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डेडलाइन पर काम नहीं तो खैर नहीं: त्रिवेंद्र सिंह

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लगता है कि राज्य में सचिवालय और अधिकारियों का आरामपसंद तरीके से काम करने के अंदाज़ का स्वाद सूबे के मुख्यमंत्री को भी चखने को मिल गया है। इसके चलते मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने तौर तरीके बदलने के आदेश दे दिये हैं। रावत ने निर्देश दिए हैं कि

  • निर्माण कार्यों में एक समय सीमा तय की जाय।
  • जन समस्याओं के निदान हेतु सचिवालय में मिलने वालों के लिए एक दिन सुनिश्चित किया जाय।
  • प्रभारी मंत्री एवं प्रभारी सचिव अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर निरीक्षण करेंगे।
  • प्रभारी सचिव एवं मंत्री के दौरे के समय उन क्षेत्रों में जनता मिलन का कार्यक्रम भी रखा जाए। इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
  • किसी भी कार्य को करने के लिए एक समय सीमा तय की जाय।
  • उन्होंने निर्देश दिए कि राज्य के सभी अधिकारी व कर्मचारी समय पर कार्यालय में उपस्थित हो इसके लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था की जाए।
  • उन्होंने सचिवालय एवं सभी विभागों की कार्यप्रणाली को बदलने पर बल देते हुए कहा कि फाईल प्रोसेस को छोटा किया जाना चाहिए।
  • किसी भी फाइल को 4 स्तरों से अधिक स्तर पर ना गुजरना पड़े, इसका विशेष ख्याल रखा जाना चाहिए। इसके लिए ई-फाइलिंग की शुरुआत की जाए।
  • साथ ही फाइल ट्रेकिंग सिस्टम को लागू किया जाए। किसी भी फाईल की किसी भी स्तर पर एक निश्चित समय-सीमा तय की जाय। 

मुख्यमंत्री के तेवर तो काफी तीखे हैं पर देखना ये होगा कि सालों से चींटी की रफ्तार से काम करने के आदि हो चुके सरकारी कर्मचारियों पर सूबे के मुखिये के इन तेवरों का कितना असर पड़ता है।

कल बद्रीनाथ आऐंगे राष्ट्रपति,मौसम रहेगा साफ

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ दौरे के बाद, अब सरकारी मशीनरी बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के मौके पर, दर्शन के लिए पहुंच रहे राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के कार्यक्रम की तैयारियों में जुट गई है। चमोली के जिलाधिकारी विनोद कुमार सुमन और पुलिस अधीक्षक तृप्ति भट्ट ने बदरीनाथ धाम में डेरा डाल दिया है। राष्ट्रपति के बदरीनाथ दौरे का कार्यक्रम प्रशासन को मिल गया है।

इसके अनुसार राष्ट्रपति सुबह साढ़े आठ बजे बदरीनाथ पहुंचेंगे और डेढ़ घंटे बदरीनाथ रुकेंगे। इस दौरान वह अखंड ज्योति के दर्शन करने के बाद सुबह दस बजे देहरादून के लिए रवाना हो जाएंगे। राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस फोर्स तैनात रहेगी। करीब डेढ़ घंटे तक तीर्थयात्रियों और स्थानीय श्रद्धालुओं को भी बदरीनाथ परिसर से हटा दिया जाएगा। बदरीनाथ में कपाट खुलने के दिन बदरीनाथ के निर्वाण (बिना श्रृंगार के) दर्शन होते हैं। इस दिन अखंड ज्योति के दर्शन का महत्व है।

कहीं मौसम न डाल दे खलल: एक पखवाड़े से बदरीनाथ धाम में मौसम पल-पल बदल रहा है। बृहस्पतिवार दोपहर बाद धाम में अचानक मौसम खराब हो गया। बृहस्पतिवार को दोपहर साढ़े बारह बजे तक बदरीनाथ में बारिश रही, जबकि 3 मई को भी दिनभर मौसम खराब रहा। हालांकि, मौसम विभाग के मुताबिक छह मई को मौसम साफ रहेगा।

बदरीनाथ के कपाट खुलने के दिन धाम में कई वीआईपी मौजूद रहेंगे। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चंद्र अग्रवाल, पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत और बदरीनाथ विधायक महेंद्र भट्ट के धाम में पहुंचने का कार्यक्रम है। सूबे के राज्यपाल केके पाल और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी राष्ट्रपति के दौरे को लेकर धाम में पहुंच सकते हैं।

महिला को दस साल का कारावास

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विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस/प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश शंकर राज की कोर्ट, नैनीताल ने चरस के साथ पकड़ी गई हल्द्वानी की महिला को दस साल का कारावास व एक लाख जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट के फैसले के बाद महिला को जेल भेज दिया गया।  अभियोजन के अनुसार 22 अक्टूबर 2011 को अपराह्न सवा तीन बजे एसआइ अरुण कुमार, एसआइ श्वेता नेगी व पुलिस कर्मी मंगलपड़ाव चौकी हल्द्वानी के समीप गश्त पर थे। तभी मुखबिर ने सूचना दी कि गौलापुल के पास एक महिला पांच किलो से अधिक चरस के साथ खड़ी है।

पुलिस टीम मुखबिर को भी साथ ले गई। महिला ने पुलिस टीम को देखा तो वह कंधे पर लटके बैग को साड़ी के पल्लू से छिपाने लगी। सूचना पर तत्कालीन एएसपी पी रेणुका देवी व एसआइ मोहम्मद अकरम भी पहुंच गए। महिला विजेता उर्फ विजललक्ष्मी को पकड़ लिया गया। उसके पास पांच किलो 104 ग्राम चरस निकली। पुलिस ने एनडीपीएस में मामला दर्ज करने के बाद उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेजा। एसआइ अकरम द्वारा चरस को विधि विज्ञान प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा और कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी घनश्याम पंत द्वारा पांच गवाह पेश किए गए।

उन्होंने अदालत में सुप्रीम कोर्ट की करनैल सिंह बनाम राजस्थान सरकार की क्रिमिनल लॉ से संबंधित नजीर पेश की। जिसमें कहा गया है कि एनडीपीएस केस हत्या व हत्या के प्रयास के अपराध से भी अधिक गंभीर है। एडीजीसी ने महिला होने के बाद भी तस्करी करने को और भी गंभीर बताते हुए कठोर सजा की मांग की। अभियोजन व बचाव पक्ष की दलील सुनने तथा साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने विजेता उर्फ विजललक्ष्मी, पत्नी मुन्ना सोनकर, मोहल्ला गांधीनगर हल्द्वानी को सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर दो साल का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।

शराब की दुकान बंद करने को फिर उतरी महिलाए

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कुंडेश्वरी रोड स्थित ग्राम जसपुर-खुर्द,काशीपुर में शराब की दुकान के खिलाफ महिलाओं ने हाथ में लाठियां लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान दुकान के कर्मचारी ताला लगाकर खिसक गए।  सुबह गांव की महिलाएं लाठी लेकर दुकान पर पहुंच गईं। वहां उन्होंने सेल्समेन से दुकान बंद कराने को कहा तो उसने नुकसान होने के डर से दुकान बंद कर दी। इसके बाद महिलाओं ने दुकान न हटने पर रोष जताते हुए प्रदर्शन किया।

सूचना पर पहुंचे आबकारी निरीक्षक विष्णु थापा व पुलिस कर्मियों ने महिलाओं को समझाने की कोशिश की। महिलाओं ने उनकी एक नहीं सुनी। साथ ही एसडीएम को घटना स्थल पहुंचकर वादे का जवाब देने की मांग पर अड़ गईं। कुछ देर बाद एसडीएम दयानंद सरस्वती मौके पर पहुंचे। एसडीएम को देखते ही महिलाओं ने शराब की दुकान हटाओ की नारेबाजी करनी शुरू कर दी। महिलाओं ने कहा कि प्रशासन ने 30 अप्रैल तक का समय मांगा था, लेकिन दुकान नहीं हटाई गई।

इस पर एसडीएम ने कहा कि वह अपना वादा नहीं भूले हैं। इस बीच एसडीएम और महिलाओं के बीच नोंक झोंक भी हुई। इस दौरान एसडीएम की पहल पर दुकान स्वामी से कहा कि वह एक जून से दुकान कही और शिफ्ट कर लेगा। इस पर महिलाएं मानीं।

 

एसिड अटैक पीडिता एएसपी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठी

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एसिड अटैक पीडित पत्नी और सास ने तीन साल की बच्ची के साथ न्याय की गुहार लगाने की मांग को लेकर एएसपी कार्यालय के बाहर धरना शुरु कर दिया है। पिडित महिला का कहना है कि लगातार उसके पति द्वारा उसे प्रताडित किया जा रहा है और उसको घर से निकाल दिया गया है, जिसके लिए वो न्याय के लिए हर चौखट पर जा चुकि लेकिन उसे न्याय नहीं मिला है।
यही नहीं मामला कोर्ट में दायर करने के बाद उसके पति द्वारा उस पर और उसकी मां पर तेजाब डालकर दबाव मुकदमा वापस लेने के दबाव बनाया जा रहा है लेकिन उसकी कोई सुनवायी नहीं हो रही है और पुलिस अब तक आरोपी को गिरफ्तार भी नहीं कर पायी है। न्याय मिलने की आशा खो चुकी पीडिता ने एएसपी कार्यालय के बाहर धरना शुरु कर दिया है और दो दिन में गिरफ्तारी ना होने पर आत्म हत्या की चेतावनी दी।
वहीं पुलिस का कहना है कि पुरे मामले की जांच की गयी है जिसमें महिलीओं द्वारा लगाये गये आरोप बेबुनियाद पाये गये है, जिससे कोई कार्यवाही न्यायोचित नहीं होगी।

हफ्ते में एक दिन जिले की कमान बच्चों के हाथ

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अगर बच्चों का पूरा विकास चाहते हैं तो उसकी शुरुआत बचपन से ही होती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए स्कूली बच्चों की प्रतिभा को संवारने के लिए टिहरी गढ़वाल के डीएम ने एक नई पहल शुरू की है। इस पहल के तहत स्कूली बच्चों को सप्ताह में एक दिन के लिए डीएम बनाया जाएगा।

टिहरी की नई डीएम सोनिका ने सरकारी स्कूलों के छात्र-छात्राओं में जिम्मेदारी समझने की क्षमता विकसित करने के लिए एक पहल की है। इसमें दसवीं और 12वीं के बच्चों को सप्ताह में एक दिन कलेक्ट्रेट में डीएम के साथ बिठाया जाएगा।

इससे बच्चे एडमिनिस्ट्रेशन के कामकाज और तौर तरीकों से तो अवगत होंगे ही, इसके अलावा उनसे अलग-अलग मसलों पर राय भी ली जाएगी। बच्चों के चयन की जिम्मेदारी मुख्य शिक्षाधिकारी की होगी।

बातचीत में उन्होंने खुलासा किया कि इसके लिए प्रत्येक सरकारी विद्यालय से कक्षा 11वीं और 12वीं के प्रतिभाशाली दो या तीन बच्चों का चयन किया जाएगा। जिलाधिकारी ने कहा कि जल्द ही इसके लिए दिन निर्धारित कर दिया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई की संभवत: अगले सप्ताह से यह प्रयोग शुरू हो जाए।

केदारनाथ में 600 मीटर से ऊपर ही उड़ेंगे हेलीकाप्टर

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राज्य सरकार ने केदारनाथ में उड़ने वाले हेलिकाॅप्टरों के लिये उड़ने की ऊंचाई तय कर दी है। ऐसा केदार घाटी में पर्यावरण को हेलीकाॅप्टरों के उड़ने से होने वाले नुकसान से बचने के लिये किया गया है। गुरूवार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में केदारनाथ में हैली सेवाओं के आपरेटरों के साथ बैठक में इसका फैसला किया गया। बैठक में केदारनाथ वाईल्ड लाईफ सेंचुरी में रह रहे वन्य जीवों पर हैली सेवाओं के चलने से पड़ने वाले असर पर चर्चा की गयी। एक रिपोर्केट में कहा गया है कि

  • केदारनाथ हैली सेवा के लिये गौरीकुण्ड से रामबाड़ा तक का इलाका केदारनाथ वन्य जीव पार्क में पड़ता है।
  • इस क्षेत्र में हैलीकाप्टर 600 मीटर की ऊॅचाई पर उड़ना चाहिए।
  • सभी हैलीसेवा कंपनियों को निर्देशित किया गया कि केदारनाथ वाइल्ड लाईफ सेंचुरी में हैली सेवाओं की उड़ान 600 मीटर से अधिक ऊॅंचाई पर की जाय।
  • हेलीकाप्टर की लेंडिंग और टैकआॅफ के समय यह प्रतिबन्ध नहीं रहेगा।
  • सेवा देने वालों को यह भी निर्देशित किया गया कि हैलीकाप्टरों द्वारा 600 मीटर से अधिक की ऊॅचाई पर उड़ान भरने से ध्वनि प्रदूषण भी कम होगा जिससे वन्य जीवों पर प्रभाव नहीं पड़ेगा।
भारतीय वन्य जीव संस्थान से हेलीकाप्टरों की उड़ान से केदारनाथ नेशनल पार्क में पड़ने वाले असर का अध्ययन करने के लिए कहा गया था। देश में पहली बार हुए इस अध्ययन में पाया गया कि इस क्षेत्र में जितने वन्य जीव पहले थे, उतने अभी भी हैं। यानि हेलीकाप्टरों की उड़ान से वन्य जीव कहीं और नहीं गये।
केदारनाथ वाईल्ड लाईफ सेंचुरी के करीब बने सिरसी हेलीपैड से उड़ान भरने वाले हैलीकाप्टर केदारनाथ के निकट होने के चलते तय 600 मीटर की ऊॅचाई प्राप्त नहीं होती है, इसलिये सिरसी हैलीपैड से उड़ान भरने वाले हैलीकाप्टर केदारनाथ की ओर उड़ने से पहले केदारनाथ वाईल्ड लाईफ सेंचुरी के इलाके से बाहर उलटी दिशा में उड़ान भरकर 600 मीटर से अधिक ऊॅंचाई पर पहुंचने के बाद ही केदारनाथ की तरफ उड़ान भरेंगे।
हांलाकि ये भी तय हुआ कि अगर किसी मौसम आदि की स्थिति में किसी हेलीकाप्टर को 600 मीटर से कम ऊॅचाई पर उड़ान भरनी पड़ती है तो इसका लाॅग बुक में रिकाॅर्ड रखा जायेगा।

डीएम कार्यालय के सामने आग

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बागेश्वर में गर्मी बढ़ने के साथ ही जंगल धधकने लगे हैं। जंगलों की आग रोकने में वन विभाग पूरी तरह विफल ही साबित हो रहा है।

जिलाधिकारी कार्यालय के सामने के जंगल में आग धधकने लगी। थोड़ी देर में पूरा जंगल आग की चपेट में आ गया। जंगल में आग की बड़ी-बड़ी लपटें दिखाई देने लगी। पूरा जंगल धुंए से भर गया। इस जंगल के बीच से दफोट और मानता को जाने वाली सड़क भी निकलती है। घंटों जंगल धधकने के बाद भी वन विभाग का कोई कर्मचारी व अधिकारी मौके पर नही पहुंचा। पूरा जंगल आग से राख हो गया। आग लगने के साथ तेज हवाएं भी चल रही थी जिससे आग और फैलने लगी। आग इतनी भयंकर थी कि मुख्यालय के आसपास धुंध छा गई। आग को बढ़ता देख आनन-फानन में अग्निशमन दल की गाड़ी को मौके पर भेजा गया। लेकिन तब तक कई हेक्टेअर जंगल आग की भेंट चढ़ गया।

गर्मी के मौसम को देखते हुए वन विभाग ने आग को नियंत्रित करने के बड़े-बड़े दावे किए थे। लेकिन सारे दावे हवा-हवाई ही साबित हो रहे है। जंगल की आग रोकने के लिए वन विभाग फिलहाल असफल ही साबित हो रहा है। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जंगल में आग की सूचना मिलते ही टीम को मौके पर भेज दिया गया है। अग्निशमन दल को भी रवाना किया गया है। उन्होंने कहा कि प्राथमिकता से जंगल की आग पर काबू किया जा रहा है।

सीएम रावत पहुँचे बाबा प्राचीन सिद्धपीठ वीरभद्र के द्वार

राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत तीर्थनगरी ऋषिकेश के प्राचीन सिद्धपीठ वीरभद्र मंदिर पहुँचे, जहां उन्होंने भगवान भोले की पूजा की ओर रुद्राभिषेक किया। उसके बाद सीएम कार्यकर्तायों के साथ बैठक के लिए पीडब्लूडी गेस्ट हॉउस पहुँचे। यहां पहुंचने पर उनका कार्यकर्तायों ने जोरदार स्वागत किया। बैठक मे पार्टी और सरकार के बीच तालमेल को लेकर चर्चा की गई। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि वो ऋषिकेश के पौराणिक वीरभद्र मंदिर के दर्शन और जलाभिषेक करने पहुँचे और उन्होंने राज्य की खुशहाली के लिए कामना की ओर बैठक में आम लोगों की समस्याएं सुनी।

जल्द तैयार होगा डाट काली मंदिर के पास डबल टनल

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डाट काली की जिस डबल लेन टनल (सुरंग) पर उत्तर प्रदेश सरकार दो साल से अड़ंगा डाले बैठी रही, उसकी राह अब जाकर योगी सरकार में आसान हो पाई। उत्तर प्रदेश की सीमा में करीब 250 मीटर हिस्से के वन क्षेत्र में निर्माण की अनुमति सोमवार को उत्तराखंड को दे दी गई। इसके साथ ही कार्यदाई संस्था लोनिवि ने टनल निर्माण की कवायद भी शुरू कर दी है।

डाट काली मंदिर के पास सिंगल लेन टनल के पास डबल लेन टनल के निर्माण की अनुमति केंद्र सरकार ने मार्च 2015 में जारी कर दी थी। इसके तुरंत बाद उत्तराखंड सरकार ने भी निर्माण की कवायद शुरू कर दी थी, टनल निर्माण क्षेत्र का बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश के वन क्षेत्र में आने के बाद यह कसरत अधर में लटक गई थी। तब उत्तर प्रदेश सरकार ने टनल निर्माण पर सैद्धांतिक सहमति तो दे दी थी, लेकिन अंतिम स्वीकृति देने में अपेक्षित दिलचस्पी नहीं दिखाई।

अंतिम स्वीकृति को लेकर लोनिवि की राष्ट्रीय राजमार्ग यूनिट के रुड़की खंड ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु पर्यावरण मंत्रालय के लखनऊ स्थित क्षेत्रीय कार्यालय (मध्य) में संपर्क किया तो अधिकारियों ने राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की राह बता दी। दरअसल, उत्तर प्रदेश के इस हिस्से में हाथी आरक्षित वन क्षेत्र है। हालांकि बोर्ड से लोनिवि को वापस लखनऊ स्थित क्षेत्रीय कार्यालय भेज दिया गया। इसके बाद लोनिवि अधिकारी कई बार लखनऊ के चक्कर लगाते रहे और उन्हें हर बार गोलमोल जवाब मिलता रहा। उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद कामकाज की तस्वीर बदली तो लखनऊ में बैठे अधिकारियों को भी अपनी जिम्मेदारी याद आ गई।

वहीं, मुख्य अभियंता (राष्ट्रीय राजमार्ग) हरिओम शर्मा का कहना है कि डाट काली टनल पर लोनिवि को उत्तर प्रदेश की अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद बहुत जल्द ठेकेदार को निर्माण की तारीख भी दे दी जाएगी।

परियोजना पर एक नजर:

  • लागत: करीब 58 करोड़ रुपये
  • चौड़ाई: डबल लेन (करीब सात मीटर)
  • सुरंग की लंबाई: 330 मीटर
  • उत्तर प्रदेश की तरफ टनल: 250 मीटर
  • एप्रोच रोड: करीब 455 मीटर
  • देहरादून की तरफ एप्रोच: 250 मीटर
  • उत्तर प्रदेश की तरफ एप्रोच: 205 मीटर

इसलिए जरूरी है डबल लेन टनल:

अभी तक वाहनों के आवागमन के लिए डाट काली मंदिर के पास सिंगल लेन टनल ही है। इसके चलते यहां पर जाम की स्थिति बनी रहती है। डबल लेन टनल के बाद यह समस्या दूर हो पाएगी।

ईपीसी मोड में होगा काम:

राष्ट्रीय राजमार्ग खंड के अधिशासी अभियंता मो. यूसुफ के अनुसार डाट काली टनल का निर्माण ईपीसी (इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) मोड में किया जाना है। इसके तहत निर्माण के अलावा डिजाइन भी ठेकेदार का होता है। विभाग सिर्फ उसे स्वीकृति देता है। इस मोड में ठेकेदार किसी भी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता।