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ऋषिकेश में एलएसएङी ड्रग्स बरामद, तीन अभियुक्त गिरफ्तार

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नशे के विरूध चलाये जा रहे अभियान को जारी रखते हुए देहरादून पुलिस ने ऋषिकेश से एलएसएङी ड्रग्स की खेप पकड़ी गयी, बरामद माल की अर्न्तराष्ट्रीय कीमत लगभग 5,00,000 रूपये बतायी जा रही है। एलएसएङी ड्रग्स वर्तमान समय का अल्ट्रा मॉडर्न व सॉफिस्टिकेटेड ड्रग्स है जो मोस्ट पावरफुल साइकेडेलिक श्रेणी में आता है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदया व पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के निर्देशन व सहायक पुलिस अधीक्षक/ क्षेत्राधिकारी ऋषिकेश, प्रभारी निरीक्षक कोतवाली ऋषिकेश के नेतृत्व में ऋषिकेश क्षेत्र में अवैध रूप से नशीले पदार्थो की तस्करी व बिक्री करने वालों के विरूद्ध अभियान चलाया जा रहा है।

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अभियान के दौरान प्रभारी कोतवाली व वरिष्ठ उप निरीक्षक हेमन्त खण्डूरी के नेतृत्व में एक टीम गठित की गयी। गठित टीम द्वारा नशीले पदार्थो की तस्करी व बिक्री करने वालों के सम्बन्ध में गोपनीय रूप से जानकारी एकत्रित की गयी। दिनांक 11.10.17 को टीम, नशीले पदार्थो की बिक्री करने वालों की तलाश में त्रिवेणीघाट व मायाकुण्ड पंहुची तो नावघाट के पास रामानुज आश्रम के पास तीन व्यक्ति एक लोहे की बैंच में बैठे दिखाई दिये जो अचानक पुलिस को अपनी ओर आता देख जाने लगे, पुलिस टीम ने सक्रियता दिखाते हुये तीनो व्यक्तियों को मौके पर ही पकड़ लिया।

घबराकर तीनों व्यक्तियों ने बताया कि हमारे पास एलएसएङी, स्ट्रेप पेपर व एलएसएङी ड्रॉप है, जो नशा करने के काम आता है, यह विदेशी नशा है जिसे लेने के 8-10 घण्टे के बाद तक व्यक्ति मदहोश रहता है। यह नशा ज्यादातर विदेशी लोग व नयी उम्र के युवक-युवतियाँ द्वारा हाई प्रोफाइल पार्टियों में लेते है।

इसे मुख्यतः पब्स, रेव पार्टियों, कैम्पिगं आदि में युवक युवतियां लेते हैं। मौके पर सहायक पुलिस अधीक्षक/क्षेत्राधिकारी श्री मंजूनाथ टिसी भी मौके पर आये, जिनके समक्ष पकड़े गये व्यक्तियों की तलाशी ली गयी तो इनके पास से भारी मात्रा में एलएसएङी, स्ट्रेप पेपर व एलएसएङी ड्रॉप बरामद हुई। इन्होंने बताया कि एक एलएसएङी ड्राप की कीमत 2-3 हजार रूपये है। तीनों व्यक्तियों को अवैध रूप से एलएसएङी स्ट्रेप पेपर व एलएसएङी ड्रॉप रखने के जुर्म में गिरफ्तार किया गया। अभियुक्तगण के विरूद्ध एनडीपीएस एक्ट के अन्तर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया, जिन्हे माननीय न्यायालय में पेश किया जायेगा। अभियुक्तो से अन्य जानकारी प्राप्त की जा रही है।

चार धाम ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट सरकार की प्राथमिकता: सीएम

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देहरादून। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में रेल विकास निगम लिमिटेड के अध्यक्ष व मुख्य प्रबन्ध निदेशक सतीश चन्द्र अग्निहोत्री, मुख्य परियोजना प्रबन्धक हिमांशु बडोनी ने भेंट कर चारधाम तथा ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट की प्रगति की अद्यतन स्थिति से अवगत कराया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना से सम्बन्धित भूमि अधिग्रहण तथा फाॅरेस्ट क्लियरेन्स की प्रक्रिया को समयबद्ध रूप से पूरा किया जाए।पूरी परियोजना पर एकसाथ कार्य आरम्भ किया जाए। चारधाम तथा ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट राज्य सरकार की प्राथमिकता है। चारधाम प्रोजेक्ट के फाइनल लोकेशन सर्वे को शीघ्र पूरा किया जाए।

बैठक में आर.वी.एन.एल. के पदाधिकारियों द्वारा बताया गया कि परियोजना से सम्बन्धित टेन्डर प्रक्रिया आरम्भ कर दी गई है। अगले वर्ष जून-जुलाई से परियोजना की सुरंगों का निमार्ण कार्य आरम्भ कर दिया जाएगा। परियोजना के ग्राउन्ड वर्क तथा लोकेशन सर्वे में सेटेलाइट इमेजरी तथा डिजिटल रेजोल्यूशन टेक्नाॅलोजी का प्रयोग किया जाएगा। उत्तराखण्ड के पर्यावरणीय व पारिस्थिति की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए भू-गर्भीय निरीक्षण के दौरान अत्याधुनिक तकनीकी का प्रयोग किया जाएगा।

पेयजल निगम के 14 अधीक्षण अभियंताओं को नोटिस

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देहरादून। जूनियर इंजीनियरों की डीपीसी (डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी) के लिए सीआर (गोपनीय प्रतिवेदन) समय से न भेजने पर पेयजल निगम प्रबंधक ने 14 अधीक्षण अभियंताओं को नोटिस जारी किया है कि यदि उन्होंने शीघ्र सीआर नहीं भेजी तो प्रबंधन उनके खिलाफ कार्रवाई करेगा।

गौरतलब है कि पेयजल निगम में प्रबंधक लंबे समय से जूनियर इंजीनियरों की अपर सहायक अभियंता पद पर पदोन्नति को अधर में लटकाए हुए है। इस संबंध में डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ पेयजल निगम के बैनर तले जूनियर इंजीनियर कई बार प्रबंधन से वार्ता कर डीपीसी की प्रक्रिया को पूरा करने की मांग कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रबंधन की सुस्ती को देखते हुए डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ ने दो दिन पहले प्रबंध निदेशक भजन सिंह को शीघ्र डीपीसी न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी थी। इसके बाद प्रबंधन हरकत में आया और दस्तावेजों की जांच की तो पता चला कि अब तक अधीक्षण अभियंताओं ने जूनियर इंजीनियरों की सीआर ही नहीं भेजी है। जबकि इस संबंध में पेयजल निगम की ओर से अधीक्षण अभियंताओं को पत्र भेजा जा चुका है। अब प्रबंधन ने इन अधिकारियों को अंतिम नोटिस जारी कर दिया है।
डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के प्रदेश अध्यक्ष रामकुमार ने बताया कि अपर सहायक अभियंता के करीब 60 पदों पर डीपीसी होनी है। संघ की ओर से प्रबंधन को चेतावनी दी जा चुकी है, यदि जल्द डीपीसी नहीं की गई तो संघ कार्य बहिष्कार कर आंदोलन करेगा।

कैबिनेट,10 साल के लिए शराब पर एक्साइज ड्यूटी तय

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देहरादून। राज्य कैबिनेट ने शराब पर 10 साल के लिए अधिकतम एक्साइज ड्यूटी तय कर दी है। इसे आबकारी विभाग जरूरत के मुताबिक हर साल तय सीमा तक ड्यूटी बढ़ा सकता है।

सबसे अधिक एक्साइज ड्यूटी व्हिसकी, रम और वाइन पर बढ़ाई गई है। यह दर 1500 अधिकतम 1500 रुपये प्रति लीटर तय की गई है। पहले यह ड्यूटी 500 रुपये थी। बीते कुछ सालों में एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी के बाद इस सीमा को लगभग प्राप्त कर लिया गया था। वहीं, देशी शराब पर अधिकतम एक्साइज ड्यूटी 500 रुपये तय की गई, जो कि अब तक 200 रुपये थी। इसी तरह भांग के लिए यह दर 75 रुपये तय की गई।
संयुक्त आबकारी आयुक्त टीके पंत के मुताबिक, राज्य गठन के बाद अधिकतम एक्साइज ड्यूटी वर्ष 2001 में तय की गई थी और इसके बाद इसमें 2010 में संशोधन किया गया। अधिकतम एक्साइज ड्यूटी निश्चित वर्षों के लिए होती है और विभाग नीति के अनुरूप हर साल जरूरत के मुताबिक इसमें बढ़ोतरी करता रहता है। सयम सीमा प्राप्त हो जाने के बाद बिना एक्ट में संशोधन किए बिना इससे अधिक ड्यूटी नहीं बढ़ाई जा सकती। इस समय एक्साइज ड्यूटी की अधिकतम सीमा में बढ़ोतरी की जरूरत महसूस होने लगी थी, लिहाजा एक्ट में संशोधन के बाद यह राह खुल गई है।

नहीं घटे पेट्रो-पदार्थों के दाम, शराब की दुकानों का समय बदला

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देहरादून। उतराखंड सरकार की मंत्री परिषद की बैठक में कई अहम मुद्दों पर मुहर लगी। अब पहले की तरह पर्वतीय क्षेत्रों में भी शराब की दुकानें रात्रि 10 बजे तक खुलेंगी। पूर्व में सरकार ने मैदानी जिलों को छोड़कर राज्य के नौ जिलों में शराब की दुकानों के खुलने का समय दिन में 12 से शाम छह बजे तक ही था। वहीं, गुजरात और महाराष्ट्र के बाद उत्तराखंड में भी पेट्रोलियम पदार्थों में पर वैट और सेस में दो फीसद की कमी की चर्चाएं रहीं, लेकिन कैबिनेट में इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई।

बुधवार को कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले लिए गए, लेकिन पेट्रो पदार्थों की कीमतों में कमी का मुद्दा कोरी अफवाह ही साबित हुआ। वहीं, सरकार के शराब की दुकानों के समय पर बैकफुट पर आने को लेकर विपक्ष ने प्रहार शुरू कर दिया। दरअसल, शराबबंदी के नाम पर वोट मांगे जाने और बाद में शराब की दुकानों के खोलने के समय में बदलाव को लेकर राज्य सरकार शुरू से ही विपक्ष के निशाने पर रही है। राज्य में शराब की दुकानों के विरोध में महिलाओं के लंबे आंदोलन को लेकर भी विपक्ष सरकार को घेरता रहा है। ऐसे में इस मामले पर एक बार फिर विपक्ष सरकार पर हमलावर होगा। राजस्व घाटे को देखते हुए सरकार ने दुकानों के समय में बदलाव कर पूर्ववर्ती व्यवस्था लागू कर दी है।
कैबिनेट बैठक के बाद कैबिनेट मंत्री और राज्य सरकार के प्रवक्ता मदन कौशिक ने बताया कि कैबिनेट में निकाय और निगमों के कर्मचारियों को सातवें वेतनमान का लाभ दिए जाने, उज्जवला योजना के तहत शेष परिवारों को एलपीजी कनेक्शन देने, निगमों के विस्तार, शासकीय संस्थानों, निकायों में एलईडी बल्बों के इस्तेमाल समेत विभिन्न फैसले लिए गए। वहीं, डीजल व पेट्रोल वैट में दो फीसद कमी की दिनभर चली चर्चा के बाद वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि पेट्रो पदार्थों पर वैट या सेस कम करने का कोई फैसला अभी नहीं लिया गया है।
कैबिनेट के प्रमुख फैसले
-महिला शसक्तीकरण बाल विकाश के कर्मियों की पूर्व में चली 37 दिन की हड़ताल की अवधि को उपार्जित अवकाश में तब्दील किया जायेगा।
-म्रतक आश्रित कोटे में तलाकशुदा पुत्री को भी शामिल किया गया।
-आपदा प्रबंधन विभाग के अधीन प्राधिकरण में सेवा शर्तों को अनुमति तथा पदों को स्वीकृति दी गयी।
-शासकीय अर्धशासकीय शैक्षणिक संस्थाओं, निकायों आदि में एलईडी बल्बो आदि को अनिवार्य किया गया।
-रुड़की नगर निगम में ग्राम रहीमपुर व शिवम् विहार कालोनी के क्षेत्र को शामिल करने का निर्णय लिया गया। पाडली गुज्जर व रामपुर को नगर निगम से बाहर करने का निर्णय लिया गया।
-उज्वला योजना के तहत लाभ न पाने वाले शेष 4 लाख गरीब परिवारों को एलपीजी कनेक्शन वितरित किए जाएगे।
-उत्तरखंड सचिवालय अपर निजी सचिव पद के रिक्त पदों पर पदोंनत्ति को कमिटी के सुपुर्द किया गया।
-राज्य में अराजपत्रित कर्मचारियों को अधिकतम 7 हजार रुपये बोनस देने का निर्णय लिया गया।
-जिला पंचायत कर्मचारियों को सातवां वेतनमान देने की अनुमति, जीएमवीन, केएमवीएन को सातवां वेतनमान देने का निर्णय लिया गया।
-आबकारी विभाग में मदिरा शुल्क निर्धारण का आध्यादेश लाने की कैबिनेट की मंजूरी, आबकारी विभाग को ही मूल्य निर्धारण का अधिकार होगा।
-हरिद्वार नगर निगम में ज्वालापुर, बहरहादूत, जगजीतपुर, देवपुरा आंशिक, अहमदपुर कड़क के 665 हेक्टेयर क्षेत्र को शामिल करने का निर्णय लिया गया।
-राजकीय महाविद्यालयों में अध्यापकों के रिक्त पदों पर नियुक्ति हेतु सम्बंधित प्रधानाचार्य को अधिकृत किया गया की 500 रुपये प्रति पीरियड के हिसाब से टीचर की अस्थाई व्यवस्था करें।
-जीएसटी प्रणाली के अंतर्गत पंजीयन हेतु राज्य के लिए वार्षिक आवर्त की सीमा बढ़ाए जाने का निर्णय लिया गया।

विस अध्यक्ष ने गंगा महोत्सव का किया शुभारम्भ

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हरिद्वार। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचन्द्र अग्रवाल बुधवार को नागरिक मंच एवं राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय ऋषिकुल के संयुक्त तत्तवाधान में आयोजित हरिद्वार गंगा महोत्सव समारोह में शिरकत की। यहां उन्होंने मालवीय सभागार ऋषिकुल में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित हुये और कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

समारोह को सम्बोधित करते हुए अग्रवाल ने कहा कि मां गंगा में वह पूर्ण आस्था रखते हैं। उनका प्रतिदिन का नियम है कि वह मां गंगा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि हम सबको मां गंगा की पवित्रता बनाये रखने तथा इसे गन्दा न होने दें। कूड़ा करकट पालीथिन आदि गंगा में न डालें। स्वच्छ गंगा संकल्प पर्व के रूप में मनाया जाए। इसलिए इस कार्यक्रम को गंगा के किनारे आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष की शपथ लेते वक्त मैने संस्कृत में शपथ ली थी, इसलिए अन्य समितियों के अलावा मेरे कार्यकाल में संस्कृत उन्ययन समिति का गठन किया गया। इस अवसर पर उन्होंने हरिद्वार नागरिक मंच की बेबसाइट का बटन दबाकर शुभारम्भ भी किया। सभी जनपद वासियों को दीपावली एवं भैया दूज की शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर विधायक आदेश चौहान, महन्त निर्मल अखाड़ा के सचिव बलवंत सिंह, सतीश कुमार जैन, जगदीश लाल पाहवा प्रो. पीएस चौहान, प्रमोद शर्मा, संत महात्मा, गणमान्य व्यक्ति आदि उपस्थित थे। 

स्वजल कर्मचारियों को राहत देने की कवायद तेज

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देहरादून। स्वजल कर्मचारियों को राहत देने की कवायद शुरू हो गई है। स्वजल कर्मचारी संघ के समर्थन में आरएसएस के आनुसांगिक संगठन भारतीय मजदूर संघ के आने से शासन पर दबाव बढ़ा है। नये प्रोजेक्ट में पद सृजित व दूसरे विकल्पों पर भी विचार-विमर्श किया जा रहा है।

स्वजल कर्मचारी संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश प्रभारी बृजेश बनकोटी के नेतृत्व में पेयजल मंत्री प्रकाश पंत को ज्ञापन सौंपा। कहा कि स्वजल कर्मचारियों की सेवाओं को समाप्त किए जाने की साजिश रची जा रही है। पहले भी कई कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की जा चुकी हैं। संघ संरक्षक वीरेंद्र भट्ट, महामंत्री अरविंद पयाल ने कहा कि स्वजल को ही पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अंतर्गत ग्रामीण स्वच्छता के लिए स्थायी कार्यदायी संस्था घोषित किया जाए। कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाए।
पेयजल मंत्री प्रकाश पंत ने कार्रवाई का आश्वासन देते हुए कहा कि अभी स्वजल का कोई स्थायी ढांचा नहीं है। ऐसे में तत्काल नियमितीकरण किया जाना संभव नहीं है। कोशिश की जा रही है कि सभी कर्मचारियों को विभागीय संविदा पर लिया जा सके। वहीं स्वजल कर्मचारियों को शहरी विकास में शामिल किए जाने की तैयारी है। शहरों को खुले में शौच से मुक्त किए जाने की दिशा में योजना चलाई जा रही है। इस प्रोजेक्ट में स्वजल कर्मचारियों के पुराने अनुभव का लाभ लिया जाएगा। इस मौके पर प्रतिनिधिमंडल में अरविंद पयाल, अनुभा रावत, हर्षमणी पंत, आलोक सेमवाल, उर्मिला पडियार, मंजू जोशी, एससी पांडे आदि मौजूद रहे। 

प्रदेश की चार क्रिकेट एसोसिएशनों के साथ सीएम करेंगे बैठक

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देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य क्रिकेट को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से पूर्ण मान्यता दिलाने के लिये मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने आगामी 15 अक्टूबर को प्रदेश की चार क्रिकेट एसोसिएशनों को बैठक के लिए बुलाया है। यह जानकारी बुधवार को उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन (यूसीए) के सचिव दिव्य नौटियाल ने दी।

दिव्य नौटियाल ने बताया कि पिछले 17 वर्षों से उत्तराखंड राज्य क्रिकेट को बीसीसीआई से मान्यता का मामला लटका हुआ है। वर्ष 2009 एवं 2016 में बीसीसीआई ने मान्यता के मामले को सुलझाने के लिये प्रदेश की चारों एसोसिएशनों उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन, क्रिकेट एसोसिएशन, यूनाइटेड क्रिकेट एसोसिएशन एवं उत्तरांचल क्रिकेट एसोसिएशन को बुलाया था, लेकिन मान्यता का मामला हल नहीं हो पाया था।
यूसीए सचिव दिव्य नौटियाल ने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा बुलाई गई बैठक में पूर्ण मान्यता का लंबित मुद्दा हल होगा और उत्तराखंड राज्य क्रिकेट को बीसीसीआई से पूर्ण मान्यता प्राप्त होगी। उत्तराखंड राज्य क्रिकेट को बीसीसीआई से पूर्ण सदस्यता दिलाने के बाबत मुख्यमंत्री बुलाई गई बैठक का उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन ने स्वागत किया है। नौटियाल ने आगामी 24 अक्टूबर को प्रदेश में आयोजित हो रहे रणजी ट्राफी मैच के लिये यूसीए की ओर से हर प्रकार की मदद व सहयोग का एलान किया है। 

दीपावली से पहले मिल सकती है छात्रवृत्ति की धनराशि

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देहरादून। प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री यशपाल आर्य ने बुधवार को विधानसभा स्थित सभागार में समाज कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक की। समीक्षा के दौरान आर्य ने शासन एवं निदेशालय के अधिकारियों को निर्देश दिये कि विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत छात्र-छात्राओं को मिलने वाली छात्रवृत्ति की धनराशि दीपावली पर्व से पूर्व ही जिला समाज कल्याण अधिकारियों को अवमुक्त कर दी जाय, ताकि छात्रवृत्ति की धनराशि एक पखवाड़े के भीतर छात्र-छात्राओं के खाते में पहुंच जाय।

गौरतलब है कि छात्रवृत्ति योजनाओं में घोटाले की वजह से सत्यापन कार्य चल रहा था। जिसके कारण गत चार माह से छात्रों की छात्रवृत्ति रोकी गई थी। पात्र छात्रों की समस्याओं को दृष्टिगत रखते हुए समाज कल्याण मंत्री ने छात्रवृत्ति अवमुक्त करने के निर्देश अधिकारियों को दिये। आर्य ने विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत दी जाने वाली पेंशन की धनराशि को भी दीपावली पर्व से पूर्व अवमुक्त करने के निर्देश दिये।
बहुउद्देशीय शिविर संचालन की समीक्षा करते हुए आर्य ने निर्देश दिये कि प्रत्येक जनपद में बहुउद्देशीय शिविरों का आयोजन जिला मुख्यालय की बजाय जनपद के दूरस्थ क्षेत्रों में किया जाय, ताकि अन्तिम छोर पर बैठे हर पात्र व्यक्ति को योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि वे बहुउद्देशीय शिविरों के जनपद के दूरस्थ क्षेत्रों में आयोजन पर समाज कल्याण अधिकारी को सहयोग प्रदान करना सुनिश्चित करें।
समीक्षा के दौरान आर्य ने आश्रम पद्धति विद्यालयों में अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को मिलने वाले भोजन भत्ते में वृद्धि करने का प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी निर्देश दिये कि प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के छात्र-छात्राओं को कोचिंग देने के लिए पूर्व की भाॅति कोचिंग सेंटर हेतु निविदा आमंत्रित की जाय। समाज कल्याण मंत्री ने अपर मुख्य सचिव समाज कल्याण को निर्देश दिये कि जिन जिला समाज कल्याण अधिकारियों ने स्थानान्तरण आदेश जारी होने के बाद सम्बन्धित जिलों में अपनी योगदान आख्या नहीं दी है। यदि वे अब भी एक माह के भीतर अपनी योगदान आख्या सम्बन्धित जिलों में नहीं देते हैं तो उन जिला समाज कल्याण अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही की जाय। 

पत्र के जरिए भाजपा सरकार पर कांग्रेस का प्रहार

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देहरादून। प्रदेश में सत्ता से बेदखल कांग्रेस जनता के बीच अपनी पैठ बनाने के लिए प्रदेश सरकार को घेरने के लिए सियासी कदम बढ़ाने शुरू कर दी है। इसी कदम के तहत लंबे समय से आन्दोलनरत ग्राम प्रधान संगठन की मांगों को पूरा करने के लिए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को पत्र लिखकर शीघ्र कार्रवाई करने की मांग की है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने पत्र के माध्यम से परेड़ ग्राउण्ड देहरादून में लम्बे समय से आन्दोलनरत प्रदेश के ग्राम प्रधान संगठन की ओर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह का ध्यान आकृर्षित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर के ग्राम प्रधान अपनी न्यायोचित मांगों को लेकर पिछले आठ दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं तथा उनकी स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है। लेकिन सरकार द्वारा आमरण अनशन पर बैठे पंचायत प्रतिनिधियों की सुध नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि इससे सरकार का असली चेहरा सामने आने लगा है।
प्रीतम सिंह ने कहा कि उत्तराखण्ड के आन्दोलनरत ग्राम प्रधान संगठन के बीच जाकर प्रसन्ना मिली है। क्योंकि ग्राम प्रधान संगठन की मांगे न्यायोचित हैं तथा मैं राज्य सरकार से उनकी न्यायोचित मांगों को पूरा करने की अपेक्षा करता हूं।
उन्होंने कहा कि 14 वें वित्त एवं राज्य वित्त से ग्राम पंचायतों को पूर्व में आवंटित धनराशि के स्वरूप में परिवर्तन किया गया है, जिससे पंचायतों के माध्यम से होने वाले विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। ग्राम प्रधान संगठन द्वारा पंचायतों को आवंटित धनराशि के स्वरूप को पूर्व की भांति यथावत रखे जाने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि मैं मानता हूं कि उनकी यह मांग पूर्ण रूप से जायज है तथा ग्राम पंचायतों को 14वें वित्त एवं राज्य वित्त से आवंटित धनराशि का स्वरूप पूर्व की भांति यथावत रखा जाना चाहिए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने यह भी कहा कि राज्य का पंचायतीराज अधिनियम जो विधानसभा से पारित हो चुका है तथा आतिथि तक लागू नहीं किया गया है।
ग्राम प्रधान संगठन विधानसभा में पारित पंचायतीराज अधिनियम को शीघ्र लागू किये जाने की मांग कर रहा है तथा मैं समझता हूं कि उनकी यह मांग पूरी तरह से न्यायोचित है। साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेशभर के नगर निकायों के सीमा विस्तार का फैसला लिया गया है जिसमें सम्बन्धित क्षेत्र की जनता एवं पंचायत प्रतिनिधियों की राय को शामिल नहीं किया गया है।
उन्होंने पूर्व में नगर निकायों के सीमा विस्तार का मामला विधानसभा में उठा था तथा सरकार द्वारा सदन को आस्वस्थ किया गया था कि सीमा विस्तार में पंचायत प्रतिनिधियों को विश्वास में लिया जायेगा, लेकिन सीमा विस्तार में सरकार द्वारा पंचायतों को विश्वास में लिये बिना अग्रिम कार्रवाई की गई है, सीमा विस्तार में पंचायतों के प्रतिनिधियों की सहमति ली जानी चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि उत्तराखण्ड ग्राम प्रधान संगठन की सभी न्यायोचित मांगों पर शीघ्र निर्णय लिया जाय।