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शिवम के साथ परिणय सूत्र में बंधी रिया

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चर्चित अभिनेत्री रिया सेन पुणे में एक पारिवारिक समारोह में अपने दोस्त शिवम तिवारी के साथ शादी के बंधन में बंध गईं। बंगाली परंपराओं के मुताबिक शादी की रस्में निभाई गईं। इस समारोह में परिवार के अलावा करीबी दोस्तों को ही बुलाया गया था। रिया की बहन रीमा सेन ने सोशल मीडिया पर अपनी बहन की शादी के फोटो शेयर किए। फोटो में रिया के साथ रीमा और उनकी मां मुनमुन सेन भी नजर आ रही हैं।

रिया के साथ शिवम तिवारी के रिश्तों को लेकर बॉलीवुड में चर्चाएं हो रही थीं। इन चर्चाओं में ये भी कहा जा रहा था कि रिया गर्भवती हैं और यही कारण माना जा रहा है कि रिया के साथ शिवम तिवारी की शादी का फैसला आनन फानन में लिया गया। 90 के दशक में हिन्दी फिल्मों में काम कर चुकी रिया सेन अपने ग्लैमर अवतार के लिए चर्चित रहीं।

अमीषा पटेल के भाई अश्मित पटेल और जॉन अब्राहम के साथ उनके अफेयर भी चर्चा में रहे। इन दिनों रिया सेन बालाजी की वेब सीरीज ‘रागिनी एमएमएस 2’ में काम कर रही हैं। बॉलीवुड की कई हस्तियों ने रिया सेन को शादी की बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है। 

डीआरएम के सामने हाथ जोड़ते नजर आये स्टेशन मास्टर

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डी आर एम इज्जतनगर मण्डल, बरेली निखिल पाण्डेय ने काशीपुर रेलवे स्टेशन का औचक निरीक्षण किया जिससे कर्मचारियों में हडकम्प मच गयी। डीआरएम ने जहां सफाई व्यवस्था का जायजा लेते हुए कर्मचारियों को जमकर फटकारा वहीं अव्यवस्थाओं को देख डीआरएम ने स्टेशन मास्टर की भी जमकर क्लास ली। डीआरएम निखिल पाण्डेय ने स्टेशन का बारिकी से निरीक्षण करते हुए हर कमरे की बारिकी से जांच की, जहां कई खामियां पायी गयी।

साथ ही डीआरएम ने की दस्तावेज खंगाले तो अधूरे कार्यों पर अधिकारियों  को जमकर लताड लगाई। सफाई व्यवस्था दुरस्थ ना देख, डीआरएम खासे नाराज हुए और सभी के सामने तल्खतेवरों में फटकार लगाना शुरु कर दिया। वहीं स्टेशन मास्टर की कई खामियां सामने आने पर उन्होने जमकर फटकारते हुए चेतावनी दी की जल्द ही व्यवस्थाओं को दुरस्थ नहीं किया गया तो कार्यवाही की जाएगी।

स्टेशन मास्टर डीआरएम के सामने खामियों पर हाथ जोङकर खडे हो गये। डीआरएम ने बताया कि, “रुटीन चैकिंग के दौरान कई खामियां मिली तो उसको दुरस्थ करने के निर्देश दे दिये गये हैं साथ ही लापरवाही करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी।”

30 पेटी अवैध शराब की गयी बरामद

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श्रीमान वरिष्ट पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देशन मे नशे के विरुध्द चलाये जा रहे अभियान के अन्तर्गत सीओ डालनवाला महोदय के पर्यवेक्षण मे प्रभारी निरीक्षक थाना रायपुर के नेतृत्व मे थाना रायपुर मे एक टीम का गठन किया गया था।

टीम द्वारा सूचना तंत्र कॊ मजबूत करते हुए देहरादून शहर के बाहरी छेत्र मे चंडीगढ़ से लायी जा रही अवेध शराब की सूचना पर काम करते हुए मुखबिर की सूचना पर चेकिंग के दौरान लाड्पुर तीराहे पर एक चंडीगढ़ नंबर की टोयोटा कोरोला कार कॊ रोकने का प्रयास किया गया। लेकिन ड्राइवर द्वारा तेजी से कार कॊ भगाने लगा, जिस पर पुलिस टीम द्वारा अभियुक्त कॊ कार सहित पकड़ लिया।

तलाशी लेने पर कार की दिग्गी से हरियाणा ब्रांड की 30 पेटी अवैध शराब की बरामद की गयी। अभियुक के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत कर कोर्ट मे पेश किया गया, अभियुक आर्यन, जिला बिजनौर यू.पी. का रहने वाला बताया गया।

क्लोरीन गैस रिसाव प्रकरणः लीपापोती में जुटा प्रशासन, जांच कमेटी गठित

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देहरादून के दिलाराम बाजार स्थित वाटर वर्क्स में क्लोरीन गैस के सिलेंडर में विस्फोट के बाद हुए रिसाव से प्रभावित व्यक्तियों को दून अस्पताल में भर्ती नहीं किए जाने के प्रकरण में प्रशासन के स्तर पर लीपापोती शुरू हो गई है। प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है और प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ऑक्सीजन की कमी नहीं थी, बल्कि बेड खाली नहीं थे। जब तक मौजूद स्टाफ बेड की व्यवस्था कर रहा था, तीमारदार मरीजों को लेकर निजी अस्पतालों में चले गए।

गुरुवार मध्य रात्रि देहरादून के जल संस्थान में क्लोरीन गैस के सिलेंडर में विस्फोट से आसपास का इलाका दहल गया था। इसके बाद हुए रिसाव से लोगों को सांस लेने में परेशानी हुई तो अस्पताल की ओर दौड़े। दिलाराम चौक पर तैनात सिटी पेट्रोलिंग यूनिट (सीपीयू) के चार जवान भी गैस की चपेट में आए। घटना के बाद लोगों ने राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल दून मेडिकल कॉलेज का रुख किया, लेकिन उन्हें वहां से बैरंग लौटा दिया गया। इसके बाद पीड़ितों ने निजी अस्पतालों की शरण ली। गनीमत रही कि हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ। कुल 14 लोगों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती किया गया, जबकि शेष को सामान्य स्थिति होने पर रात में ही अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई। इस पूरे प्रकरण को लेकर सरकारी अस्पताल की व्यवस्थाएं सवालों के घेरे में आ गई हैं। हाल ही में गोरखपुर में ऑक्सीजन नहीं होने के कारण हुए दर्दनाक हादसे की यादें भी इस प्रकरण ने ताजा कर दीं।
शुक्रवार को मामले ने तूल पकड़ा तो मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रकरण की जांच के लिए उनके चिकित्सा सलाहकार डॉ. नवीन बलूनी की अध्यक्षता में तीन सदस्य समिति गठित की है। इसमें स्वास्थ्य निदेशक डॉ. अर्चना श्रीवास्ताव व निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. आशुतोष सयाना शामिल हैं। टीम अपनी जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को सौंपेगी। जांच समिति ने शुक्रवार सुबह दून चिकित्सालय जाकर उक्त प्रकरण के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने अस्पताल की इमरजेंसी का निरीक्षण किया और क्लोरीन गैस से प्रभावित व्यक्तियों को निजी चिकित्सालयों को रेफर करने पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा, इमरजेंसी चिकित्सा अधिकारी व रात में तैनात स्टॉफ से जानकारी ली। निरीक्षण में पाया गया कि अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी नहीं है। तकरीबन 300 बेड ऑक्सीजन आपूर्ति के साथ जोड़े गए हैं।
बताया गया कि क्लोरीन गैस से प्रभावित व्यक्तियों को भर्ती नहीं किए जाने का कारण बेड उपलब्ध न होना था। इमरजेंसी स्टॉफ ने बताया कि प्रभावितों को भर्ती करने की वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने से पूर्व ही तीमारदार उन्हें निजी चिकित्सालयों में ले गए। इन तथ्यों की पुष्टि के लिए समिति के सदस्यों ने अस्पताल की इमरजेंसी व उन वार्डों का भी निरीक्षण किया, जहां पर ऑक्सीजन की व्यवस्था थी। डॉ. बलूनी व समिति के अन्य सदस्यों सीएमआइ व श्री महंत इन्दिरेश ने अस्पताल जाकर प्रभावित व्यक्तियों व तीमादारों से बात की और अस्पताल द्वारा दिए गए उपचार की जानकारी भी ली।
इमरजेंसी में तैनात स्टाफ से जवाब तलब
चिकित्सा सुविधाओं को लेकर देहरादून में भी गोरखपुर से अलग हालात नहीं हैं। जल संस्थान में गुरुवार देर रात क्लोरीन गैस के रिसाव हादसे ने राजधानी की स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोल दी। गैस रिसाव की घटना ने साबित कर दिया कि आपात स्थिति के लिए राजधानी में सरकारी व्यवस्था तैयार नहीं हैं। गनीमत यह रही कि राजधानी का मामला था और कई बड़े निजी अस्पताल लोगों की पहुंच में थे, वरना एक बड़ा हादसा होने के बाद यहां भी बस राजनीत होती। फिलहाल हादसे के बाद पीड़ितों को भर्ती नहीं किए जाने के मामले में शुक्रवार को दून मेडिकल कालेज प्रशासन ने इमरजेंसी में तैनात डाक्टर, फार्मासिस्ट व अन्य स्टाफ से स्पष्टीकरण मांगा है। जल संस्थान में गैस रिसाव के बाद अस्पताल पहुंचे मरीजों रेफर किए जाने पर उठे सवालों के यह बाद कार्रवाई की गई । चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टाका कहना है कि अस्पताल में आक्सीजन की कोई कमी नहीं। डेंगू वार्ड में ही 10 बेड खाली थे।
20 बेड की आपदा इमरजेंसी बनेगी
गैस रिसाव के बाद सामने आई लापरवाही के बाद विभाग की नींद टूटी। अब दून मेडिकल कालेज चिकित्सालय में 20 बेड की डिजास्टर इमरजेंसी बनाई जाएगी। स्वास्थ्य सलाहकार डा. नवीन बलूनी ने अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। विभाग के अनुसार इन सभी बेड पर रहेगी आक्सीजन सप्लाई। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिये समिति बनेगी। समिति में डाक्टर, फार्मासिस्ट व नर्स समेत अन्य स्टाफ रहेगा। अस्पताल की अन्य समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए भी बिंदुवार रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं|
सभी पीड़ित स्वस्थ, दी गई छुट्टी
क्लोरीन गैस रिसाव के कारण बीमार हुए सभी लोग अब स्वस्थ हैं और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। जिलाधिकारी, देहरादून एसए मुरुगेशन ने बताया कि गैस रिसाव से 14 लोग प्रभावित हुए थे। मैक्स, सीएमआई और महन्त इंद्रेश अस्पताल में इनका उपचार किया गया। सभी को डिस्चार्ज कर दिया गया है।

क्लोरीन गैस रिसाव हादसा: दून अस्पताल में नहीं मिली आक्सीजन, मरीजों को लौटाया गया

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देहरादून में भी गोरखपुर से अलग हालात नहीं हैं। जल संस्थान में गुरुवार देर रात क्लोरीन गैस के रिसाव हादसे ने राजधानी की स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोल दी।क्लोरीन गैस रिसाव हादसे के बाद दून अस्पताल से मरीजों को ऑक्सीजन नहीं होने के कारण निजी अस्पतालों में रेफर किया गया जिस पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने नाराजगी जताई है। इस घटना ने साबित कर दिया कि आपात स्थिति के लिए हम तैयार नहीं हैं। आपात स्थिति में लोगों के लिए निजी अस्पताल ही एकमात्र विकल्प हैं। कुछ बड़े अस्पताल को छोड़ निजी संस्थान में भी सुविधाएं सीमित हैं।
दून अस्पताल में ऑक्सीजन नहीं होने के कारण मरीजों को भर्ती नहीं किया गया। गुरुवार की देर रात जल संस्थान, देहरादून में क्लोरीन गैस सिलेंडर फटने के बाद 14 लोगों की हालत खराब हो गई थी। रिसाव के बाद प्रभावितों को दून मेडिकल कालेज ले जाया गया, जहां उपचार के नाम पर डाक्टरों के हाथ-पांव फूल गए। प्रभावितों को आक्सीजन न होने की बात कहकर निजी अस्पतालों में रेफर कर दिया गया। गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज में आक्सीजन की कमी से कई बच्चों की जान जाने की घटना के बाद भी कोई सबक नहीं लिया गया।
गनीमत रही कि राजधानी देहरादून का मामला था और कई बड़े निजी अस्पताल लोगों की पहुंच में थे, वरना उत्तराखंड में भी एक बड़ा हादसा होने के बाद यहां भी बस राजनीति ही होती। यह हाल तब है जब दून अस्पताल प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शुमार है। इसे मेडिकल कालेज बनाकर सरकार खुद की पीठ थपथपाती रही है। हादसे के 12 घंटे बाद सरकार और मशीनरी की नींद टूटी और अस्पताल व जल संस्थान की ओर अधिकारी दौड़े। फिलहाल अधिकारियों को नोटिस जारी कर अपनी जिम्मेदारी की इतिश्री कर दी गई।
शुक्रवार सुबह गढ़वाल आयुक्त दिलीप जावलकर और डीआईजी पुष्पक ज्योति देहरादून के जल संस्थान पहुंचे और गैस सिलेंडर विस्फोट वाले स्थान का निरीक्षण किया और अधिकारियों से घटना की जानकारी ली। सिलेंडरों के रख रखाव और घटना के कारण की रिपोर्ट तैयार कर शासन को देने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी, देहरादून एसए मुरुगेशन ने बताया कि गैस रिसाव से 14 लोग प्रभावित हुए थे। मैक्स, सीएमआई और महन्त इंद्रेश अस्पताल में इन सभी का इलाज चल रहा है। सिटी पेट्रोल यूनिट (सीपीयू) के चार पुलिस कर्मी भी प्रभावित हुए हैं। सभी डिस्चार्ज हो गए हैं। कुछ बच्चे भी प्रभावित हुए हैं जिन्हें डिस्चार्ज करने की बात है। कुछ लोगों को मामूली समस्या थी, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद रात में ही छुट्टी दे दी गई थी।
हादसे के बाद पीड़ितों को भर्ती नहीं किए जाने के मामले में शुक्रवार को दून मेडिकल कालेज प्रशासन ने इमरजेंसी में तैनात डाक्टर, फार्मासिस्ट व अन्य स्टाफ से स्पष्टीकरण मांगा है। जल संस्थान में गैस रिसाव के बाद अस्पताल पहुंचे मरीजों को रेफर किए जाने पर उठे सवालों के बाद कार्रवाई की गयी। चिकित्सा अधीक्षक का कहना है कि अस्पताल में आक्सीजन की कोई कमी नहीं है। डेंगू वार्ड में ही 10 बेड खाली थे। डाक्टर व स्टाफ के स्तर पर भी लापरवाही बरती गई। क्लोरीन गैस रिसाव हादसे के बाद दून अस्पताल से मरीजों को रेफर किए जाने के मामले में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने नाराजगी जताई है। सीएम के निर्देश पर उनके स्वास्थ्य सलाहकार डा. नवीन बलूनी दून अस्पताल पहुंचे और संसाधनों का जायजा लिया। उन्होंने स्वास्थ्य निदेशक, चिकित्सा शिक्षा निदेशक समेत सभी अधिकारियों को तलब करके अधिकारियों को इमरजेंसी व्यवस्था तत्काल सुधारने के निर्देश दिए ताकि किसी भी मरीज को बिना उपचार लौटाने की स्थिति न आए। उन्होंने कहा कि अन्य अव्यवस्थाओं में भी सुधार के काम की समीक्षा की जाएगी और अव्यवस्था को लेकर सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।
गैस रिसाव के बाद सामने आई लापरवाही के बाद विभाग की नींद टूटी है। अब दून मेडिकल कालेज चिकित्सालय में 20 बेड की डिजास्टर इमरजेंसी बनाई जाएगी। स्वास्थ्य सलाहकार डा. नवीन बलूनी ने अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। विभाग के अनुसार इन सभी बेड पर आक्सीजन की सप्लाई होगी। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिये समिति बनेगी जिसमें डाक्टर, फार्मासिस्ट व नर्स समेत अन्य स्टाफ रहेगा। अस्पताल की अन्य समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए भी बिंदुवार रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

यूएपीएमटी में एक सीट पर छह दावेदार

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उत्तराखंड आयुष प्री-मेडिकल टेस्ट (यूएपीएमटी) के जरिये भरी जानी वाली राज्य की आयुष सीटों पर इस बार मुकाबला कड़ा है। संस्थानों में एक सीट पर छह दावेदार मैदान में हैं। प्रदेश में बीएएमएस, बीएचएमएस व बीयूएमएस की राज्य कोटे की 530 सीट हैं। जिनपर दाखिले यूएपीएमटी के माध्यम से होंगे। कुल 2991 अभ्यर्थियों ने परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन किया है।

उत्तराखंड आयुर्वेद विवि के कुलसचिव प्रो. अनूप गक्खड़ ने बताया कि यूएपीएमटी के लिए आवेदन प्रक्रिया समाप्त हो गई है। परीक्षा तीन सितंबर को आयोजित की जाएगी। जिसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। परीक्षा की सुचिता व सुरक्षा के लिए इस दफा पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि परीक्षा के प्रवेश पत्र भी ऑनलाइन डाउनलोड किए जा सकेंगे।
इस साल आयुष मंत्रालय ने दाखिले नीट के माध्यम से करने का आदेश दिया था। बाद में इसमें राज्यों को एक साल की रियायत दे दी गई। यह आदेश हुआ कि राज्य चाहें तो इस साल अलग परीक्षा करा सकते हैं। लेकिन अगले साल प्रवेश नीट के द्वारा ही होंगे। जिसके बाद आयुष विभाग ने यूएपीएमटी कराने का निर्णय लिया था। निजी कॉलेज मैनेजमेंट कोटे की सीटों के लिए दस सितम्बर को अलग से परीक्षा आयोजित करेंगे।

इस बार बढ़ सकती हैं सीट:
शिवालिक इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद एंड रिसर्च सेंटर झाझरा व दून इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज शंकरपुर में बीएएमएस के लिए सीसीआईएम का निरीक्षण हो चुका है। मान्यता मिलने पर इन्हें भी काउंसलिंग में शामिल किया जाएगा। जिसके बाद आयुष पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने के इच्छुक छात्रों को बढ़ी सीटों का लाभ होगा।

कहां कितनी सीट:

  • कॉलेज का नाम-पाठ्यक्रम-राज्य कोटे की सीट-स्ववित्तपोषित
  • ऋषिकुल परिसर-बीएएमएस-60-00
  • गुरुकुल परिसर-55-05
  • मुख्य परिसर आयुर्वेद विवि-30-30
  • उत्तरांचल आयुर्वेदिक कॉलेज-50-00
  • पतंजलि भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान-50-00
  • क्वाड्रा इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद-30-00
  • हिमालयीय आयुर्वेदिक कॉलेज-30-00
  • ओम आयुर्वेदिक कॉलेज-30-00
  • मदरहुड आयुर्वेदिक कॉलेज-50-00
  • हरिद्वार आयुर्वेदिक कॉलेज-30-00
  • चंदोला होम्योपैथिक कॉलेज-25-00
  • परम हिमालय होम्योपैथिक कॉलेज-25-00
  • उत्तरांचल यूनानी कॉलेज-30-00

जान हथेली पर रखकर जाते हैं स्कूल

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भीषण आपदा से जूझ रहे पिथौरागढ के एक गांव की हकीकत ये हैं कि यहां सम्पर्क मार्ग टूट जाने से लोग जान हथेली पर रखकर बाजार जाते हैं और स्कूली बच्च भी जान जोखिम में डाल कर स्कूल पढने जाते हैं। पांअो फिसल जाए तो सीधे चार सो मीटर गहरी खाई जिसे देख कर आपके होश उड जाएं मगर जिनके लिए इस खतरनाक रास्ते पर चलना मजबूरी है उनके लिए हर दिन खतरों से भरा है।
हम बात कर रहे हैं कौली गांव की जहां कौली से अस्याली होकर बलीगाड़ तक बन रही सड़क के मलबे से अस्याली गांव को जाने वाला पैदल रास्ता पूरी तरह टूट गया है। इस कारण लोगों को इसी खतरनाक रास्ते से जान हथेली पर रखकर निकलना पड़ रहा है। इसी रास्ते से होकर अस्याली गांव के 25 बच्चे थल बाजार के स्कूलों में आते हैं। अस्याली गांव के लोग रामगंगा में खुद अस्थायी पुल बनाते हैं। यह पुल इस बार जून में नदी का जलस्तर बढ़ते ही बह गया था।

उसके बाद गांव के लोगों को थल बाजार आने के लिए पांच किलोमीटर दूर घटीगाड़ के झूलापुल तक जाना पड़ रहा है। घटीगाड़ जाने का जो रास्ता है वह पूरी तरह टूट गया है। टूटे रास्ते के ठीक नीचे रामगंगा बहती है। यदि किसी का पैर फिसला तो सीधे रामगंगा में गिरने का खतरा है।

गांव के सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश रजवार ने आठ अगस्त को क्षेत्र के दौरे पर आई विधायक मीना गंगोला के सामने भी रास्ते की समस्या रखी थी। विधायक ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को मौके पर ही निर्देश दिए थे कि तीन दिन के भीतर रास्ते की मरम्मत की जाए, लेकिन दस दिन बाद भी रास्ता नहीं सुधरा है। वहीं अब गांव के लोगों का कहना है कि पैदल रास्ते की मरम्मत के लिए आंदोलन किया जाएगा।

108 के अधिकारी अब ‘रुद्रप्रयाग’ जिले के एक-एक स्कूल को लेंगे ‘गोद’

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शिक्षा के स्तर में सुधार लाने के लिए एक अलग सी पहल में रुद्रप्रयाग जिले के 108 राज्य सरकार के अधिकारियों ने एक-एक गांव को ‘गोद लिया है। अधिकारियों ने बच्चों को खुद पढ़ाने से लेकर,बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए जो भी किया जा सके, उसके योगदान के लिए तत्पर रहेंगे।

इसके अलावा गजट आॅफिसर वित्तीय रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को प्रशिक्षित करने की योजना भी कर रहे हैं। अलग-अलग स्कूलों से कक्षा 5 के छात्रों में से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की पहचान करने के लिए माॅक टेस्ट लिए जाऐंगे और इन टेस्ट में बेहतरीन पर्फामेंस वाले बच्चों को आगे के लिए तैयार किया जाएगा।

रुद्रप्रयाग जिला मजिस्ट्रेट मंगेश घिल्लियाल ने बताया कि, “रुद्रप्रयाग में 500 से अधिक सरकारी स्कूल हैं, जिनमें कुल 5000 छात्र हैं और 108 के अधिकारी बड़ी संख्या में जिले में तैनात हैं। हाल में हिई एक बैठक में, अधिकारियों ने जिले में शिक्षा को सुधारने में योगदान देने का फैसला किया। “

घिल्डियाल ने पहले इस क्षेत्र में आपदा प्रभावित युवाओं को सिविल सर्विस के लिए मुफ्त कोचिंग देने की बात कही थी। बाद में उन्होंने पाया कि राजकुमारी बालिका इंटर कॉलेज, रुद्रप्रयाग में कोई विज्ञान शिक्षक नहीं था, उन्होंने इस मामले पर अपनी पत्नी उषा के साथ चर्चा की, जो अब हर दिन दो घंटे तक छात्रों को पढ़ाती हैं।

इस नई पहल के तहत, अधिकारी हर महीने अपने दत्तक यानि को गोद लिए हुए स्कूलों में दो बार मुलाकात करेंगे। इन यात्राओं के दौरान, वे बुनियादी सुविधाओं का निरीक्षण करेंगे और बच्चों की शिकायतों को सुनेंगे।

घिल्डियाल ने कहा कि, “यहां तक कि इन अधिकारियों के परिवार के सदस्यों ने भी परियोजना में शामिल होने का मन बना लिया है।उन्होंने कहा कि यह देखकर बहुत खुशी हो रही थी कि अधिकारियों में से एक की बेटी ने हाल ही में अपने पहले वेतन से 5,000 रुपये का अपने पिता को उनके गोद लिए हुए स्कूल के लिए दिया।

सरकारी स्कूलों के कर्मचारियों ने कहा कि ऐसा कदम उन्हें शिक्षा क्षेत्र से संबंधित मुद्दों को उठाने के लिए एक मंच प्रदान करेगा।रातूरा के सरकारी प्राइमरी स्कूल के प्रिंसिपल धरम सिंह रौथाण ने कहा कि, “सरकारी अधिकारियों ने स्कूलों के दौरे से निश्चित रूप से विद्यार्थियों और कर्मचारियों की समस्याएं उनके सामने आ जाऐंगी।

डम्पर अनियंत्रित होकर खाई में गिरा, चालक की मौत

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चमोली जिले के सीमांत गांव नीती घाटी में सड़क निर्माण कार्य में लगा एक डम्पर गुरुवार की देर सांय को दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जिसमें चालक की मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक अन्य घायल हो गया है। घायल का चिकित्सालय में उपचार चल रहा है।

नीती रोड पर कार्य कर रहा डम्पर अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरा, जिससे चालक नितिन (38) निवासी मुजफ्फरनगर की मौके पर मौत हो गयी। एक अन्य व्यक्ति प्रमोद (24) निवासी बिहार घायल हो गया है, जिसका उपचार चल रहा है। थानाध्यक्ष जोशीमठ आशीष रवियान ने बताया कि घटना गुरुवार की देर सांय की है।

ऋषिकेश की बेटी के कमांड में होगा आइएंस वितरणी जहाज का विश्व सागर अभियान

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लड़किया किसी भी छेत्र में पुरुषो के वर्चश्व को पीछे छोड़कर आगे निकलती जा रही है, ऐसा ही कुछ कमाल कर दिखाया है। ऋषिकेश में पली-बड़ी लेफटिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी ने पहली बार विश्व भर्मण पर निकलने वाली 6 सदस्यीय 9 सैनिक महिला दल की टीम लीडर बन के वर्तिका विश्व के समुद्र को नापने का काम करेंगी। उनकी इस टीम में लेफिटिनेंट कमांडर प्रतिभा जम्वाल पी स्वाति, लेफ्टिनेंट अस विजय देवी, वी ऐश्वर्या और पायल गुप्ता शामिल है।
vartika joshi
वर्तिका ने इण्टर तक की शिक्षा ऋषिकेश में ली है, उनके पिता डॉ पी के जोशी श्रीनगर गढ़वाल में और माँ ऋषिकेश पग ऑटोनोमस कॉलेज में हिंदी की विभाग अध्यक्ष है। 2010 में नौ सेना में शमिल होने से पूर्व वर्तिका ने एमेटी यूनिवर्सिटी, नॉएडा से एयरोस्पेस में बीटेक और दिल्ली अाय.अाय.टी से एमटेक, और दसवीं बारहवीं की शिक्षा ऋषिकेश के एनडीएस से की है।
उसके स्कूल में ख़ुशी का माहौल है वर्तिका अपनी टीम के साथ सितम्बर के पहले सप्ताह में गोवा से नादिका सागर परिक्रमा अभियान की शुरुवात करेगी और ये अभियान मार्च 2018 में पूरा होगा। वर्तिका की माँ डॉ.अल्पना जोशी का कहना है कि, ‘वर्तिका बचपन से ही रंगमंच खेल खुद और कम्युनिकेशन में सबसे आगे रहती थी और आज उसकी इस उपलब्धि पर हम सबको नाज है।’