा करने में गांव के लोग भी पीछे नहीं रहे। किसी ने अपनी सामथ्र्य के मुताबिक सामग्री दी तो कोई कामकाज में हाथ बंटाने में आगे रहा।
























































इस अवसर पर बोलते हुए रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि मां गंगा हमारी एक धरोहर है जिस को साफ और स्वच्छ रखना यहां के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।मैंने बच्चों को शपथ दिलाई है वह जनजागरूकता फैलाकर इस पवित्र पावनि मां गंगा को स्वच्छ बनाने में आगे आएं और देश विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को भी स्वच्छता की ओर जागरूक करें। ऋषिकेश देवभूमि का प्रवेश द्वार है जहां साल भर मां गंगा में स्नान करने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु देश विदेश से पहुंचते हैं,ऐसे में गंगा में बढ़ते प्रदूषण को लेकर उन सब की आस्था पर भी चोट पहुंचती है,जरूरत है तो समाज में जन जागरूकता फैलाने की जिससे आने वाले दिनों में गंगा स्वच्छ निर्मल होकर बहने लगे।





