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आमिर खान ने बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए अपील की

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Aamir khan speaks up on GSt and other issues

गुजरात और असम सहित देश के कई राज्यों में आई बाढ़ की विपदा में फंसे लोगों की मदद के लिए आमिर खान ने मदद की अपील की है। शनिवार को सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में आमिर खान ने कहा कि असम और गुजरात में बाढ़ के जिस तरह के हालात बन रहे हैं, उनको लेकर वे चिंतित हैं।

उन्होंने कहा कि ये हमारी जिम्मेदारी है कि संकट के इस कठिन वक्त में हम इन राज्यों में फंसे लोगों की मदद के लिए काम करें। आमिर खान ने लोगों से बाढ़ प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्री राहत कोष में आर्थिक मदद की अपील की। आमिर खान ने कहा कि वे खुद ऐसा करने जा रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि बाकी सब लोग भी इस तरह से इन राज्यों के लोगों की मदद के लिए आगे आएंगे।

अपनी नई फिल्म ‘ठग ऑफ हिंदोस्तां’ की शूटिंग के लिए अमेरिका गए आमिर हाल ही में मुंबई लौटे हैं। गुजरात में अब भी बाढ़ की गंभीर स्थिति बनी हुई है और सरकारी आंकड़े के मुताबिक 128 लोग अब तक इस विपदा का शिकार होकर अपनी जान गंवा चुके हैं। असम में बाढ़ के हालात थोड़े से बेहतर माने जा रहे हैं। 

जेल में बंद कैदी ने फांसी लगाकर की खुदकुशी

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चमोली के जिला कारागार में हत्या के जुर्म में सजा भुगत रहे जनपद के थराली विकास खंड के तुंगेश्वर गांव निवासी एक युवक ने शौचालय के रोशनदान में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली है।

जानकारी के अनुसार, तुंगेश्वर गांव निवासी जयवीर राम फरवरी 2017 से पुरसाडी जेल में हत्या के जुर्म में सजा काट रहा था। शनिवार की सांय को साढ़े छह बजे के आस-पास जब जेल के अन्य कैदी खाना खाने के लिए पाकशाला गये हुए थे तो वह अकेले ही अपने बैरक में ही रुक गया।

जब अन्य कैदी खाना खा कर लौटे तो उन्होंने जयवीर को शौचालय के ऊपर बने रोशनदान पर लटका पाया। जब इसकी जानकारी बंदी रक्षक व जेल स्टाफ को दी गई तो एंबूलेंस से तुरंत उसे जिला चिकित्सालय लाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि मृतक ने जुते की लैस से खुद को फांसी लगायी है।

एयर इंडिया के बेड़े में शामिल हैं 20 वर्ष से अधिक पुराने विमान

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सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया के विमान बेड़े में 20 साल से भी अधिक पुराने विमान शामिल हैं। बावजूद इसके सरकार की नये यात्री विमान खरीदने की कोई योजना नहीं है। नागर विमानन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने यह जानकारी लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान नागर विमानन विनियमों के अनुसार एक विमान तब तक उड़ान भर सकता है जब तक कि वह तकनीकी रूप से उड़ने के योग्य है| इसके लिए कोई अधिकतम समयावधि तय नहीं है। उन्होंने बताया कि एयर इंडिया बी-747 और 6 ए-320 (क्लासिक) विमानों का उड़ान में प्रयोग कर रहा है जिनमें से कुछ 20 वर्ष से अधिक पुराने हैं।

उन्होंने बताया कि पुराने ए-320 विमानों की प्रतिस्थापना और विकास के उद्देश्य से एयर इंडिया ने 34 ए-320 विमानों की श्रृंखला को किराए पर लेने का निर्णय किया है। इनमें से 13 विमान पहले ही प्राप्त किए जा चुके हैं और शेष 13 अंतरण भी फरवरी 2019 तक पूरे हो जाएंगे।सिन्हा ने बताया कि बी-747 की प्रतिस्थापना के लिए एयर इंडिया बी-777 और बी-787 विमानों का प्रतिष्ठापन आरंभ कर चुकी है जिसके लिए 2005 में एयर इंडिया ने बोईंग के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इन विमानों को सुपुर्दगी मार्च 2018 तक पूरी हो जाएगी।

सीएजी ने उठाये ‘आकाश मिसाइल’ के परीक्षण पर सवाल

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भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने भारतीय वायुसेना की आकाश मिसाइल की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाये हैं। सीएजी के अनुसार इनमें से एक तिहाई मिसाइलें टेस्ट में असफल हो गईं।सदन में रखी गई सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार इन मिसाइलों को ‘एस’ सेक्टर (उत्तर-पूर्व) में तैनात किया जाना था। यह काम 2013-15 के बीच ही हो जाना था लेकिन अभी तक वायुसेना ऐसा नहीं कर पाई है।
रिपोर्ट में मिसाइल के नाम की जगह ‘जेड’ लिखा हुआ है लेकिन सूत्रों के अनुसार यहां आकाश मिसाइलों की ही बात हुई है। नवंबर 2014 में एयरफोर्स के पास 80 मिसाइलें थीं जिनमें से 20 का परीक्षण किया गया था। इनमें से 6 यानी 30 फीसदी मिसाइलें परीक्षण में असफल रहीं।
रिपोर्ट के अनुसार प्रारम्भिक जांच में पता चला है कि असफल हुई मिसाइलों में से कोई अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाई तो किसी की रफ़्तार कम रही। यानी इन मिसाइलों में कई कमियां हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जरूररत के समय ये कमियां बेहद नुकसान पहुंचा सकती हैं।
ये मिसाइलें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड से 3,619 करोड़ रुपये अदा करके खरीदी गईं थीं। इन्हें उत्तर-पूर्व में तैनात करने का निर्णय 2010 में लिया गया था। इन मिसाइलों की उम्र 10 साल तक होती है। रिपोर्ट की मानें तो इनमें से कई मिसाइलों का जीवन मार्च 2017 में ही समाप्त हो चुका है।

जल्द आने वाला है उत्तराखंड ”हेरिटेज एक्ट”

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145 साल पुराना अल्मोड़ा जेल जहां जवाहरलाल नेहरू ने दो बार जेल की सज़ा काटी, ब्रिटिश काल का नैनीताल स्थित राजभवन ये दोनों ही उत्तराखंड की ऐतिहासिक घरोहर के शिलालेख समान हैं। इसके साथ साथ राज्यभर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक औऱ हेरिटेज को दर्शाने वाली तमाम इमारतों और जगहों को एक नई पहचान मिलने वाली है। इसके लिये राज्य सरकार ने उत्तारखंड हेरिटेज ऐक्ट लाने की तैयारी कर ली है।

इस एक्ट के आने से राज्यभर कि उन सभी इमारतों और जगहों को संवारने में मदद मिलेगी जो राज्य के लिहाज से तो महत्वपूर्ण हैं पर अबी तक किसी भी केंद्र सरकार की ऐजेंसी ने उनके जीर्णोंधार पर ध्यान नहीं दिया है।

उत्तारखंड संस्कृति विभाग की निदेशक बीना भट्ट के अनुसार इस ऐक्ट का खांचा तैयार है और राज्य सरकार को भेज दिया गया है।इसके साथ साथ आम लोगों के सुझावों के लिये इसे रोका गया है और इसके बाद कैबिनेट की मंजूरी के लिये इसे भेजा जायेगा।

ऐंसियंट मोंन्यूमेंट एंड आर्कियोलोजिकल साइटस एंड रिमेंस ऐक्ट के अंतर्गत राज्यभर में करीब 71 इमारतों का रख रखाव राज्य सरकार करती है और 42 इमारतों का रख-रखाव केंद्र सरकार करती है। वहीं ये नया एक्ट अपने नियमों की सीमा क्षेत्र के कारण अलग रहेगा। इस एक्ट के अंतर्गत न सिर्फ इमारतें आयेंगी बल्कि कला के नमूने, सड़के-गलियां, महत्वपूर्ण प्रकृतिक जगहें और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इलाके भी रहेंगे।

मिसाल के तौर पर इस ऐक्ट के तहत पवित्र झरने और तालाब, पारंपरिक रास्ते औऱ पगडंडियां रहेंगे। इन इलाकों के आसपास निर्माण की मनाही रहेगी। ऐसी सभी जगहं को चिह्नहित करने और उनके जीर्णोंधार के लिये प्लॉन बनाने के लिये एक हेरिटेज अथाॅरिटी बनाई जायेगी। इसके चेयरमैन राज्य के मुख्य सचिव होंगे उनके साथ आर्किटेक्ट, इंजिनियर, इतिहासकार, पर्यावरणविद भी इस समिति का हिस्सा होंगे।

जानकारों के मुताबिक उत्तराखंड को लंबे समय से ऐसे विधेयक की जरूरत थी। वहीं देहरादून के हेरिटेज एक्सपर्ट और बीन देयर दून दैट एनजीओ के फाउंडर लोकश ओहरी ने कहा कि उत्तराखंड को अलग राज्य बने 16 साल हो गए है और अगर अब भी यह एक्ट नहीं आएगा तो हमारे हैरिटेज को खत्म होने से कोई नहीं बचा पाएगा।उन्होंने कहा कि हालांकि यह एक्ट काफी पहले से अधूरा है।उन्होंने कहा कि हमारे जैसे एक्टिविस्ट काफी समय से इस एक्ट को लागू करने के लिए उत्तराखंड सरकार से बातचीत कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि इस एक्ट के आने से जो बचे हुए हेरिटेज साइट है उनकी देखभाल हो जाएगी। ओहरी ने कहा कि सरकार के ऐसे फैसलों का हम जैसे एक्टिविस्ट दिल खोल कर स्वागत करते हैं।बस इससे जुड़े सभी नियम सख्ती से लागू करने चाहिए ताकि असल में हैरिटेज प्रोटेक्शन हो सके। उन्होंने कहा कि बहुत से ऐसे राज्य है जैसे गुजरात,दिल्ली और आंध्र प्रदेश जहां पहले से यह एक्ट लागू किया जा चुका है।ओहरी ने कहा कि इन प्रदेशों में सभी स्थानीय हैरिटेज को सुरक्षित रखने के लिए बेहतरीन काम कर रहे हैं और मैं उम्मीद कर रहा हूं कि पहाड़ी क्षेत्र भी दूसरे राज्यों की तरह काम करेगा।

एक माह में आधार न बना तो, मिड-डे मील नहीं

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हाल ही में प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों में आधार कार्ड को अनिवार्य करने का फैसला लिया है। फैसले के बाद स्कूलों में मिड डे मील के लिए भी आधार अनिवार्य होगा लेकिन आंकड़ों पर गौर करें तो अभी 5 से 18 साल उम्र के बीच आने वाले तकरीबन 80 प्रतिशत छात्रों के ही आधार बन पाए हैं, जबकि शिक्षा विभाग को 30 अगस्त तक बच्चों के आधार मुहैया कराने है। इसी के आधार पर मिड डे मील के लिए राशन आवंटित होगा। ऐसे में महज एक माह में बाकी 20 प्रतिशत बच्चों के आधार बना पाना बड़ी चुनौती होगा।

केन्द्र की आधार कार्ड की अनिवार्यता को सरकारी स्कूलों में पूरी तैयारी के साथ लागू किया जा रहा है। पहले दाखिले के लिए आधार कार्ड अनिवार्य किया गया, अब मिड डे मिल के लिए भी आधार कार्ड को जरूरी कर दिया है। स्कूलों में पढ़ने वाले हर बच्चे को आधार कार्ड नंबर देना ही होगा। जिसके बाद मिड डे मिल का कोटा मिलेगा। मुख्य शिक्षा अधिकारी एसबी जोशी ने बताया कि आधार को लेकर जारी निर्देशों का पूरी तरह से पालन किया जा रहा है। सबसे पहले दाखिले के लिए आधार कार्ड अनिवार्य किया गया था। इसका हर स्कूल ने पालन किया है। इसके बाद अब मिड डे मिल के लिए भी हर बच्चे का आधार नंबर जरूरी कर दिया गया है। आधार कार्ड को अनिवार्य करने के लिए शिक्षा विभाग ने कमर कस ली है। इससे पहले, शिक्षा विभाग ने हर सरकारी स्कूल के छात्रों के लिए 31 अगस्त तक आधार को जमा करने के निर्देश दिए हैं। अगर आधार कार्ड 100 प्रतिशत जमा नहीं हुए तो शिक्षकों के वेतन तक रोकने के निर्देश पहले ही जारी हो चुके हैं।

5 से 18 तक के 80 प्रतिशत के पास ही आधार
हाल ही में यूनिक आइडेंटिफिकेशन आॅफ इंडिया द्वारा देशभर में बनाए गए आधार कार्ड के आंड़े जारी किए गए। 15 जुलाई 2017 तक के इन आंकड़ों पर गौर करें तो उत्तराखंड की कुल आबादी 1,09,56,753 में से अभी तक 1,05,46,913 यानि 96.3 प्रतिशत आधार कार्ड बनाए जा चुके हैं। इनमें अगर 0-5 साल उम्र की बात करें तो 10,01,656 कुल बच्चों में से 6,07,869 यानि 60.7 प्रतिशत ही लक्ष्य पूरा हो पाया है। इसके अलावा, 5 से 18 वर्ष आयु वर्ग की बात करें तो प्रदेश में 31,71,638 में से केवल 25,41,212 जो कि मात्र 80.1 प्रतिशत ही आधार बन पाए हैं। ऐसे में यदि स्कूलों में 30 अगस्त तक आधार जमा कराने की अनिवार्यता होगी तो इससे पहले बाकी बचे 20 प्रतिशत छात्रों के आधार बनवाने होंगे। जो कि बड़ी चुनौती होगा।

कहां बनाएं आधार
स्कूलों में आधार कार्ड को अनिवार्य तो कर दिया लेकिन दून में आधार कैसे बनाएं ये बड़ा सवाल खड़ा हो रखा है। शहर के जीपीओ में आधार कार्ड बनाने के लिए घंटो इंतजार करना पड़ रहा है। दरअसल निजी सेंटरों में आधार कार्ड नहीं बन रहा है। सिर्फ मुख्य डाकघर में ही आधार बनाने की फैसलिटी दी जा रही है। उधर, डीएसओ कार्यालय के पास बने आधार सेंटर में सिर्फ शुक्रवार, शनिवार को ही आधार बनाया जा रहा है। ऐसे में स्कूलों में एडमिशन लेने के लिए आवेदन करने में लोगों को बड़ी परेशानी हो रही है। साथ ही, निजी स्कूलों ने भी सीबीएसई के नियमों का पालन नहीं किया है।

एसडीएम ने आधार कार्ड के नाम पर अवैध वसूली का किया खुलासा

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आधार कार्ड बनवाने के नाम पर लोगों से अवैध वसूली करने के आरोप में रानीपुर मोड़ स्थित दुकान पर एसडीएम ने छापा मारकर दुकान का सामान सीज कर दिया। दुकान पर ग्राहक बन कर आए, एसडीएम ने जब दुकान मालिक से आधार कार्ड बनाने के पैसे पूछे तो दुकानदार ने उनसे 150 रुपये बनवाई और 100 रुपये प्रिंट के मांगें।

शनिवार को रानीपुर मोड़ स्थित डिजिटल आॅनलाइन सेंटर पर उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब खुद एसडीएम ने ग्राहक बन कर इस बात का खुलासा किया कि आधार कार्ड बनाने के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है।
एसडीएम मनीष सिंह ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि काफी समय से इस तरह की शिकायतें मिल रही थी जिस पर वह स्वयं उस दुकान पर गये और अपनी पत्नी का आधार बनाने और उसके प्रिंट की बात की तो दुकानदार द्वारा सरकारी रेट से अधिक 150 से 250 रुपये तक मांगें गये। जिसके बाद एसडीएम ने दुकानदार के खिलाफ कार्रवार्इ करते हुए प्रिंट मशीन के साथ-साथ बायोमेट्रिक मशीन को सील कर दिया।
एसडीएम मनीष सिंह ने बताया कि आस-पास खड़े लोगों ने भी इस तरह की बात की पुष्टि की है। जिसके बाद इस मामले में लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवार्इ की जा रही है।

अब सीधा जुड़िये अपने मुख्यमंत्री से, सीएम ने की डिजिटल पहल

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मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उत्तराखण्ड की जनता से सीधे सम्पर्क बनाने के लिए teamtrivendra.in  वेबसाईट का विमोचन किया। शनिवार को देहरादून के एक स्थानीय होटल में वेबसाईट को लाॅंच करते हुए उन्होंने कहा कि इस वेबसाईट के माध्यम से जनता से सीधे सम्पर्क बनाया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि इस वेबसाईट के माध्यम से उत्तराखण्ड निवासी, प्रवासी एवं सभी पार्टी कार्यकर्ता अपने सुझाव दे सकेंगे। इसका रिकाॅर्ड भी रखा जायेगा साथ ही नियमित रूप से इसका अवलोकन किया जायेगा। 

उत्तराखंड को मिला बाघ संरक्षण में पहला स्थान

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शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित ’ग्लोबल टाइगर डे’ कार्यक्रम में उत्तराखण्ड को देश का पहला संरक्षण आश्वस्त बाघ मानक(CATS-Conservation Assured Tiger Standard) अवार्ड मिला। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने भी वन विभाग के साथ-साथ प्रदेश वासियों को बधाई व शुभकामनाएं दी है। 

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि बाघों के संरक्षण के लिए ठोस प्रयास किये जाए। बाघो के शिकार को रोकने के लिए वन विभाग कार्य करें। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि बाघो के संरक्षण में उत्तराखण्ड द्वारा शानदार काम किया जा रहा। सरकार बाघो के संरक्षण के प्रति पूरी तरह से गंभीर है। बाघो का शिकार किसी भी सूरत में नही होने दिया जायेगा, इसके लिए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जायेगी। मुख्यमंत्री ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्बेट व राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघो के संरक्षण के लिए ठोस प्रयास किये जाए। उन्होंने कहा कि बाघों के शिकार करने वालो पर कठोर कार्यवाही की जायेगी। बाघो के शिकार पर शिकंजा कसने के लिए मुख्यमंत्री ने वन विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर बाघो के शिकार के संबंध में किसी भी गिरोह के साथ किसी भी अधिकारी/कर्मचारी के संलिप्तता पायी जाती है, तो ऐसे अधिकारी/कर्मचारी के विरूद्ध जांच कर कडी कार्रवाई की जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बाघो के संरक्षण के प्रति बेहद गंभीर व चिन्तित है। 

पी.सी.सी.एफ. वन्य जीव डी.बी.एस.खाती ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा बाघों के संरक्षण व उनके शिकार को रोकने के लिए कई कदम उठाये गये है। जिनमें कार्बेट टाइगर रिजर्व पार्क से सटे 122 गुर्जर परिवारों को वहां से विस्थापित किया गया है। बाघो के अवैध शिकार करने वालो पर सर्विलांस के जरिये निगरानी की जा रही है साथ ही जन सहभागिता व गुप्तचरों के जरिये भी बाघो के शिकार करने वाले गिरोहो पर नजर रखी जा रही है। 

बाघो की गणना के वर्ष 2016-17 के ताजे आंकडों के अनुसार कार्बेट टाईगर रिजर्व में न्यूनतम 208 बाघ और राजा जी टाइगर रिजर्व में 34 बाघों की पहचान की गई है। पिछले वर्ष यह संख्या कार्बेट टाईगर रिजर्व में 163 एवं राजा जी टाईगर रिजर्व में 16 पायी गई थी। 340 बाघो के साथ क्षेत्रफल के अनुपात में बाघो की संख्या के मामले में उत्तराखण्ड देश का नम्बर एक राज्य है।

हरियाणा के युवक ने पंखे से लटकर की आत्महत्या

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हरियाणा के एक युवक ने श्रवणनाथ नगर स्थित एक होटल के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस को कमरे से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। युवक अविवाहित था तथा मां और पिता की भी कई साल पूर्व मौत हो चुकी है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया है। आत्महत्या के कारणों की वजह कोई साफ नहीं चल पा रही है। रिश्तेदारों को सूचना दे दी गई है।

नगर कोतवाली प्रभारी चंद्रभान सिंह अधिकारी ने बताया कि श्रवणनाथ नगर स्थित चित्रा हेरीटेज होटल का कमरा नंबर 301 के बंद होने की सूचना मिली। होटल मैनेजर संतन चौहान ने बताया कि हरियाणा करनाल गांव जाटो निवासी हरीश मान 32 पुत्र जगदीश 27 जुलाई को कमरा लेने आया था। आईडी देखने के बाद कमरा नंबर 301 दे दिया गया। शनिवार को करीब एक बजे हरीश ने खाने का आर्डर दिया। जब खाना देने वेटर गया तो कमरा बंद था। पुलिस ने कमरे को खोला तो हरीश तौलिये का फंदा बनाकर पंखे से झूल रहा था। हरीश मृत अवस्था में था। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया है।