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गंगा किनारे पांच किमी दायरे में खनन पर लगी रोक हटी

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नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और स्टोन क्रशर मालिकों को राहत देते हुए गंगा नदी के पांच किमी दायरे में खनन पर लगाई रोक हटा दी है। साथ ही सरकार की नीति के अनुसार खनन को हरी झंडी दे दी है।

हरिद्वार निवासी पवन कुमार सैनी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पिछले साल छह दिसंबर को रायवाला से भोगपुर तक गंगा नदी किनारे स्थापित स्टोन क्रशर बंद करने के साथ ही खनन कार्य पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। इस आदेश का अनुपालन न होने पर इसी साल तीन मई को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राज्य के मुख्य सचिव को आदेश का अनुपालन करने के लिए पत्र भेजा, मगर मुख्य सचिव द्वारा भी आदेश का अनुपालन नहीं किया गया। इसके बाद मातृसदन हरिद्वार के स्तर से अवमानना याचिका दायर की गई। इस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए मुख्य सचिव से 24 घंटे में रिपोर्ट तलब की थी। अगले ही दिन सरकार ने रायवाला से जगजीतपुर तक के सभी स्टोन क्रशर व खनन बंद करने की रिपोर्ट हाईकोर्ट में दाखिल कर दी थी।
इस बीच, राज्य सरकार व स्टोन क्रशर मालिकों की ओर से हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की गई। सरकार की ओर से महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर व मुख्य स्थायी अधिवक्ता परेश त्रिपाठी ने दलील दी कि पिछले साल छह दिसंबर को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से मातृसदन के प्रत्यावेदन व तत्कालीन डीएम के पत्र को आधार बनाते हुए गंगा के पांच किमी दायरे में खनन बंद करने का जो आदेश पारित किया गया, उससे पहले सरकार का पक्ष सुना ही नहीं गया। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ व न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने गुरुवार को इस पर सुनवाई करते हुए खनन पर लगी रोक हटा दी, साथ ही इस मामले में सरकार को तीन सप्ताह के भीतर प्रति शपथ पत्र प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने अपने आदेशों में यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश अवैध खनन करने व अवैध तरीके से स्टोन क्रशर लगाने की अनुमति का आधार नहीं बनाया जा सकता।

स्वाइन फ्लू का कहर जारी, 152 पहुंची मरीजों की संख्या

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स्वाइन फ्लू का प्रकोप थमने के बजाय लगातार बढ़ता ही जा रहा है। हर अंतराल बाद स्वाइन फ्लू के नए मामले सामने आ रहे हैं। यही नहीं स्वाइन फ्लू का वायरस एचवनएनवन जानलेवा भी साबित हो रहा है। इस बीमारी की गिरफ्त में आए 19 मरीज अब तक दम तोड़ चुके हैं। इनमें सर्वाधिक ग्यारह मरीज दून के रहने वाले हैं। जबकि हरिद्वार से एक, पौड़ी से दो, उत्तराकाशी से दो व यूपी के रहने वाले तीन मरीजों की मौत भी स्वाइन फ्लू से हो चुकी है। वहीं, गुरुवार को छह और मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। इसके बाद स्वाइन लू के मरीजों की संख्या बढ़कर 152 हो गई है। जबकि 26 संदिग्ध मरीजों की जांच रिपोर्ट आनी बाकी है।

दिल्ली की एनसीडीसी लैब से आज जिन सैंपल की जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई है उनमें से छह मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। इनमें पांच मरीजों का उपचार हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट में और एक मरीज का उपचार मैक्स अस्पताल में चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन माह में स्वाइन फ्लू का वायरस ज्यादा सक्रिय रहा है। जुलाई में 35 मरीजों में स्वाइन लू की पुष्टि हुई है। जबकि अगस्त में 76 और सितंबर में अब तक 25 मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। स्वाइन फ्लू का वायरस पहाड़ व मैदान में सक्रिय है। हालात यही रहे तो आने वाले दिनों में भी इस वायरस का प्रकोप यूं ही बदस्तूर बना रह सकता है।

महाराष्ट्र के ट्रैकर की मौत

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उत्तरकाशी जिले में क्यार कोटी- सांकरी ट्रैक पर पुणे महाराष्ट्र से आये एक ट्रैकर की मौत हो गई। जिसके रेस्क्यू के लिए सेना, एसडीआरएफ और आपदा प्रबंधन की टीम रवाना हो गई है।

चार सितंबर को पुणे के छह लोगों का ट्रैकर दल उत्तरकाशी पहुंचा। इसके बाद पांच सितंबर को पुणे के छह सदस्यीय दल ने स्थानीय स्तर पर चार पोर्टर और एक गाइड को अपने साथ लेकर झाला से कंडी-क्यार कोटी ट्रैक पर ट्रैकिंग करने निकल पड़े। इस बीच पुणे के एक ट्रैकर की रास्ते में मौत हो गई। इनमें से दो लोग जब बुधवार देर शाम को हर्षिल स्थित सेना की कंपनी के पास पहुंचे तो मामले का पता चल पाया। मृतक के साथ बाकी के ट्रैकर भी वहां रुके हुए हैं। जिस जगह पर वह रुके हुए हैं वह गंगोत्री हाईवे स्थित झाला से करीब 28 किमी दूर 15500 फीट की ऊंचाई पर है। जिसके कारण वहां फिलहाल हेलीकॉप्टर भी नहीं उतर पा रहा है। जिस ट्रैक पर ट्रैकर गये हैं वह इनर लाइन के अंदर बताया जा रहा है। लेकिन इसको लेकर ट्रैकर दल ने न ही जिला प्रशासन से और न ही वन विभाग से अनुमति ली है। जिसके कारण पुणे के ट्रैकर दल के सदस्यों का नाम पता भी प्रशासन के पास उपलब्ध नहीं है। लदाड़ी क्षेत्र में ट्रैकिंग का काम करने वाले बृजमोहन ने बताया कि यह ग्रुप टाटा का है। इसमें छह लोग पुणे महाराष्ट्र के हैं। नाम पते उन्हें किसी के मालूम नहीं है। उनके साथ एक गाइड सहित चार पोर्टर शामिल हैं। ट्रैकर को झाला से ट्रैकिंग करते हुए मोरी ब्लॉक के सांकरी निकना था। यह ट्रैक करीब 10 दिनों का है। गाइड और पोर्टर से उनका संपर्क नहीं हो पा रहा है। डीएफओ संदीप कुमार का कहना है कि जिस एरिया में ट्रैकर गये हैं वह इनर लाइन के अन्तर्गत आता है जिसको लेकर दल ने वन विभाग से कोई अनुमति नहीं ली है इसलिए उनके नाम पते भी दर्ज नहीं हैं। बगैर अनुमति के इनर लाइन में प्रवेश करने पर भारती वन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जायेगी। जबकि डीएम उत्तरकाशी डा आशीष कुमार का कहना है कि ट्रैकर की मौत किन कारणों से इस बारे में बाकी सदस्यों के नीचे आने पर ही पता चलेगा। हमारी पहली प्राथमिकता ट्रैकर को नीचे लाने की है। अगर ट्रैकर 12 हजार फीट के आस पास पहुंचते हैं तो सेना का चॉपर उन्हें आसानी से नीचे ले आयेगा। क्योंकि इससे ऊपर चॉपर के उतरने की व्यवस्था नहीं है। एसडीआरएफ, आपदा प्रबंधन और सेना के जवान ट्रैकर को रेस्क्यू करने गई है। 

‘मिनी कॉर्बेट’ की उम्मीदों को फिर लगे पंख

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जैव विविधता से लबरेज व पारिस्थितिक तंत्र के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण दलमोठी वन क्षेत्र को ‘मिनी कॉर्बेट’ के रूप में विकसित करने का सपना पिछले तीन वर्षों से पूरा नहीं हो सका है। ‘कॉर्बेट नेशनल पार्क’ की तर्ज पर जंगल सफारी के लिए वन विभाग ने जहां शासन को दोबारा प्रस्ताव भेज रहा। वहीं चौबटिया सेब बागान को हाइटेक बना पर्यटन विकास की तैयारी में जुटे उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल ने भी इस दिशा में दिलचस्पी दिखा उम्मीदों को पंख लगाए हैं।

दरअसल, उद्यान मंत्री सुबोध ने विश्व प्रसिद्ध चौबटिया सेब बागान को पुराने स्वरूप में लाने के साथ ही इसे हाइटेक बनाने का खाका तैयार किया है। हालिया निदेशक डॉ. बीर सिंह नेगी के प्रस्ताव पर उन्होंने बाकायदा चौबटिया गार्डन के विस्तरीकरण, रेड डेलिशियस सेब आदि के लिए एक करोड़ का बजट भी स्वीकृत किया था। इधर होटल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भावी ‘मिनी कॉर्बेट’ दलमोठी वन क्षेत्र को मूर्तरूप देने का आग्रह किया। इस पर सबोध ने वन मंत्री हरक सिंह रावत से मिलकर वन भूमि या एक्ट संबंधी अड़चन दूर कराने का भरोसा दिलाया है। ताकि जांगल सफारी शुरू करा पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा व स्थानीय स्तर पर रोजगार मुहैया कराया जा सके। मामले में डीएफओ अल्मोड़ा का कहना है कि प्राकृतिक रूप से समृद्ध दलमोठी वन क्षेत्र के मामले में प्रभावी प्रयास जारी हैं। उन्होंने बताया कि पर्यटन विकास को जैवविविधता वाले इस क्षेत्र में जंगल सफारी आदि के लिए शासन को दोबारा प्रस्ताव भेज रहे हैं।
‘फ्लोरा एंड फॉना’ फॉर्मूला से बदलनी थी तस्वीर
वर्ष 2014 आखिर में हजारों वनस्पतिक प्रजातियों एवं वन्य जीवों वाले इस जंगलात को ‘फ्लोरा एंड फॉना’ के तहत संवारने का प्रस्ताव बना। तत्कालीन कांग्रेस सरकार में संस्कृति एवं मेला संरक्षण समिति सदस्य रहे वर्तमान विधायक करन माहरा व एसडीएम एपी वाजपेयी ने जंगल सफारी का प्रस्ताव बना शासन को भेजा था। मकसद था करीब 1200 हेक्टेयर में फैले वन क्षेत्र को पर्यटन गतिविधियों का बड़ा केंद्र विकसित कर वन एवं वन्य जीवों को संरक्षण प्रदान करना था।
विविध वनस्पति प्रजातियां व वन्य जीवों का संसार
दलमोठी में विभिन्न वनस्पति प्रजातियों व वन्य जीवों का मोहक संसार है। बहुपयोगी चौड़ी पत्ते वाले बांज, बुरांश, काफल, उतीस आदि प्रजातियों के साथ ही पारिस्थितिक तंत्र में सहायक हजारों वनस्पतियां। वहीं गुलदार, जंगल कैट, जंगली सुअर, भालू, हिरन, घुरड़, काकड़, बारहसिंघा आदि अनगिनत वन्यजीवों के साथ ही तीतर, बटेर, जंगली मुर्गे आदि मौजूद हैं। 

‘बीमार’ हुआ दून अस्पताल, ऑपरेशन के दौरान बत्ती गुल

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दून महिला अस्पताल में गुरुवार को अजीब स्थिति पैदा हो गई। गर्भवती ऑपरेशन टेबल पर थी और बत्ती गुल हो गई। डॉक्टरों ने अनुभव से किसी तरह ऑपरेशन अंजाम दिया। लाइन में फॉल्ट आने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। दिनभर जेनरेटर से काम चलाया गया, पर रात होते-होते यह भी दगा दे गया। जिससे कई वार्डों में अंधेरा पसर गया।

अस्पताल में ओटी की लाइट बंद होने से शनिवार सुबह कई घंटे ऑपरेशन ठप रहे। अल सुबह इमरजेंसी में लाई गई कुछ गर्भवती महिलाओं का रिस्क लेकर ऑपरेशन किया गया। बाद में दोपहर बाद वैकल्पिक व्यवस्था की गई। इस बीच तिमारदारों के हाथपांव फूले रहे। शाम के वक्त जेनरेटर भी बंद पड़ गया और सर्जिकल समेत कई अन्य वार्ड में अंधेरा पसर गया। बताया गया कि यह दिक्कत कई दिन से थी, पर बार-बार मामला अधिकारियों के संज्ञान में लाने के बाद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। इसे लेकर डॉक्टरों में भी गुस्सा है। उनका कहना है कि यह बुनियादी व्यवस्था है। जिस पर उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए। इधर, महिला अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मीनाक्षी जोशी ने इसकी जानकारी दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा को दी। जिसके बाद उन्होंने वैकल्पिक व्यवस्था कराई। यह तय हुआ कि अगर दोबारा ऐसी घटना हुई तो ऑपरेशन रोकने के बजाए दून अस्पताल का ऑपरेशन थियेटर उपयोग में लाया जाएगा। डॉ. मीनाक्षी जोशी ने का कहना है कि इस आपात स्थिति में डॉक्टरों का अनुभव काम आया। अन्यथा बड़ी समस्या खड़ी हो जाती। आगे से ऐसा न हो, इसके लिए उच्चाधिकारियों को सूचना दी गई है।
आहरण अधिकार न मिलने से दिक्कत
दून व दून महिला अस्पताल के मेडिकल कॉलेज बनने के बाद अस्पताल में व्यवस्थाएं बेपटरी हो चुकी हैं। कभी बजट की कमी और कभी स्वीकृति के इंतजार में अस्पताल के छोटे-छोटे काम भी अटक जाते हैं। जिसका एक कारण है कि चिकित्सा अधीक्षकों के पास आहरण अधिकार नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और हाल में मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य सलाहकार डॉ. नवीन बलूनी ने इन्हें आहरण अधिकार दिए जाने की बात कही जरूर पर इस पर कार्रवाई नहीं हुई है।
एमएसबीवाई के मरीजों के भी नहीं हुए ऑपरेशन
अस्पताल में गुरुवार को मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना (एमएसबीवाई) के मरीजों को खासी फजीहत झेलनी पड़ी। न उनके ऑपरेशन हुए और न टेस्ट। मरीज दिनभर एमएसबीवाई काउंटर पर भटकते रहे। हुआ यह कि एमएसबीवाई काउंटर पर इंटरनेट ठप हो गया। कर्मचारियों ने डोंगल से व्यवस्था सुचारू करनी चाही पर इसने भी काम नहीं किया। जबकि इस सुविधा के तहत मरीज की जानकारी व दस्तावेज साइट पर अपलोड करने पड़ते हैं।

बाबाओं की चहेती चरस हसीना गिरफ्तार

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हरिद्वार में वह चरस हसीना के नाम से मशहूर और बाबाओं के लिए नशे की चलती फिरती दुकान कही जाने वाली चरस हसीना को पुलिस ने धर दबोचा। गुरुवार को वह पुलिस के हत्थे चढ़ गयी।
बरेली की रहने वाली यह चरस हसीना बरेली से चरस लाकर हरिद्वार में बाबाओं को सप्लाई करती थी। पुलिस ने इसके पास से 12 हजार रुपये नकद और 450 ग्राम चरस बरामद की है। फिलहाल पुलिस इस महिला से पूछताछ कर रही है। पुलिस पूछताछ में उन लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं, जो इससे चरस लेते थे। इनमें कई बडे़ नाम भी हो सकते हैं। गुरुवार को शहर कोतवाली की मायापुर चैकी पुलिस ने एक महिला को गिरफ्तार किया जो चरस बेचने का काम करती थी। इसके पास से पुलिस को 12 हजार रुपये नकद और तराजू-बाट व 450 ग्राम चरस बरामद की हैं। पुलिस पूछताछ में उस महिला ने बताया कि वहा बरेली से चरस ला कर हरिद्वार में बाबाओं को बेचती हैं। उसने बताया कि वह कई सालों से यह काम करती हैं। मायापुर चौकी प्रभारी रमेश सैनी ने बताया कि महिला ने जानकारी दी कि वह गरीब घर की है और पति शराब पीकर नशे में रहता है इसलिए यह अपने बच्चों के लालन-पालन के लिए चरस बेचने का काम करती हैं। सैनी ने बताया कि इस महिला से पूछताछ की जा रही है और संबधित धाराओं में इसका चालान किया जा रहा हैे।

नशे के खिलाफ नैनीताल पुलिस ने छेड़ी जंग: जन्मजेय खंडूरी

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उत्तराखंड में नशे के बढ़ते जाल पर रोक लगाने के लिये राज्य पुलिस ने व्यापक अबियान छेड़ रखा है।  खास तौर पर मैदानी क्षेत्रों और पर्य़टक स्थान नशे के कारोबरियो ंके लिये मुफीद जगह बन जाती हैं। इसी सिलसिले में नैनीताल जिले में भी एसएसपी जन्मज्य खंडूरी ने नशे के खिलाफ मुहिम छेड़ी हुई है। इसी अभियान के अंतर्गत  जिले के सभी थाना प्रभारियों को निर्देशित किया गया है की नशे की लत में पड़ रहे युवाओं को निजात दिलाने के लिये अपने अपने इलाकों में जांच और छापेमारी जोर सोर से की जाये।

इस दौरान नैनीताल पुलिस को कामयाबी तब मिली जब एरोड्रम रोड पर पुलिस ने एकस्थानीय युवक को स्मैक के साथ गिरफ्तार किया। पकड़ी गी स्मैक की मात्रा करीब तीन ग्राम है। इस बारे में एसएसपी का कहना है कि “भले ही मात्रा कम हो या ज्यादा लेकिन युवाओं में नसे और उससे होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता पैलाना हमारा मुख्य लक्ष्य है। इसके साथ साथ पुलिस जिले में किसी भी तरह कि अापराधिक गतिविधियों को बर्दाशत नहीं करेगी। इसको रोकने के लिये हम कड़े से कड़े कानून का प्रयोग करेंगे”

 

दो माह से पानी को तरस रहे नौनिहाल

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कालसी प्रखंड के राजकीय प्राथमिक विद्यालय सराड़ी में असामाजिक तत्वों द्वारा दो माह पूर्व पेयजल लाइन को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था, जबकि पानी जमा करने के लिए रखी गई टंकी भी तोड़ दी गई है। इसके चलते नौनिहालों को पीने का पानी मुहैया नहीं हो रहा है। साथ ही मध्याह्न भोजन योजना के संचालन में भी दिक्कतें आ रही हैं।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक राजेंद्र शाह ने बताया कि क्षतिग्रस्त पेयजल लाइन की शिकायत विभागीय अधिकारियों से की गई है। जबकि, विद्यालय प्रबंधन समिति के माध्यम से पेयजल लाइन मरम्मत का प्रस्ताव भी भेजा गया है। कालसी ब्लाक के राजकीय प्राथमिक विद्यालय सराड़ी में तीस नौनिहाल अध्ययनरत हैं। यहां एक वर्ष पूर्व नौनिहालों की सुविधा के लिए पेयजल लाइन बिछाई गई थी जबकि शौचालय के उपयोग के लिए पानी जमा करने को टंकी लगाई गई थी। दो माह पूर्व विद्यालय अवकाश के बाद असामाजिक तत्वों ने पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त करने के साथ ही पानी जमा करने को लगाई गई टंकी भी तोड़ डाली जिससे विद्यालय की पेयजल आपूर्ति ठप हो गई है। विद्यालय में पीने के पानी की सुविधा नहीं होने से मध्याहन भोजन पकाने को दो किमी दूर से पानी लाना पड़ रहा है। जबकि पानी के अभाव में शौचालयों में भी गंदगी पसरी हुई है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक राजेंद्र शाह ने बताया कि विभागीय अधिकारियों से पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त होने की शिकायत करने के साथ ही एसएमसी से पुनर्निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।

संदिग्ध परिस्थितियों में पेड़ से लटका मिला साधु का शव

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ऋषिकेश के लक्षमण झूला थाना क्षेत्र में चौरासी कुटिया के पास एक पेड़ पर साधु का शव लटका लोगों ने देखा, जिसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

लक्षमण झूला थाना प्रभारी प्रदीप राणा के अनुसार, बुधवार की देर शाम चौरासी कुटिया क्षेत्र मे घूमने वाले लोगों ने सुचना दी कि एक व्यक्ति पेड़ से लटका है। सूचना पर जब पुलिस मौके पर पहुंची तो देखा कि साधू की तरह लगने वाला व्यक्ति पेड़ से एक कपड़े के सहारे लटका है। जिसके शरीर पर कपड़ों के नाम पर मात्र एक लंगोटी थी। जिसकी शिनाख्त के लिए आसपास में पूरे प्रयत्न किए गए लेकिन पहचान नहीं हो पाई।प्रदीप राणा का कहना था कि, “प्रथम दृष्टया साधू द्बारा आत्महत्या करना प्रतीत हो रहा है।”

अब सीबीएसई स्कूलों में नियुक्ति से पहले होगा शिक्षकों व स्टाफ का साइकोमेट्रिक टेस्ट

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सेंट्रल बोर्ड आॅफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) से जुड़े स्कूलों में अब शिक्षकों और कर्मचारियों का साइकोमेट्रिक टेस्ट भी लिया जाएगा। इसके साथ ही पुलिस वेरिफिकेशन भी अनिवार्य कर दिया गया है। गुरुग्राम के रायन इंटरनेशनल स्कूल की घटना के बाद बोर्ड ने स्कूल में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को गंभीरता से लेते हुए यह निर्णय लिया है।
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजुकेशन ने स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए ‘सुरक्षा कवच’ तैयार किया है। हरियाणा के गुरुग्राम स्थित रायन इंटरनेशनल स्कूल में बच्चे कहीं हत्या के बाद बोर्ड ने स्कूलों में सुरक्षा इंतजाम चाक चौबंद रखे जाने के निर्देश दिए हैं। बोर्ड ने सभी एफिलिएटेड स्कूलों के लिए सिक्योरिटी गाइडलाइन भी जारी की है। बोर्ड के देहरादून रीजन द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार, बोर्ड ने स्कूलों में शैक्षिक व्यवस्था से अलग वर्तमान परिस्थितियों में जैसा कि कई विद्यालय में छात्रों और उसमें भी खासकर बालिकाओं की संरक्षा एवं सुरक्षा की स्थिति चिंताजनक बताई है।
बोर्ड ने कहा है कि अखिल भारतीय स्तर पर कहीं न कहीं अप्रत्याशित व हृदयविदारक घटनाएं घटित हुई हैं। यह चिंता का विषय है। इसमें कई मामलों में स्कूलों की लापरवाही भी बड़ा कारण है। ऐसे में स्कूलों में बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए नियमों का कड़ाई से पालन होना बेहद जरूरी है। बोर्ड ने स्कूलों को विभिनन व्यवस्थाएं चुनिश्चित करने के साथ ही शिक्षकों, अभिभावकों और बच्चों को जागरूक करने की भी अपील की है। साथ ही ब्लूव्हेल गेम के कारण मौत के मुंह में जा रहे बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए स्कूलों में शिक्षकों द्वारा अभिभावकों को जागरूक करते हुए ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए बच्चों के व्यवहार पर नजर रखने की हिदायत दी है।
बयान
स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा बोर्ड की पहली प्राथमिकताओं में से एक है। स्कूलों में सुरक्षा से संबंधित दिशा निर्देश समय समय पर दिए जाते रहे हैं। हरियाण की घटना अत्यंत दुखद व गंभीर है। ऐसा मामले दोबारा न हो इसके लिए देहरादून परीक्षेत्र स्तर पर अलग से सभी स्कूलों को सुरक्षा से जुड़ी तमाम व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
– रणबीर सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, सीबीएसई देहरादून
दिशा- निर्देश
– निर्देशों के तहत स्कूलों को पूरे परिसर को सीसीटीवी कैमरों से कवर करते हुए इसकी रिकॉर्डिंग में देखने हेतु स्वयं विद्यालय प्रमुख व उपप्रधानाचार्य या वरिष्ठ स्टाफ का दायित्व सुनिश्चित किया जाए।
– स्कूल में शिक्षकों व स्टाफ से गार्ड, ड्राइव, कंडक्टर आदि सभी का साइकोमेट्रिक टेस्ट कराया जाए। उनका पूरा रिकॉर्ड स्कूल के पास उपलब्ध होना अनिवार्य किया जाए।
– वाहन चालक, कंडक्टर, सफाई कर्मचारी, हेल्पर आदि सभी कर्मचारियों का नियुक्ति से पहले पुलिस वेरिफिकेशन कराया जाए।
– कक्षाओं टॉयलेट व अन्य ज्यादा आवाजाही नहीं होने वाली जगहों पर कड़ी निगरानी होनी चाहिए। यदि संदिग्ध वस्तु या अनैतिक प्रवृत्ति की जानकारी किसी भी स्थिति में संज्ञान में आती है, तो त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए।
– स्कूल के प्रत्येक दल कोरिडोर में छात्रों की देखरेख व उनकी सुरक्षा हेतु प्रयास होना चाहिए।
— स्कूल द्वारा संचालित स्कूल बसों की देखरेख में लगाए गए सभी तकनीकी स्टाफ, ड्राइवर व कंडक्टर जो भी हो दैनानुदित निगरानी रहे व इसके लिए विद्यालय में ट्रांसपोर्ट इंचार्ज बराबर संपर्क में रहे।
– स्कूल बसों को जीपीएस से लैस कराया जाए। बसों में सिक्योरिटी गार्ड सुनिश्चित किया जाए।
– इंटरनेट आदि के उपयोग को लेकर स्कूल के शिक्षकोंं द्वारा न सिर्फ बच्चों को बलिक उनके अभिभावकों को भी जागरूक किया जाए।