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तो अब अल्मोड़ा के आसमान में भी उड़ान भरेंगे पैराग्लाइडर्स

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अल्मोड़ा में र्यटन को बढ़ावा देने के लिये साहसिक पर्यटन से जुड़े विकल्पों पर काम किया जा रहा है। इसी के चलते जिला प्रशासन अब पैराग्लाइडिंग शुरू करने की तैयारी कर रहा है, जिससे यहां पर भीमताल की तर्ज पर पैराग्लाइडिंग हो सके।

प्रशासन को इस खेल के शुरू होने से यहां पर्यटकों की संख्या में इजाफा होने की उम्मीद है। पैराग्लाइडिंग शुरू करने के लिए भीमताल में सेवाएं दे रही एक निजी कंपनी के प्रतिनिधि ने डीएम इवा आशीष से परमीशन मांगी है। इस पर प्रशासन और विभागीय अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि पायलट की तरफ से पैराग्लाइडिंग की उड़ान देखने और उसकी तरफ से एनओसी मिलने के बाद अनुमति दी जाएगी।

डीएम ने बताया कि “एनटीडी के पास एक चयनित जगह है जिस पर पैराग्लाइडिंग की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इसके लिए भीमताल में सेवाएं दे रहे कंपनी के प्रतिनिधि राकेश उप्रेती से बात हुई है। छह माह से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिसमें पर्यटन विभाग की तरफ से एक कमेटी भी बनाई गई है, जिसकी रिपोर्ट के बाद यह निर्णय लिया जाना है।”

पैराग्लाइडिंग शुरू होने से पहले

  • एक निश्चित आय का कुछ प्रतिशत राजस्व के रूप में लिए जाने की बात कंपनी से होनी है।
  • संबंधित जगह पर पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाएं भी मुहैया कराई जायेंगी
  • जरूरी तकनीकी चीजों और रखऱकाव के सामान मुहैया कराया जायेगा।

बरसात का मौसम खत्म होने के बाद पायलट यहां पर पैराग्लाइडर उड़ाकर देखेगा और प्रमाणपत्र देगा कि यहां पर उड़ान सफल और सुरक्षित है। तब विभाग यहां पर इस रोमांचकारी खेल के लिए कंपनी को एनओसी और अनुमति प्रदान करेगा।

अफवाहों का माध्यम बनता सोशल मीडिया

वर्तमान दौर सूचनाओं के त्वरित प्रवाह का है। सूचनाएं बिजली की चलपता से एक स्थान से अन्यत्र हवाओं में तैरती हुई हमारे माध्यमों के मार्फत सभी तक पहुंच रही हैं। सूचना समर के इस दौर में अफवाहों का तंत्र भी इसके समानांतर गतिशील है। अफवाहें कब सूचनाओं का रूप धरकर समाचार में तब्दील हो जाएं, कुछ कहा नहीं जा सकता है। वहीं, अफवाहें कब सामूहिक उन्माद में तब्दील हो कर किसी बड़ी घटना का अंजाम दे जायें, इसका भी कोई समय निश्चित नहीं है। समय विशेष में यही घटनाएं मात्र घटनाएं न होकर ‘मास हीस्टीरिया’ या जन भ्रम की घटनाएं होती हैं जो अफवाहों के पंख लगने के बाद सामूहिक उन्माद का रूप ले लेती होती हैं। देश में ‘मास हीस्टीरिया’ जन भ्रम का अपना इतिहास रहा है। 90 के दशक के मध्य में 21 सितंबर की सुबह एकाएक अफवाह फैली की भगवान गणेश की मूर्ति चम्मच से दूध पी रही है। देखते ही देखते मंदिरों में लाइनें लग गईं। तब इस अफवाह को सुदूर तक फैलाने का काम टेलीफोन ने किया था। इसी तरह 2001 में देश की राजधानी दिल्ली में ‘मंकी मैन’ की अफ़वाह फैली। मंकी मैन ने कथित रूप से कई लोगों पर हमला किया। इसके बाद सन् 2002 में देश की जनसंख्या के मामले में सबसे बड़े सूबे में मुंहनोचवा का प्रकरण सामने आया। सन् 2006 में हज़ारों की तादाद में लोग मुंबई के एक समुद्र तट में इसीलिए पहुंचने लगे क्योंकि उन्होंने सुना कि समुद्र का पानी अचानक मीठा होने लग गया है। इन जैसे कई उदाहरण हैं जिन्हें मीडिया ने समाचार बनाकर लोगों को परोसा। हालांकि बाद में घटनाएं अफवाह मात्र निकलीं। इन मामलों में मीडिया की किरकिरी होने के बाद मुख्य धारा का मीडिया अब इस तरह की घटनाओं को सोच समझकर ही स्थान देता है। भला हो इस व्हाट्अप और फेसबुक युनिवर्सिटी का, जिसमें शामिल सभी लोग खुद को समाज विज्ञानी होने का दम भरते हैं। साथ ही अपने और अपने समाज को भलीभांति जानने की तकरीरें करते हैं। उन्हें शायद पता ही होगा कि जब भी कहीं दंगे- फसाद होते हैं तो वहां के प्रशासन का पहला लक्ष्य सूचना सेवाओं को बाधित करने का होता है। न जाने कब अफवाहें सूचना के रूप में लोगों के दिल में घर कर जाएं।

हाल ही में उत्तरी भारत के कई राज्यों जैसे हरियाणा, उत्तरप्रदेश, दिल्ली और राजस्थान में महिलाओं की चोटी कटने की घटनाओं का बाजार गर्म है। कई मामले दर्ज किये जा चुके हैं लेकिन न तो पुलिस और न ही इसकी शिकार महिलाएं इसके कारणों की तह तक पहुंच पायें हैं। जब घटना की शिकार महिलाओं से पूछा जाता है कि किसी ने हमलावर को देखा है..इस प्रश्न पर रहस्य औऱ ही गहरा जाता है। कई महिलाओं ने शिकायत की है कि किसी ने उन्हें बेहोश करके रहस्यमयी तरीके से उनके बाल काट लिए। जितनी महिलाओं ने अपनी चोटी कटने की शिकायते थानों में दर्ज कराई हैं सबकी अपनी- अपनी आपबीती है। चोटी कटने की पहली खबर राजस्थान से आयी थी लेकिन अब इसने हरियाणा और दिल्ली समेत उत्तर प्रदेश को भी अपनी चपेट में ले लिया है। इन घटनाओं और उसके बाद इसके गहराते रहस्य की कई कहानियां हैं। कइयों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं तांत्रिकों द्वारा अंजाम दी जा रही हैं जबकि कई इनके पीछे अदृश्य शैतानी ताकतों का होना मानते हैं। हालांकि इस तरह की घटनाओं को वैज्ञानिक तथ्यों की कसौटी पर कसने पर यह ‘मास हिस्टीरिया’ की घटना समझ पड़ती है। इनके पीछे कोई चमत्कार, दैवीय या शैतानी शक्ति नहीं है बल्कि यह एक विशेष मन: स्थिति का परिणाम है। इस तरह की मन: स्थिति में पीड़ित खुद पर ऐसा होते हुए अहसास करता है। यह कभी – कभार अवचेतनावस्था में भी होता है। इस तरह की घटनाओं की शिकार महिलाओं में इस बात की समानता है कि तकरीबन सभी की आर्थिक- सामाजिक स्थिति कमोवेश एक जैसी होने के साथ ही वे कम पढ़ी-लिखी हैं। लेकिन शिक्षा के प्रसार और बढ़ती जागरूकता से इसमें काफी कमी आई है। बावजूद इसके ऐसी घटनाएं यदा-कदा होती रहती हैं। कई बार इस तरह की अफवाहें दहशत फैलाने के उद्देश्य से भी फैलाई जा सकती हैं। मेडिकल साइंस इसे ‘आईडेंटिटी डिसऑर्डर’ मानता है, जिसके पीड़ित लोग इस तरह की अजीबोगरीब घटनाओं के शिकार पाए जाते हैं। इससे पीड़ित व्यकित कुछ समय के लिए स्वयं पर नियंत्रण खो देते हैं। उसके बाद वे क्या करते हैं या फिर उनके साथ क्या होता है, इसकी उन्हें कोई समझ नहीं होती। ऐसी घटनाओं की मनगढ़त खबरें कमजोर सामाजिक और आर्थिक स्थिति के लोगों को ज्यादा प्रभावित करती हैं। जीवन की कठिनाइयों से त्रस्त, हैरान- परेशान लोग मानसिक दबाव या तनाव में भ्रम का शिकार आसानी से हो जाते हैं।
मंगलवार की ही घटना है, जब हरियाणा के पिछड़े जिले मेवात के नगीना ब्लॉक में एक बिल्ली को भीड़ ने इस लिए मार दिया क्योंकि गांव में एक महिला की कटी चोटी पाई गई तो परिजनों ने देखा वहां एक बिल्ली बैठी हुई है। बिल्ली को लोगों ने पकड़ लिया और उसकी हत्या की गई। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि इस इलाके में ऐसी अफवाहों का जोर था कि बिल्ली के रूप में कोई औरत आकर महिलाओं की चोटी काट जाती है। जब इस घटना को अंजाम दिया जा रहा था तो कई लोग इसका वीडियो बना रहे थे। सोशल मीडिया के माध्यम से यह खबर गोली की रफ्तार से भी तेज अन्य लोगों तक पहुंच गई होगी। परिणाम क्या होंगे ? यह समय बताएगा। इस तरह की अफवाहों के समय में कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की मन: स्थिति निष्क्रिय श्रोता की तरह होती है। आगरा में एक बुजुर्ग महिला को भीड़ ने चोटी काटने वाली समझकर पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया। इसी साल झारखंड में बच्चा चोरी की अफवाह के चलते भीड़ ने दो लोगों को मार डाला। ऐसी घटनाएं सामूहिक उन्माद का ही नतीजा है। इसी तरह मुंहनोचवा की अफवाहों के चलते फैले सामूहिक उन्माद में दो लोगों की मौत हो गई थी। मुज्जफरपुर की घटना तो सभी को याद होगी जब फेसबुक पर आपत्तीजनक कंटेट अपलोड करने पर दंगे भड़क गए थे। हालांकि बाद में पता चला कि संबंधित वीडियो देश का है ही नहीं। उपरोक्त उदाहरणों से स्पष्ट है कि मीडिया एक खास परिस्थिति में अत्यंत ही शक्तिशाली रुख अख्तियार कर लेता है, जब एक विशेष मन: स्थिति वाले लोगों तक जनभ्रम या मास हीस्टीरिया के संदेश पहुंचते हैं और इसी खास मीडिया इफेक्ट के चलते ही जनभ्रम सामूहिक उन्माद का रूप ले लेता है। सोशल मीडिया आज इन्हीं सब का टूल बना हुआ है। ऐसे में सोशल मीडिया का सोच-समझकर इस्तेमाल करना चाहिए। माना कि आप इस तरह की सूचनाओं को खबर बनाकर आगे नहीं बढ़ाते लेकिन इस बात को भी सुनिश्चित करना होगा कि कहीं आप इनके झांसे में तो नहीं आ रहे। सूचना क्रांति के इस दौर में सोशल मीडिया के उपयोगकर्ताओं को विशेष एहतियात बरतने की आवश्यकता है। वरना जनभ्रम के संदेशों से लोगों के दिलों दिमाग में घर कर गया शैतान कब अपने वास्तविक भयावह आकार, उन्माद का रूप लेकर हमारे उस सामाजिक ताने-बाने को तगड़ा अपूर्णीय आघात पहुंचा जाए जिसे बनाने में न जाने कितनी ही पीढ़ियां मर-खप गई। 

आपदा को लेकर वन विभाग सतर्क : डीएफओ

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जनपद पौड़ी गढ़वाल के कोटद्वार में आई दैवीय आपदा के चलते वन विभाग ने भी आपदा से निपटने के लिये कमर कस ली है। प्रभागीय वनाधिकारी लैंसडाउन मयंक शेखर झा ने बताया कि आपदा ग्रस्त क्षेत्रो में वन विभाग के कर्मचारी मवाकोट, कण्वाश्रम, ग्रास्टनगंज जैसी जगहों पर आपदा की दृष्टि को देखते हुए तैनात किया गया है।


कोटद्वार क्षेत्र में बाघ की धमक को देखते हुए जगह जगह पर निगरानी हेतु कैमरे लगा दिए गए हैं। साथ ही बाघ को पकड़ने के लिये पिंजरा भी लगाया गया है।
डीएफओ ने बताया कि वन विभाग के द्वारा आपदा पीड़ितों को खाद्य सामग्री का वितरण भी किया गया साथ ही पेयजल की समस्या को देखते हुए वन विभाग के द्वारा पेयजल समस्या से ग्रस्त क्षेत्र मानपुर, शिवपुर, धुर्वपुर आदि क्षेत्रों में वन विभाग के द्वारा टैंकर से पानी सप्लाई किया गया।
वनक्षेत्राधिकारी एसपी कण्डवाल ने बताया कि वन विभाग आपदा को देखते हुए पूरी तरह से मुस्तैदी के साथ कार्य कर रहा है। 

केदारनाथ में वैली ब्रिज बनकर तैयार

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नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) ने केदारनाथ में सरस्वती नदी पर वैली ब्रिज तैयार कर लिया, जिससे अब यात्रियों को आने जाने में सुविधा मिलेगी।

निम की टीम केदारनाथ की विषम भौगोलिक परिस्थितियों में पुनर्निर्माण कार्य में जुटी है। निम के नाम एक और उपलब्धि जुड़ गई है। इस पुल के निर्माण से केदारनाथ से भगवान भैरवनाथ मंदिर तक जाना सुविधाजनक होगा। पुल से केदारनाथ से हेलीपैड तक भी आवाजाही आसान हो जाएगी।
निम के देवेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि शुक्रवार को पुल का काम पूरा हो गया। पुल पर एक दो दिन में पूरी तरह आवाजाही शुरू कर दी जाएगी। वहीं निम ने इस स्थान के आसपास भी सुरक्षा के पूरे इंतजाम कर लिए। केदारनाथ में अब सभी जगहों से आवाजाही सुरक्षित हो गई है। एक ओर मुख्य प्रवेश मार्ग पर पक्का पुल निर्माण कर दिया गया है, वहीं इस पुल के बनने से भी तीर्थयात्रियों को काफी राहत मिलेगी।
केदारनाथ मंदिर से दांयी तरफ सरस्वती नदी पर इस साल मई से एनआईएम ने वैली ब्रिज बनाने का काम शुरू किया। इस कार्य में निम के 30 मजदूर, एक इंजीनियर और एक सुपरवाइजर प्रतिदिन मेहनत करते रहे है। पुल लगभग सौ दिन में बनकर तैयार हो गया। 

हौंसलो के दम पर अपने सपनों को सच्चाई बनाते ये खास बच्चे

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“तलाशोगे अगर तो रास्ते ही मिलेंगे, मंजिलों की फितरत है वह खुद चलकर नहीं आती”

कुछ ऐसे ही अपने रास्ते ढूंढने में कामयाब हुए देहरादून नेशनल इंस्टिट्टयूट आॅफ विजुअली हैंडीकैम्पड(एनआईवीएच) स्कूल के कुछ बच्चे जिन्होंने महज 15 से 18 साल की उम्र में वो कर दिखाया जो आप सुन कर हैरान हो जाऐंगे। एनआईवीएच के छत्रों ने 2017 ब्लाईंड फुटबाल प्रतियोगिता में भाग लिया और फुटबाल चैंम्पियनशीप अपने नाम कर ली। जी हां दून के इन बच्चों ने वो कर दिखाया जो सोचने में भी कठिन लगता है। एनआईवीएच राज्य का ही नही देश का ऐसा इन्सटिट्यूट हैं जहां हर राज्य से बच्चे शिक्षा लेते हैं। इस दौरान संस्थान उन छात्रों को भी चिह्नित करता है जो स्पोर्टस में अच्छा करते हैं और जिन्हें आगे बढ़ने में स्कूल और टीचर पूरा सहयोग करता है। एसे ही कुछ छात्रों से टीम न्यूजपोस्ट ने मुलाकात की और उनके जिन्दगी के बारे में जानने की कोशिश की।

NIVH team

2017 ब्लाइंड फुटबाल चैंपियनशीप में जीतने के बाद एनआईवीएच के पास अब चार चैंपियन खिलाड़ी बचें हैं जिनमें कुछ ग्यारहवी में हैं तो कुछ और छोटी क्लास में हैं। शोभेंद्र पिछले 11 साल से एनआईवीएच में पढ़ाई कर रहें हैं और 2016 से फुटबाल खेल रहे हैं। पहले इंटरनेशनल टीमों के साथ भी मैच खेल चुके हैं। लाहौर,मलेशिया और भारत के अलग-अलग राज्यों के साथ शोभेंद्र ने मैच खेला भी है और जीता भी है। फुटबाल चैंपियनशीप में 2016 से खेल रहे शोभेंद्र पिछले दो साल से प्लेयर आॅफ दि टूर्नामेंट भी है।उत्तरकाशी के शोभेंद्र को अपने टीचर के सपोर्ट के साथ घर वालों का सपोर्ट मिलता है लेकिन जब कभी खेल के दौरान उन्हें कहीं चोट लग जाती है तब उनके माता-पिता चितिंत होकर कहते हैं कि खेल में कुछ नहीं रखा। हालाकि शोभेंद्र इसे माता पिता का प्यार मान कर अनदेखा कर आगे बढ़ जाते हैं।

ठीक ऐसे ही एक खिलाड़ी है 16 साल के मेहराज जो बिहार से हैं। 15 साल के शोभित ध्यानी जो पौड़ी गढ़वाल से हैं और 16 साल के गंभीर भी उत्तराखंड से हैं। इसके अलावा चैंम्पियनशीप में खेलने वाले सभी खिलाड़ी पास आउट हो चुके हैं जिनमें पंकज राणा,संदीप और अश्वनि एनआईवीएच के सबसे उम्दा खिलाड़ियों में गिने जाते हैं।एनआईवीएच के पंकज राणा अब इंडियन ब्लाइंड टीम के लिए खेल रहे हैं।

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एनआईवीएच में बचे इन चार खिलाड़ीयों को आगे बढ़ाने में इनके कोच नरेश सिंह नयाल का बहुत बड़ा हाथ हैं।इन बच्चों को हर तरह की ट्रेनिंग देने के साथ चैंम्पियनशीप तक लेकर जाना आसन नहीं था। लेकिन कोच नरेश ने ना खुद हिम्मत हारी ना बच्चों को हारने दी। 2017 की चैंम्पियनशिप देहरादून के बच्चों के लिए आसान नहीं थी, अपनी उम्र से दोगुने उम्र के लोगों साथ हुए इन मैचों में बच्चों ने दिल्ली की टीम के खिलाफ अपना सेमीफाईनल जीता। दिल्ली की टीम के साथ मैच खेलने के बाद खिलाड़ी चैंम्पियनशीप के पास पहुंच चुके थे।फाईनल में देहरादून की टीम ने केरला के साथ मैच खेला और जीते भी। केरला टीम के खिलाड़ी दून टीम के खिलाड़ियों से उम्र और अनुभव में काफी बड़े थे लेकिन फिर भी टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन किया और जीत गए।

खिलाड़ियों ने बताया कि फुटबाल गेम को खलने के लिए उनको कोच नरेश और प्रिसिंपल कमलवीर सिंह जग्गी से पूरा सपोर्ट मिला। इस चैंम्पियनशीप को जीतने के बाद खिलाड़ी खासे उत्साहित हैं और आगे आने वाले सभी चैंम्पियनशीप को लिए जी तोड़ तैयारी कर रहे हैं। इन सभी बच्चों और एनआईवीएच ने एक शेर को कही साबित कर दिया है कि “खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है”

तेज बहाव ने ली हाथी के बच्चे की जान

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भारी बारिश का कहर जहां जनता पर पडा वहीं जानवर भी इससे अछूते नहीं रहे। कार्बेट के जंगलों में बरसात के चलते नदियों और नालों में जलस्तर बढने से जानवरों में भगदल मच गयी। कुछ जानवरों ने तो जान बचा ली मगर हाथी का एक बच्चा तेज पानी की धाराओं में बह गया। जिसका शव कार्बेट की टीम ने पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

तेज बारिश के दौरान बरसाती नदी के पानी में बहने से हाथी के बच्चे की मौत हो गई। उसका शव सावल्दें नदी के पुल के निकट बरामद किया गया। गत रात रामनगर व आसपास के क्षेत्र में भारी बारिश के चलते नदी नाले उफान पर आ गए। इस दौरान कार्बेट पार्क से बहकर एक हाथी का बच्चा सावल्दें गांव में नदी में आ गया। यह मादा हाथी थी। हाथी के बच्चे की मौत की सूचना पर कार्बेट पार्क की टीम मौके पर पहुंच गई। चिकित्सकों ने शव का पोस्टमार्टम किया। इस हाथी की उम्र करीब दो साल आंकी गई।

उत्तराखण्ड के विवि व काॅलेजों में गाया जाएगा वन्देमातरम

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 उच्च शिक्षा एवं सहकारिता मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों एवं डिग्री काॅलेजों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए अच्छे प्रयास करने होंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों एवं डिग्री काॅलेजों में राष्ट्रगान एवं वन्देमातरम अनिवार्य रूप से गाया जाए तथा एक माह में तिरंगा झण्डा भी अनिवार्य रूप से लगाने के निर्देश दिए।

उच्च शिक्षा एवं सहकारिता मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत द्वारा प्रदेश के कुलपतियों, रजिस्ट्रार तथा संबंधित अधिकारियों के साथ शनिवार को सचिवालय में समीक्षा बैठक के दौरान यह निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए हम सभी अच्छे प्रयास करने होंगे।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति तैयार की जा रही है, जिसके लिए उत्तराखण्ड सरकार से सुझाव मांगे गये है। सुझाव भेजने के लिए सभी अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ सुझाव तैयार करते हुए नोडल अधिकारी भी नामित करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों एवं डिग्री काॅलेजों में राष्ट्रगान एवं वन्देमातरम अनिवार्य रूप से गाने के निर्देश देते हुए कहा कि जिन विश्वविद्यालयों एवं डिग्री काॅलेजों में बायोमैट्रिक मशीन नही लगी है, उन विश्वविद्यालय एवं डिग्री काॅलेजों में बायोमैट्रिक मशीन 30 अगस्त तक अनिवार्य रूप से लगाया जाए।
उन्होंने छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए समाधान पोर्टल बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि शैक्षिक कैलेण्डर घोषित किया जाए तथा इसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। सभी विश्वविद्यालय एवं डिग्री काॅलेजों में 180 दिन पढ़ाई अनिवार्य रूप से किया जाए तथा इसमें छात्रों की उपस्थिति 75 प्रतिशत होना अनिवार्य है। यदि किसी छात्र की उपस्थिति 75 प्रतिशत से कम होती है, तो उनके अभिभावकों को भी सूचित किया जाए।
उच्च शिक्षा मंत्री कहा कि सुपर 100 क्लासेज चलाई जाएंगी। जिसमें 50 बच्चों को अल्मोडा तथा 50 बच्चों को श्रीनगर में कोचिंग दी जायेगी। उच्च शिक्षा मंत्री ने निर्देश दिए कि उच्च शिक्षा में 100 प्रतिभावान बच्चों की सूची तैयार की जाए, जिन्हें लैपटाॅप दिये जाय सभी जनपदों के विश्वविद्यालय एवं डिग्री काॅलेजों में ई-लाईब्रेरी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। प्रत्येक विश्वविद्यालय को वाई-फाई कनेक्टिविटी से भी जोड़ा जाए।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2019 तक उत्तराखण्ड को पूर्ण साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सभी विश्वविद्यालय पांच-पांच गावों को गोद लेकर पूर्ण साक्षरता के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहयोग करेंगे, जिसमें प्राइवेट विश्वविद्यालय भी शामिल होंगे।
उच्च शिक्षा मंत्री द्वारा सभी विश्वविद्यालय एवं डिग्री काॅलेजों में समय से छात्र संघ चुनाव करने के निर्देश दिए, जिसमें गढवाल मण्डल में 10 सितम्बर, 2017 से पूर्व एवं कुमांऊ मण्डल में 25 सितम्बर, 2017 तक अनिवार्य रूप से छात्र संघ चुनाव किये जाए। उन्होंने निर्देश दिये कि विश्वविद्यालय एवं डिग्री काॅलेजों में छात्र-छात्राओं का दुर्घटना बीमा किया जाए। उन्होंने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में जीर्णसीर्ण अतिथि गृह व छात्रावासों की मरम्मत के भी निर्देश दिए।
उच्च शिक्षा मंत्री डाॅ. रावत द्वारा स्थानीय परेड ग्राउण्ड में 28 अगस्त से पांच सितम्बर, तक आयोजित होने वाले पुस्तक मेले के आयोजन के संबंध में भी आवश्यक दिशा निर्देश दिए। जिसमें प्रदेश एवं प्रदेश के बाहर से भी साहित्यकारों को भी आमंत्रित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि ’पढेगा भारत तो बढेगा भारत’ की तर्ज पर ’पढ़ेगा उत्तराखण्ड तो बढेगा उत्तराखण्ड’ थीम रखा गया है।
उन्होंने कहा कि मेले का शुभारम्भ 28 अगस्त, 2017 को प्रदेश के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा। उन्होंने पुस्तक मेले के दौरान संस्कृति विभाग को नुक्कड नाटक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जाने एवं प्रतिदिन 300 से 400 बच्चों को कार्यक्रम में शामिल करने के निर्देश दिए। मेले के दौरान शांति व्यवस्था बनाये रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती एवं नगर निगम को सफाई व्यवस्था किये जाने के निर्देश दिए। 

रोक के बावजूद पाक श्रद्धालु हेमकुंड साहिब दर्शन के लिए रवाना

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पाकिस्तान से आए सिख श्रद्धालुओं को दो दिनों से ऋषिकेश गुरुद्वारे में रोकने के बाद विदेश मंत्रालय से शुक्रवार को इजाजत मिलने के बाद शनिवार सुबह सभी 41 श्रद्धालुओं ने श्री हेमकुंड साहिब दर्शन के लिए रवाना हो गए। गुरुद्वारा प्रबंधक दर्शन सिंह ने बताया कि बीते शुक्रवार देर शाम विदेश मंत्रालय से मिली इजाजत की रिपोर्ट दून पहुंची।

शनिवार सुबह पाकिस्तान से आए सिख श्रद्धालुओं के जत्थे ने गुरुद्वारे में ही फोटोमैट्रिक पंजीकरण कराने के बाद हेमकुंड साहिब की यात्रा पर रवाना हो गए। यात्रियों का वीजा 24 अगस्त तक मान्य है। श्री हेमकुंड साहिब यात्रा के लिए पाकिस्तान के लाहौर, पेशावर से 41 सिख श्रद्धालु जिसमें 11 बच्चे, 30 महिला-पुरुष बीते बुधवार को ऋषिकेश लक्ष्मणझूला स्थित गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब पहुंचे। उनके वीजा में चमोली जनपद स्थित श्री हेमकुंड साहिब जाने की अनुमति नहीं होने पर सभी को गुरुद्वारे में ही रोक लिया गया।
श्रद्धालुओं ने गुरुवार को देहरादून में पुलिस प्रशासन के के माध्यम से केंद्र सरकार से हेमकुंड यात्रा के लिए अनुमति मांगी थी और शुक्रवार की देर शाम विदेश मंत्रालय से हेमकुंड साहिब यात्रा पर जाने की अनुमति मिलने पर शनिवार सुबह सभी श्रद्धालु फोटोमैट्रिक पंजीकरण कराने के बाद रवाना हुए।

सड़क सुरक्षा तथा नशे से बचाव के लिये निकाली जागरूकता रैली

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शहर में हो रही सड़क दुर्घटनाओं तथा नशे के कारण युवा पीढ़ी को हो रहे नुकसान के कारणों को दूर करने के उद्देश्य को पूरा करने के लिये युवा पीढ़ी की महत्ता को ध्यान में रखकर जनता में जागरूकता उत्पन्न करने के लिये खेल विभाग के जिला क्रीडा अधिकारी श्री राजेश मनराल, उप क्रीडा अधिकारी श्री दिनेश एवं एस्सेल होण्डा के सेल्स मैनेजर श्रीमती मोनिका के सहयोग से श्रीमती निवेदिता कुकरेती कुमार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून तथा श्री धीरेन्द्र गुंज्याल, पुलिस अधीक्षक यातायात की अगुवाई में शनिवार को जनपद पुलिस द्वारा एक स्कूली बच्चों की एक रैली का आयोजन किया गया जिसमें सीएनआई स्कूल,विद्या मंदिर सुमन नगर, स्पोर्ट्स कॉलेज के बच्चे,एसजीआरआर राजकीय इण्टर कॉलेज नालापानी आदि विभिन्न स्कूलों के लगभग 200 छात्र-छात्राओंतथा स्काउट, कैडेटों द्वारा बडे उत्साह एवं उमंग के साथ प्रतिभाग किया गया।

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रैली का शुभारम्भ पैवेलियन ग्राउण्ड से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून द्वारा किया गया जोकि लैन्सडाउन चैक से कनक चैक से एस्लेहॉल से गांधी पार्क से राजपुर रोड होते हुए पुनः पैवेलियन ग्राउण्ड पर समाप्त हुई । रैली में छात्र-छात्राओं द्वारा सड़क सुरक्षा के नियमों तथा नशे के विरूद्ध बनाये गये पोस्टर, बैनर, पैम्पलेट तथा स्लोगन के द्वारा यातायात नियमों का प्रचार प्रसार किया गया तथा जनता को नशे से दूर रहने की अपील की गयी। उक्त रैली में श्रीमती जया बलूनी, क्षेत्राधिकारी यातायात, निरीक्षक यातायात तथा अन्य यातायात कर्मी भी शामिल रहे

दिल्ली का इनामी बदमाश जरनैल सिंह मुठभेड मे घायल

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दिल्ली के इनामी बदमाश जरनैल सिंह को नानकमत्ता क्षेत्र के टुकड़ी गांव में तड़के चार बजे दिल्ली पुलिस के साथ मुठभेड़ में गोली लग गई। पुलिस ने उसे हल्द्वानी के बांबे हास्पिटल में भर्ती कराया है। कुमाऊं डीआईजी अजय रौतेला ने बताया कि मुठभेड़ में एक लाख के इनामी बदमाश जरनैल सिंह जैली के घायल होने की सूचना मिली है, लेकिन अधिकृत जानकारी दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम ही दे पाएगी।

उन्होंने बताया कि प्रारंभिक सूचना के मुताबिक जरनैल सिंह लंबे समय से ऊधमसिंह नगर के नानकमत्ता थाने के बिचवा टुकड़ी गांव में अपने रिश्तेदार के यहां रहता था। वह शुक्रवार की शाम अपनी बुआ के घर आया हुआ था। सर्विलांस के जरिए उसके पीछे पहुंची दिल्ली पुलिस की विशेष टीम के आने की भनक लगते ही वह खेतों की ओर भागा। इस बीच पुलिस के जवानों ने उसे गोली मार दी। गोली लगते ही दिल्ली पुलिस उसे अपने वाहन में लेकर हल्द्वानी की ओर रवाना हो गई। उधर, बांबे हास्पिटल के डायरेक्टर डॉ. एसके मिश्रा ने जरनैल सिंह को दिल्ली पुलिस द्वारा सुबह भर्ती कराए जाने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि गोली उसकी आंत में लगी है और उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। घायल जरनैल सिंह दिल्ली के अलीपुर थाने के ग्राम झगोला के सेक्टर 26 का निवासी बताया जा रहा है। उस पर हत्या, फिरौती व डकैती के दर्जनों मुकदमे बताए जा रहे हैं।