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हरियाणा में राम रहीम के 36 आश्रम सील, डेरा मुख्यालय पर सेना का घेरा 

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साध्वी से दुष्कर्म मामले में 15 साल बाद दोषी करार दिए जाने पर डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह राम रहीम के समर्थकों द्वारा की गई हिंसा के बाद शनिवार को शासन और प्रशासन ने डेरा सच्चा सौदा के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की है। राम रहीम की जेड प्लस सुरक्षा हटा दी गयी है और हरियाणा में उनके 36 आश्रमों को सील किया गया है। सिरसा में डेरा मुख्यालय को सेना ने घेर कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस ने डेरा प्रमुख के 6 निजी सुरक्षा गार्डों को हिरासत में लिया है। शुक्रवार को हुई हिंसा में अबतक 32 लोगों की मौत हुई है। उधर, शनिवार को भी पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने कानून व्यवस्था के मुद्दे पर हरियाणा सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। हरियाणा-पंजाब समेत आसपास के दूसरे राज्यों में भड़की हिंसा को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के दिल्ली स्थित आवास पर हाईलेवल बैठक हुई जिसमें अर्ध सैनिक बलों की समय से तैनाती नहीं किए जाने पर नाराजगी व्यक्त की गई।

साध्वी से रेप केस में 15 साल बाद शुक्रवार को पंचकूला की सीबीआई अदालत द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद डेरा प्रमुख के समर्थकों ने जमकर उत्पात मचाया। हरियाणा और पंजाब में हुई हिंसा में अब तक 32 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 250 से ज्यादा लोग घायल हैं।

इस बीच शनिवार को सेना ने सिरसा में दोनों डेरों को घेर लिया है। सेना अपने साथ समर्थकों को ले जाने के लिए बसें लेकर आयी है। डेरे के अंदर बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद हैं। सिरसा में शनिवार को पहले अल सुबह सेना ने फ्लैग मार्च निकाला। इसके बाद पूर्वाह्न 11 बजे डेरे को घेरने की प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी। सेना के जवानों ने पहले पुराने डेरे को घेरा। इसके बाद वहां से लगभग दो किलोमीटर दूर नए डेरे को घेरा। सेना अंदर घुसने की तैयारी कर रही है लेकिन डेरे के अंदर बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद हैं। इनमें महिलाएं तथा बच्चे भी हैं। डेरा समर्थकों के पास अंदर हथियार होने की भी आशंका है। ऐसे में सेना अंदर जाने के पहले सभी तमाम ऐहतियात बरत रही है ताकि अगर डेरा समर्थक प्रतिरोध करें तो आपरेशन के दौरान कम से कम नुकसान हो।
पुलिस ने राम रहीम के 6 निजी सुरक्षा बलों को हिरासत में लिया है। इनके पास से हथियार, केरोसिन तेल भी जब्त किया गया है। राम रहीम के इन 6 सुरक्षा गार्ड और 2 डेरा समर्थकों के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया है। इन सभी पर शुक्रवार को वाहनों की चेकिंग के समय आईजी स्तर के एक वरिष्ठ पुलिस अफसर को चांटा मारने का आरोप है। हरियाणा में राम रहीम के 36 आश्रमों के सील किया गया है जिनमें करनाल, अंबाला, कैथल और कुरुक्षेत्र के आश्रम भी हैं।

हरियाणा के पुलिस महानिदेशक बीएस संधू के अनुसार डेरा प्रमुख राम रहीम की जेड प्लस सुरक्षा हटा दी गयी है। उन्हें रोहतक की जेल में एक सामान्य कैदी की तरह रखा गया है। उन्होंने बताया कि डेरा प्रमुख के खिलाफ आए फैसले के बाद भड़की हिंसा में 524 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यही नहीं डेरा समर्थकों के पास से तीन राइफल तथा पिस्टल और कारतूस भी बरामद हुआ है। इसके साथ उन्होंने स्पष्ट किया कि सिरसा में डेरा मुख्यालय के अंदर सेना नहीं घुसी है। सेना ने डेरे के बाहर घेरा डाला है। अंदर मौजूद समर्थकों से बाहर निकने की अपील की जा रही है।

इस मामले में लगातार नजर रख रहे पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में शनिवार को हरियाणा और पंजाब में कानून व्यवस्था की स्थिति रिपोर्ट पेश की गई। कोर्ट ने सख्त निर्देश दिया कि दोनों ही राज्यों के डीसी अपने यहां हिंसा के कारण हुए आर्थिक नुकसान की रिपोर्ट मंगलवार को तीन बजे तक पेश करें। हाईकोर्ट में जस्टिस एसएस सरो की नेतृत्व वाली खंड पीठ ने डेरा प्रमुख के खिलाफ चल रहे केस में कानून व्यवस्था की स्थिति पर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई प्रारम्भ की। इसमें दोनों राज्यों की तरफ से उनके महाधिवक्ताओं ने अपने राज्यों की मौजूदा कानून-व्यवस्था की रिपोर्ट प्रस्तुत की। हरियाणा में डेरा प्रमुख के खिलाफ फैसला आने के बाद पंचकूला में 28 तथा सिरसा में 4 लोगों की मौत हुई है। पूरे हरियाणा में डेरा समर्थकों पर आठ केस दर्ज किए गए हैं।
दूसरी तरफ, पंजाब में भड़की हिंसा में डेरा समर्थकों पर 45 केस दर्ज किए हैं। इस स्थिति को देखने के बाद हाईकोर्ट ने कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता जताई। हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों राज्यों के डीसी आम जनता तथा दुकानदारों के साथ ही सरकारी महकमों को भी हिंसा के कारण क्या आर्थिक नुकसान हुआ है, इसकी रिपोर्ट मंगलवार को तीन बजे तक पेश करें। इस हिंसा के कारण किसको कितना मुआवजा देना है, यह अब हाईकोर्ट तय करेगा। आप रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इस रिपोर्ट में सरकारी महकमे को हुआ आर्थिक नुकसान भी शामिल रहेगा।
उधर, हरियाणा के साथ ही दिल्ली में कृष्णा नगर में मौजूद डेरे की भी पुलिस ने तलाशी ली। दिल्ली के डेरे में कई महंगी बाइक और गाड़ियां खड़ी हैं।

केंद्रीय गृहमंत्री सिंह के दिल्ली स्थित आवास पर आज एक उच्चस्तरीय बैठक में इन सभी हालात की समीक्षा की गई। इस बैठक में एनएसए अजीत डोभाल, आईबी चीफ राजीव जैन, गृह सचिव राजीव महर्षि समेत केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के उच्च अधिकारी शामिल हुए।
सूत्रों के अनुसार बैठक में राजनाथ ने अर्धसैनिक बलों की समय से तैनाती नहीं करने पर नाराजगी जताई। राजनाथ ने हिंसा से निपटने के लिए कड़े कदम उठाने पर जोर दिया। दरअसल हिंसा पर हरियाणा सरकार के ढुल-मुल रवैये के चलते केंद्र की भी देश में फजीहत हो रही है। इसके चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी खासे नाराज बताये जा रहे हैं। वहीं पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के लगातार निर्देशों का पालन नहीं करने पर भी खट्टर सरकार निशाने पर है। कयास लगाए जा रहे थे कि इस उच्च स्तरीय बैठक में मनोहर लाल खट्टर भी पहुंचेंगे लेकिन वह बैठक में शामिल नहीं हुए।

बलात्कार के दोषी डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की गिरफ्तारी से नाराज उनके समर्थकों द्वारा सार्वजनिक परिवहन के साधन ट्रेन और बसों को निशाना बनाने के चलते रेलवे ने अभी तक 603 ट्रेनों का रद्द कर दिया है जबकि 58 ट्रेनों का रूट छोटा कर चलाया जा रहा है। वहीं दिल्ली से होकर हरियाणा जाने वाली बसों का भी परिचालन रोक दिया गया है। ऐसे में स्टेशनों और बस अड्डों पर यात्री स्थिति के सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।

कॉलेजों की छात्र राजनीति बनी चिंता का सबब

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दून इस समय छात्र संघ चुनाव के शोर से गूंज रहा है। छात्र नेता पूरे जोर-शोर से खुद को बेहतर साबित करने और छात्र हितों की रक्षा की ताल ठोकते दिख रहे हैं लेकिन धरातल पर देखें तो छात्र संगठनों की प्राथमिकता में न छात्र हैं, न ही छात्र हित। स्थिति यह है कि तमाम छात्र संगठन सीधे तौर पर या अप्रत्यक्ष रूप से किसी न किसी राजनीतिक दल से जुड़े हैं और उन्हीं के एजेंडे पर चुनाव मैदान में हैं। कॉलेज तमाम समस्याओं से जूझ रहे हैं लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं।

शिक्षा में गुणवत्ता के लिए सबसे बड़ा मुद्दा है शिक्षकों की तैनाती लेकिन धरातल पर गौर करें तो बीते कई वर्षों से 50 फीसद से ज्यादा पद खाली हैं। संसाधनों के मामले में भी तमाम कॉलेजों की स्थिति बदतर है। जो शिक्षक तैनात हैं, उनकी उपस्थिति को लेकर किए गए तमाम प्रयासों के बावजूद शिक्षक छात्रों के लिए कम ही उपलब्ध होते हैं। इतना ही नहीं ट्यूशन का खौफ अब भी छात्रों पर नजर आता है। बात ढांचागत और छात्र सुविधाओं की करें तो दून के किसी भी कॉलेज के भवन को पर्याप्त और सुदृढ़ नहीं कहा जा सकता। छात्र-छात्राओं के लिए साफ सुथरे शौचालय, परिसर में वाइ-फाई या इंटरनेट की सुविधा, खेलने के लिए पर्याप्त संसाधन, पढ़ने के लिए उच्चस्तरीय पुस्तकालय तक नहीं हैं। छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के लिए भी किसी कॉलेज के पास पर्याप्त संसाधन नजर नहीं आते। किताबों और पाठ्यक्रम में सुधार को लेकर भी कोई कवायद नहीं की जाती। इनके अलावा विश्वविद्यालयों से जुड़े मामलों में भी स्थिति बेहतर नहीं है। परीक्षाओं के आयोजन से लेकर परिणाम जारी किए जाने तक में देरी होती है, जिस कारण छात्र कई छात्रवृत्तियों का लाभ नहीं ले पाते। इसके अलावा अंक तालिकाओं व उपाधि समय से न मिलने से भी छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
इन तमाम बिंदुओं पर मशक्कत की जरूरत है। इसके बावजूद छात्र राजनीति के पैरोकारों के पास इनमें से कोई मुद्दा नजर नहीं आता। चुनावों का शोर तो है लेकिन न तो अब तक कोई छात्र संगठन घोषणा पत्र जारी कर पाया है, न ही इन मुद्दों को छू पाया है। छात्र संगठन महज नारेबाजी और प्रत्याशियों के नामों तक ही अटका है। ऐसे में छात्र नेतृत्व को मजबूत करने और छात्र हितों को आवाज देने की मंशा छात्र संघ चुनावों में कहीं नजर नहीं आती। हां, चुनाव के दौरान अव्यवस्थाएं, मारपीट, संस्थानों से उगाही जैसी समस्याएं जरूर नजर आती है। ऐसे में छात्र राजनीति किस दिशा में जा रही है, इस पर मंथन करने की जरूरत है।
बीते एक दशक पर गौर करें तो दून के चार कॉलेजों से 40 छात्र संघ अध्यक्ष और करीब 300 अन्य पदाधिकारी चुने गए। इसके बावजूद आज छात्रहितों के मुद्दों पर आवाज उठानी हो तो 100 लोग एकत्र नहीं होते लेकिन किसी राजनीतिक दल की रैली में भीड़ बढ़ानी हो तो हजारों छात्रों को यही छात्रनेता जुटा लेते हैं। साफ है कि छात्र राजनीति केवल बड़े नेताओं के लिए भीड़ एकत्र करने का जरिया मात्र बनकर रह गई है।

कहां से आता है चुनाव खर्च
हर साल छात्र संघ चुनाव में लाखों रुपये फूंके जाते हैं। सवाल यह है कि ये राशि आती कहां से है। सूत्रों की मानें तो कुछ संगठन शिक्षण संस्थानों की कमियों को निशाना बनाकर उगाही करते हैं तो कुछ संगठन बड़े राजनीतिज्ञों के बूते चुनाव में खर्च करते हैं। ऐसे में चुनाव जीतने के बाद उनकी निष्ठा इन्हीं वित्तीय सहायकों के साथ जुड़ी रहती है और छात्र हित के मुद्दे हाशिये पर होते हैं।
प्रमुख मुद्दे, जो एजेंडे में नहीं
-शिक्षकों की कमी
-संसाधनों की कमी
-शिक्षकों की उपस्थिति
-भवनों की स्थिति
-कॉलेजों की कमी
-छात्रवृत्तियां
-परीक्षाओं और परिणामों में देरी
-अंकतालिका व उपाधि मिलने में परेशानी
-खेल सुविधाएं
-शौचालय
-छात्रों की सुरक्षा
-इंटरनेट की सुविधा
-कंप्यूटर लैब
-पुस्तकालय
-प्रयोगशालाएं
-साफ-सफाई
-किताबें
-पाठ्यक्रम में सुधार
-ट्यूशन पढ़ने की बाध्यता
रविंद्र जुगरान, पूर्व छात्र नेता, पूर्व उपाध्यक्ष राज्य युवा कल्याण परिषद ने कहा कि छात्र राजनीति अपनी राह भटक गई है। छात्र-छात्राओं के मुद्दों को भूल छात्र अराजक हो रहे हैं। उन्हें दिशा देने वाला कोई नहीं है, सभी छात्रों को भटका रहे हैं।
वहीं, संग्राम सिंह पुंडीर, पूर्व छात्र संघ अधयक्ष, डीएवी कॉलेज ने कहा कि बेहतर कल के लिए माहौल तैयार करना होगा। किसी न किसी को सुधार के लिए तो आगे आना ही होगा। प्रत्याशी के नाम राजनीतिक दल तय करेंगे तो साफ है कि छात्रों की निष्ठा भी उन्हीं के साथ होगी।
जबकि पूर्व छात्र नेता आदित्य चौहान ने कहा किअधिकांश छात्र बस ग्लैमर के लिए छात्र राजनीति में आ गए हैं। राज्य के हजारों छात्र हर साल पलायन कर रहे हैं। कारण, पढ़ने के लिए साधन नहीं है। इस ओर छात्र नेताओं को ध्यान देना चाहिए।

हरीश रावत ने हरियाणा के सीएम खट्टर से मांगा इस्तीफा

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प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हरियाणा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हिंसा रोकने में विफल सीएम मनोहर लाल खट्टर को अपने पद से तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए।

पूर्व सीएम हरीश रावत ने पत्रकार वार्ता में कहा कि भाजपा सरकार के संरक्षण में ही पंचकुला में हिंसा हुई है। नहीं तो इतनी बड़ी संख्या में राम रहीम के समर्थक पंचकुला नही पहुंच सकते थे। उन्होंने कहा कि सीएम खट्टर व राम रहीम के संबंध जग जाहिर हैं। राम रहीम के साथ राज्य में स्वच्छ भारत अभियान चलाने वाले खट्टर के पास आज पंचकुला हिंसा के बारे में बोलने के लिए कुछ नहीं है। इसलिए उन्हें तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
उत्तराखण्ड भाजपा सरकार को कोसते हुए कहा कि सरकार मलपा व मांगती में हुई दैवीय आपदा की घटना को लेकर चिंतित नही दिख रही हैैं। इस घटना में कई लोेग अभी भी लापता बताए जा रहे है फिर भी भाजपा सरकार अन्य कार्यो में मशगूल है, जो उनके फायदे के है।
हरीश रावत ने भाजपा पर चुटकी लेते हुए कहा कि डेनिस शराब पर हल्ला मचाने वाली भाजपा की सरकार आज दबंग शराब की ब्रांड एंबेसडर बन गई है और इस शराब को गांव-गांव पहुंचाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बाजपुर की चीनी मिल को बेचने का एक सोची समझी चाल चली जा रही है। यही कारण है कि लगातार चीनी मिल के कर्मचारियों का घो उपेक्षा की जा रही है। सरकार चीनी मिल को को निजी स्वामियों को देकर हजारों कर्मचारियों को बेरोजगार बनाना चाह रही है। 

पलायन रोकने में राज्य सरकार की मदद करेगी पतंजलि

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उत्तराखंड में बढ़ते पलायन, किसानों की समस्या और युवाओं को रोजगार देने के लिए अब सरकार को बाबा रामदेव की संस्था पतंजलि योगपीठ का सहारा लेना पड़ रहा है। शनिवार सीएम त्रिवेंद्र ने पतंजलि के सीईओ और रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण के साथ सहयोग कार्यक्रम की समीक्षा की। इस बैठक में राज्य के किसानों की आय बढ़ाने, पलायन रोकने, रोजगार के साधन बढ़ाने, शोध कार्यों को बढ़ावा देने जैसे कई मुद्दों पर चर्चा हुई। इस बैठक में सीएम और आचार्य बालकृष्ण के साथ कैबिनेट मंत्री हरक सिंह और विभाग से जुड़े तमाम अधिकारी उपस्थित रहे।

गौरतलब हो कि पिछले महीने भी सरकार के प्रतिनिधियों की बाबा रामदेव के साथ बैठक हुई थी। एक महीने बाद फिर से कार्यक्रम की समीक्षा हो रही है कि सरकारी विभाग किन-किन क्षेत्रों में कार्य योजना बना रहे हैं। पिछले दिनों योगगुरू बाबा रामदेव ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और कृषि मंत्री हरक सिंह रावत के साथ मुलाकात कर इस सहयोग कार्यक्रम की शुरुआत की थी।

एम्स में बनेगा 500 बेड का आवासी भवन,तीमारदारों को मिलेगी सहूलियत

ऋषिकेश एम्स मैं आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए एक अच्छी खबर है। अब जल्द ही ऋषिकेश एम्स में मरीजों के तीमारदारों के लिए 500 बेड का आवास गृह बनाया जाएगा ताकि अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों के तीमारदारों को खुले आसमान के नीचे रात ना गुजारनी पड़े।

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आपको बता दें कि ऋषिकेश एम्स में रोजाना देश के कोने कोने से बड़ी संख्या में मरीज और उनके तीमारदार पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें रात गुजारने के लिए कोई छत नहीं मिलती जिस कारण वह एम्स परिसर के बाहर ही खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर होते हैं। लेकिन अब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने घोषणा की है कि जल्द ही एम्स आवास गृह बनाया जाएगा ताकि मरीजों के तीमारदारों को सहूलियत मिल सके। फिलहाल मुख्यमंत्री ने ऋषिकेश एडीएम को एम्स के निकट भूमि की व्यवस्था बनाने के निर्देश दे दिए हैं।

मानकों के पायदान पर फेल हुए बिग बाजार के खाद्य तेल, मुकदमा दर्ज

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बिग बाजार के खाद्य तेल खाद्य सुरक्षा विभाग के गुणवत्ता मानकों में खरे नहीं उतर सके है। लैब ने इनकी क्वालिटी को खराब बताया है। रिपोर्ट आने के बाद एडीएम कोर्ट में बिग बाजार प्रबंधन के खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम में मुकदमा दर्ज हो गया है।

तकरीबन छह माह पूर्व खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने शहर के अलग अगल डिपार्टमेंटल स्टोर से विभिन्न खाद्य पदार्थों के सैंपल लिये थे। इन खाद्य पदार्थों की क्वालिटी जांचने के लिये सभी को लैब में भेज गया था। लैब में राजपुर रोड स्थित बिग बाजार से लिये गये खाद्य तेल की क्वालिटी बेहद खराब पाई गई।
खाद्य विभाग के जिला अभिहित अधिकारी जीसी कंडवाल ने बताया कि लैब से रिपोर्ट आने के बाद संबंधित प्रतिष्ठन को नोटिस भेजा गया था। उसके बाद एडीएम कोर्ट में एफसीआई की स्वीकृति के बाद मुकदमा दर्ज किया गया। उन्होंने बताया, खाद्य सुरक्षा की टीम शहर के हर कौने से दूध और खाद्य पदार्थ के सैंपल आजकल भर रही है। मिलावटीखोरी के खिलाफ व्यापक अभियान विभाग छेड़ चुका है। 

मनमाना पैसा नहीं वसूल पाएंगे व्यवसायी

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प्रदेश में शराब व्यापारियों द्वारा मानमाने ढंग से पैसे लिए जाने के मामले में आबकारी विभाग ने गंभीर संज्ञान लिया है। आबकारी विभाग ने सभी शराब व्यापारियों को निर्देश दिए गए हैं कि शराब की बिक्री पर इसकी रशीद भी ग्राहक को देनी होगी। साथ ही सभी शराब की दुकानों में स्वैप मशीन भी लगाने के निर्देश दिए हैं। जिनमें से कुछ व्यापारी मशीन लगा चुके हैं और कुछ की बैंक में प्रक्रिया चल रही है।

जिला आबकारी अधिकारी मनोज कुमार उपाध्याय ने कहा कि कई दिनों से राजधानी में शराब व्यापारियों द्वारा प्रिंट रेट से अधिक वसूले जाने की शिकायत मिल रही थी जिसका संज्ञान लेते हुए निर्देश जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यापारी ऐसा करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

परियोजना के संबंध में रेल अधिकारियों और डीएम के बीच बैठक

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देवबंद-रुड़की न्यू रेल लाइन परियोजना के सम्बंध में जिलाधिकारी दीपक रावत एवं भारतीय रेल विभाग के अधिकारियों के बीच आज कलेक्ट्रेट में बैठक हुई।

अधिकारियों ने जिलाधिकारी को अवगत कराते हुए रेल परियोजना में राज्य सरकार की ओर से सहयोगी विभागों द्वारा किये जाने वाले कार्यों के सम्बंध में बताया।
रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि रुड़की से देवबंद तक कुल 51 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। अधिग्रहण की सीमा में क्षेत्र कौ गांव आ रहे हैं जिनमें से चार गांवों में भूमि अधीग्रहण किया जा चुका है। उन्होंने जिलाधिकारी से पिटकुल द्वारा रेल लाइन मार्ग में पड़ने वाली विद्युल लाइनों के सिानातंरण तथा उस पर होने वाले खर्च निर्धारण किये जाने, इरीगेशन विभाग द्वारा झबरेड़ा नाले पर बाॅक्स ब्रिज बनाने की एनओसी प्रदान करने, वन निगम से रेलवे ट्रैक में आ रहे पेड़ों के कटान तथा निलामी किये जाने, पीडब्ल्यूडी द्वारा रुड़की स्टेशन के नजदीक जंक्शन प्वांइट के अनुरूप लेवल क्राॅसिंग तैयार करने आदि से सम्बधी बिन्दुओं पर चर्चा की। जिलाधिकारी ने उक्त बिन्दुओं से सम्बंधित विभागीय अधिकारियों को तीव्रगति से कार्य करते हुए अवगत कराने के निर्देश दिये।

28 अगस्त- 5 सितम्बर को देहरादून में अायोजित होगा विश्व पुस्तक मेला

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आम नागरिको में पढाई-लिखाई की प्रवृत्ति को बढ़ाने के लिए एवं जागरूकता में वृद्धि के उद्देश्य से लगाये जाने वाले विश्व पुस्तक मेला के आयोजन को लेकर उच्च शिक्षा मंत्री डाॅ.धन सिंह रावत ने समीक्षा की। ‘पढेगा उत्तराखण्ड और बढेगा उत्तराखण्ड’ थीम को लेकर परेड ग्राउण्ड में लगाई जाने वाले विश्व पुस्तक मेला का आयोजन 28 अगस्त, 2017 से 05 सितम्बर, 2017 के मध्य होगा। पुस्तक मेला का उद्घाटन राज्यपाल डाॅ.कृष्ण कांत पाल एवं मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा। इस संबंध में उच्च शिक्षा मंत्री ने प्रेस वार्ता भी की।
एन.बी.टी. के अधीन लगाई जाने वाले विश्व पुस्तक मेला में लगभग 200 प्रकाशको के स्टाॅल लगने की आशा की गई है। 2019 तक पूर्ण साक्षरता का लक्ष्य हासिल करने में यह पुस्तक मेला सहयोगी होगा। 9 दिवसीय विश्व पुस्तक मेला में प्रतिदिन सुबह 11 बजे से सायं 8 बजे तक अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।
विचार गोष्ठी, बौद्धिक परिचर्चा, सांस्कृतिक कार्यक्रम, विश्व विद्यालय, अन्र्तविद्यालय प्रतियोगिता के आयोजन में प्रख्यात साहित्यकार, शिक्षाविद् एवं समाजसेवी को आमंत्रित किया गया है। आम नागरिको को न्यूनतम 10 प्रतिशत की छूट पुस्तको पर होगी। जो छात्र अपने पहचान पत्र के साथ आयेंगे, उन्हें 20 प्रतिशत की छूट मिलेगी। इसके अतिरिक्त महापुरूषों से संबंधित पुस्तकों पर 20 प्रतिशत की छूट होगी।
पुस्तक मेला का उद्देश्य उत्तराखण्ड के छात्र-छात्राओं में पढ़ने की अभिरूचि को जगाना है तथा विश्व स्तरीय पुस्तकों की उपलब्धता आमजन तक पहुंचाना है।इस अवसर पर संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा सविता मोहन, उप निदेशक हर्षवन्ती बिष्ट, प्राचार्य डी.ए.वी. देवेन्द्र भसीन, सहायक निदेशक एन.बी.टी. मयंक सुरोलिया आदि उपस्थित थे।

संविधान और विधान से बड़े क्यों बाबा ?

धार्मिक संस्था डेरा सच्चा सौदा प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम को 15 साल पुराने यौन शोषण मामले में सीबीआई अदालत ने दोषी करार दिया गया है। हलांकि जिस तरह से हरियाणा और पंजाब में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चौकसी बरती जा रही थी उससे यह साफ हो गया था कि सीबीआई अदालत की तरफ से फैसला बाबा के खिलाफ जा सकता है। सिरसा में कर्फ्यू लगा दिया गया है। फैसले के बाद बाबा को अंबाला सेंटल जेल भेजे जाने की बात थी। हलांकि अभी यह स्थिति साफ नहीं हुई है कि उन्हें कितने साल की सजा दी जाएगी। अदालत के इस निर्णय के बाद अब दोनों राज्यों में सबसे बड़ा सवाल कानून व्यवस्था का खड़ा हो गया है।

इस निर्णय से यह बात साफ हो चला है कि कोई कितना बड़ा क्यों न हो वह कानून और संविधान, न्याय व्यवस्था से अलग नहीं है। यह न्याय प्रणाली की बड़ी जीत है। गुमनाम शिकायत पर जिस तरह सीबीआई अलालत ने काम किया है, वह लोकतांत्रिक व्यव्यस्था की जीत है। लेकिन सवाल कई हैं। सबसे खास बात है कि क्या धर्म और आस्था की आड़ में संविधान और कानून बौना साबित हो गया है। राजनीति क्या संविधान और विधान का गलाघोंट रही है। धर्म, जाति, संप्रदाय पर सरकारों का लचीला रुख, कई सवाल खड़े करता है। राष्ट्रीय मीडिया में डेरा सच्चा प्रमुख संत गुरमित राम रहिम छाए हुए हैं। हरियाणा की पंचकूला स्थित सीबाई अदालत की तरफ से शुक्रवार को 15 साल पुराने एक यौन शोषण मामले में फैसला आना था। इसकी वजह से हरियाणा और पंजाब राज्यों में कानून-व्यवस्था का खयाल खड़ा हो गया है। हरियाणा में के पंचकूला औद दूसरी जगहों पर धारा 144 लागू लगा दी गई है। बावजूद बाबा के समर्थक तीन दिन से पंचकूला पहुंच कर डेढ़ लाख से अधिक लोग सड़कों पर अपना डेरा जमा चुके थे। इस पर हाईकोर्ट को कड़ी टिप्पणी करनी पड़ी। अदालत ने यहां तक कहा कि क्यों न राज्य के डीजीपी को हटा दिया जाए। राज्य में धारा 144 लागू होने के बाद इतनी संख्या में लोग कहां से पहुंच गए।
देश में पहली बार ऐसा हुआ जब किसी भी अदालत के फैसला सुनाने के पहले सेना बुलाई गई हो और ड्रोन, हेलीकाप्टर के अलावा कमांडो तैनात किए गए हों। एक बाबा ने दो राज्यों की पूरी व्यवस्था ठप कर दी है। इसकी वजह से पंजाब और हरियाणा की सरकारों को सतर्क रहना पड़ रहा है। पहले भी जाट आंदोलन के दौरान खट्टर सरकार की ढ़िलाई से काफी नुकसान उठाना पड़ा था, लिहाजा सरकार वह स्थिति पैदा नहीं होना देना चाहती। दोनों राज्यों की राजनीति में बाबा की अच्छी पकड़ है।
स्वाल उठता है कि बाबाओं पर सरकारें क्यों इतनी मेहरबान क्यों रहती हैं। उन्हें आस्था की आड़ में संविधान और विधान से खेलने की आजादी क्यों दी जाती है। बाबा हैं तो उन्हें सब कुछ करने की खुली छूट कैसे मिल जाती है। जिस संत पर देश की सबसे प्रतिष्ठित सुरक्षा एजेंसी फैसला सुना रही हो, वह अदालत किस लाव लश्कर के साथ पहुंचता है ,यह कैसी बिडंबना है। क्या एक आम आदमी के साथ भी ऐसी स्थियां बनती हैं। बाबाओं का रुतबा, उनकी आजादी क्या हमारे संविधान और कानून से बड़ी है। महिलाओं और आश्रम की साध्वियों के यौन शोषण को लेकर बाबाओं, संतो और मठाधीशों को इतिहास कलंकित रहा है। हम यह कत्तई नहीं कहते हैं कि यह बात सभी धार्मिक संस्थाओं और पीठाधीश्वरों पर लागू होती है, लेकिन अपवाद को भी खारिज नहीं किया जा सकता है। देश में ऐसी स्थितियां क्यों पैदा हुईं।
गुरुमित राम रहीम एक विशेष समुदाय के संत हैं और दुनिया में उनके पांच करोड़ से अधिक भक्त हैं। राजनेता चुनाव जीतने के लिए उनकी दुआ और आशीर्वाद लेते हैं। क्या इस लिहाज से वह न्याय व्यवस्था से परे हैं। वह कुछ भी करने को आजाद हैं। वह यौन शोषण करें या फिर जमीनों पर अतिक्रम, धर्म के नाम पर इस तरफ के बाबाओं को खुली छूट कब तक मिलती रहेगी। संविधान और कानून से वह खिलवाड़ कब तक कैसे करते रहेंगे। संत आशाराम बाबू, रामपाल सिंह, चंद्रास्वामी और न जाने कितने बाबाओं और राजनेताओं का संबंध जग जाहिर है।
हमारी धार्मिक आस्था और अधिकार इतने अनैतिक क्यों हो चले हैं। एक बाबा पर यौन शोषण का आरोप लगता है। जांच के बाद देश की सबसे विश्वसनीय संस्था सीबीआई उस पर फैसला सुनाती है और संत के समर्थक हिंसा और मरने- मारने पर उतारु हैं, यह सब क्यों। क्या आपका यह दायित्व नहीं बनता है कि जिसे आप भगवान मान रहे हैं उसकी नैतिकता कितनी अनैतिक हो चली है, बावजूद आप देश की संविधान, काननू और व्यवस्था पर विश्वास नहीं जता रहे हैं, आस्था के नाम पर आप मोहरे बने हैं। खुले आम सड़कों पर नंगा प्रदर्शन कर रहे हैं। फिर देश, संविधान, कानून और व्यवस्था का मतलब ही क्या रह जाता है। इस तरह की अनैतिक भक्ति किस काम की। जिस बाबा और संत से आप सदआचरण की संभावना कर रहे क्या वह आपके विश्वास पर खरा उतर सकता है। फिर बगैर जांच परख के गुरु करना हमारी सबसे बड़ी मूर्खता होगी। बाबाओं, और संतो के नाम पर अगर इसी तरह लोगों को धार्मिक स्वतंत्रा की आजादी मिलती रहेगी, फिर देश और उसके संविधान का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। उस स्थिति में हम एक राष्ट्र के निर्माण के बजाए ऐसे समाज का निर्माण कर रहे होंगे जहां सदाचार की बजाय कदाचार अधिक होगा। अगर यह सिलसिला बंद नहीं हुआ तो लोकतांत्रिक व्यस्था भीड़ के हवाले होगी। जहां किसी भी तंत्र का कोई कानून लागू नहीं होता है सिर्फ बस सिर्फ हिंसा से नियंत्रण ही एक जरिया बचता है। उस स्थिति से हमें बचना होगा। देश जनादेश से चलता है, जनादेश कोई बाबा नहीं देता है। राजनेताओं और राजनीति को यह बात भी समझनी होगी। सिर्फ नारों से देश नहीं बदल सकता है। उसके लिए जमींन तैयार करनी होगी। हम संत राम रहीम, आसाराम, रामपाल सिंह और दूसरे बाबाओं से किस चरित्र निर्माण की उम्मीद कर सकते हैं। बाबाओं को हम आस्था को प्रतिबिंब कब तक मानते रहेंगे। सेना तैनात कर, बिजली काट और कर्फ्यू लगा कर कब तक व्यवस्था और संविधान की रक्षा की जाएगी। अब वक्त आ गया है जब धर्म के ढोंगियों का संरक्षण और रक्षण बंद होना चाहिए।