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मेरे लापता बेटे केे बारे में खबर करिये सरकार

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स्कूल से प्रार्थना के बाद अचानक गायब हुए छह वर्षीय मासूम मोहित की माता अलका कोठियाल ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत से गुहार लगाई है कि उसके लापता बेटे केा खोजा जाए।

मुख्यमंत्री मुख्यायल गोपेश्वर में गुरुवार को आयोजित जनता दरवार में पहुंचे। इस दौरान मैठाणा की अलका कोठियाल ने अपनी शिकायत दर्ज की कि उनका छह वर्षीय पुत्र प्राथमिक विद्यालय तेफना में अध्ययनरत था। 10 अगस्त को अचानक गायब हो गया। अलका कोठियाल का कहना है कि इस संबंध में पुलिस से भी गुहार की गई मगर अभी तक कोई तक कोई सुराग नहीं मिला। मुख्यमंत्री के जनता दरबार में आयी मां ने गुहार लगायी कि उसके बच्चे को खोजा जाए। सीएम ने इस मामले में पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।

रेरा चेयरमैन की दौड़ में रिटायर्ड आईएएस

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रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) के चेयरमैन पद के लिए रिटायर्ड आईएएस अधिकारी ही कसरत कर रहे हैं। रेरा के नियामक प्राधिकारी कार्यालय को प्राप्त आवेदनों में इस पद के लिए तीन उम्मीदवार सामने आए हैं और तीनों रिटायर्ड आइएएस हैं। इनमें दो पूर्व आइएएस उत्तराखंड, जबकि एक झारखंड के हैं। वहीं, रेरा सदस्यों के लिए पांच आवेदन प्राप्त हुए। हालांकि आवेदनों की कम संख्या को देखते हुए दोबारा से आवेदन मांगे गए हैं और आवेदन करने की अंतिम तिथि अब 22 सितंबर रखी गई है।

रेरा के नियामक प्राधिकारी व सचिव आवास अमित नेगी के मुताबिक रेरा चेयरमेन व तीन सदस्यों के लिए चार सितंबर तक आवेदन मांगे गए थे। तय तिथि तक तीन आवेदन चेयरमेन के लिए व सदस्यों के तीन पदों के लिए आठ ही आवेदन आए थे। आवेदनों की कम संख्या को देखते हुए यह तिथि 22 सितंबर तक बढ़ा दी गई है। इसके बाद मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित विधि, आवास व कार्मिक सचिवों वाली कमेटी आवेदनों की स्क्रूटनी कर सलेक्शन कमेटी को नाम भेजेगी। जबकि सलेक्शन कमेटी हर पद के लिए तीन-तीन नामों का चयन पर सरकार को रिपोर्ट देगी। इस कमेटी में हाईकोर्ट के न्यायाधीश यूसी ध्यानी, प्रमुख सचिव न्याय व सचिव आवास हिस्सा हैं। चेयरमेन व सदस्यों की नियुक्ति अंतिम रूप से सरकार के निर्णय के अधीन रहेगी। चेयरमैन पद के लिए अब तक आए आवेदनों में प्रमुख रूप से एन रविशंकर (पूर्व मुख्य सचिव उत्तराखंड), चंद्र सिंह नपलच्याल (पूर्व सचिव उत्तराखंड), विष्णु प्रसाद (पूर्व अपर मुख्य सचिव झारखंड) के आवेदन शामिल हैं।
सचिवालय समिति ने किया आवेदन
रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी के नोटिस के बाद उत्तराखंड सचिवालय सहकारी आवास समिति ने पंजीकरण के लिए आवेदन कर लिया है। उनके दस्तावेजों की जांच की जा रही है और इसके बाद समिति का विधिवत पंजीकरण कर दिया जाएगा। इस समिति ने कारगी के पास भारूवाला ग्रांट में करीब 120 बीघा क्षेत्रफल पर प्लॉटिंग कर रखी है। इस भूखंड पर प्लॉट बेचने का काम भी शुरू किया जा चुका था। समिति सचिव प्रदीप पपनै ने रेरा अधिकारियों को पत्र लिखकर पंजीकरण में छूट देने की मांग की थी। तर्क दिया गया था कि यह सहकारी अधिनियम में पंजीकृत लाभ-हानिरहित संस्था है। इस तर्क को रेरा के नियामक प्राधिकारी ने यह कहकर खारिज कर दिया था कि जो समिति के सदस्यों को प्लॉट बेचे जा रहे हैं, जिसमें बड़ी राशि का प्रयोग हो रहा है। ऐसे में किसी भी विवाद की स्थिति में निवेशकों के हितों को संरक्षित रखने के लिए समिति का रेरा में पंजीकृत होना जरूरी है। इसके साथ ही समिति को नोटिस जारी कर प्लॉटिंग प्रतिबंधित कर दी गई थी। 

डीआईडी सीजन-6 के आॅडिशन में दिखा हुनर

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सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल में जीटीवी द्वारा आयोजित कार्यक्रम डांस इंडिया डांस सीजन-6 का आॅडिशन हुआ। आॅडिशन में कई क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों ने अपना हुनर का जलवा बिखेरा। इस आॅडिशन में दो लेवल रखे गए, जो प्रतिभागी प्रथम लेवल पर चयनित हुए उन्हें दूसरे लेवल में अपनी प्रस्तुति देनी थी व दूसरे लेवल के चयनित प्रतिभागियों को दिल्ली के मंच पर अपना फाइनल आॅडिशन देना होगा।
गुरुवार को आयोजित हुए आॅडिशन में प्रतिभागियों की संख्या 1500 रही, दूसरे लेवल में दो सौ से ज्यादा प्रतिभागियों का चयन हुआ जिसमें से केवल पाॅच प्रतिभागियों का फाइनल सैलेक्शन हुआ है जो अब दिल्ली में अपनी प्रस्तुति देगें। आॅडिशन को जज कर रहे प्रसिद्व डीआईडी मौम्स विजेता सोम्य श्री, डीआईडी के प्रसिद्व कोरियोग्राफर मयूरेश वाडकर, शिवाजी होडवाली और जीटीवी से आई साक्षा मौजूद थे। आॅडिशन को सफल बनाने के लिए मुम्बई से साठ लोगों की टीम एक दिन पहले से ही विद्यालय में व्यवस्था बनाने के लिए मौजूद थे। स्कूल के एमडी विपिन बलूनी ने कहा कि बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत है प्रतिभा को पहचानकर उसे सही जगह दिखाने की है। डीआईडी का मंच बच्चों में छुपे प्रतिभाओं को सामने लाने का सबसे अच्छा प्लेटफाॅर्म है। इस अवसर पर स्कूल के सभी शिक्षक व स्टाफ मौजूद रहे।

सचिवालय पर गरजीं भोजन माताएं, सरकार को ज्ञापन भेजा

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सीटू से सम्बद्ध उत्तराखंड भोजन माता कामगार यूनियन अपनी ने मांगों को लेकर गुरुवार को लोकल बस स्टेंड स्थित सीटू कार्यालय पर एकत्रित होकर तीन बजे दोपहर को सचिवालय कूच किया।

यूनियन की महामंत्री मोनिका ने कहा की सरकार को समय समय पर आन्दोलन करने के पश्चात भी सरकार ने उनकी एक नही सुनी जिसके परिणाम स्वरूप उन्हें सचिवालय कूच करना पड़ा व आन्दोलन करना पड़ रहा है। उन्होंने इसकी सुचना जिला प्रशासन को पहले ही दे दी थी, किन्तु सुचना देने के बाद भी पुलिस द्वारा भोजन माताओं को सीटू कार्यालय से आगे नही बढ़ने दिया जा रहा था जिसका भोजन माताओं ने जम कर विरोध कर नारेबाजी शुरू कर दी और सचिवालय कूच किया सचिवालय कूच लोकल बस स्टैंड स्थित सीटू कार्यालय से इंद्रा मार्केट, लैंसडॉन चौक से होते हुए कनक चौक पर पुलिस ने बैरिकेट लगा कर रोक दिया। जिसके बाद भोजनमाताएं वहीं पर धरना दे कर बैठ गई और सभा की।
सभा को सीटू के जिला सचिव लेखराज ने सम्बोधित करते हुए कहा कि उत्तराखंड सरकार मध्याह्न भोजन योजना को निजी हाथो में दे रही है जिसका पुरजोर विरोध किया जायेगा जबकि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर ताजा पका हुआ भोजन ही बच्चों को दिया जाये जिसका उल्लंघन राज्य सरकार कर रही है। उन्होंने बताया कि संसदीय कमेटी द्वारा भी इस बात की पुष्टि की गई है लेकिन यह सरकार मध्याह्न भोजन योजना का निजीकरण करने पर उतारू है। सभा को सीटू के प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष वीरेंद्र भंडारी ने केंद्र और राज्य सरकार को आड़े हाथो लेते हुए कहा की केंद्र की मोदी सरकार द्वारा मध्याह्न भोजन योजना के बजट में भारी कटौती की है, जिसके परिणम स्वरूप इस योजना को सरकर की बंद करने की मंशा है। उन्होंने कहा की राज्य सरकार द्वारा भोजन माताओं को कार्य से हटाने की गहरी साजिश है जिसको कतई बर्दास्त नही किया जायेगा।
यूनियन की महामंत्री मोनिका ने कहा की सरकार द्वारा भोजनमाताओं को निकला जा रहा है। निकाली गई भोजन माताओं को वापस कार्य पर नही रखा जाता है और उन्होंने कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर मुख्यमंत्री उन्हें वार्ता के लिए नही बुलाते है तो भोजनमाताएं बड़ा आन्दोलन करेंगी। प्रदर्शन के दौरान काफी संख्या में भौजन माताएं मौजूद रहीं।
ज्ञापन में रखी मांगें
– भोजनामाताओं से अतिरिक्त कार्य न कराया जाएं।
– भाजनमाताओं का स्वास्थ्य बिमा कराया जाए।
– न्यूनतम वेतन देकर निकाली गई भोजनमाताओं को वापस कार्य पर लिया जाए।
– कार्य से निकलना बंद करने व सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए।

गंगा किनारे पांच किमी दायरे में खनन पर लगी रोक हटी

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नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और स्टोन क्रशर मालिकों को राहत देते हुए गंगा नदी के पांच किमी दायरे में खनन पर लगाई रोक हटा दी है। साथ ही सरकार की नीति के अनुसार खनन को हरी झंडी दे दी है।

हरिद्वार निवासी पवन कुमार सैनी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पिछले साल छह दिसंबर को रायवाला से भोगपुर तक गंगा नदी किनारे स्थापित स्टोन क्रशर बंद करने के साथ ही खनन कार्य पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। इस आदेश का अनुपालन न होने पर इसी साल तीन मई को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राज्य के मुख्य सचिव को आदेश का अनुपालन करने के लिए पत्र भेजा, मगर मुख्य सचिव द्वारा भी आदेश का अनुपालन नहीं किया गया। इसके बाद मातृसदन हरिद्वार के स्तर से अवमानना याचिका दायर की गई। इस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए मुख्य सचिव से 24 घंटे में रिपोर्ट तलब की थी। अगले ही दिन सरकार ने रायवाला से जगजीतपुर तक के सभी स्टोन क्रशर व खनन बंद करने की रिपोर्ट हाईकोर्ट में दाखिल कर दी थी।
इस बीच, राज्य सरकार व स्टोन क्रशर मालिकों की ओर से हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की गई। सरकार की ओर से महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर व मुख्य स्थायी अधिवक्ता परेश त्रिपाठी ने दलील दी कि पिछले साल छह दिसंबर को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से मातृसदन के प्रत्यावेदन व तत्कालीन डीएम के पत्र को आधार बनाते हुए गंगा के पांच किमी दायरे में खनन बंद करने का जो आदेश पारित किया गया, उससे पहले सरकार का पक्ष सुना ही नहीं गया। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ व न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने गुरुवार को इस पर सुनवाई करते हुए खनन पर लगी रोक हटा दी, साथ ही इस मामले में सरकार को तीन सप्ताह के भीतर प्रति शपथ पत्र प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने अपने आदेशों में यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश अवैध खनन करने व अवैध तरीके से स्टोन क्रशर लगाने की अनुमति का आधार नहीं बनाया जा सकता।

स्वाइन फ्लू का कहर जारी, 152 पहुंची मरीजों की संख्या

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स्वाइन फ्लू का प्रकोप थमने के बजाय लगातार बढ़ता ही जा रहा है। हर अंतराल बाद स्वाइन फ्लू के नए मामले सामने आ रहे हैं। यही नहीं स्वाइन फ्लू का वायरस एचवनएनवन जानलेवा भी साबित हो रहा है। इस बीमारी की गिरफ्त में आए 19 मरीज अब तक दम तोड़ चुके हैं। इनमें सर्वाधिक ग्यारह मरीज दून के रहने वाले हैं। जबकि हरिद्वार से एक, पौड़ी से दो, उत्तराकाशी से दो व यूपी के रहने वाले तीन मरीजों की मौत भी स्वाइन फ्लू से हो चुकी है। वहीं, गुरुवार को छह और मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। इसके बाद स्वाइन लू के मरीजों की संख्या बढ़कर 152 हो गई है। जबकि 26 संदिग्ध मरीजों की जांच रिपोर्ट आनी बाकी है।

दिल्ली की एनसीडीसी लैब से आज जिन सैंपल की जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई है उनमें से छह मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। इनमें पांच मरीजों का उपचार हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट में और एक मरीज का उपचार मैक्स अस्पताल में चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन माह में स्वाइन फ्लू का वायरस ज्यादा सक्रिय रहा है। जुलाई में 35 मरीजों में स्वाइन लू की पुष्टि हुई है। जबकि अगस्त में 76 और सितंबर में अब तक 25 मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। स्वाइन फ्लू का वायरस पहाड़ व मैदान में सक्रिय है। हालात यही रहे तो आने वाले दिनों में भी इस वायरस का प्रकोप यूं ही बदस्तूर बना रह सकता है।

महाराष्ट्र के ट्रैकर की मौत

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उत्तरकाशी जिले में क्यार कोटी- सांकरी ट्रैक पर पुणे महाराष्ट्र से आये एक ट्रैकर की मौत हो गई। जिसके रेस्क्यू के लिए सेना, एसडीआरएफ और आपदा प्रबंधन की टीम रवाना हो गई है।

चार सितंबर को पुणे के छह लोगों का ट्रैकर दल उत्तरकाशी पहुंचा। इसके बाद पांच सितंबर को पुणे के छह सदस्यीय दल ने स्थानीय स्तर पर चार पोर्टर और एक गाइड को अपने साथ लेकर झाला से कंडी-क्यार कोटी ट्रैक पर ट्रैकिंग करने निकल पड़े। इस बीच पुणे के एक ट्रैकर की रास्ते में मौत हो गई। इनमें से दो लोग जब बुधवार देर शाम को हर्षिल स्थित सेना की कंपनी के पास पहुंचे तो मामले का पता चल पाया। मृतक के साथ बाकी के ट्रैकर भी वहां रुके हुए हैं। जिस जगह पर वह रुके हुए हैं वह गंगोत्री हाईवे स्थित झाला से करीब 28 किमी दूर 15500 फीट की ऊंचाई पर है। जिसके कारण वहां फिलहाल हेलीकॉप्टर भी नहीं उतर पा रहा है। जिस ट्रैक पर ट्रैकर गये हैं वह इनर लाइन के अंदर बताया जा रहा है। लेकिन इसको लेकर ट्रैकर दल ने न ही जिला प्रशासन से और न ही वन विभाग से अनुमति ली है। जिसके कारण पुणे के ट्रैकर दल के सदस्यों का नाम पता भी प्रशासन के पास उपलब्ध नहीं है। लदाड़ी क्षेत्र में ट्रैकिंग का काम करने वाले बृजमोहन ने बताया कि यह ग्रुप टाटा का है। इसमें छह लोग पुणे महाराष्ट्र के हैं। नाम पते उन्हें किसी के मालूम नहीं है। उनके साथ एक गाइड सहित चार पोर्टर शामिल हैं। ट्रैकर को झाला से ट्रैकिंग करते हुए मोरी ब्लॉक के सांकरी निकना था। यह ट्रैक करीब 10 दिनों का है। गाइड और पोर्टर से उनका संपर्क नहीं हो पा रहा है। डीएफओ संदीप कुमार का कहना है कि जिस एरिया में ट्रैकर गये हैं वह इनर लाइन के अन्तर्गत आता है जिसको लेकर दल ने वन विभाग से कोई अनुमति नहीं ली है इसलिए उनके नाम पते भी दर्ज नहीं हैं। बगैर अनुमति के इनर लाइन में प्रवेश करने पर भारती वन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जायेगी। जबकि डीएम उत्तरकाशी डा आशीष कुमार का कहना है कि ट्रैकर की मौत किन कारणों से इस बारे में बाकी सदस्यों के नीचे आने पर ही पता चलेगा। हमारी पहली प्राथमिकता ट्रैकर को नीचे लाने की है। अगर ट्रैकर 12 हजार फीट के आस पास पहुंचते हैं तो सेना का चॉपर उन्हें आसानी से नीचे ले आयेगा। क्योंकि इससे ऊपर चॉपर के उतरने की व्यवस्था नहीं है। एसडीआरएफ, आपदा प्रबंधन और सेना के जवान ट्रैकर को रेस्क्यू करने गई है। 

‘मिनी कॉर्बेट’ की उम्मीदों को फिर लगे पंख

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जैव विविधता से लबरेज व पारिस्थितिक तंत्र के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण दलमोठी वन क्षेत्र को ‘मिनी कॉर्बेट’ के रूप में विकसित करने का सपना पिछले तीन वर्षों से पूरा नहीं हो सका है। ‘कॉर्बेट नेशनल पार्क’ की तर्ज पर जंगल सफारी के लिए वन विभाग ने जहां शासन को दोबारा प्रस्ताव भेज रहा। वहीं चौबटिया सेब बागान को हाइटेक बना पर्यटन विकास की तैयारी में जुटे उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल ने भी इस दिशा में दिलचस्पी दिखा उम्मीदों को पंख लगाए हैं।

दरअसल, उद्यान मंत्री सुबोध ने विश्व प्रसिद्ध चौबटिया सेब बागान को पुराने स्वरूप में लाने के साथ ही इसे हाइटेक बनाने का खाका तैयार किया है। हालिया निदेशक डॉ. बीर सिंह नेगी के प्रस्ताव पर उन्होंने बाकायदा चौबटिया गार्डन के विस्तरीकरण, रेड डेलिशियस सेब आदि के लिए एक करोड़ का बजट भी स्वीकृत किया था। इधर होटल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भावी ‘मिनी कॉर्बेट’ दलमोठी वन क्षेत्र को मूर्तरूप देने का आग्रह किया। इस पर सबोध ने वन मंत्री हरक सिंह रावत से मिलकर वन भूमि या एक्ट संबंधी अड़चन दूर कराने का भरोसा दिलाया है। ताकि जांगल सफारी शुरू करा पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा व स्थानीय स्तर पर रोजगार मुहैया कराया जा सके। मामले में डीएफओ अल्मोड़ा का कहना है कि प्राकृतिक रूप से समृद्ध दलमोठी वन क्षेत्र के मामले में प्रभावी प्रयास जारी हैं। उन्होंने बताया कि पर्यटन विकास को जैवविविधता वाले इस क्षेत्र में जंगल सफारी आदि के लिए शासन को दोबारा प्रस्ताव भेज रहे हैं।
‘फ्लोरा एंड फॉना’ फॉर्मूला से बदलनी थी तस्वीर
वर्ष 2014 आखिर में हजारों वनस्पतिक प्रजातियों एवं वन्य जीवों वाले इस जंगलात को ‘फ्लोरा एंड फॉना’ के तहत संवारने का प्रस्ताव बना। तत्कालीन कांग्रेस सरकार में संस्कृति एवं मेला संरक्षण समिति सदस्य रहे वर्तमान विधायक करन माहरा व एसडीएम एपी वाजपेयी ने जंगल सफारी का प्रस्ताव बना शासन को भेजा था। मकसद था करीब 1200 हेक्टेयर में फैले वन क्षेत्र को पर्यटन गतिविधियों का बड़ा केंद्र विकसित कर वन एवं वन्य जीवों को संरक्षण प्रदान करना था।
विविध वनस्पति प्रजातियां व वन्य जीवों का संसार
दलमोठी में विभिन्न वनस्पति प्रजातियों व वन्य जीवों का मोहक संसार है। बहुपयोगी चौड़ी पत्ते वाले बांज, बुरांश, काफल, उतीस आदि प्रजातियों के साथ ही पारिस्थितिक तंत्र में सहायक हजारों वनस्पतियां। वहीं गुलदार, जंगल कैट, जंगली सुअर, भालू, हिरन, घुरड़, काकड़, बारहसिंघा आदि अनगिनत वन्यजीवों के साथ ही तीतर, बटेर, जंगली मुर्गे आदि मौजूद हैं। 

‘बीमार’ हुआ दून अस्पताल, ऑपरेशन के दौरान बत्ती गुल

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दून महिला अस्पताल में गुरुवार को अजीब स्थिति पैदा हो गई। गर्भवती ऑपरेशन टेबल पर थी और बत्ती गुल हो गई। डॉक्टरों ने अनुभव से किसी तरह ऑपरेशन अंजाम दिया। लाइन में फॉल्ट आने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। दिनभर जेनरेटर से काम चलाया गया, पर रात होते-होते यह भी दगा दे गया। जिससे कई वार्डों में अंधेरा पसर गया।

अस्पताल में ओटी की लाइट बंद होने से शनिवार सुबह कई घंटे ऑपरेशन ठप रहे। अल सुबह इमरजेंसी में लाई गई कुछ गर्भवती महिलाओं का रिस्क लेकर ऑपरेशन किया गया। बाद में दोपहर बाद वैकल्पिक व्यवस्था की गई। इस बीच तिमारदारों के हाथपांव फूले रहे। शाम के वक्त जेनरेटर भी बंद पड़ गया और सर्जिकल समेत कई अन्य वार्ड में अंधेरा पसर गया। बताया गया कि यह दिक्कत कई दिन से थी, पर बार-बार मामला अधिकारियों के संज्ञान में लाने के बाद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। इसे लेकर डॉक्टरों में भी गुस्सा है। उनका कहना है कि यह बुनियादी व्यवस्था है। जिस पर उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए। इधर, महिला अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मीनाक्षी जोशी ने इसकी जानकारी दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा को दी। जिसके बाद उन्होंने वैकल्पिक व्यवस्था कराई। यह तय हुआ कि अगर दोबारा ऐसी घटना हुई तो ऑपरेशन रोकने के बजाए दून अस्पताल का ऑपरेशन थियेटर उपयोग में लाया जाएगा। डॉ. मीनाक्षी जोशी ने का कहना है कि इस आपात स्थिति में डॉक्टरों का अनुभव काम आया। अन्यथा बड़ी समस्या खड़ी हो जाती। आगे से ऐसा न हो, इसके लिए उच्चाधिकारियों को सूचना दी गई है।
आहरण अधिकार न मिलने से दिक्कत
दून व दून महिला अस्पताल के मेडिकल कॉलेज बनने के बाद अस्पताल में व्यवस्थाएं बेपटरी हो चुकी हैं। कभी बजट की कमी और कभी स्वीकृति के इंतजार में अस्पताल के छोटे-छोटे काम भी अटक जाते हैं। जिसका एक कारण है कि चिकित्सा अधीक्षकों के पास आहरण अधिकार नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और हाल में मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य सलाहकार डॉ. नवीन बलूनी ने इन्हें आहरण अधिकार दिए जाने की बात कही जरूर पर इस पर कार्रवाई नहीं हुई है।
एमएसबीवाई के मरीजों के भी नहीं हुए ऑपरेशन
अस्पताल में गुरुवार को मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना (एमएसबीवाई) के मरीजों को खासी फजीहत झेलनी पड़ी। न उनके ऑपरेशन हुए और न टेस्ट। मरीज दिनभर एमएसबीवाई काउंटर पर भटकते रहे। हुआ यह कि एमएसबीवाई काउंटर पर इंटरनेट ठप हो गया। कर्मचारियों ने डोंगल से व्यवस्था सुचारू करनी चाही पर इसने भी काम नहीं किया। जबकि इस सुविधा के तहत मरीज की जानकारी व दस्तावेज साइट पर अपलोड करने पड़ते हैं।

बाबाओं की चहेती चरस हसीना गिरफ्तार

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हरिद्वार में वह चरस हसीना के नाम से मशहूर और बाबाओं के लिए नशे की चलती फिरती दुकान कही जाने वाली चरस हसीना को पुलिस ने धर दबोचा। गुरुवार को वह पुलिस के हत्थे चढ़ गयी।
बरेली की रहने वाली यह चरस हसीना बरेली से चरस लाकर हरिद्वार में बाबाओं को सप्लाई करती थी। पुलिस ने इसके पास से 12 हजार रुपये नकद और 450 ग्राम चरस बरामद की है। फिलहाल पुलिस इस महिला से पूछताछ कर रही है। पुलिस पूछताछ में उन लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं, जो इससे चरस लेते थे। इनमें कई बडे़ नाम भी हो सकते हैं। गुरुवार को शहर कोतवाली की मायापुर चैकी पुलिस ने एक महिला को गिरफ्तार किया जो चरस बेचने का काम करती थी। इसके पास से पुलिस को 12 हजार रुपये नकद और तराजू-बाट व 450 ग्राम चरस बरामद की हैं। पुलिस पूछताछ में उस महिला ने बताया कि वहा बरेली से चरस ला कर हरिद्वार में बाबाओं को बेचती हैं। उसने बताया कि वह कई सालों से यह काम करती हैं। मायापुर चौकी प्रभारी रमेश सैनी ने बताया कि महिला ने जानकारी दी कि वह गरीब घर की है और पति शराब पीकर नशे में रहता है इसलिए यह अपने बच्चों के लालन-पालन के लिए चरस बेचने का काम करती हैं। सैनी ने बताया कि इस महिला से पूछताछ की जा रही है और संबधित धाराओं में इसका चालान किया जा रहा हैे।