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राज्य में तीन नए आयुर्वेदिक कॉलेजों को मिली मान्यता

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देहरादून। आयुर्वेद चिकित्सक बनने के इच्छुक प्रदेश के युवाओं के लिए अच्छी खबर है। राज्य में तीन नए आयुर्वेदिक कॉलेजों को मान्यता मिल गई है। यह कॉलेज बेशक निजी क्षेत्र के हैं लेकिन इनकी पचास प्रतिशत सीट राज्य कोटे में ही भरी जाएंगी।

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय ने इसी माह तीन सितम्बर को यूएपीएमटी का आयोजन किया था। जिसका परिणाम जारी किया जा चुका है और विवि अक्टूबर माह में काउंसलिंग आयोजित करेगा। यूएपीएमटी की अधिसूचना में तब सरकारी व निजी कॉलेजों की 880 सीट का उल्लेख था। जिसमें अब बढ़ोत्तरी हो गई है। राज्य में तीन और निजी कॉलेजों को बीएएमएस की 60-60 सीट के लिए मान्यता मिल गई है। इनमें शिवालिक इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद एंड रिसर्च झाझरा, दून इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद फैकल्टी मेडिकल साइंसेज शंकरपुर सहसपुर और देवभूमि मेडिकल कॉलेज ऑफ आयुर्वेद एंड हॉस्पिटल मांडूवाला शामिल हैं। विवि के कुलसचिव प्रो. अनूप कुमार गक्खड़ ने बताया कि मान्यता मिलने पर इन कॉलेजों को भी काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है। इनमें 30-30 सीट राज्य कोटे में भरी जाएगी। ऐसे में सीट बढ़ने का फायदा राज्य के युवाओं को मिलेगा। 

गैस सिलेंडरों से भरे ट्रक में लगी आग

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सोमवार दिन में करीब 12 बजे नैनीताल वीरभट्टी के पास एक गैस सिलेंडर के ट्रक में आग लग गई जिसके चलते सिलेंडरों में विस्फोट भी होने लगा। इस दौरान विस्फोट से ट्रक के परखच्चे उड़ गए। हादसे के बाद यातायात बंद हो गया है। चालक और क्लीनर किसी तरह भागकर जान बचाने में सफल रहे।  भवाली वीरभट्टी रास्ता आम जनता के लिए बंद कर दिया गया और साथ ही फायर ब्रिगेड और साथ ही फायर ब्रिगेड और एक आॅफिसर को घटना स्थल के पास भेज दिया गया आग पर काबू करने के लिए।

हल्द्वानी से अल्मोड़ा की ओर जा रहे गैस सिलेंडर से लदे ट्रक पर सोमवार दिन में करीब 12 बजे आग लग गई। गोठिया पुल पर ट्रक में आग लगने की भनक लगते ही चालक व क्लीनर ट्रक से कूदकर दूर भाग निकले। सूचना पर नैनीताल से फायर ब्रिगेड भी मौके के लिए रवाना कर दी गई।सिलेंडर की गाड़ी में आग ठीक एक पुराने पुल के ऊपर हुई जोकि एनएच 87 का हिस्सा भी है, खबर  यह भी आ रही है कि है कि पुल भी इस विस्फोट से कमजोर हुआ है।

एसएसपी नैनीताल जन्मेजय खंडूड़ी ने बताया कि ”लगभग 12 बजे के आसपास ये घटना हुई और तुरंत ही फायर ब्रिगेड टीम और फायर आॅफिसर घटना स्थल के लिए रवाना किए गए।इस गटना में जान हानि की कोई खबर नहीं है।पहले पुलिस के लिए महत्तवपूर्ण था आग को काबू  में करना।घटना के दौरान ट्रेफिक रोक दिया गया था।बाद में घटना की जांच की जाएगी”।

देश विदेश के श्रद्धालु होंगे महासू महिमा से परिचित

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विकासनगर। अब देश, विदेश के श्रद्धालु भी जौनसार-बावर परगने समेत रवांई, जौनपुर व हिमाचल प्रदेश के आराध्य देव चार महासू की महिमा से परिचित होंगे। जय महासू सिरीज ने महासू दरबार चलो रे नाम से वीडियो एलबम तैयार की है। इसमें चार महासू की वंदना व महिमा का वर्णन है।

रविवार को एलबम के निर्माता आशीष भट्ट ने बताया कि धार्मिक नगरी हनोल, थैना सहित जौनसार-बावर परगने में चार महासू के दर्जनों मंदिर है, जहां देश विदेश से श्रद्धालु आराध्य देवों के दर्शन के लिए आते हैं। हिंदी में महासू महिमा का वर्णन उपलब्ध नहीं होने से श्रद्धालुओं को इनकी विस्तृत जानकारी नहीं मिल पाती है। लिहाजा जय महासू सिरीज के बैनर तले एक वीडियो एलबम तैयार किया गया है। एलबम में महासू महिमा के साथ ही परगने की सुंदरता को भी दर्शाया गया है ताकि धार्मिक पर्यटन के साथ ही मुख्य पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सके। एलबम में गीत संगीत स्थानीय प्रतिभाओं द्वारा दिया गया है। उन्होंने बताया कि वीडियो एलबम आगामी 28 सितंबर को बाजार में उपलब्ध हो जाएगा। इस दौरान गीतम पंडित, मनोज भट्ट, रोशन, पिंकेश, शेखर अधिकारी, राहुल वर्मा, हिरोज महंता आदि मौजूद रहे।

दून में 4 जुअारी गिरफतार

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कल रात धारा चौकी पुलिस द्वारा सेंट थॉमस स्कूल के पीछे फालतू लाइन से 4 व्यक्ति ललित थापा, मोनू कुमार,रोबिन गर्ग व विकास त्यागी  को सार्वजनिक स्थान पर जुआ खेलते हुए गिरफ्तार किया गया।

मौके से उक्त अभियुक्तों के कब्जे से 8400/- ₹ की धनराशि बरामद की गई। अभियुक्तों के विरुद्ध धारा 13 जी एक्ट के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया। जिन्हें आज माननीय न्यायालय पेश किया जाएगा।

बजट का संकट, अधर में लटका ‘अमृत प्रोजेक्ट’

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देहरादून। केंद्र सरकार भले ही अमृत प्रोजेक्ट को लेकर गंभीरता दिखा रही हो, लेकिन स्थिति यह है कि तीन साल पहले शुरू हुए इस प्रोजेक्ट के लिए अब तक सरकार ने एक तिहाई बजट भी नहीं भेजा है। इसका परिणाम ये है कि 90 में से 87 योजनाओं का काम अब तक पूरा नहीं हो सका है।

वर्ष 2015 में शुरू हुए अमृत प्रोजेक्ट के लिए 144.83 करोड़ रुपये में 30 पेयजल, सीवेज, ड्रेनेज योजनाएं स्वीकृत की गई लेकिन इसमें से सिर्फ बीस फीसद बजट ही जारी किया गया। इसके बाद वर्ष 2016 में 192.58 करोड़ रुपये में 31 योजनाएं स्वीकृत हुई। इसमें मात्र देहरादून के लिए बीस फीसद बजट जारी किया गया। बाकी छह शहरों के लिए सरकार ने कोई पैसा नहीं दिया। इतना ही नहीं इस साल 230.49 करोड़ रुपये में 29 योजनाएं स्वीकृत हुई लेकिन इस साल अब तक पेयजल निगम को बजट के नाम पर एक रुपया तक नहीं मिला है। इतना ही नहीं, पेयजल निगम की भी अमृत के प्रति कार्यप्रणाली सुस्त है। इसी का नतीजा है कि तीन साल के भीतर पेयजल निगम मात्र तीन योजनाओं के ही निर्माण कार्य पूरा कर पाया है, बाकी के कार्य अधूरे पड़े हुए हैं। चूंकि, ये प्रोजेक्ट पांच साल का है और इस रफ्तार से तो समय से प्रदेश में अमृत प्रोजेक्ट पूरा होने की उम्मीद नहीं है।
सूत्रों की मानें तो इस साल के लिए बजट की एक किश्त शहरी विकास विभाग के पास पहुंची हुई है लेकिन अब तक यह पैसा पेयजल निगम को नहीं मिल पाया है। यदि शहरी विकास विभाग समय से इस पैसे को निगम को सौंप दे तो योजनाओं के निर्माण कार्य में तेजी आए। वहीं पेयजल निगम प्रबंध निदेशक भजन सिंह ने कहा कि बजट के अभाव में योजनाओं के निर्माण में कुछ देरी हो रही है। इस संबंध में बात चल रही है कि जल्दी बजट मंगाया जाए, जिससे कि योजनाओं का निर्माण समय से पूरा हो सके। 

भैयादूज को बंद होंगे केदारनाथ धाम के कपाट

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रुद्रप्रयाग। विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम के कपाट भैयादूज पर्व पर 21 अक्टूबर को विधि-विधान पूर्वक बंद कर दिए जाएंगे। जबकि द्वितीय केदार मद्महेश्वर धाम व तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट बंद होने की तिथि विजयादशमी पर्व पर घोषित की जाएगी। इन तीनों धामों के कपाट बंद करने के लिए बद्री-केदार मंदिर समिति ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।

प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि पर्व पर केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की घोषणा होती है, जबकि धाम के कपाट भैयादूज पर बंद होने की पौराणिक परंपरा है। इसके साथ ही द्वितीय केदार मद्महेश्वर व तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट बंद होने की तिथि की आधिकारिक घोषणा भी 30 सितम्बर को विजयदशमी पर्व पर की जाएगी।
बद्री-केदार मंदिर समिति के कार्याधिकारी अनिल शर्मा ने बताया कि भगवान मद्महेश्वर के कपाट बंद होने की तिथि पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ व तुंगनाथ मंदिर के कपाट बंद होने की तिथि मार्कंडेय मंदिर मक्कूमठ में तय होगी।

लावारिस गायों के लिए गौसदन बनाने की मांग

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पछवादून क्षेत्र में लावारिस गौ वंश के संरक्षण की कोई भी व्यवस्था नहीं होने के चलते बाड़वाला से लेकर सेलाकुई तक हर रोज सैंकड़ों गौवंश राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ ही अन्य संपर्क मार्गों पर घूमते रहते हैं। लावारिश घूम रहे पशु अक्सर वाहनों की चपेट में आकर दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं, जबकि इन पशुओं पर तस्करों की नजर भी लगी रहती है। वारियर्स गर्ल्स ग्रुप हरबर्टपुर ने गौ वंश के संरक्षण के लिए उचित व्यवस्था किए जाने की मांग शासन, प्रशासन से की है।

पांच लाख से अधिक वाली पछवादून तहसील के बाशिंदों को मुख्य पेशा कृषि है, लिहाजा यहां ग्रामीण क्षेत्रों के साथ ही शहरी क्षेत्रों में भी सहायक व्यवसाय के तौर पर पशुपालन किया जाता है। अधिकांश लोगों द्वारा पालतू पशुओं की उपयोगिता समाप्त होने पर उन्हें लावारिश छोड़ा जा रहा है, जो अक्सर रात दिन राष्ट्रीय राजमार्ग सहित गांवों के संपर्क मार्गों पर घूमते रहते हैं। ऐसे लावारिश पशु अक्सर तेज गति से चल रहे वाहनों की चपेट में आने से दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं, जबकि कई बार ये पशु वाहन दुर्घटनाओं का कारण भी बनते हैं। साथ ही इन पशुओं पर तस्करों की निगाहें भी लगी रहती हैं।

तहसील क्षेत्र में सरकारी स्तर पर लावारिश गौवंश के संरक्षण के लिए काई भी गौसदन व कांजी हाउस नहीं है। निजी स्तर पर छरबा पंचायत के पूर्व प्रधान रूमीराम जसवाल ने जरूर गौशाला बनाई है लेकिन सरकारी सहायता नहीं मिलने के चलते उसकी क्षमता भी सौ से अधिक गौवंश के संरक्षण की नहीं है। वारियर्स गर्ल्स ग्रुप ने लावारिश पशुओं के संरक्षण के लिए कांजी हाउस या अन्य कोई उचित व्यवस्था किए जाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया है।

ज्ञापन के माध्यम से पछवादून क्षेत्र सहित तहसील क्षेत्र में गौ सदन बनाने व उसमें पशुओं के संरक्षण और पोषण की उचित व्यवस्था मांग की है, जिससे लावारिश गोवंश के संरक्षण के साथ ही सड़क दुर्घटनाओं पर भी रोक लग सके। ज्ञापन पर ग्रुप की अध्यक्ष रिहाना सिद्दीकी, रितु सैनी, प्रीति सैनी, अनीता सैनी, नरेश, मोहसिन आलम के हस्ताक्षर हैं।

लगातार बारिश से गंगा खतरे के निशान के करीब

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rains cause water level in rivers to rise

हरिद्वार। तीर्थनगरी में पिछले तीन दिन से हो रही बारिश से गंगा का जलस्तर एक बार फिर चेतावनी स्तर 293 मीटर के करीब पहुंच गया है। शाम को गंगा का जलस्तर 292.65 मीटर रिकॉर्ड किया गया, जो चेतावनी स्तर 293 और खतरे के निशान 294 मीटर के करीब पहुंच गई है।

जिला आपदा कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के अनुसार शाम चार बजे तक गंगा का जलस्तर 292.65 मीटर पर पहुंची है। हरिद्वार में 89, और लक्सर तहसील क्षेत्र में 60 मिमी बारिश दर्ज की गई। बारिश फिर हुई तो जलस्तर में इजाफा हो सकता है।
जिलाधिकारी दीपक रावत ने बताया कि बारिश को देखते हुए सभी को अलर्ट पर रखा गया है। गंगा के तटीय क्षेत्रों में रहने वालों को सचेत किया गया है। वहीं संबंधित तहसीलों के अधिकारियों को तहसीलवार स्थिति पर नजर रखने की हिदायत देकर एहतियाती उपाय करने को कहा है।

सैकड़ों ने सुनी पीएम मोदी की मन की बात

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देहरादून। धर्मपुर विधानसभा के दीपनगर वार्ड में विश्वकर्मा मंदिर में प्रधानमंत्री मोदी की मन की बात कार्यक्रम को सैंकड़ों लोगों ने सुना। इस मौके पर हरिद्वार सांसद डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने भी लोगों के साथ कार्यक्रम सुना।

डॉ निशंक ने कहा कि आज मन की बात कार्यक्रम को तीन वर्ष पूरे हो गए हैं। प्रधानमंत्री की मन की बात से लगातार लोगों का भी मन बदल रहा है। मोदी मन की बात कार्यक्रम छोटी-छोटी बातों से लोगों को जोड़कर क्रांतिकारी काम कर रहे है। आज स्वच्छता को लेकर देश का हर नागरिक आंदोलन के रूप में स्वछता के कार्यक्रम में अपना योगदान दे रहा है। लोग जुड़कर कुछ ना कुछ देश के लिये करने का मन बना रहे हैं।
मन की बात में मोदी ने कहा कि लोगों को घूमने से एक से दूसरे क्षेत्र की संस्कृति, सभ्यता, भाषा की जानकारी मिलेगी और आप अपने अनुभव लोगों को बताएं। मोदी के आह्वान कर कहा पर डॉ निशंक ने पिछले सप्ताह भारत सरकार की ओर से अपने इंडोनेशिया दौरे के अनुभव कार्यकर्ताओं के साथ बांटते हुए कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम राष्ट्र आज अपने देश मे रामलीला, देवी-देवताओं के चित्र अपनी मुद्रा में अंकित कर, अपनी देश की वायु सेवा का नाम गरुड़ रखा है। 

काश्तकारों की चौलाई की फसल कीड़ों ने कर दी बर्बाद

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उत्तरकाशी जिले में अस्सी गंगा घाटी क्षेत्र के अधिकतर ग्रामीणों की चौलाई और आलू की खेती पर ही आजिविका निर्भर है, लेकिन इस सीजन में उनकी चौलाई की फसल को कीड़ों ने बर्बाद कर दी है। जबक‌ि बारीश से खस्ताहाल हुए पैदल मार्गों की वजह से काश्तकार आलू की फसल को भी मंडी तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। यहां के मार्ग वन विभाग और जिला पंचायत के अंर्तगत आते हैं, परंतु दोनों ही कोई कदम उठाने को तैयार नहीं हैं।

संगमचट्टी क्षेत्र में पड़ने वाली अस्सी गंगा घाटी के सेकू, गजोली, भंकोली, अगोड़ा सहित नौ गांवों के काश्तकारों पर इस साल कुदरत ने जमकर कहर बरपाया है। चौलाई और आलू पर आ‌धारित अर्थव्यवस्था को कीड़ों और बारिश ने बर्बाद कर दिया है। ऐसे में प्रशासन ने भी यहां के किसानों की समस्याओं पर आंख मूंद ली है।

सेकू गांव के पूर्व जिला पंचायत सदस्य, कमल सिंह रावत ने बताया कि, “कीड़ों द्वारा तबाह की गई चौलाई की फसल के बाद अब आलू की फसल पर ही सारी उम्मीदें टिकी हैं लेकिन सभी पैदल मार्ग बंद होने की वजह से हम फसल को बाजार तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। इन जानलेवा मार्गों पर घोड़े खच्चर तो क्या इंसान भी नहीं चल सकते हैं। जिला पंचायत और वन विभाग से कई बार शिकायत करने पर भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।”

वहीं डीएफओ संदीप कुमार ने कहा कि, “वन क्षेत्र में आने वाले सभी मार्गों की मरम्मत के लिए शासन प्रशासन से बजट मांगा गया है। अस्सी गंगा घाटी के ग्रामीण अपने क्षेत्र के मार्गों की जानकारी विभाग में दे सकते हैं। जिसके बाद इनके पुनः निर्माण के लिए प्रस्ताव भेज दिया जाएगा।”