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अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हुए बजरंग दल कार्यकर्ता

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जम्मू-कश्मीर स्थित बूढ़ा अमरनाथ यात्रा के लिए बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की यात्रा तीर्थनगरी हरिद्वार से रवाना हुई। जिसमें बहुत से हिन्दू बाबा बूढ़ा अमरनाथ के लिए रवाना हुए। हरिद्वार स्टेशन से प्रारंभ हुई इस यात्रा को जिला पंचायत सदस्य देवेन्द्र प्रधान ने भगवा ध्वज दिखाकर रवाना किया। इस दौरान अनेक गणमान्य नागरिक भी मौजूद रहे।

यात्रा के रवाना होने से पूर्व बजरंग दल के जिला प्रभारी अनुज वालिया ने बताया कि देश की एकता व अखण्डता को कायम रखने व आतंकवादियों को कड़ा जवाब देने के लिए प्रतिवर्ष इस यात्रा का आयोजन किया जाता है। बताया कि यात्रा धार्मिकता के साथ-साथ यह राष्ट्रीय सुरक्षा की यात्रा है। जब कश्मीर में हिंदू पलायन शुरू हुआ 19 जनवरी 1990 मे सारे कश्मीरी पंडितों के घर के दरवाजों पर नोट लगा दिया गया था, जिसमें लिखा था या तो मुस्लिम बन जाओ या कश्मीर छोड़ कर भाग जाओ या फिर मरने के लिए तैयार हो जाओ। उसके बाद सारे कश्मीरी मुस्लिम सड़कों पर उतर आये। उन्होंने कश्मीरी पंडितों के घरों को जला दिया, कश्मीर पंडित महिलाओं का बलात्कार कर उनकी हत्या करके पेड़ पर लटका दिया गया। कुछ महिलाओं को जिंदा जला दिया। करीब साढ़े तीन लाख कश्मीरी पंडित अपनी जान बचाकर कश्मीर से भाग गए थे। इस घटना के कुछ समय बाद पुंछ सेक्टर में भी हिंदू घरों पर पर्चे चिपका दिए गए जिसकी जानकारी बजरंग दल को मिली। बजरंग दल ने उनकी रक्षा के लिए संघर्ष किया और यह यात्रा शुरू की इसी यात्रा का परिणाम रहा है की पुंछ सेक्टर में आज भी हिंदू स्थापित हैं।
अनुज वालिया ने कहा कि कश्मीर में हिंदूओं को स्थापित रखने के लिए यह यात्रा हर वर्ष की जाती है। बजरंगी अपने प्राणों की परवाह न करते हुए इस यात्रा पर भारी संख्या में जाते हैं। आतंकवादियों की मिलती लगातार चेतावनी बजरंगियों के हौसले बुलंद करती है। यह उन लोगों के लिए सबक है जो पड़ोस में हो रही लड़ाई के बीच में भी जाना नहीं चाहते। बजरंग दल का कार्यकर्ता आतंकवादी घटना और धमकियों के बावजूद भी सिर पर कफन बांधकर राष्ट्र सुरक्षा, कश्मीर सुरक्षा, धर्म सुरक्षा के लिए इतनी कठिन यात्रा करता है। जिसके लिए हमें बजरंगी होने पर गर्व है।

बीमार बच्चे के इलाज को भटक रही मां, सीएम ने लिया संज्ञान

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बीती रात उत्तरकाशी जिले की तहसील पुरोला के सुनाली गांव की मीरा देवी के नवजात शिशु का स्वास्थ्य बेहद खराब हो गया। वह नवजात शिशु के स्वास्थ्य को लेकर काफी परेशान हो गई। मीरा ने फोन के माध्यम से इसकी जानकारी मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को दी।

मीरा की सूचना पर मुख्यमंत्री ने तत्काल जिलाधिकारी उत्तरकाशी को उनकी मदद करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी उत्तरकाशी के निर्देश पर एसडीएम पुरोला शैलेंद्र सिंह नेगी ने तत्काल मौके पर पहुंच कर रात्रि 11.30 बजे शिशु को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती कराया। नेगी ने बताया कि बच्चे का उपचार डाॅ सुभाष कुमार द्वारा किया गया और एक घंटे बाद बच्चे के स्वास्थ्य में काफी सुधार हो गया। नेगी ने यह भी बताया कि मीरा पत्नी वीरेन्द्र कुमार ने देर रात उनकी समस्या को सुनकर उनकी मदद करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है। 

इंदु सरकार व मुबारकां का बाक्स आफिस पर पहला दिन कमजोर

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शुक्रवार को रिलीज हुई दोनों फिल्मों मुबारकां और इंदु सरकार का बाक्स आफिस पर पहले दिन का कलेक्शन उम्मीदों के अनुरुप नहीं आया है। अनीस बज्मी के निर्देशन में बनी कामेडी फिल्म मुबारकां ने पहले दिन लगभग 5 करोड़ की कमाई की, जबकि फिल्म का बजट 70 करोड़ के आसपास बताया गया है।

दूसरी ओर विवादों में घिरी रही मधुर भंडारकर की फिल्म इंदु सरकार की पहले दिन बाक्स आफिस पर कमाई एक करोड़ से भी नीचे रही। छोटे बजट की इस फिल्म की लागत 11 करोड़ के आसपास आंकी गई है। जानकारी के अनुसार, मुबारकां का प्रोडक्शन बजट 55 करोड़ है, जबकि प्रमोशनल बजट 15 करोड़ के आसपास रहा है।
इंदु सरकार का प्रोडक्शन बजट 7.50 करोड़ के आसपास माना जा रहा है, जबकि 3.50 करोड़ फिल्म के प्रमोशन पर खर्च हुए हैं। फिल्मों के काराबोर के जानकार मान रहे हैं कि दोनों ही फिल्मों की पहले दिन की कमाई उम्मीदों से कम है। साथ में ये भी कहा जा रहा है कि माउथ पब्लिसिटी से दोनों फिल्मों के आने वाले दो दिन बेहतर रहेंगे।
अनुमान लगाया जा रहा है कि पहले वीकंड तक मुबारकां का बिजनेस 20 करोड़ पार करेगा, जबकि इंदु सरकार 3 से 4 करोड़ के बीच का कारोबार कर लेगी। कामेडी के मसालों से भरी मुबारकां में अनिल कपूर के साथ पहली बार उनके भतीजे अर्जुन कपूर परदे पर आए हैं और परदे पर अर्जुन कपूर डबल रोल में हैं।
इलियाना डिक्रूज और आथिया शेट्टी फिल्म में अर्जुन की दो हीरोइनें हैं, जबकि सहायक भूमिकाओं में रत्ना पाठक शाह, पवन मल्होत्रा और राहुल देव हैं। विवादों में घिरी रही इंदु सरकार 1975 की अपातकाल की घटनाओं पर आधारित पति-पत्नी के बीच बनते-बिगड़ते रिश्तों को लेकर बनी है, जिसमें कीर्ति खुल्लारी, नील नितिन मुकेश और अनुपम खेर प्रमुख भूमिकाओं में हैं। 

ऋषिकेश के हेमंत ने उत्तराखंड पीसीएस में निकल कर राज्य की सेवा के लिए बढ़ाएं कदम

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उत्तराखंड सिविल सेवा पीसीएस में तीर्थनगरी के  युवाओं ने परचम लहराया। प्रदेश के युवाओं में अपने राज्य के लिए और अपने प्रदेश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा देखने को मिल रहा है। ऋषिकेश के आवास विकास में रहने वाले और भरत मंदिर इंटर कॉलेज से पढ़कर निकले  हेमंत कोठियाल ने केंद्र में डिफेन्स की आकर्षक अलाइड सर्विस छोडकर ग्राम स्तर पर काम करने का अपना सपना सच साबित कर दिया। हेमंत कोठियाल ने बातचीत में बताया की उनका पहाड़ के प्रति बचपन से ही लगाव रहा है खाली होते गावं और पहाड़ो से होता पलायन हमेशा से ही हेमंत को कचोटता था।उनका सपना था की वो अपने राज्य और यहाँ के विकास के लिए कुछ ऐसा करे जिससे पहाड़ एक बार फिर आबाद होकर खुशहाली की तरफ लौट पड़े।

इसके लिए हेमंत ने दिल्ली सेकट्रटे में अपने सेक्शन अफसर के पद को अलविदा कहकर उत्तराखंड पीसीएस की ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर की परीक्षा में छठा स्थान प्राप्त कर गावं और अपने राज्य की सेवा के लिए कदम बढ़ा दिए हैं। जिससे आने वाले समय में राज्य में नयी सोच के साथ विकास की योजनाओं को जन जन तक पहुंचकर पहाड़ी क्षेत्रों से पलायन रोका जा सके। गौरतलब है की ऋषिकेश की दो लड़कियों ने भी उत्तराखंड पीसीएस में अपना स्थान बनाया है  चौदहबीघा की निकिता गिरी वित्त अधिकारी,और कैलाश गेट वर्षा शर्मा, बाल विकास परियोजना अधिकारी ने भी पीसीएस निकाल  कर अपने राज्य के लिए अपनी सेवाएं देने का योगदान दिया है। जिससे उत्तराखंड की नई जेनरेशन में अपने प्रदेश के प्रति सेवा का जज्बा बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। उन्होंने लगातार हो रहे पालयन और खाली होते गांवो पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य की सेवाओं में अपना योगदान देने की बात कही है जिससे नई जनरेशन के युवा अपने राज्य के लिए अपनी सेवाएं देने के  लिए अपने कदम आगे बढ़ाने लगे है।

 

कुहू गर्ग का शानदार प्रदर्शन, महिला औऱ मिक्सड डब्लस के फाइनल में पहुंची

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ऑल इंडिया सीनियर डबल्स रैंकिंग बैडमिंटन टूर्नामेंट में उत्तराखंड की कुहू गर्ग का शानदार प्रदर्शन जारी है। शनिवार को हुए मुकाबलों में कुहू ने मिक्सड डब्नेलस औऱ महिला डब्लस के सेमी फाइनल जीतकर दोनें वर्गों के फाइनल में अपनी जगह बना ली। इसके साथ ही कुहू ने महिला युगल व मिश्रित युगल वर्ग में दो पदक पक्के कर लिए हैं। दोनों ही वर्गो में कुहू ने अपनी जोड़ीदार के साथ फइनल में प्रवेश किया। वहीं पुरुष युगल वर्ग में चेतन आनंद बी व वी. दीजू को उलटफेर का शिकार होना पड़ा।

शनिवार को हुए बैंडमिंटन टूर्नामेंट के सेमीफाईनल में कुहू गर्ग और रोहन की डबल जोड़ी ने शानदार जीत के साथ मिक्स डबल्स के फाईनल में अपनी जगह बना ली है। वहीं महिला डब्लस में कुहू और नंग्शी ने फाइनल में अपनी जगह पक्की की।

हरिद्वार विकास प्राधिकरण के सभागार में चल रहे टूर्नामेंट में शुक्रवार का दिन उत्तराखंड के लिए खास रहा।  मिश्रित युगल वर्ग में कुहू गर्ग और दिल्ली के रोहन कपूर की जोड़ी ने उत्तराखंड के मोहित तिवारी और उप्र की सारुनी शर्मा की जोड़ी को 23-21, 19-21 व 21-9 से हराकर अंतिम चार में जगह बनाई। मिश्रित युगल वर्ग में कैग के के. नंदा गोपाल व कर्नाटक की महिमा अग्रवाल ने हरियाणा के अक्षित महाजन व महाराष्ट्र की अरुंधति की जोड़ी को 21-16 व 30-28, हरियाणा के एस. शर्मा व गुजरात की ए. पारिख ने केरल के अरुण जॉर्ज व असोम की निंग्शी हजारिका को 21-19 व 21-14, एयर इंडिया के संयम शुक्ला व संजना संतोष ने महाराष्ट्र के विग्नेश देवलकर व हरिका की जोड़ी को 21-11 व 21-16 से हराकर अंतिम चार में प्रवेश किया। पुरुष युगल वर्ग में रोहन कपूर व आंध्र प्रदेश के जी. शेख ने उप्र के तुषार शर्मा व बृजेश यादव की जोड़ी को 21-16 व 21-14, हरियाणा के केतन चहल व अक्षित महाजन ने चेतन आनंद व वी. दीजू की जोड़ी को 21-10 19-21 व 23-21, अरुण जॉर्ज व संयम शुक्ला ने कर्नाटक के किरण कुमार व वसंता कुमार की जोड़ी को 21-10, 21-15 और महाराष्ट्र वी. वेदलकर व हरियाणा के एस शर्मा ने उत्तराखंड के रोहित रतूड़ी व मोहित तिवारी की जोड़ी को कड़े संघर्ष में 12-21, 21-14 व 21-16 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। शनिवार को टूर्नामेंट में सभी वर्गो के सेमीफाइनल व फाइनल मैच खेले जाएंगे

दून में डेंगू और स्वाईन फ्लू का डबल अटैक

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स्वास्थ के संबंध में उत्तराखंड इस समय दोगुनी मुसीबत झेल रहा है। एक तरफ डेंगू मुंह बाए खड़ा है तो दूसरी तरफ स्वाइन फ्लू लोगों की जिंदगी लील रहा है। गुरुवार को स्वाइन फ्लू के लक्षण वाले एक और मरीज की मौत हो गई। उसका सैंपल जांच के लिए दिल्ली भेजा गया था, जिसकी रिपोर्ट अभी नही आई है। वहीं, दो मरीजों में डेंगू की भी पुष्टि हुई है।स्वाइन फ्लू का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। हर रोज न सिर्फ मरीजों का आंकड़ा बढ़ रहा है बल्कि इसकी वजह से कई लोगों की जान भी जा चुकी है। दून और हरिद्वार में इसका असर ज्यादा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जनपद में अब तक स्वाइन फ्लू से छह लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा मरने वाले तीन मरीज ऐसे हैं, जिनमें स्वाइन फ्लू के लक्षण पाए गए थे। यदि इनमें भी स्वाइन फ्लू की पुष्टि होती है तो इस बीमारी से मरने वालों की संख्या नौ हो जाएगी। मृतकों में अधिकांश हरिद्वार और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आए मरीज हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. तारा चंद पंत ने बताया कि गुरुवार देर रात स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीज की मौत हुई है। बैरागीवाला निवासी इस 29 वर्षीय युवक का हिमालयन हॉस्पिटल जौलीग्रांट में उपचार चल रहा था। मृतक का ब्लड सैंपल जांच के लिए दिल्ली भेजा गया है।

दो मरीजों में डेंगू की पुष्टि : स्वाइन फ्लू व डेंगू का डबल अटैक स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती बन गया है। जिले में डेंगू से पीड़ित मरीजों का आंकड़ा चार हो गया है। दून के लिए राहत की बात यह है कि सभी मरीज बाहर के हैं। एक मरीज बिजनौर और बाकी के तीन हरिद्वार के हैं। मानसून के साथ ही डेंगू ने भी असर दिखाना शुरू कर दिया है। जगह-जगह हुआ जलभराव मच्छरों के लिए मुफीद साबित हो रहा है। गुरुवार को दो और मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई। इनमें एक की उम्र 18 वर्ष, जबकि दूसरे की 24 वर्ष है। दोनों ही हरिद्वार के रहने वाले हैं और इनका उपचार दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में चल रहा है।दून अस्पताल ने बनाए स्पेशल वार्ड1दून अस्पताल में 10 बेड का स्वाइन फ्लू वार्ड और 10 बेड का डेंगू वार्ड बनाया गया है। जिसका नोडल अधिकारी वरिष्ठ चेस्ट फिजिशियन डॉ. रामेश्वर पांडे को और इंचार्ज सिस्टर लक्ष्मी पुनेठा को बनाया गया है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा के अनुसार जरूरत पड़ने पर बेड की संख्या बढ़ा दी जाएगी।

दो युवकों ने रचायी शादी सभी को किया हैरान

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अल्मोडा नगर से लगे सरसों गांव में दो युवकों द्वारा समलैंगिक विवाह करने का मामला सामने आया है। दोनों का दावा है कि उन्होंने छह साल पहले शादी कर ली है और तब से वह साथ ही रहते हैं। इसमें एक युवक ने ऑपरेशन के जरिये सेक्स बदलकर लड़की बनने की ठान ली है। इसके लिए वह डॉक्टरों के भी संपर्क में है। लड़की बनने जा रहे युवक ने कहा है कि अगर घर वालों ने उन्हें स्वीकार नहीं किया तो वह गांव छोड़कर कहीं और चले जाएंगे। 

निकटवर्ती सरसों गांव के रहने वाले ललित कुमार आर्य (विक्की) और पड़ोस में रहने वाले उनके बचपन के साथी अमित कुमार आर्य के बीच 11वीं कक्षा में पढ़ने के दौरान काफी घनिष्ठता हो गई थी। दोनाें ने बताया कि उन्होंने बचपन में जीआईसी अल्मोड़ा में पढ़ाई की और स्कूल भी साथ ही आते-जाते थे। बड़े हुए तो बीए और एमए (प्राइवेट) की पढ़ाई भी साथ ही की। पढ़ाई में अमित ने ललित की काफी मदद की। धीरे-धीरे दोनों इतने करीब आ गए कि उन्होंने पूरी उम्र पति-पत्नी की तरह साथ बिताने की ठान ली। 

ललित और अमित के मुताबिक दोनों की घनिष्ठता इतनी बढ़ गई थी कि उन्होंने 28 अक्तूबर 2011 को शादी भी कर ली। अमित ने बताया कि शादी ललित के घर पर की और शादी में सिर्फ वही दोनों थे। उसके बाद दोनों ने गांव के भगवती मंदिर में पूरी जिंदगी साथ बिताने की कसमें खाईं। तब से दोनों साथ-साथ रहते हैं। ललित की उम्र 31 साल और अमित की 26 साल है। ललित वन विभाग में सीजनल श्रमिक के तौर पर काम करता है, जबकि अमित राजकीय स्वास्थ्य केंद्र बानठोक में वार्ड ब्वाय पद पर कार्यरत है। 

अमित ने में बताया कि दोनों ने ही करीब तीन माह पहले शादी के बारे में अपने घरों में बताया, लेकिन घर वाले इस शादी के खिलाफ हैं। परिजन दोनों की शादी को किसी भी सूरत में स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं।बकौल अमित उसने भविष्य में ऑपरेशन के जरिये सेक्स बदलकर लड़की बनने की ठान ली है। इसके लिए हाल ही में उसने हार्मोंस बदलने की कुछ दवाएं भी खाई हैं, जिससे उसकी आवाज में बदलाव भी आया है। अमित ने यह भी बताया कि सेक्स बदलने के लिए वह दिल्ली में कुछ डॉक्टरों के भी संपर्क में है। अमित ने कहा कि ऑपरेशन होने के बाद वह कोर्ट मैरिज भी करेंगे। अमित कुमार ने कहा कि अगर दोनों के घर वालों ने उन्हें स्वीकार नहीं किया तो वह यहां से बाहर शिफ्ट हो जाएंगे।

देहरादून से ही सीएम रखेंगे सारे प्रदेश पर नज़र

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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सरकार के काम काज में पारदर्शिता औऱ जवाबेही लाने की तैयारी कर ली है। इसके लिये देहरादून से तमाम अधिकारियों और जिले में काम काज की माॅनिटरिंग की जायेगी। इस कवायद के लिये डैशबोर्ड तैयार किया जा रहा है।डैशबोर्ड से सभी विभागों और जिलों, वर्तमान में चल रह सभी परियोजनाएं, जन कल्याणकारी तथा विकास योजनाओं की समीक्षा की जायेगी। इस बारे में मुख्यमंत्री ने आईटीडीए और एनआईसी के अधिकारियों से मॉनिटरिंग डैशबोर्ड के बारे में बैठक की। बैठक में बताया गया कि इस डैशबोर्ड से मुख्यमंत्री

  • अपने आॅफिस से ही सभी विभागों और जिलों की समीक्षा करने के साथ ही निर्देश भी दे सकेंगे और फॉलो अप भी कर सकेंगे।
  • डैशबोर्ड परफॉर्मेंस, चुनौतियों और प्रमुख परफॉर्मेंस संकेतकों की जानकारी भी देगा।
  • इस मोड्यूल में सरकार की प्राथमिकताएं, राज्य की उपलब्धियां, परफॉर्मेंस संकेतक, फ्लैगशिप प्रोग्राम, चुनौतियों वाले क्षेत्र, विभागों के परफॉर्मेंस की स्टार रेटिंग और चैट बोर्ड होगा ।
  • इसमें ग्राउंड लेवल का डाटा जिलों, ब्लॉक और गांव से इकट्ठा किया गया डेटा रहेगा।
  • साथ ही इसमें ग्राफिक रिपोर्ट, दैनिक, मासिक रिपोर्ट, सबसे अधिक और सबसे कम परफॉर्मेंस वाले जिलों की रिपोर्ट, विभागवार डाटा सीडिंग रिपोर्ट, विभागवार सेवाओं की रिपोर्ट, योजना के अनुसार भौतिक और वित्तीय प्रगति की रिपोर्ट रहेगी।

मुख्यमंत्री के सुझावों के अनुसार डैशबोर्ड में राज्य भर के अधिकारियो, किसानों, युवा वर्ग या समाजसेवियों द्वारा इनोवेटिव कार्यों का भी उल्लेख किया जाएगा। दुनिया भर में डिजिटस क्रांति छा रही है औऱ ऐसे में अगर सरकार का ये डैशबोर्ड सूबह का सवेरा देखता है तो सरकारी कामों में जवाबदेही तय करने में काफी मदद मिल सकती है।

युवाओं को नहीं भा रहे प्रदेश के मेडिकल संस्थान

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सरकार प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों को भले ही कितने भी सुविधा संपन्न होने के दावे करती हो लेकिन युवाओं की पंसद में जगह नहीं बना पा रहे हैं। यह हम नहीं बल्कि नीट काउंसिलिंग के आंकड़े इसकी तस्दीक करते हैं। आलम यह है कि काउंसिलिंग में प्रदेश के कॉलेजों की एमबीबीएस की सीटों पर एक चौथाई भी दाखिले नहीं हो पाए हैं।

राज्य के मेडिकल संस्थानों की सीटों पर दाखिला प्रक्रिया के अंकड़े संस्थानों के हित में नहीं हैं। भले ही युवाओं में डॉक्टर बनने का क्रेज भले ही बढ़ा हो, लेकिन राज्य के मेडिकल कॉलेजों से डॉक्टर बनने की चाहत युवाओं में कम ही दिख रही है।
नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) की ऑल इंडिया काउंसिलिंग के तहत राज्य के तीन मेडिकल कॉलेजों में प्रथम राउंड में दाखिले कुछ यही इशारा कर रहे हैं। श्रीनगर व हल्द्वानी की बात छोड़िए, राजधानी स्थित दून मेडिकल कॉलेज भी देश के युवाओं की पसंद नहीं है। यहां ऑल इंडिया कोटे से अभी मात्र 02 ही एडमिशन हुए हैं।
वहीं, हल्द्वानी और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में भी अभी अधिकांश सीटें खाली हैं। श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में ऑल इंडिया कोटे में महज एक सीट भरी है। जबकि हल्द्वानी में पांच दाखिले हुए थे, जिनमें तीन ने सीट छोड़ दी है। इस स्थिति पहले चरण में राज्य के तीन मेडिकल कॉलेजों में कुल मिलाकर पांच ही सीट भर पाई हैं।
राज्य के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन कम होने की बड़ी वजह है सरकार के साथ पहाड़ पर पांच साल सेवाओं का बॉन्ड। सरकारी कोटे की सीटों पर दाखिला लेने वाले अभ्यर्थियों के लिए यहां पहाड़ी इलाके में सेवाएं देना अनिवार्य है। अगर बॉन्ड साइन नहीं किया गया तो चार लाख रुपये सालाना फीस चुकानी पड़ती है। जबकि बाहरी राज्यों में यह फीस काफी कम है। यही कारण है कि युवाओं के बीच कम रुझान दिख रहा है।
काउंसिलिंग का जिम्मा संभाल रही एचएनबी उत्तराखंड मेडिकल एजुकेशन यूनिवर्सिटी के प्रभारी कुलसचिव व निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. आशुतोष सयाना के मुताबिक प्रथम चरण की काउंसिलिंग में अभ्यर्थी अच्छा कॉलेज मिलने की आस में कई बार एडमिशन नहीं लेते। दून मेडिकल कॉलेज अभी नया भी है। श्रीनगर में पहाड़ी क्षेत्र व फैकल्टी एक फैक्टर है। उन्होंने बताया कि काउंसिलिंग का दूसरे राउंड में संस्थानों की सीटें भरने की उम्मीद है।

यह है सीटों की स्थिति
कॉलेज-ऑल इंडिया सीट-एडमिशन
राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर-15-01
राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी-15-02
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज, देहरादून-22-02

देहरादून में होंगे रणजी के मैच, राज्य क्रिकेट एसोसियेशन को मान्यता पर भी विचार

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Dehradun
Stadium

अगर सांसद राजीव शुक्ला की माने तो आने वाले दिनों में देहरादून में भी राष्ट्रीय स्तर के क्रिकेट मैच खेले जायेंगे। दून के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में रणजी मुकाबले देखने को मिलेंगे। उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव व आइपीएल चेयरमैन राजीव शुक्ला ने इसके लिए हामी भरी है।

खेल मंत्री अरविंद पांडे औऱ राजीव शुक्ला की मुलाकात में राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों के आयोजन को लेकर चर्चा की गई। इस पर राजीव शुक्ला ने कहा कि दून में बने क्रिकेट स्टेडियम में इस घरेलू सीजन में रणजी मुकाबले दिए जाएंगे। खेल मंत्री अरविंद पांडे ने बताया कि मुलाकात में आइपीएल व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच के आयोजन को लेकर भी चर्चा हुई। राजीव शुक्ला ने कहा कि आइपीएल व अंतरराष्ट्रीय मैच के लिए स्टेडियम की दर्शक क्षमता काफी कम है। अगर इसमें पांच से दस हजार का इजाफा कर दिया जाता है तो आइपीएल मैचों की मेजबानी मिल सकती है। स्टेडियम में दर्शक क्षमता बढ़ाने के लिए प्रयास किए जाएंगे, ताकि यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुकाबले हो सकें।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में क्रिकेट एसोसिएशन को मान्यता के मुद्दे पर राजीव शुक्ला ने कहा कि यदि दोनों एसोसिएशन मिलकर प्रयास करें तो बीसीसीआई की आगामी एजीएम में मान्यता का मुद्दा सुलझा जाएगा। गौरतलब है कि महाराणा प्रताप स्पोर्टस कॉलेज परिसर में करीब 239 करोड़ की लागत से राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम का निर्माण पूरा हो चुका है। इसमें 25 हजार दर्शकों के बैठने की क्षमता है। अब इसे 35 हजार तक करने के प्रयास होंगे।