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सख्ती न बरते बैंकः धन सिंह

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सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत ने बाजपुर,अल्मोड़ा में किसान की आत्महत्या पर गहरा दुःख व्यक्त किया, उन्होंने कहा कि बैंकों को निर्देश दिए गए हैं कि कर्ज वसूली में सख्ती न बरती जाए। विकास भवन में जिला योजना की समीक्षा बैठक में पहुंचे सहकारिता मंत्री ने कहा कि कर्ज में डूबे किसान की मौत पर उन्हें ही नही, सरकार को भी दुख है। इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि हमने बैंको से साफ लफ्जों में कहा है कि कर्ज वसूली में किसी तरह की सख्ती न बरतें और न ही किसान पर इस तरह का दबाव बनाए कि वह आत्महत्या जैसा कदम उठाने को विवश हो। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले पर गंभीर है। जिला योजना का बजट कम करने पर उन्होंने कहा कि हमने बजट कम नही किया है। चालू योजनाओं पर पैसा लगाने के बजाय पुरानी पेंडिंग योजनाओं के लिए 52.49 करोड़ दिए है।

उधर, किसान की मौत के मामले में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि मामले की जांच के बाद ही स्थिति साफ होगी। इस मामले को कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने संदिग्ध बताते हुए जांच की बात कही।

चारधाम यात्रियों का आंकड़ा तोड़ेगा पुराने सभी रिकॉर्ड

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उत्तराखंड की सरकार के लिए चारधाम यात्रा इस साल खुशियां लेकर आई है। आमतौर पर बीते वर्षों में जितने यात्री पूरे यात्रा काल में उत्तराखंड नहीं आए, उससे अधिक इस बार पहले दो माह में आ चुके हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि इस साल पुराने सभी रिकॉर्ड टूट जाएंगे। यात्रा के लिए आने वाले यात्रियों के पंजीकरण के आंकड़े बता रहे हैं कि अभी तक कुल 17,72, 631 यात्री चारधाम और हेमकुंड साहिब के दर्शनों के लिए आ चुके हैं।

उत्तराखंड में 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद यात्रियों की संख्या में खासी गिरावट आई थी। बीते चार साल में यात्रियों का आंकड़ा 15 लाख की संख्या नहीं छू पाया था। लेकिन, इस बार 12 जुलाई तक ही करीब 18 लाख यात्री उत्तराखंड का रुख कर चुके हैं। यात्रा के शुरू होते ही राज्य सरकार ने केदारनाथ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बदरीनाथ में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की आमद के जरिए सुरक्षित यात्रा का संदेश दिया। इसके सकारात्मक परिणाम भी दिखाई दिए, यात्रा शुरू होने से लेकर अभी तक यात्रियों का चारों धामों और हेमकुंड साहिब में आने का सिलसिला जारी है।

भारी बारिश और खतरे के बावजूद आस्था में डूबे श्रद्धालुओं के काफिले निरंतर दर्शनों के लिए आ रहे हैं। सरकार ने दो दिन के लिए चारधाम यात्रा पर रोक लगाई है, लेकिन मौसम साफ होने के बाद फिर यात्रा शुरू कर दी गई है। सरकार का मानना है कि इस बार यात्रियों का आंकड़ा पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ देगा। अभी तक के आंकड़े बताते हैं कि गंगोत्री में 3,32,491, यमुनोत्री में 3,31,738, केदारनाथ में 3,74,394, बदरीनाथ में 6,47,107 और हेमकुंड साहिब में 86901 श्रद्धालु मत्था टेक चुके हैं।यात्रा अक्टूबर माह तक जारी रहेगी।

राज्य सरकार के प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक का कहना है कि, ‘सरकार ने लोगों को विश्वास दिलाया कि चारधाम यात्रा सुगम और सुरक्षित है। इसी का नतीजा है कि देश-विदेश से लाखों लोग दर्शनों के लिए पहुंचे। सरकार का प्रयास यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराना है। आने वाले दिनों में यात्रियों की संख्या में और इजाफा होगा।’

उत्तराखंड के पुलिस और सेना के वाहनों से हटेगी लाल बत्ती

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वाहनों पर बत्ती के नियम तय होने के बावजूद अनाधिकृत रूप से लाल, नीली या नारंगी बत्ती लगाकर दौड वाले सेना और पुलिस के वाहनों से बत्ती हटाने की तैयारी परिवहन विभाग ने कर ली है। केंद्र ने बत्ती के लिए जो नियम तय किए हैं उसमें सेना, पुलिस एवं दमकल की गाड़ियों पर बहुरंगी बत्ती (लाल-सफेद-नीली) की स्ट्रीप होनी चाहिए। साथ ही इन गाड़ियों को परिवहन विभाग से अनुमति लेना भी जरूरी है, मगर प्रदेश में अब तक किसी सरकारी विभाग ने परिवहन विभाग से अनुमति नहीं ली।

केंद्र सरकार ने एक मई से पूरे देश में वीआइपी बत्ती कल्चर खत्म कर दिया था। इसकी जद में राजनेता, नौकरशाह से लेकर पुलिस व सैन्य अधिकारी भी आए। इसकी अधिसूचना जारी होने पर राजनेताओं समेत नौकरशाहों ने तो वाहनों से बत्ती उतार ली, लेकिन उत्तराखंड पुलिस अब भी वीआइपी कल्चर में चल रही।

पुलिस के थानेदार से लेकर सर्किल अफसर और एसपी स्तर तक के अफसर अभी भी लाल, नीली या नारंगी बत्ती लगाकर चल रहे। सैन्य वाहनों की भी यही हालात हैं, केंद्र के आदेश में पुलिस व सेना के साथ ही अर्धसैनिक बलों और कानून-व्यवस्था में लगे वाहनों को बहुरंगी स्ट्रीप लगाने की अनुमति है।

शर्त रखी गई हैं कि हर साल ऐसे वाहनों के लिए मंजूरी परिवहन विभाग से लेनी होगी, अनुमति के बाद परिवहन विभाग इन वाहनों की सूची को सार्वजनिक करेगा।

परिवहन विभाग देगा स्टीकर:बहुरंगी स्ट्रीप के वाहनों को परिवहन विभाग से एक स्टीकर जारी होगा। इसमें संबंधित विभाग व अफसर का नाम होगा, जिसके अधीन वह गाड़ी संचालित हो रही है। एक वाहन के लिए एक ही स्टीकर जारी किया जाएगा, जिसे वाहन के अगले शीशे पर चस्पा करना होगा।

सैन्य अधिकारी पहुंचे आरटीओ: वाहनों पर बहुरंगी बत्ती की अनुमति के लिए पुलिस भले आगे न आई हो लेकिन सेना ने पहल की है। सैन्य अधिकारियों ने आरटीओ कार्यालय पहुंचकर एआरटीओ प्रशासन अरविंद कुमार पांडे से मुलाकात की। एआरटीओ ने सेना से सभी वाहनों की सूची मांगी है जिन पर बहुरंगी स्ट्रीप लगनी है। सेना ने एक हफ्ते में सभी गाडिय़ों की सूचि देने की बात कही।

आपदा वाहनों को है छूट:केंद्र ने आपदा के दौरान आपातकालीन स्थिति में सरकारी वाहनों पर बत्ती लगाकर चलने की अनुमति दी है। ऐसे वाहनों को परिवहन विभाग की अनुमति की जरूरत नहीं होगी। इसके साथ ही एंबुलेंस को भी छूट दी गई है।

हरिद्वार में लागू नहीं होगा एनजीटी का आदेश

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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हरिद्वार से लेकर उत्तर प्रदेश के उन्नाव तक जिन जगहों पर गंगा बह रही है उन जगहों पर गंगा किनारे 100 मीटर तक के दायरे में कोई भी निर्माण कार्य नहीं होने के आदेश दिए हैं। इसी के साथ ही एनजीटी ने यह आदेश दिया है कि गंगा में अगर कोई व्यक्ति कूड़ा करकट फेंकता हुआ पाया गगा तो उस पर 50 हजार तक का जुर्माना लग सकता है।

हरीश रावत सरकार के कारण एनजीटी का आदेश मान्य नहीं
बता दें कि हरिद्वार की हर की पैड़ी से लेकर शहर के बीचों-बीच बह रही पतित पावनी मां गंगा के लिए एनजीटी का ये आदेश मान्य योग्य ही नहीं होगा। ऐसा इसलिये क्योंकि सरकारी अभिलेखों में हर की पौड़ी सहित हरिद्वार में बह रही गंगा नदी है ही नहीं। दरअसल, पिछली कांग्रेस सरकार में हरीश रावत ने शहर के डेवलपमेंट और कुछ योजनाओं के तहत गंगा नदी को कैनाल का दर्जा दे दिया था जिसके बाद सरकारी कागजों में हरिद्वार हर की पौड़ी सहित पूरी गंगा, गंगा नहीं, बल्कि एक सामान्य नदी है।

तीर्थ पुरोहितों ने किया था विरोध
हरीश रावत के इस आदेश के बाद हरिद्वार के तीर्थ पुरोहितों ने भी इसे गलत ठहराते हुए राज्य सरकार को उस समय इस निर्णय को बदलने आग्रह किया था। साथ ही विरोध भी किया था लेकिन हरीश रावत के रहते हुए ऐसा हुआ नहीं।

बीजेपी सरकार ने नहीं पूरा किया वादा
राज्य में बीजेपी की सरकार को आए हुए चार महीने का वक्त बीत गया और हरिद्वार में आने के बाद सीएम त्रिवेंद्र ये वादा कर गए थे कि जल्द ही इस आदेश को बदला जाएगा लेकिन ऐसा भी अभी तक नहीं हुआ और आज भी हालात जस के तस हैं।

आदेश नहीं बदले जाने तक गंगा होती रहेगी मैली
एनजीटी के आदेश के बाद सभी खुश हैं कि एनजीटी की तरफ से अच्छा आदेश जारी हुआ है लेकिन हरिद्वार में जबतक ये आदेश नहीं बदलेगा तब तक ना जाने कितने निर्माण हो चुके होंगे और गंगा मैली होती रहेगी।

तीर्थ पुरोहितों के सरकार से सवाल
हरिद्वार के तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि सरकार पहले ये बताए कि जिस गंगा में सालों से कुम्भ और हजारों मेले लग रहे हैं वो नदी में लग रहे हैं या गंगा में। पुरोहित उज्वल पंडित का कहना है कि, ‘सरकार को ये साफ करना चाहिए। हरिद्वार में भक्त किस में डुबकी लगा रहे हैं?’ पुरोहितों का कहना है कि वो एक बार फिर से राज्य की बीजेपी सरकार से मांग करेंगे कि हरीश रावत की सरकार में जो आदेश हुए थे उसे जल्द बदला जाए।

हरीश रावत को करना पड़ा विरोध का सामना
ऐसा नहीं है कि हरीश रावत को इस आदेश को करने के बाद विरोध का सामना ना करना पड़ा हो। पिछले दिनों हर की पौड़ी पर उपवास के लिए पहुंचे हरीश रावत को कुछ पुरोहितों ने घेर लिया था। उनका कहना था कि जब आप हरिद्वार में गंगा को गंगा मानते ही नहीं तो आप यहां उपवास के लिए क्यों आते हैं। उस वक्त फजीहत देखते हुए रावत ने ये कहकर पल्ला झाड़ लिया था कि वो मौजूदा सरकार से उस आदेश को बदलने की मांग करेंगे।

गंगा को गंगा न कहें तो क्या कहें
गौर हो कि हरिद्वार में भीमगौड़ा बैराज से एक जल की धारा को शहर यानी हर की पौड़ी की तरफ निकाला गया है जिसको रामधारा कहते हैं। सरकारी अभिलेखों में नहर का दर्जा दिया है जबकि ऋषिकेश से सीधे-सीधे आ रही नीलधारा को गंगा माना जाता रहा है। इस नदी से सीधे उत्तर प्रदेश के उन्नाव ही नहीं, कई राज्यों में इसी से जल जाता है।

हरेला पर्व पर लाखों पेड़ लगाने का लक्ष्य

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मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने 16 जुलाई को होने वाला हरेला पर्व पर सभी जिलाधिकारियों को लक्ष्य निर्धारित कर पौधारोपण करने के निर्देश दिए। उन्होने कहा कि यह एक सांस्कृतिक पर्व है, लोगों को इसके साथ जोड़ते हुए व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाया जाय। इसके साथ ही हरेला में लगाए जाने वाले पौधों की सुरक्षा का भी ध्यान रखे। उन्होने कहा कि सभी जिलाधिकारी अपने जिलों में कम से कम एक नदी/वॉटर बॉडी/तालाब को पुनर्जीवित करने का लक्ष्य ले। नैनीताल में सूखा ताल को पुनर्जीवित करने का लक्ष्य रखे, इस सीजन में वृक्षारोपण अभियान ऐसी नदियों को ध्यान में रखते हुए किया जाय।
बागेश्वर में कलना गदेरा को पुनर्जीवन हेतु चुना गया है जहाँ लगभग 2-3 लाख पौधे लगाए जाएँगे। जिलाधिकारी बागेश्वर ने अंकुरण कार्यक्रम जड़ी बूटी, दालचीनी और अन्य मसालों के लिए, शहतूत के प्रोत्साहन के लिए शुरू किया है। देहरादून में सुस्वा नदी एवं, हरिद्वार में रानीपुर रो नदी को पुनर्जीवन हेतु चुना गया है।
पौड़ी में नयार नदी को चुनने की सलाह दी गई। मुख्यमंत्री ने जिलाअधिकारी पौड़ी को 16 जुलाई को 50 हजार पेड़ लगाने का लक्ष्य दिया। मुख्य विकास अधिकारी देहरादून ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा आगामी 16 जुलाई को 25 हजार पेड़ों का वृक्षारोपण पूरे जिले में किया जाएगा तथा इस पूरे मौसम में सात लाख पेड़ लगाए जाएंगे।

सीएम रावत का ट्वीट कहीं विधायक मनोज रावत को जवाब तो नहीं

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आज का युग सोशल मीडिया का युग है, शायद इसलिए राजनैतिक पार्टियां भीं अपनी बात एक दूसरे तक सोशल मीडिया के जरिए पहुंचा रही हैं। कुछ समय पहले पूर्व सीएम हरीश रावत और प्रकाश पंत का ट्वीट वार चर्चा में था। इसी कड़ी में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने ट्वीटर के माध्यम से यह बात साफ की है कि मोबाईल सेवा देने वाली कंपनियों को अगर मैदानी क्षेत्र में अपनी दाल गलानी है तो पहले पहाड़ी क्षेत्रों में बेहतर सेवाएं देनी होंगी।

जी हां, उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में सबसे ज्यादा परेशानी का सबब है, आए दिन खराब रहने वाले मोबाईल सेवाएं। मोबाइल सेवाऐं देने वाली कंपनियां दावे और बाते तो बहुत करती हैं लकिन सेवाओं की हकीकत किसी से छुपी नही हैं। आपको बता दें कि कुछ दिनों पहले विधायक मनोज रावत ने अपने क्षेत्र रुद्रप्रयाग में बाधित मोबाईल सेवा के बारे में आवाज उठाई थी। रावत ने कहा था कि कहने को नेटवर्क के टावर और केबल दूर-दूर तक लगे है लेकिन उसके जरिए कोई कनेक्टिविटी नही है। लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है और इसकी वजह से रोड भी बदहाल पड़ी रहती है,क्योंकि केबल और तारों को बिछाने के लिए सबसे पहला काम रोड को खोंदने का होता है।

बहरहाल सीएम रावत के ये ट्वीट मनोज रावत के आरोपों का जवाब हो न हो लेकिन अगर सीएम का ट्वीट जमीनी हकीकत बन सके तो ही सूचना क्रांती के इस युग में आम लोगं को एक अदद मोबाइल फोन की घंटी सुनाई देगी।

गंगा में कूड़ा डालने पर लगेगा पांच हजार का जुर्माना

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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानि की एनजीटी ने गंगा में कूड़ा डालने पर पांच हजार जुर्माना लगाने का आदेश दिया है। इस आदेश के साथ ही गंगा के सौ मीटर के दायरे में किसी भी तरह के निर्माण पर पूरी तरह से रोक रहेगी। इसके अतिरिक्त गंगा से पांच सौ मीटर की दूरी तक कोई भी डंपिंग जोन नहीं बनेगा।

ट्रिब्यूनल के जस्टिस, स्वतंत्र कुमार ने ये ओदश दिया है, इसके अतिरिक्त ट्रिब्यूनल ने गंगा को निर्मल बनाने पर खर्च होने वाले बजट के संबंध में भी आदेश दिया है। इस मामले में पर्यावरणविदव सीनियर एडवोकेट एमसी महता ने मांग की थी कि गंगा को निर्मल करने के लिए सरकार जो पैसा लगा रही है वह बेकार जा रहा है। अभी तक सात हजार करोड़ रुपया खर्च हो चुका है। ऐसे में इसकी जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए। इस आदेश के बाद गंगा प्रेमियों में खुशी है।

मेयर मनोज गर्ग ने कहा कि एनजीटी का यह आदेश स्वागत योग्य है। इसका अक्षरशः पालन करवाया जाएगा। 

मंदिर नवनिर्माण के दौरान मिले पौराणिक ओखल

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रुद्रप्रयाग जिले के विश्वनाथ मंदिर, गुप्तकाशी में नवनिर्माण के दौरान पौराणिक ओखल मिले हैं, जो एक बहुत बड़े से आकार की शिला पर स्थित हैं। माना जा रहा है कि इस शिला के ऊपर लगभग दो सौ साल पुराना कोठा रहा होगा। इन ओखलों में भक्तों द्वारा भगवान को नवधान्य के भोग लगाने की परंपरा थी।

स्थानीय निवासी आचार्य कृष्णानंद नोटियाल का मानना है कि, ‘मंदिर में स्थित कोठा भवन के ईशान कोण पर दो-दो ओखलियों का पाया जाना सामान्य बात नहीं है। असल में ये ओखलियां इस बात के गवाह हैं कि प्राचीन काल में प्रतिदिन ताजे धान को इन ओखलियों में कूटा जाता था। उसके बाद भगवान विश्वनाथ को भोग लगाया जाता था।’

विशेषकर अन्नकूट भतूज के दिन आसपास के गांवों की कन्या व औरतें धान कूटकर भगवान का अन्नकूट भतूज तैयार करती थीं। उसके बदले में नारियल अौर दक्षिणा देकर सम्मान सहित उन्हें विदा किया जाता था। बाद में इन ओखलों के ऊपर भवन निर्माण किया गया, जो कि गलत था। अब स्वयं भगवान ने अपनी ओखलें प्रकट की हैं तो परंपरा को पुनः प्रारंभ करना चाहिए। साथ ही इसके संरक्षण के प्रयास किये जाने चाहिए।

कीड़ा जड़ी के साथ दो नेपाली गिरफ्तार

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चमोली पुलिस व एसओजी ने जोशीमठ के हेलंग नामक स्थान पर दो नेपाली व्यक्तियों से 875 ग्राम कीड़ा जड़ी (यारशागुंबा) व 97 हजार रुपये की नगद धनराशि के साथ गिरफ्तार किया है। कीड़ा जड़ी की अंर्तराष्ट्रीय बाजार में कीमत 13 लाख के आसपास बतायी जा रही है।

पुलिस अधीक्षक चमोली तृप्ति भट्ट ने बताया कि, ‘थाना जोशीमठ को गुरुवार को मुखबिर से सूचना मिलने पर कोतवाली जोशीमठ से एसआइ अनिल जोशी, दिलीप कुमार, कांस्टेबल अजय काला, भूपेंद्र कुमार व एसओजी के अरविंद व प्रदीप की टीम ने हेलंग के पास चैकिंग के दौरान नेपाल निवासी दुर्गा बहादूर शाही के पास से 500 ग्राम कीड़ा जड़ी तथा 65 हजार रुपये नगद व वीर बहादूर के पास से 375 ग्राम कीड़ा जड़ी व 32 हजार रुपये नगद बरामद हुए हैं।’

अभियुक्तों से पकड़ी गई कीड़ा जड़ी की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 13 लाख के आसपास बतायी जा रही है। एसपी ने बताया कि, ‘अभियुक्तों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत अभियोग पंजीकृत कर लिया गया है।’ 

ड्रोन की मदद से कांवड़ मेले की सुरक्षा

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कांवड़ मेले की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पुलिस प्रशासन ड्रोन कैमरे का सहारा ले रही है। विभिन्न गंगा घाटों, सीसीआर टावर, नेशनल हाइवे, विशेषकर हर की पौड़ी क्षेत्र में ड्रोन की मदद ली जा रही है। जिसकी शुरुआत गुरुवार सीसीआर टावर से की गई। इस अवसर पर एसपी सिटी ममता बोहरा, सीओ सिटी प्रकाश देवली सहित पुलिस के कई अधिकारी मौजूद रहे।

एसपी सिटी ममता बोहरा ने बताया कि, ‘संदिग्ध व आतंकवादी घटनाओं पर विराम लगाने के लिए ड्रोन कैमरे की मदद ली जा रही है। जिससे संदिग्धों पर पैनी नजर रखी जा रही है। मेले को सकुशल सम्पन्न कराने के लिए 250 सीसीटीवी कैमरे मेला क्षेत्र में लगाये गये हैं। सुरक्षा की चाक-चौबंद बनाने के लिए ड्रोन कैमरे मददगार साबित होंगे।’

सीओ सिटी प्रकाश देवली ने बताया कि, ‘ड्रोन कैमरे की मदद से संदिग्ध वस्तुओं, संदिग्ध व्यक्तियों पर पैनी नजर रखी जायेगी। वैसे मेला क्षेत्र को अभेद्य सुरक्षा में बदल दिया गया है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस सुरक्षाकर्मी पैनी नजर रखे हुए हैं। कावंड़ियों की सुरक्षा को लेकर पहली प्राथमिकता दी जा रही है। अधिनिस्तों को समय-समय पर मेला क्षेत्र में बड़े पैमाने पर चेकिंग अभियान चलाने के लिए निर्देशित किया गया है।’

ड्रोन की मदद से हुड़दंगी कांवड़ियों पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है। मेला क्षेत्र में शरारती तत्वों एवं जेब कतरों, उठाइगिरों आदि पर भी ड्रोन कैमरे की मदद से कन्ट्रोल किया जायेगा। पूरे मेला क्षेत्र में अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरों की मदद ली जा रही है। डॉग स्क्वायड बम निरोधक दस्ते समय-समय पर संदिग्ध व्यक्तियों एवं वस्तुओं की जांच पड़ताल पूरे मेला क्षेत्र में रखे हुए हैं।