बदरीनाथ में शनिवार को अचानक मंदिर परिसर के उपर से ड्रोन कैमरा उड़ने लगा जिसे देखकर वहां मौजूद स्थानीय लोगों और तीर्थ यात्रियों में खलबली मच गई। सूचना मिलने थाना पुलिस ने मौके पर पहुंच कर ड्रोन को अपने कब्जे में लिया।
थानाध्यक्ष बदरीनाथ ने बताया कि ड्रोन कैमरे उड़ने की सूचना मिली, जिसे कब्जे में ले लिया गया है। बताया कि यह कैमरा बिना अनुमति के चलाया जा रहा था। पूछताछ में पता चला है कि यह कैमरा नमामि गंगे योजना के तहत बनने वाली डाक्यूमेंट्री के लिए प्रयोग में लिया जा रहा था. लेकिन संचालकों के पास ड्रोन संचालन की लिखित अनुमति न होने के कारण इसे कब्जे में ले लिया गया है। थानाध्यक्ष ने बताया कि बदरीनाथ के मुख्य मंदिर में फोटोग्राफी पूर्ण रूप से वर्जित है। कैमरे के फुटेज खंगाले जा रहे है। वर्जित क्षेत्र के फुटेज मिलने पर इसे हटा दिया जाएगा साथ ही जिला प्रशासन की अनुमति के बाद ही ड्रोन संचालन की अनुमति दी जाएगी।
बदरीनाथ धाम में दिखा अवैध ड्रोन कैमरा, जब्त
धर्मनगरी में धड़ल्ले से बिक रही अवैध शराब
धर्मनगरी यूं तो ड्राई एरिया हैं, लेकिन यहां मदिरा आसानी से उपलबध कराई जा रही है। शराब गली मोहल्लों में बिक रही है। सबसे ज्यादा प्रभावित मध्य हरिद्वार का क्षेत्र है, जहां कई दुकानों में खुलेआम शराब बेची जा रही है। यही नहीं शाम होते ही शराब पीने वाले लोगों का आतंक भी क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। शराब पीकर हंगामा करने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। बावजूद इसके पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।
कुछ दिन पहले शिवलोक काॅलोनी में मंदिर के बगल में परचून की दुकान में शराब बेचने का मामला सामने आया था। यहां के लोगों ने परचून की दुकान के बाहर प्रदर्शन भी किया था, लेकिन इसके बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इससे साफ है कि पुलिस का संरक्षण इन शराब माफियाओं को मिला हुआ है। वहीं शराब के सेवन से नई पीढ़ी लगातार बिगड़ रही है। आए दिन रानीपुर मोड़ और आस-पास के इलाकों में हंगामा और मारपीट की घटनाएं हो रही है।
स्थानीय व्यापारी सुनील गुलाटी और राहुल अग्रवाल ने बताया कि आए दिन हो रहे हंगामे के कारण यहां व्यापारियों का जीना दूभर हो गया है, इसलिए पुलिस को अब इस पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई इलाके ऐसे हैं, जहां शराब आसानी से उपलब्ध कराई जा रही है। इसके कारण ये मामले बढ़ रहे हैं। शिवलोक काॅलोनी के अलावा पुराना रानीपुर मोड, उत्तरी हरिद्वार, राजीव काॅलोनी, ब्रह्मपुरी, टिबडी, अहबाबनगर आदि इलाकों में भी शराब बेची जा रही है। आबकारी विभाग द्वारा छापेमारी अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके बावजूद भी अवैध शराब बिक्री पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
एसएसपी कुष्ण कुमार वीके का कहना है कि तीर्थनगरी की मर्यादा को हर कीमत पर बनाए रखा जाएगा। पुलिस अवैध शराब बचेने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। प्रतिदिन अपराधियों को पकड़कर जेल की सलाखों के पीछे भेजा जा रहा है। जहां शराब बिक्री की शिकायत मिली है, शीघ्र ही उन पर कार्रवाई की जाएगी।
प्यासे गांव में पानी को हाहाकार
जिला मुख्यालय बागेश्वर से लगे मंडलसेरा में 45 परिवार पानी को तरस गए है। यहां दस दिन से नलों में पानी की बूंद भी नहीं टपकी है। तीन दिन से पानी का टैंकर भी गांव नहीं आ रहा है। जिससे उपभोक्ताओं में भारी रोष है। उन्होंने जलसंस्थान पर गांव की उपेक्षा का आरोप लगाया है।
मंडलसेरा गांव की जनसंख्या लगातार बढ़ रही है। जिला बनने के बाद यहां गांवों से पलायन कर लोग आ गए हैं। उन्होंने जमीन खरीदी। मकान बनाए। लेकिन अब पानी के लिए तरस रहे हैं। ग्रामीण दीवान सिंह दानू ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई आदि के लिए भी लोगों ने गांव छोड़े हैं। उन्होंने बताया कि दस दिन से गांव में पानी की बूंद नहीं गिरी। 150 व्यक्तिगत कनेक्शन हैं। बीस सार्वजनिक हैं। तीन दिन से जलसंस्थान ने पानी का टैंकर भी नहीं भेजा है। उन्होंने कहा कि दीवाली पर्व पर महिला, बच्चों और बुजुर्गो को पानी के लिए नदी और जलस्त्रोतों का रुख करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्राइवेट संयोजन वालों को बिना पानी के भारी भरकम बिल देना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि जेई का फोन भी नहीं लग रहा है। उपभोक्ता दिग्पाल ¨सह मेहता, रमेश आर्य, भुवन चौबे, ममता, पुष्पा टाकुली, मोहन ¨सह, गीता, शैलेंद्र धपोला आदि ने बताया कि बानरी योजना से गांव को पानी देने का भरोसा दिलाया गया। लेकिन त्योहार पर उन्हें पानी नहीं मिल रहा है। उपभोक्ताओं ने कहा कि जलसंस्थान के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा। इधर ईई नंदकिशोर ने बताया कि पानी की आपूर्ति सुचारु करने के निर्देश जेई को दिए गए हैं। जल्द ही लोगों को पानी मिल जाएगा।
विशाल भारद्वाज की अगली फिल्म रस्किन बॉंड की एक और कहानी पर
बॉलिवुड के प्रसिद्ध निर्देशक विशाल भारद्वाज को अपनी अगली फिल्म के लिये एक बार फिर मशहूर लेखक रस्किन बॉंड की कहानी रास आई है। फिलहाल मसूरी में अपनी फिल्म की शूटिंग कर रहे विशाल ने हाल ही में बॉंड की कहानी “मिस्टर ऑलिवर्स डायरी” के राइट्स खरीदे हैं।
विशाल इससे पहले भी बॉंड की कहानी ‘सुसेनस सेवन हस्बैंड्स’ पर प्रियांका चोपड़ा को लेकर ‘सात खून माफ’ और ‘द ब्लू अम्ब्रेला’ पर आधारित बच्चों के लिये ‘नीली छतरी’ नाम की फिल्म बना चुके हैं।
रस्किन बॉंड द्वारा लिखी बहुत सी कहानियां सालों से फिल्मकारों की पसंद बनी हुई हैं। इस सिलसिले की शुरूआत हुई थी टॉम ऑलटर की ‘द लास्ट टाइगर’, लेकिन किन्ही कारणों से ये फिल्म कभी भी परदे पर नहीं आई । इसके बाद ऑस्ट्रेलियन निर्देशक रेयमंङ स्टायनर की बच्चों के लिये फिल्म “बिग बिसनेस” और श्याम बेनेगल की मशहूर फिल्म “जुनून” जो कि बॉंड के उपन्यास “ए फ्लाइट ऑफ पिजन्स” पर आधारित थी, ये फिल्म 1857 की आजादी की लड़ाई पर आधारित थी। निर्देशकों की इस लिस्ट में हाल ही में आसमिया निर्देशक भार्गव साइकिया का नाम जुड़ा है, साइकिया की फिल्म “द ब्लैक कैट” इसी नाम से रस्किन द्वारा लिखी गई कहानी पर आधारित है। इस पिल्म को कई मंचों पर सम्मानित भी किया गया है।
छोटे पर्दे पर भी रस्किन की कहानियों ने अपना झंडा गाड़ा है। इन सब में सबसे लोकप्रिय रही है निर्देशक शुभादर्शिनी सिंह की 52 एपिसोड वाला धारावाहिक “एक था रस्टी”।
विशाल भारद्वाज की ये नई फिल्म जिस उपनायस पर आधारित है वो एक कॉमेडी कहानी है जोकि पहाड़ों में रहने वाले एक स्कूल मास्टर की। इस फिल्म की शूटिंग 2018 की गर्मियों में होने की उम्मीद है।
पुलिस अधिकारी के ‘ख्वाबों के खत’ पहुंचे लोगो तक
चमोली के पुलिस अधीक्षक तृप्ति भट्ट के कविता संग्रह ‘ख्वाबों के खत’ का विमोचन रविवार को देहरादून में हुआ। मुख्यमंत्री निवास पर सीएम त्रिवेंद्र रावत इस कविता संग्रह का विमोचन किया। इस मौके पर प्रख्यात कवि डॉ.हरिओम पंवार, कलाकार शबाना आजमी, कवि असीम शुक्ल और प्रदेश के पुलिस महानिदेशक अनिल कुमार रतूड़ी मौजूद थे।गौरतलब है कि तृप्ति भट्ट एक आईपीएस अधिकारी हैं और चमोली की पुलिस अधीक्षक भी हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने तृप्ति भट्ट की सराहना करते हुए कहा कि एक पुलिस अधिकारी के रूप में अपने व्यस्त दिनचर्या के बीच भी वे लेखन और कला के लिए समय निकालती हैं।
अपनी किताब और लिखने के शौक के बारे में न्यूज़पोस्ट से बात करते हुए तृप्ती ने कहा कि “मुझे बचपन से ही लिखना का शौक रहा है। हांलाकि अब समय की कमी के कारण लिखना मुश्किलव हो जाता है पर मै कोशिश करके समय निकाल लेती हूं। लिखने के विषयों में मुझे समाजिक मुद्दे, भावनात्मक मुद्दों आदि पर लिखने में खास मजडा आता है”।
डॉ.हरिओम पंवार ने कहा कि यदि पुलिस अधिकारी एक कवि है तो उसके हाथों कभी अन्याय नहीं हो सकता और ऐसा अधिकारी कभी किसी दुर्बल को नहीं सताएगा। शबाना आजमी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुश्री भट्ट के कविता लेखन की सराहना की और जिस प्रकार से कविता संकलन में विभिन्न विषयों को स्पर्श किया गया है उसकी प्रशंसा भी की। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को उनके कार्य क्षेत्र की एकरसता से बचाने और अपनी आत्मा पर से धूल झाड़ने के लिए कला से बेहतर कोई मौका नहीं मिलता।
मसूरी: कार खाई में गिरी, दो घायल
आज शाम पुलिस कंट्रोल रूम से थाना मसूरी पर सूचना मिली कि ऐलन स्कूल, मसूरी के पास लंढौर क्षेत्र में एक कार 200 मीटर गहरी खाई में गिर गई है।
सूचना मिलते ही थाना मसूरी का पुलिस बल तुरन्त मौके पर पहुँचा । पुलिस बल व स्थानीय जनता की सहायता से 2 घायलों को रेस्क्यू कर खाई से निकाला। सोहन सिंह नेगी,निवासी बार्लोगंज मसूरी अौर परशु निवासी किंगरेग मसूरी, को सी.एच.सी मसूरी में भर्ती कराया गया।
मौके पर मौजूद लोगों द्वारा बताया गया कि चालक सोहन द्वारा आई0 10(ब्लैक कलर) गाडी संख्या- UK 07 X 5529 को बैक कर रहा था व जहाँ सडक पर निर्माण कार्य चल रहा था और जगह कम होने की वजह से अचानक गाडी लंढौर क्षेत्र में गहरी खाई में गिर गई, उक्त सम्बन्ध में परिजनों को सूचित कर दिया गया है।
‘नशे के विरूद्ध जागरूकता’ निकाली गयी चीता मोबाईल की रैली
उत्तराखण्ड के वर्तमान एवं भविष्य को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने के लिये उत्तराखण्ड पुलिस द्वारा लिये गये अपने उद्देश्य पर आगे बढ़ते हुए उत्तराखण्ड में बढ़ रही नशे की प्रवृत्ति एवं प्रचलन पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिये, अक्टूबर में नशें के विरूद्ध चलाये जा रहे अपने अभियान के अन्तर्गत जनपद देहरादून में पुलिस ने मोटर साईकिल रैली का आयोजन किया।

जनपद के थानों की लगभग 50 पुरूष अौर महिला चीता मोबाईल ने प्रतिभाग किया। मोटर साईकिल रैली का उद्देश्य शहर में विशेषकर युवा वर्ग में नशे के विरूद्ध जनजागरूकता उत्पन्न करना था। मोटर साईकिल रैली सुबह रिजर्व पुलिस लाईन से शुरु होकर बन्नू स्कूल से रेसकोर्स से एमकेपी से दर्शनलाल चैक से राजपुर रोड सचिवालय से वापस पुनः पुलिस लाईन पर समाप्त हुई।
नशे के विरूद्ध जागरूकता के लिये निकाली गयी मोटर साईकिल रैली के लिये श्रीमती निवेदिता कुकरेती वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून, श्री धीरेन्द्र गुंज्याल पुलिस अधीक्षक यातायात तथा श्रीमती सरिता डोभाल, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण से मार्गदर्शन एवं दिशा निर्देश प्राप्त करते हुए श्री राकेश देवली, क्षेत्राधिकारी यातायात ने अपने पर्यवेक्षण में निरीक्षक यातायात श्री राजपाल सिंह रावत व प्रतिसार निरीक्षक सुरेन्द्र प्रसाद बलूनी के सहयोग से मोटर साईकिल रैली का सकुशल सम्पन्न करवाया गया।
पीएम के दौरे के चलते मसूरी में ख़ुफ़िया विभाग सक्रिय
प्रधानमंत्री के मसूरी आगमन के दृष्टिगत निदेशानुसार आज एल.आई.यू यूनिट मसूरी व विदेश शाखा देहरादून ने गांधी चौक मसूरी से केम्पटी रोड में होटल शिलटन, क्लासिक, रतन, जीत, विष्णु पैलेस, देवलोक, द्वापर, लाइब्रेरी प्रेसिडेंसी, क्वीन प्लाज़ा, मसूरी रेसीडेंसी, शालीमार, सिल्वर रॉक, मधुबन हीलैंड आदि होटलों को चैक किया गया।

सभी होटल प्रबंधको को सतर्क रहने तथा किसी व्यक्ति के संदिग्द प्रतीत होने पर तुरंत स्थानीय पुलिस व एल.आई.यू को सूचित करने को निर्देशित किया गया। होटल में ठहरे बाहरी व्यक्तियों की आई.डी चेक करी गई व सत्यापन के लिये सम्बन्धित राज्य के जनपदों को प्रेषित की जा रही है। चेकिंग के दौरान किसी संदिग्द व्यक्तियों का होना प्रकाश में नही आया।
6 लोगों की टीम ने सुबह 11:00 से 4:00 बजे शाम तक गांधी चौक से केम्पटी रोड होते हुए अकादमी गेट तक लगी चाय, सब्जी ठेली, नाई, रेस्टुरेंट आदि में कार्यरत बाहरी व्यक्तियों व आई.एस अकादमी परिसर में काम कर रहें मजदूरों, तिब्बती होम फाउंडेशन, पोलो ग्राउंड में कार्यरत मजदूरों तथा एल बी एस एकेडमी गेट, पोलो ग्राउंड के अास पास दुकानदार/किराएदारों का भौतिक सत्यापन भी किया।
तो गूगल ने मनाया उत्तराखंड के इस महान पर्वतारोही का जन्मदिन
शनिवार को गूगल ने नैन सिंह रावत का 187वां जन्मदिन मनाया। इसके लिये खासतौर पर गूगल ने रावत को समर्पित एक डूडल बनाया। नैन सिंह रावत 19 वीं सदी के पर्वतारोही थे और ब्रिटिश सरकार के लिये हिमालय पर्वतों का मानचित्र बनाने वाले पहले व्यक्ति भी थे। उन्होने सबसे पहले तिब्बत का सर्वे कर तिब्बति राजधानी लाहसा की सटीक लोकेशन और ऊंचाी नापी थी।
गूगल का ये डूडल हरी और दीप्ति पानिकर ने बनाया है, इसमें एक पर्वातारोही (जो कि रावत को दर्शाता है) का प्रतिबिंब दिखाी देता है। इसके साथ ही चित्र में एक ट्राई पोड भी है जोकि रावत के काम को दिखाता है।

रावत का जन्म 1830 में मिलम जो उत्तराखंड के जोहर घाटी में है हुआ था।रावत ने कम उम्र में तिब्बत जाकर अपने पिता के साथ लोकल भाषा और तौर तरीके सीख लिये जो आने वाले समय में उनके खासा काम आया।
19वीं शताब्दी में युरोपियन खोजकर्ताओं के सेंट्रस एशियन इलाके में कोज करने के सिलसिले शुरु हुए। इसके लिये उन्होने उन स्थानीय लोगों की मदद लेनी शुरू की जो इन दूर दराज के इलाकों की भाषा और तौर तरीकों से वाकिफ थे। रावत इन्ही चुनिंदा लोगों में से एक थे। स्थानीय लोगों के बीच जाने के लिये रावत भेष बदल कर कुमाऊं से लाहसा, काठमांडू जैसी जगहों तक पैदल गये। रावत के बारे में कहा जाता है कि वो एक मील 2000 कदम में पूरी कर लेते थो और मनको की माला से इसे नापते थे।
रावत का पहला दौरा जर्मन दल के साथ 1855-1857 के बीच रहा। उन्हेोने मानसरोवर और राकस ताल तक का सफर तय किया। इसके बाद आगेगारतोक और लद्दाख तक भी गये। इसके बाद रावत ने देहरादून के सर्वे दफ्तर से अपने काम आने वाली सर्वे की तकनीकी जानकारी हासिल की। कहा जाता है कि रावत का सबसे महत्वपूर्ण सफर 1873-1875 के बीच रहा जिसमें वो लेह से लाहसा होते हुए असम पहुंचे।
अपने जीवन काल में रावत को कई पुरसकारों से सम्मानित किया गया।जिनमें रॉयल जियोग्राफिक सोस्याइटी से मिले कई सम्मान शामिल हैं। जून 2004 में रावत की याद में एक पोस्ट स्टैंप भी जारी किया गया। निसंदेह रावत उत्तराखंड ही नही देश की ऐतिहासिक धरोहर का एक अमिट हिस्सा हैं।
खत्म हुई 2017 चारधाम यात्रा, सरकार ने यात्रियों की संख्या पर जताई खुशी
हिमालई इलाकों में सर्दियों के आगमन के साथ ही इस साल की उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चार धाम यात्रा भी समाप्ति की ओर आ गई है। इस याशत्रा में सालाना लाकों श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री मिलकर चार धाम बनाते हैं।इस यात्रा को पूरा करने के लिये लाखों की तादा में यात्री यमुनोत्री से शुरू कर गंगोत्री और केदारनाथ होते हुए बद्रीनाथ में अपनी यात्रा को खत्म करते हैं।
इन सब के बीच कपाट बंद होने में चमोली ज़िले में मौजूद सिखों के घर्म स्थल हेंमकुड साहिब का रहा। करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित ये जगह सिकों के लिये अति धार्मिकमहत्व की है। हेंमकुड साहिब के कपाट 10 अक्टूबर को शबद कीरितन के बीच बंद हुए।
इसके बाद शीतकाल के लिये गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट बंद हुए। इस साल अप्रेल में खुले कपाट में गंगोत्री धाम के कपाट 20 अक्टूबर और यमुनोत्री और केदारनाथ के कपाट 21 अक्टूबर को बंद हुए।
विजयदश्मी के दिन बदर्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने की तारीख निकाली जाती है। इस साल बद्रीनाथ के कपाट 19 नवंबर शाम 7:28 पर बंद होंगे।
इसी के साथ मध्यमहेशवर और तुंगनाथ धाम के कपाट भी 22 अक्टूबर और 27 अक्टूबर को होंगे। इसके साथ ही 2017 की चार धाम यात्रा यात्रा का समापन भी हो जायेगा। गौरतलब है कि 2013 में आी केदारनाथ आपदा के बाद से ही चारधाम यात्रा के पुनर्जन्म को लेकर तमाम कयास लगाये जाते रहे हैं। ये यात्रा उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के लिये भी खासी महत्वपूर्ण रहती है। ऐसे में राज्य के लिये ये ज़रूरी है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इसमें हिस्सा लें।





























































