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भ्रूण लिंग परीक्षण के आरोप में डॉक्टर समेत तीन गिरफ्तार

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रुड़की क्षेत्र में भ्रूण लिंग परीक्षण करने के आरोप में हरियाणा के रोहतक और गुरुग्राम की पीसीपीएनडीटी की संयुक्त टीम ने एक अल्ट्रासाउंड सेंटर पर छापा मारकर एक चिकित्सक व दो दलालों को गिरफ्तार कर लिया। सेंटर को सील कर दिया है। टीम ने इन्हें पकड़ने के लिए एक गर्भवती महिला को दलालों के माध्यम से भेजकर जाल बिछाया था। इस नेटवर्क के तार गुरुग्राम की एक अल्ट्रासाउंड संचालिका से जुड़े हैं।

रोहतक के स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी सिविल सर्जन और पीसीपीएनडीटी के जिला समन्वयक संजीव मलिक को सूचना मिली थी हरियाणा में सख्ती के चलते महिलाओं के भ्रूण लिंग की जांच अन्य राज्यों में करवाया जा रहा है। इस पूरे नेटवर्क गुरुग्राम के पटौदी कस्बे के एक अल्ट्रासाउंड से संचालित होने की भी जानकारी मिली। इस पर चार दिन पहले टीम ने एक गर्भवती महिला को पटौदी में उक्त अल्ट्रासाउंड सेंटर पर भेजा। दलाल के माध्यम से लिंग परीक्षण कराने की डील 40 हजार रुपये में तय हुई। योजना के मुताबिक महिला को दिए गए नोटों के नंबर नोट करने के बाद उसे अल्ट्रासाउंड सेंटर पर भेजा गया।
इस दौरान सेंटर संचालिका ने दो दलालों के साथ गर्भवती महिला को रुड़की के बीएसएम चौक स्थित डॉक्टर विकास तोमर के पंचम अल्ट्रासाउंड सेंटर पर भेजा। बुधवार सुबह करीब 10 बजे जैसे ही डॉक्टर ने महिला के भ्रुण लिंग की जांच करनी शुरू की तो संयुक्त टीम ने सेंटर पर छापा मार दिया। टीम ने मौके से डॉ. विकास तोमर के अलावा दलाल अब्दुल सत्तार निवासी पटौदी गुरुग्राम तथा संजय निवासी ब्रह्मपुर कोतवाली रुड़की को धर दबोचा। बताया गया कि डॉ. विकास तोमर एक पूर्व पीसीएस अधिकारी के बेटे हैं। इस कार्रवाई में हरियाणा क्राइम ब्रांच की टीम भी शामिल रही। जबकि रुड़की के ज्वाइंट मजिस्ट्रेट मयूर दीक्षित भी इस दौरान मौके पर मौजूद रहे।
अब्दुल सत्तार के पास से 20 हजार के वह नोट मिले हैं जिन्हें टीम ने महिला को देकर भेजा था। बाकी की 20 हजार की रकम अभी बरामद नहीं हो सकी। टीम ने अल्ट्रासाउंड सेंटर को सील कर दिया। आरोपियों को बाद में गंगनहर कोतवाली पुलिस के हवाले कर दिया।
बताया जा रहा है कि इस मामले में अन्य राज्यों में भी छापेमारी हो सकती है। सीएमओ रविंद्र थपलियाल ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम पूरे मामले पर नजर रखे हुए है। स्वास्थ्य विभाग भी इस मामले में कार्रवाई करेगा।

जुड़वां-02 के साथ संजय दत्त की बायोपिक की पहली झलक

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राजकुमार हीरानी के निर्देशन में बन रही संजय दत्त की बायोपिक फिल्म की पहली झलक जल्दी ही बड़े परदे पर देखने को मिलेगी। निर्माता साजिद नडियाडवाला की 29 सितंबर को रिलीज होने जा रही फिल्म जुड़वां-02 के साथ इस फिल्म का पहला टीजर जोड़ा जा सकता है।

फिल्म के दो टीजर तैयार किए गए हैं, जिनमें से एक टीजर को इस फिल्म के साथ जोड़ा जा सकता है। अभी तक की घोषणा के मुताबिक, ये फिल्म अगले साल 30 मार्च को रिलीज होनी है। फिल्हाल इस मामले में अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। अगले महीने अमेरिका में इस फिल्म का एक बड़ा शेड्यूल होने जा रहा है, जिसमें रणबीर कपूर और सोनम कपूर हिस्सा लेंगे। अमेरिका में फिल्म का एक शेड्यूल हो चुका है।

फिल्म सत्तर प्रतिश्त बनकर तैयार हो गई है। पहले इस फिल्म को इसी साल 22 दिसंबर को रिलीज करने की घोषणा की गई थी, लेकिन इसी दिन यशराज में बन रही सलमान खान की फिल्म टाइगर जिंदा है भी रिलीज हो रही है। इस टकराव से बचने के लिए फिल्म को मार्च तक आगे बढ़ाने का फैसला हुआ। अभी तक अधिकारिक रूप से फिल्म का टाइटल भी तय नहीं हुआ है। हाल ही में जब संजय दत्त की फिल्म भूमि का ट्रेलर लांच हुआ था, तो इस मौके पर इस फिल्म की पूरी टीम-रणबीर कपूर, निर्देशक राजकुमार हीरानी और निर्माता विधु विनोद चोपड़ा भी मौजूद थे। 

कभी न सूंघ पाने वाले लड़के की चमत्कारी कहानी है ‘स्निफ’

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आमिर खान की प्रोडक्शन में बनी फिल्म ‘तारे जमीं पे’ (उनका नाम बाद में बतौर निर्देशक हटा दिया गया था) के अलावा ‘स्टेनली का डिब्बा’ और ‘हवा-हवाई’ जैसी बच्चों की फिल्मों के बाद निर्देशक अमोल गुप्ते की नई फिल्म ‘स्निफ’ रिलीज के लिए तैयार है। इसी फिल्म के प्रमोशन के सिलसिले में अमोल गुप्ते अपनी फिल्म के लीड कलाकार खुश्मित गिल के साथ पिछले दिनों दिल्ली में थे। होटल रॉयल प्लाजा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में फिल्म के निर्माता-निर्देशक एवं इसके सुपरहीरो ने फिल्म से जुड़ी कई बातें साझा कीं।

25 अगस्त को रिलीज होने जा रही ट्रिनिटी फिल्म्स के बैनर तले बनी इस फिल्म को बच्चों के लिए बनी सुपर हीरो वाली फिल्म माना जा रहा है, जो एक असली घटना के प्रेरित बताई जाती है। निर्माता अजीत ठाकुर की अमोल गुप्ते निर्देशित यह फिल्म बेगुनाही, रहस्य और वीरता से भरी हुई है। इस फिल्म में पंजाब के बाल कलाकार खुश्मित गिल ने सुपर हीरो की मुख्य भूमिका निभाई है। फिल्म का यह मुख्य किरदार अपने साथियों के साथ जासूसी करके कई बड़े केस हल करने में मदद करता है। फिल्म का टाइटल ‘स्निफ’ इसलिए रखा गया है, क्योंकि खुश्मित के किरदार को चीजों को सूंघकर असलियत पता लगाने का वरदान मिला हुआ है।

मीडिया से बातचीत में अमोल गुप्ते ने बताया कि ‘यह फिल्म ऐसे बच्चे की कहानी है जिसे, एक सुपर पावर मिली हुई है, यानी वह चीजों को सूंघकर उसकी असलियत का पता लगा लेता है। इस फिल्म को पूरा करने के लिए लगभग एक वर्ष का समय लगा। यह फिल्म वीरता के बारे में है।’ खास बात यह है कि निर्देशक अमोल गुप्ते हमेशा ही बच्चों संग नए और अनोखे विषय के साथ प्रेक्षकों के सामने आए हैं । साथ ही अपनी फिल्मों में वह अभिनय भी करते रहे हैं। ‘स्निफ’ में भी वे निर्देशक के साथ अभिनेता के तौर पर नजर आएंगे, क्योंकि फिल्म में वे एक मेहमान भूमिका में ही सही, परंतु महत्वपूर्ण किरदार में नजर आएंगे। फिल्म में उन्होंने जो किरदार निभाया है, वह भले ही मेहमान की भूमिका है, लेकिन यही किरदार फिल्म की कहानी को और दिलचस्प बनाते हैं। खास बात यह भी कि इस फिल्म में अमोल गुप्ते गणपति आरती करते भी नजर आएंगे। इस संबंध में उन्होंने कहा कि ‘फिल्म में बच्चों के साथ काम करने का यह बहुत अच्छा अनुभव था, उन्होंने मुझे बहुत कुछ सिखाया और वास्तव में मैं बच्चों के साथ सुरक्षित महसूस कर रहा हूं।’ इस मूवी के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, ‘इस फिल्म में एक बड़ा सबक है। ‘स्निफ’ एक बहुत ही साफ-सुथरी और मनोरंजक फिल्म है।

फिल्म में सुपरहीरो का किरदार निभाने वाले पंजाब के बाल कलाकार खुश्मित गिल ने भी मीडिया के साथ अपने अनुभव को साझा किया। उन्होंने कहा, ‘मैंने कई विज्ञापनों और धारावाहिकों में काम किया है, लेकिन यह पहली बार है, जब मैं फिल्म में सीसा के रूप में लीड किरदार निभा रहा हूं। मुझे यह मौका देने के लिए मैं अमोल सर का आभारी हूं।’ फिल्म में सुपरपावर के बारे में पूछने पर उन्होंने बहुत मासूमियत से कहा, ‘मैं चाहता हूं कि भगवान ने मुझे वास्तविक जीवन में भी ऐसी ही शक्ति दे, जो मुझे फिल्म में मिली है।’

जहां तक ‘स्निफ’ की कहानी का सवाल है, तो इस फिल्म के केंद्र में भी एक छोटा बच्चा है, लेकिन इस बच्चे की समस्या यह है कि वह सूंघ नहीं सकता और इसके चलते कैसे उसके सारे काम खराब हो सकते हैं, यही इसमें दिखाया गया है। लेकिन, लगातार ऐसा नहीं होता, क्योंकि एक साइंस लैब में हुए हादसे में इस बच्चे को सूंघने की शक्ति मिल जाती है, लेकिन यह शक्ति ‘सुपरशक्ति’ बन जाती है। वह डर, प्रेम, क्रोध जैसे भावों को भी सूंघने लगता है और चर्चा का विषय बन जाता है।

सत्ता की हनक के सामने बौनी हुई खाकी-वर्दी

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अबतक कांग्रेस राज में ही देखा जाता था की सत्ता की हनक दिखाकर आरोपियों और मुजरिमों को छुड़ा लिया जाता था। मगर अब इसी परिपाठी में सत्ता पर काबिज भाजपा भी उतार आई है और पुलिस के हाथों से बदमाशों को छुड़ाने में भाजपा भी पीछे नहीं रही। भ्रस्टाचार और भय मुक्त शासन देने के भले ही बड़े नेताओं के दावे हों मगर उनके निचले नेता और कार्यकर्ता पार्टी की छवि को धूमिल करने में पीछे नहीं हैं।

जी हाँ, मामला रुद्रपुर का है जंहा देखकर लगता है की कोतवाली को पुलिस नहीं भाजपाइ नेता चला रहे हैं। जिस युवक को पकड़ने के लिए दिनभर पुलिस उसे तलाशती रही और बदमाश कहते नहीं थकी, शाम होते ही उसे रिहा कर दिया गया। उसके खिलाफ गुंडा एक्ट की कार्रवाई से लेकर, पुलिस पर पथराव करने और अवैध तमंचा रखने तक का आरोप था। मगर अचानक किसका दबाव हुआ की उसे छोड़ना पड़ा।

आधा दर्जन से अधिक मामलों में वांछिद जिस युवक को पकड़ने के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी, उसे सत्ता की हनक दिखाकर कुछ ही घंटों में नेताजी छुड़ा का ले गए। रम्पुरा चौकी पुलिस पर पथराव के साथ ही अन्य वारदातों में नामजद क्षेत्र में आतंक फैलाने वाले युवक के घर पर पुलिस ने दबिश दी तो वह कूद कर भाग गया था। उसके बाद पुलिस ने उसके घर से तमंचा भी बरामद किया था।

रविवार को वह पुलिस के हत्थे चढ़ गया। उसकी पैरवी में रम्पुरा के भाजपा नेता कोतवाली पहुंच गए। उनकी पैरवी पर पुलिस ने युवक की करतूतों को छुड़ाने  नेताओं के सामने बयां कर किसी भी सूरत में उसको छोड़ने से इन्कार कर दिया, लेकिन देर शाम पुलिस ने उसको छोड़ भी दिया, जिसके चलते भाजपा के साथ ही पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे है। जबकि सी ऒ स्वतंत्र कुमार ने बताया कि, “युवक को पकड़ा जरूर गया था, लेकिन मारपीट के मामले में उसने जमानत करवा ली। उसके खिलाफ गुंडा एक्ट की कार्रवाई की गई है। नोटिस उसको रिसीव करा दिया गया है। युवक को किसी भी सूरत में बक्शा नहीं जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार तड़ीपार की भी कार्रवाई की आवश्यकता पड़ी, तो पुलिस उससे भी पीछे नहीं हटेगी।”

लेकिन प्रश्न ये उठता है की जब पकड़ा गया युवक इतनी संगीन धाराओं में वांछिद है और उसके विरुद्ध कार्यवाही की बात भी की जा रही है तो इतनी मुश्किलों से पकडे गए आरोपी को आखिर क्यों छोड़ दिया गया। और किसके दबाव में आकर पुलिस को आखिर उस युवक को छोड़ना पड़ा? इसका जवाब पुलिस के पास तो नहीं है मगर इतना तो सभी को दिख रहा है की सत्ता की हनक के सामने खाकी कितनी बोनी हो गयी है।

हाई कोर्ट मे सरकार से टिहरी बाँध प्रभावितो के लिये जल्द क़दम उठाने को कहा

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उच्च न्यायालय ने आज टिहरी बांध प्रभावित संघर्ष समिती की मांगों पर उत्तराखण्ड के मुख्य सचिव को टिहरी जिलाधिकारी की संस्तुति के आधार पर जल्द समाधान करने को कहा है ।

टिहरी बांध प्रभावित संघर्ष समिती ने यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य के खिलाफ याचिका दायर करते हुए मांग रखी थी कि प्रतापनगर और गांजडा क्षेत्र के 15,500 लोगों को डैम बनने के बाद 80 किलोमीटर अधिक यात्रा करनी पड़ रही है जिसके कारण उन्हें एक लाख पच्चीस हजार रुपये प्रति परिवार 2010 से प्रतिपूर्ति के रूप में भुगतान किया जाए । समिति ने मांग की है कि तोलजीशेड, गांजडा व हुलाड़ी क्षेत्र के बीच एक एक आई.आई.टी.संस्थान खोले जाए । इसके अलावा अपनी आखिरी मांग में समिति ने गांजडा क्षेत्र की जनता के लिए धेन्तरी में 50 बैड का चिकित्सालय खोलने की मांग की है ।

समिति की इन मांगों पर टिहरी के जिलाधिकारी ने 26 फरवरी 2009 में प्रमुख सचिव और सरकार को संस्तुति भेजी थी ।आज उच्च न्यायालय में वरिष्ठ न्यायाधीश राजीव शर्मा की एकलपीठ ने मामले में जिलाधिकारी द्वारा की गई संस्तुति पर मुख्य सचिव से त्वरिय निर्णय लेने को कहा है । न्यायालय ने इसी के साथ मामले को निस्तारित कर दिया है ।

धरना जारी, ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं बंट पा रही है डाक

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ग्रामीण डाक सेवक संघ के आह्वान पर ग्रामीण क्षेत्रों के तमाम डाक कर्मचारी बुधवार को आठवें दिन भी हड़ताल पर रहे। स्वर्गाश्रम, श्याम पुर, मुनि की रेती, रायवाला, आईडपीएल, क्षेत्र के डाक घरों मे कार्यरत डाक कर्मचारी सातवें वेतनमान को लागू किये जाने की मांग को लेकर पिछले सात दिनो से अपने-अपने डाक घरों के बाहर धरना दे रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में डाक नहीं बंट पा रही है।

आज आठवें दिन धरना देने वाले डक कर्मचारियों मे सुंदरलाल कंडवाल, केदार सिंह बिष्ट ,सत्य सिह चौहान, मोहन सिंह बिष्ट, डबल सिंह चौहान, हुकुम सिंह बिष्ट कर्मचारी नेता राजाराम पांडे व सुभाष पवार ने इस अवसर पर कहा कि जब तक उन्हें अन्य विभागों मे दिये जा रहे, सातवें वेतनमान की तरह वेतन का भुगतान व ग्रामीण डाक सेवकों को विभागीय कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया जायेगा, तब तक उनका धरना जारी रहेगा।

‘मुखर्जी आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग’

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भारतीय सम्राट सुभाष सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरुचरण सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु से संबधित मुखर्जी आयोग की रिपोर्ट को सर्वाजनिक करने तथा आजादी से संबंधित दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की मांग की है।

पत्र में चौहान ने कहा कि देश में सम्पर्ण शिक्षा नीति को लागू किया जाए जिससे सभी युवाओं को नौकरियों में समान अवसर प्राप्त हो सकें। देश में किसानों की हालत को सुदृढ़ करने के लिए उत्पादित फसलों का लाभकारी मूल्य व गरीब व सीमांत किसानों को किराaए पर कृषि यंत्र दिलाने की मांग की।
अर्द्धसैनिक बलों व कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए पेंशन योजना को लागू किए जाने की मांग की। उन्होंने सांसदों व विधायकों के मनमाने तरीके से वेतन भत्तों में वृद्धि करने पर भी रोक लगाने की मांग की।

‘कूड़ा लाओ इनाम पाओ’ योजना के तहत मिले इनाम

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स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) को लेकर डीएम उत्तरकाशी द्वारा शुरू की गई नई पहल ‘कूड़ा लाओ इनाम पाओ’ अभियान के तहत बुधवार को उत्तरकाशी में साप्ताहिक लक्की ड्रॉ निकाला गया। इसमें वार्ड नंबर-चार के शिवम बघियाल का लकी ड्रॉ में एंड्रॉयड मोबाइल निकला। जबकि अपने वार्ड में सबसे ज्यादा कूपन इकट्ठे करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्री संगीता सेमवाल को 500 रुपये इनाम में दिए जाएंगे।

बुधवार को जिला सभागार में स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) को लेकर कूड़ा लाओ इनाम पाओ अभियान के तहत सप्ताह का पहला लकी ड्रॉ निकाला गया। डीएम डॉ. अशीष कुमार की मौजूदगी में पांचवी कक्षा की संध्या ना‌ैटियाल ने लकी ड्रॉ बॉक्स से पर्ची निकाली। जिसमें वार्ड नंबर-चार के शिवम बघियाल का नाम निकला। शिवम को 10 हजार रुपये तक एंड्रॉयड मोबाइल ईनाम में दिया जाएगा। जबकि वार्ड नंबर-दो में सबसे अधिक 200 कूपन एकत्रित करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्री संगीता सेमवाल को 500 रुपये इनाम में दिए जाएंगे।
यह इनाम 26 अगस्त को उत्तरकाशी में शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक के हाथों दिए जाएंगे। एक सप्ताह के तहत नौ वार्ड में चलाए गए इस अभियान के तहत 623 कूपन इकठ्ठे किये गए। इसमें लोगों ने करीब साढ़े तेरह कुंतल जैविक व अजैविक कूड़ा एकत्रित किया गया। डीएम ने बताया कि जैविक कूड़े की खाद बनाकर 20 किलो तक के पैकेट बनाकर उत्तरा ब्रांड नाम से बेचे जाएंगे। जबकि अजैविक कूड़े को नष्ट किया जाएगा। इस अभियान के तहत एक किलो जैविक कूड़े पर और 300 ग्राम अजैविक कूड़े पर एक कूपन दिया जाएगा।
डीएम के अनुसार अपने वार्ड में लोगों को इस अभियान के तहत अधिक प्रेरित करने वाले सफाई कार्यकर्ता को भी 500 रुपये देकर सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नगर क्षेत्र के अलावा अब आस पास के ग्रामीण क्षेत्रों जोशियाड़ा, लदाड़ी में भी यह अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने ने कहा कि जिला कार्यक्रम व बाल विकास अधिकारी को निर्देश दिए कि बेहतर काम करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को शासन में सचिव राधा रतूड़ी और महिला बाल विकास सचिव भारत सरकार को बाकायदा चिट्ठी भेजी जाए।

जीरो टोलरेन्स की सरकार में घोटालों की खुल रही परत

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राज्य में सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जीरो टॉलरेंस का दावा किया था, लेकिन प्रदेश के सिस्टम पर इस दावे का कोई असर नहीं दिख रहा। परिवहन निगम को देखें तो दो माह पूर्व जिन टायरों की खरीद की गई थी, उनमें से घोटाले की बू आने लगी है। टायरों की गुणवत्ता ऐसी कि 40 से 60 हजार किमी तक चलने वाले टायर दस हजार किमी चलने के बाद ही उतर गए। भ्रष्टाचार की इस बू के बीच कर्मचारी यूनियनों में भी आक्रोश पनपने लगा है।

उत्तराखंड परिवहन निगम एक तरफ बजट का रोना रो रहा है और दूसरी तरफ निगम के अधिकारी मौज कर रहे हैं। परिवहन निगम साउथ की जेके टायर कंपनी से टायरों की खरीद करता है। लंबे समय से भुगतान न होने से कंपनी ने टायरों को भेजने से मना कर दिया था। दो माह पूर्व मुख्यालय ने करीब एक करोड़ रुपये का भुगतान कर 150 नए टायर मंगाए थे। ये टायर कुमाऊं रीजन को भेजे गए। कुमाऊं रीजन ने उधारी चुकाते हुए 50 टायर टनकपुर रीजन को भेज दिए तथा बचे टायर आठ डिपो में जरूरत के मुताबिक वितरित कर दिए। टायरों की गुणवत्ता इतनी खराब रही कि दस हजार किमी चलने के बाद ही ये घिस गए और बसों से उतार दिए गए। जबकि मानकों के अनुसार एक टायर पर्वतीय मार्ग पर 40 हजार व मैदानी मार्ग पर 60 हजार किमी चलता है। कारण यह कि पर्वतीय मार्ग पर मोड़ अधिक होने के कारण टायर जल्दी घिसते हैं। इधर, कर्मचारियों ने अधिकारियों पर टायर खरीद में घोटाले करने का आरोप लगाते हुए जांच की मांग उठाई है।

जब टायरों की गुणवत्ता के बारे में मंडलीय प्रबंधक तकनीकी अनूप रावत से पूछा गया तो यह मानक बदल गए। उन्होंने कहा कि पर्वतीय मार्ग पर अमूमन यह टायर 15 से 20 हजार और मैदानी मार्ग पर 40 से 50 हजार किमी चलते हैं। कुमाऊं रीजन में टायरों का टोटा शुरू हो गया है। मंडलीय प्रबंधक तकनीकी अनूप रावत ने बताया कि रीजन के आठ डिपो में टायरों के अभाव में पांच से आठ बसें खड़ी हो गई है। अगर एक-दो दिन में टायर नहीं आए तो स्थिति और बिगड़ जाएगी। ऐसे में बसों का संचालन करना मुश्किल हो जाएगा। मुख्यालय को 150 टायरों की डिमांड भेजी गई है।

राजाजी पार्क के गांव आज भी महरूम है मूलभूत सुविधाओं से

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 उत्तराखंड के राजा जी पार्क कि परधि में आने वाले कई गाँव वन अधिनियम कानून के चलते कई सालो से मुलभुत सुविधाओ से वंचित है। समय-समय पर ये ग्रामीण अपनी आवाज उठाते रहे लेकिन पार्क प्रशासन ने उनकी एक नहीं सुनी, अब राजा जी पार्क को टाईगर रिजर्व फारेस्ट बनाने के बाद विकास की अवधारणा ख़त्म होने का डर ग्रामीणो को सता रहा है। एनजीटी ने ग्रामीणों की परेशानी को ध्यान में रख कर उत्तराखंड सरकार को हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए जिस से यहाँ रह रहे ग्रामीणों में एक उम्मीद जगी है।

यम्केस्वर विधान सभा के कोठार ग्राम सभा के कुनाऊ गोठ तोक, ग्रामसभा जोंक के धोतिया, गरुड चट्टी गावो के लोग दशकों  से अपने गाव में मूलभूत सुविधाओ कि मांग करते हुए पार्क प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के चौखट पर गुहार लगा कर थक गए है लेकिन सिर्फ वादों के सिवा उनको कुछ भी नहीं मिला, पार्क प्रसाशन के वन अधिनियम कानून के डर ने इन गावो को विकास से कोसो दूर कर दिया। पीढियों से यहाँ निवास कर रहे ग्रामीणों को चुनाव से पहले सरकार से ठोस वायदे किये ,लेकिन सरकारी वादे कभी जमीं पे नहीं उतरे ग्रमीण आज भी अपने भविष्य को लेकर चिंतित है।

चंद्रमोहन सिंह नेगी, ग्रामीण का कहना है कि, ‘राजा जी नेशनल पार्क होने की वजह से हम सालो से अपने मुलभुत सुविधाओं के लिए लड़ाई लड़ रहे है, न सड़क है न बिजली और हम लोगो का गाँव काफी पहले से बसा हुआ है ऐसे में हमारे लिए विस्थापन की और जाना सम्भव नहीं है। उत्तराखंड निर्माण  के 17 साल  बाद भी यमकेश्वर ब्लाक के राजा जी नेशनल रिजर्व पार्क के ये गाव आज भी मूलभूत सुविधाव से वंचित है।’

यहाँ के ग्रामीण राजा जी नेशनल पार्क के बनने के बाद वन कानून के दायरे में ऐसे फसे की आज तक विकास की कोई भी उमीद इनके काम नहीं आई , न सड़के है, न मूलभूत सुविधा है ऐसे में जीये  तो जीये  केसे ये सवाल अभी तक बना हुआ है। ऐसे में पार्क के अंतर्गत आने वाले  गाव के ग्रमीणों का गुस्सा वन क़ानून अधिनियम के विरुद्ध बना हुआ है। सालों से निवास कर रहे सत्य प्रकाश पयाल, ग्रामीण ने कहा कि, “हमने प्रदेश सरकार से कई बार अपनी बुनियादी सुविधाओं के लिए गुहार लगाई लेकिन सरकार का हमरी तरफ कोई फैसला नहीं रहा राजा जी पार्क होने की वजह से गाँव के बच्चों और महिलाओ को जंगली जानवरो के हमले भी कई बार हुए है एनजीटी ने इस मामले में गाँव वालो की समस्या को लेकर सरकार को हलफनामा के आदेश दिये है  पुनर्वास की निगरानी के लिए गाँव वालो ने समिति की मांग की है और  मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी।”

राजा जी नेशनल पार्क की स्थापना के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने 1983 में अधिसूचना जारी की थी जिसमे इसकी सीमा में आने वाले ग्रामो लेकर कोई बात नहीं की गयी थी। आज तक ये गांव अपने हक़ हकूक की लड़ाई के लिए सरकार से उम्मीद लगाए बैठे है लेकिन अभी तक यहाँ निवास कर रहे लोगो की समस्या न केंद्र और न ही राज्य सरकार कोई ठोस कदम उठा पायी है ।