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उत्तराखंड सरकार भी मनाएगी ”मोदी फेस्ट”

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उत्तराखंड राज्य में बीजेपी की प्रचंड बहुमत वाली सरकार बनने के बाद राज्य ने एक के बाद एक नए फैसले लिए हैं।इसी कड़ी में उत्तराखंड की बीजेपी कमेटी ने एक नया ऐलान किया है कि आने वाली 26 मई को वह ”मोदी फेस्ट” का आयोजन करेंगे जिसमें वह मोदी सरकार के तीन साल के दौर की सफलता को अलग-अलग इवेंट के माध्यम से दिखाऐंगे।

बीजेपी के जनरल सेक्रेटरी संजय कुमार ने बताया कि इस राज्य स्तर के कार्यक्रम ”मोदी फेस्ट” का आयोजन पार्टी के केंद्रीय मुख्यालय के कोआर्डिनेशन से किया जा रहा है।

इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए केंद्रीय मंत्री, बीजेपी सरकार वाले राज्यों के मुख्यमंत्री और सांसदों ने इसमें भाग लेने के लिए अपनी कमर कस ली है।

आपकों बतादें कि आने वाले 26 मई को पीएम मोदी की सरकार को बनें 3 साल पूरे हो जाऐंगे जिसका उत्सव मनाने के लिए बीजेपी ने इस फेस्ट का आयोजन किया है।

ये 10 लोग अगर राष्ट्रगान पर उठे तो अच्छा नहीं होगा

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अगर आप सिनेमाहाॅल में पिक्चर देखने जाते हैं तो आपको यह पता होगा कि हर फिल्म शुरु होने से पहले थियेटर में राष्ट्रगान चलाया जाता है और राष्ट्रगान के सम्मान में हर किसी को अपनी जगह खड़ा होना होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि राष्ट्रगान को गाते समय कौन से लोग है जो अगर ना खड़े हो तो भी चलेगा।

राष्ट्रगान पर जिनको न खड़े होने की छूट है, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी लिस्ट को बढ़ा दिया है और अब कुल 10 केटेगरी बना दी हैं। उन लोगों की जो सिनेमा हॉल में नेशनल एंथम पर ना खड़े हों तो चलेगा।

इन 10 स्थितियों के लोगों को सिनेमा हॉल में फिल्म में बजने वाले नेशनल एंथम पर ना खड़े होने की छूट होगी:

  • दृष्टिहीन
  • सुन न सकने वाले लोग
  • ऑटिज्म
  • सेरिब्रल पाल्सी यानी दिमाग के उस हिस्से का काम न करना, जो शरीर में होने वाले हलचल को कंट्रोल करते हैं, नतीजतन लोगों को चलने फिरने से लेकर खाने, गटकने, उलटने, हर तरह के मूवमेंट में तकलीफ होती है।
  • पार्किन्संस डिजीज यानी नसों का काम करना बंद करना। जिसे चलने फिरने, सोचने समझने मे तकलीफ हो। इसके अलावा दिमागी तौर पर उलझन और डिप्रेशन भी हो सकता है।
  • मस्कुलर डिस्ट्रोफी यानी मांसपेशियों का हद से ज्यादा कमज़ोर होना, जिससे लोगों को चलने में तकलीफ होती है।
  • चल-फिर न पाने वाले
  • मल्टिपल स्क्लेरोसिस यानी ऐसी स्थिति जिसमें नसों, स्पाइनल कॉर्ड और दिमाग के सेल्स पर चढ़ा हुआ नेचुरल कवर उतर जाता है। जिससे शारीरिक और मानसिक तकलीफें हो जाती हैं।
  • जिनको कभी कुष्ठरोग रहा हो
  • सीखने या समझने में जिन्हें तकलीफ होती हो

29 से 31 मई तक भारी बारिश की चेतावनी

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मौसम विभाग ने आगामी 29 से 31 मई, 2017 तक प्रदेश के कुछ जनपदो के विभिन्न क्षेत्रों में मध्यम से तेज और कही कहीं भारी बारिश की चेतावनी दी है। मौसम विभाग की सलाह पर मुख्य सचिव एस.रामास्वामी ने चारधाम यात्रा को ध्यान में रखते हुए तीर्थयात्रियों एवं आम जन की सुरक्षा के लिए जिलाधिकारी उत्तरकाशी, चमोली, रूद्रप्रयाग एवं पिथौरागढ़ को निर्देश दिए है कि भूस्खलन एवं संवेदनशील स्थानों पर जरूरी एहतियात बरतें।

मौसम ने बदली करवट पहाड़ में जनजीवन अस्त-व्यस्तः

उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में मौसम का बिगड़ा मिजाज भारी पड़ने लगा है। देवप्रयाग क्षेत्र में दशरथ पर्वत पर हुई जोरदार वर्षा के बाद उफान पर आए बरसाती नाले के बहाव में भरपूर पट्टी को जोडने वाले रामपुर-श्यामपुर-बमाणा मार्ग का एक हिस्सा बह गया, जबकि छह गांवों की पेयजल योजना क्षतिग्रस्त हो गई। बामाणा के प्रधान रतन सिंह राणा ने बताया कि निजी वाहन से देवप्रयाग जाते वक्त वह खुद नाले के उफान में फंस गए थे, कुछ लोगों ने उन्हें सुरक्षित निकाला। सड़क बंद होने और पेयजल योजना क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

चमोली जिले में खराब मौसम के कारण जोशीमठ से पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज का हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर पाया। उन्हें द्रोणागिरी जाना था।टिहरी जिले में बारिश, अंधड़ व ओलावृष्टि से घनसाली, चंबा, जौनपुर क्षेत्रों के दर्जनों गांवों की विद्युत आपूर्ति ठप हो गई व जनजीवन प्रभावित रहा। कई क्षेत्रों की बत्ती भी गुल है। पिथौरागढ़ व जनपदों में भी खासा नुकसान पहुंचा है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हिमपात की सूचना है। यही नहीं, देहरादून, पौड़ी सहित अन्य स्थानों पर कहीं हल्की तो कहीं जोरदार बौछारें पड़ीं। उधर, मौसम विभाग के मुताबिक मौसम के मिजाज में तब्दीली के आसार नहीं हैं। चमोली जिले में तो दिनभर ही मौसम खराब रहा, हालांकि बदरा बूंदाबांदी तक सिमटे रहे।

पौड़ी में जोरदार बारिश हुई तो देहरादून में भी शाम के वक्त तेज हवा के साथ ही कुछ क्षेत्रों में हल्की वर्षा हुई । पिथौरागढ़ जिले के गणाई गंगोली तहसील क्षेत्र में शाम के वक्त तेज हवा के साथ मौसम ने पलटी मारी। इसी दरम्यान अल्मोड़ा-सेराघाट-बेरीनाग मार्ग में तपोवन के पास पेड़ उखड़कर सड़क पर आ गिरे, जिससे दो घंटे यातायात ठप रहा। क्षेत्र भ्रमण से लौट रहीं गंगोलीहाट की विधायक मीना गंगोला यहां फंसी रही। ताड़ीखेत, रामगढ़ व बेतालघाट विकासखंडों में फल पट्टियों को खासी क्षति पहुंची है। नैनीताल व अल्मोड़ा जिले की फल पट्टियों में भी फसलें तबाह हो गईं।

मौसम विभाग के मुताबिक उत्तराखंड में आंशिक से लेकर आमतौर पर बादल छाये रहेंगे। उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग व पिथौरागढ़ जनपदों में कुछ जगह और शेष जिलों में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम वर्षा अथवा गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है।

मैदानी क्षेत्रों को मिली राहतः

मौसम की बदली करवट के साथ ही पहाड़ों में हो रही बारिश और मैदानी क्षेत्रों में गाहे-बगाहे तेज हवा के साथ ही हल्की वर्षा व बूंदाबांदी से मैदानी इलाकों को उछाल भरते पारे से कुछ राहत मिली है। देहरादून, पंतनगर समेत अन्य स्थानों में अधिकतम तापमान सामान्य के करीब आ गए हैं।

बस हादसे के शिकार लोगों के शवों को भेजा घर

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मंगलवार को उत्तरकाशी के नालूपानी में एक बस हादसे का शिकार हो गयी थी। बस में अधिकतर यात्री इन्दौर, मध्यप्रदेश के रहने वाले थे। यह हादसा मंगलवार शाम 5:30 बजे हुअा। एडीजी राम सिंह मीणा के बयान ने इसकी पुष्टी की अौर बताया कि बस का टायर निकलने से यह हादसा हुआ। बुधवार रात विनोद कुमार शर्मा कमिश्नर गढवाल व पुष्पक ज्योति पुलिस उपमहानिरीक्षक गढवाल परिक्षेत्र स्वंय उपस्थित होकर व अपने संरक्षण में 24 मृत्तको के शवों को सुराक्षित जौलीग्राण्ट्र हास्पिटल में पहुंचाने के बाद शवों  का केमिकल ट्रीटमेंट (एमबाम्बिंग) कराके शवों को सुराक्षित इन्दौर(मध्यप्रदेश) आज ही रात भेजने की कार्रवाही की जा रही है। मौके पर मध्यप्रदेश के एडीजी के साथ समस्त मध्यप्रदेश पुलिस बल मौजूद हैl

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाको में सड़के हादसे रुकने का नाम नही ले रहे है । सोमवार को भी अलग अलग सड़क हादसों में आधा दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हो गयी थी। उत्तरकाशी के नालूपानी में गंगोत्री से आ रही बस, धरासू से 11 किलोमीटर आगे अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। जिसमें अब तक कुल 24 लोगो की इस दर्दनाक हादसे में मौत हो गयी, 06 लोग गम्भीर से गायल हुये जिन्हें पुलिस ने हायर सेन्टर पहुचाया गया। पुलिस द्वारा अभी भी मिसिंग 01 व्यक्ति के राहत व बचाव का कार्य जारी है।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने घटना पर शोक व्यक्त किया और राहत बचाव के कामों में तेज़ी के लिये मुख्य सचिव को निर्देश दिये हैं। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 1 लाख और गम्भीर घायलों के लिए 50,000 रुपए सहायता की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने बस दुर्घटना पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए इसकी मजिस्ट्रेटी जाँच के निर्देश दिए हैं। परिवहन आयुक्त और पुलिस को वाहनों की सख़्त जाँच के निर्देश भी दिए है। मुख्य सचिव को राहत बचाव के कार्यों को युद्दस्तर पर करने के निर्देश। बीअारअो तथा नैशनल हाइवे को चारधाम यात्रा मार्गों पर संवेदनशील स्थानों / भूस्खलन संभावित क्षेत्र पर आवश्यक सावधानियाँ रखने और क्रैश बैरीअर बनाने के निर्देश।

 

जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद में 4 बाइकों में लगाई आग

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सितारगंज के नानकमत्ता क्षेत्र के सिद्धा गांव में जमीन पर कब्जे को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए। एक पक्ष ने हवाई फायरिंग करते हुए चार मोटर साइकिलों को आग के हवाले कर दिया। बताया जा रहा है कि एक पक्ष खेत में जुताई के लिए पहुंचा। तभी दूसरा पक्ष वहां पहुंच गया और दोनों में मारपीट होने लगी। इसी दौरान जुताई का विरोध कर रहे एक व्यक्ति ने हवाई फायरिंग कर दी। इससे मौके पर भगदड़ मच गई।

नानकमत्ता के थाना प्रभारी अशोक कुमार ने बताया कि सिद्धा गांव से होकर गुजर रहे हाईवे के किनारे विवादित जमीन पर इसी गांव के दो गुट कब्जा करने की फिराक में हैं। जवाहर सिंह का गुट ट्रैक्टर से जमीन की जुताई करने पहुंच गया, जैसे ही उसने खेत में ट्रैक्टर चलाना शुरू किया तो गांव के ही निरबैर सिंह गुट को इसकी जानकारी मिल गई। पुलिस का कहना है कि निरबैर सिंह गुट भी अपने समर्थकों के साथ खेत पर पहुंचा और जमीन पर कब्जा करने वालों को विरोध किया।

पुलिस को छानबीन में पता चला कि निरबैर सिंह के गुट ने जवाहर सिंह के साथियों की सड़क किनारे खड़ी चार मोटर साइकिलों में आग लगा दी। थाना प्रभारी अशोक कुमार ने बताया कि पुलिस को जैसे ही घटना की जानकारी मिली वह फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने मोटरसाइकिलों को कब्जे में ले लिया है। अभी किसी पक्ष की ओर से पुलिस को तहरीर नहीं दी गई।

यहां देखेंः

अब माओवादी उत्तराखंड में करायेंगे शराबबंदी

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उत्तराखंड में पूर्ण शराब बंदी की मांग करते पोस्टर माओवादियों ने सरकारी भवनों पर चस्पा कर प्रशासन की नींद उड़ा दी। रविवार की रात धौलीछीना स्थित, खंड विकास अधिकारी कार्यालय व राजकीय इंटर कालेज अल्मोड़ा की दीवारों पर माओवादी नारों से रंगे लाल पोस्टर देखकर लोग सन्न रह गए।

दोनों सरकारी भवनों पर जो पोस्टर चस्पा किए गए हैं वह कथित तौर पर भारत की कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी की ओर से जारी हैं। जिस पर यह भी लिखा है कि वह यहीं के लोग हैं। शराब बंदी की मांग कर रहे हैं। माओवादी के नाम पर भेदभाव व उत्पीड़न करने की चेतावनी भी दी है।

सोमवार की सुबह लोगों ने पोस्टर देखा तो हड़कंप मच गया। एसडीएम सदर विवेक राय ने मामले की जांच के की। उन्होंने राजकीय इंटर कालेज के प्रधानाचार्य व बीडीओ को निर्देश दिए कि वह रात्रि में नियुक्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगें और गश्त बढ़ाएं।

पता कराएं कि पोस्टर कब और किन लोगों ने चस्पा किए। उस समय चौकीदार कहां थे। जिले के आस-पास क्षेत्रों में इससे पहले तीन बार माओवादी पोस्टर चस्पा किए जा चुके हैं। पिछले दिनों बागेश्वर जिलों में भी दीवारों पर भाकपा माओवादी की तरफ से पोस्टर लगाए गए थे।

वहीं, एसडीएम सदर विवेक राय का कहना है कि मामले को पूरी गंभीरता से लिया जा रहा है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस की रैकी करने वालों पर सिकंजा

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रेकी करने वाले फिल्डरों की अब खैर नहीं। काशीपुर में अवैध खनन से भरे वाहनों के साथ पुलिस की रैकी करने वाले फिल्डरों पर पुलिस ने नकेल कसना शुरु कर दिया है। जिसके लिए खनन माफिया की लगाई फील्डिंग पर अब पुलिस ने बैटिंग शुरू कर दी है। पुलिस ने रेकी करने वाले कई लोगों की बाइक सीज कर दी है। पुलिस अवैध खनन के साथ-साथ रेकी करने वालों के खिलाफ भी अभियान चला रही है।

कोसी नदी में अवैध खनन करने वाले कुछ युवकों को पुलिस की रेकी करने के लिए रखा गया है। जिन युवकों के पास बाइक नहीं है, उन्हें खरीद कर बाइक भी दी गई है। नदी के खनन क्षेत्र से जुड़े मार्गो पर जगह-जगह खोखों पर युवक खड़े रहते हैं। जब पुलिस व प्रशासन की टीम गुपचुप तरीके से अवैध खनन के खिलाफ छापा मारने जाती है तो इसकी सूचना मोबाइल से युवक खनन माफिया को दे देते हैं। माफिया मौका पाकर अवैध खनन में शामिल लोग ट्रैक्टर-ट्रॉली, डंपर व ट्रक लेकर भाग जाते हैं। ऐसी स्थिति में माफिया प्रशासन के हाथ नहीं लग पाते हैं।

अब पुलिस अवैध खनन के साथ रेकी करने वालों पर भी नजर है। आइटीआइ थाना प्रभारी जसवीर सिंह चौहान ने बताया कि कुछ युवक पुलिस की रेकी करते हैं। इन पर भी अंकुश लगाना बेहद जरूरी है। रोजाना रात में अवैध खनन के खिलाफ अभियान चलाया जाता है। तीन दिन में रेकी करने वाले सात युवकों को बाइक सहित पकड़ लिया गया। युवकों को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया, मगर सात बाइकों को सीज कर दिया गया है। एक बाइक छोड़ किसी बाइक पर नंबर प्लेट नहीं थी। अब रेकी करने वालों की बाइक सीज करने के साथ केस भी दर्ज होगा।

ईडी ने अवैध ”फॅारेन करेंसी एक्सचेंज” की तीन दुकानों में मारा छापा, 68 लाख सीज़

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बेहिसाब धन पर कार्रवाई के दौरान, ईडी के अधिकारियों ने देहरादून में “अवैध” फारेन करेंसी चेंजर गौरव कुमार के तीन परिसरों में छापा मारा और मंगलवार शाम यहां से 68 लाख रुपये फारेन और इंडियन करेंसी जब्त किए।

ईडी टीम के 3 अधिकारियों ने गौरव के दो बिजनेस जगहों पर छापा मारा जिनमें से एक शहर के बीचों-बीच सेंट जोसफ स्कूल के पास और नेशविला रोड पर स्थित है। इसके अलावा उनके घर जो मसूरी डायवर्जन पर स्थित है वहा भी छापा मारा।

ईडी के अधिकारी ने बताया कि यह छापे 3 जगहों पर चले, लेकिन अभी के लिए 68 लाख की रिकवरी हुई है जिसमें से 17 लाख फारेन करेंसी है और 51 लाख इंडियन करेंसी है, यह पूरा अमाउंट सीज कर दिया गया है। ईडी टीम ने कुछ कागजात भी सीज कर दिए है, जिसमें इनके बिजनेस के लिंक उत्तराखंड के साथ साथ दूसरे राज्यों में भी है।

ईडी के अधिकारी ने बताया कि गौरव और उनके पिता अशोक कुमार पिछले 10 सालों से फारेन करेंसी एक्सचेंज का बिजनेस चलाते हैं, और इन दोनों के लिंक एक ऐसे सिंडिकेट से बताए जा रहे जो बेहिसाब फारेन करेंसी की सप्लाई अलग-अलग देशों में करते हैं जैसे यूएस, कनाडा, दुबई और सिंगापुर।

अब तक की जांच के बारे में अधिकारीयों ने बताया कि दोनों ही बाप और बेटे को ईडी स्कैनर के तहत रखा गया था, और इन दोनों के नाम किसी पूछताछ में सामने आए थे। यह दोनो बिना लाइसेंस के काम कर रहे थे और कम दाम में लोगों को फारेन करेंसी एक्सचेंज करते थे।

ईडी के अधिकारी ने बताया कि 51 लाख की इंडियन करेंसी को भी फारेन करेंसी में बदलने के लिए रखा गया था। उन्होंने बताया कि हम अभी भी फारेन और इंडियन करेंसी सप्लाई करने वाले लोगों की खोज कर रहे है, और हमें लगता है कि वह जो भी है देहरादून और वेर्स्टन उत्तर प्रदेश सिंडिकेट के है क्योंकि इतने बड़े लेवल पर फारेन और इंडियन करेंसी की लेन देन मुमकिन ही नहीं है।

छापे के बाद, ईडी ने दोनों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम की रोकथाम के तहत मामला दर्ज करने का फैसला किया है।

लाईफ लाईन को बचाने में जुटे वरिष्ठ नागरिक

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कुमाऊं की लाइफ लाइन कही जाने वाली गौला नदी को बचाने में हल्द्वानी के वरिष्ठ नागरिक समाज के सामने मिसाल पेश कर रहे हैं। सेवानिवृत्ति के बाद उम्र के जिस पड़ाव पर लोग आराम पसंद करते हैं, उस उम्र में हल्द्वानी शहर के पांच वरिष्ठ नागरिक जीवनदायिनी गौला नदी को जीवन देने में जुटे हैं।

गौला को साफ रखने का संकल्प ऐसा कि नदी में उतरकर गंदगी को साफ करते हैं। दो साल से चल रही उनकी मुहिम अब बड़ा रूप लेने लगी है। घाट पर शवों का अंतिम संस्कार करने आने वाले लोग भी गौला की सुचिता के लिए चल रहे स्वच्छता अनुष्ठान में शामिल हो रहे हैं। धीरे-धीरे शहर के दूसरे संगठन भी उनके साथ होने लगे हैं।

काठगोदाम के रानीबाग स्थित चित्रशिला घाट पर वरिष्ठ नागरिक समिति हर सप्ताह के शनिवार को सफाई अभियान चलाकर नदी को साफ करती है। समिति के सदस्य घाट पर शव का दाह संस्कार करने आने वाले लोगों को नदी को स्वच्छ रखने के लिए जागरूक करते हैं।

चित्रशिला घाट पर रोजाना औसतन 10-12 शवों का दाह संस्कार होता है। इन्हें जलाने के लिए प्रति शव पांच से सात क्विंटल लकड़ी की जरूरत होती है। शवदाह के बाद लोग अवशेष लकड़ी, कपड़े और अन्य सामान नदी में फेंक देते हैं। कई बार अधजले अंग भी नदी में बहा दिए जाते हैं, जिससे जल दूषित होता है। इसी पानी को हल्द्वानी शहर में पीने के उपयोग में लाया जाता है।

वरिष्ठ नागरिक आनंद सिंह ठठोला बताते हैं कि समिति ने मार्च 2015 में सफाई अभियान की शुरुआत की थी। शुरू में समिति से जुड़े पांच लोगों की टोली ने नदी में उतरकर उसमें जमा गंदगी को बाहर निकाला। समिति अब रानीबाग में विद्युत शवदाह गृह बनाने के लिए अभियान चलाने की तैयारी कर रही है।

जीवनदायिनी गौला नदी की सफाई में भारत स्वाभिमान संस्था भी जुटी है। संस्था के अध्यक्ष कौस्तुभानंद जोशी ने घाट पर टिन शेड बनवाए और उनकी टीम सफाई अभियान में सक्रिय रहती है।

फुड प्वाजनिंग के 56 लोग शिकार

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ऊधमसिंह नगर के शक्तिफार्म, देवनगर में पूजा के बाद प्रसाद खाने से 56 लोग फूड प्वाइजनिंग के शिकार हो गए। सूचना पर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। विभागीय टीम ने गांव पहुंचकर मरीजों का उपचार किया। अधिक प्रभावित छह ग्रामीणों का स्वास्थ्य केंद्र में उपचार किया गया।

देवनगर निवासी आनंद मंडल के घर शनिवार रात पूजा हुई। देर रात पूजा के बाद ग्रामीणों को प्रसाद वितरित किया गया। यह प्रसाद कच्चा दूध, आटा, मैदा, गुड़, चीनी, केला, नारियल आदि को मिलाकर बनाया जाता है। रविवार सुबह प्रसाद खाने वाले बच्चे-महिलाओं समेत 50 से ज्यादा लोगों को उल्टी-दस्त शुरू हो गए।

एक साथ लोगों के बीमार होने से गांव में हड़कंप मच गया। ग्राम प्रधान हिना सरकार के पति तपन सरकार ने इसकी सूचना स्वास्थ्य केंद्र में देकर ग्रामीणों के उपचार के लिए कहा। सूचना पर स्वास्थ्य विभाग की एएनएम मंजू रानी, सुपरवाइजर बीएम यादव के साथ एक टीम गांव पहुंची। जहां उल्टी-दस्त से प्रभावितों को ओआरएस के घोल व अन्य जरूरी दवाएं दी गई।

एएनएम मंजू रानी ने बताया कि सभी मरीजों की स्थिति अब सामान्य है। फिर भी नजर रखी जा रही है। छह लोगों को स्थिति अधिक खराब रहने पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। यहां डॉक्टर की तैनाती न होने से फार्मासिस्ट नरेंद्र भट्ट ने उपचार किया। जबकि गांव में आशा कार्यकर्ता मीनाक्षी सरकार व स्नेहलता आदि भी जुटी रहीं।