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एम्स प्रशाशन के खिलाफ अनिश्चितकालीन अनशन 

ऋषिकेश, कभी अपने सस्ते ईलाज के किये जाने जाना वाला ऋषिकेश एम्स ने अब अपने ईलाज की दरों को बड़ा दिया है जिसके बाद अब इसके विरोध में धरने प्रदर्शन शुरू हो चुके है, इसी कड़ी में तीन नवंबर से आम लोग एम्स परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने जा रहे है जिसमें ऋषिकेश छेत्र के कई लोग जुटेंगे और बड़ी ईलाज दरों को कम करने की मांग करेंगे।

aiims dharna

आपको बता दे की ऋषिकेश एम्स ने हाल ही में अपने इलाज दरों को दुगना बड़ा दिया था जिसके बाद से ही लोगों को इलाज के लिए पहले से कई गुना ज्यादा रुपए देने पद रहे है. ऋषिकेश स्तिथ पीडब्यूडी गेस्ट हाउस में प्रेस वार्ता कर इस बारे में जानकारी दी गई, मीडिया से बात करते हुए प्रवीण सिंह ने बताया कि ऋषिकेश एम्स को पहाड़ में बेहतर स्वास्थ्य सेवा के लिए बनाया गया था लेकिन अब एम्स प्रशाशन ने अपने ईलाज दरों को बड़ा दिया है जिससे लोगों को एम्स में ईलाज करवाने में दिककतें हो रही है।

उन्होंने बताया कि ये अनशन 3 नवंबर से शुरू होगा और अनिश्चितकालीन तक चलेगा।

पुलिस द्वारा चरस तस्करी में 1 किलो चरस के साथ एक अभियुक्त गिरफ्तार

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एसएसपी देहरादून द्वारा जनपद में नशे के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के क्रम में बीते बुधवार को थाना रानीपोखरी पुलिस द्वारा चरस बेचने वाले तस्कर को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। अभियुक्त के कब्जे से करीब एक किलो चरस बरामद की गई जिसकी कीमत लगभग एक लाख रुपए है अभियुक्त से एक स्कूटी मेस्ट्रो भी बरामद हुई है अभियुक्त के विरुद्ध थाना रानी पोखरी में मुकदमा अपराध संख्या 79 /17 धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया है। अभियुक्त सतीश उनियाल ने बताया कि वह यह चरस सहारनपुर से खरीदकर ऋषिकेश बेचने के लिए जा रहा था

नाम अभियुक्त-
अतीस उनियाल पुत्र स्वर्गीय शांति प्रसाद उनियाल निवासी रेशम माजरी थाना डोईवाला जनपद देहरादून उम्र 25 वर्ष

  • अभियुक्त के आपराधिक इतिहास की जानकारी की जा रही है
  • पुलिस टीम :-
  • थानाध्यक्ष श्री धर्मेंद्र सिंह रौतेला
  • कांस्टेबल 896 युवराज सिंह 3-कांस्टेबल 712 संदीप कुमार 4-कांस्टेबल 989 अजेंद्र बुटोला
  • कांस्टेबल चैन पाल सिंह चौधरी
  • राजाराम डोबाल

पुलिस द्वारा नशे के विरुद्ध चलाए गए अभियान के तहत अभियुत्त को गिरफ्तार करने पर स्थानीय जनता द्वारा एवं उच्च अधिकारियों द्वारा प्रशंसा की गई है।

दून में चरस के साथ पकड़े गए दो युवा

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एसएसपी देहरादून के निर्देशन में थाना प्रेमनगर क्षेत्रान्तर्गत अवैध मादक पदार्थ के विक्रय एवं नशे की प्रवर्ति एवं नशे के प्रचलन पर नियंत्रण हेतु चलाये जा रहे रहे अभियान के अंतर्गत थानाध्यक्ष प्रेमनगर के नेतृत्व में बुधवार को थाना प्रेमनगर क्षेत्र में संदिग्ध व्यक्ति/वाहन चेकिंग के दौरान डी0ए0वी0 कॉलेज प्रेमनगर के पास दो संदिग्ध व्यक्ति दिखाई दिए। जिन्हें पुलिस टीम द्वारा रुकने का इशारा किया गया लेकिन पुलिस को देखकर अचानक से पीछे मुड़कर भागने का प्रयास किया।परंतु पुलिस टीम द्वारा तेजी दिखाते हुवे एकदम घेर घोटकर मौके से कुछ दूरी पर पकड़ लिया तथा इनसे इनका नाम पता पूछा तो पहले ने अपना नाम गोपाल तथा दुसरे ने अपना नाम लक्ष्मण सिंह होना बताया भागने का कारण पूछने पर अपने आपको स्टूडेंट होने का बहाना बनाने लगे परंतु पुलिस टीम द्वारा उक्त दोनों व्यक्ति की तलासी ली गयी तो पहले व्यक्ति गोपाल के पिट्ठू बैग के अंदर से एक पॉलीथिन के अंदर से 310 ग्राम चरस व 28000 रुपये नगद तथा दूसरे व्यक्ति लक्ष्मण के बैग की तलाशी ली जाने पर 205 ग्राम चरस व 26000 रूपये नगद कुल 515 ग्राम चरस व 54000 रूपये नगद बरामद किया गया इतने रूपये होने की जानकारी ली गयी तो उक्त दोनों व्यक्ति द्वारा बताया गया कि ये सभी पैसे हमने चरस बेचकर कमाये है तथा चरस को अपने ग्राम से लाना तथा चरस को हॉस्टल व कॉलेज में रहने वाले लड़को को बेचना बताया। अभियुक्तो का विवरण निम्नवत है:-

  • गोपाल पुत्र नारायण सिंह उम्र 28 वर्ष निवासी घेस थराली जनपद चमोली हॉल बोहरा नर्सिंग होम के पास स्पेशल विंग प्रेमनगर
  • लक्ष्मण सिंह पुत्र रणजीत सिंह उम्र 27 वर्ष ग्राम व पोस्ट थराली चमोली हॉल पता उपरोक्त। 

    बरामद मॉल का विवरण :-

  • 515 ग्राम चरस
  • 02 मोबाइल विभिन्न कम्पनी 3) 54000 रूपये नगद।

अभियुक्त/मॉल बरामद करने वाली पुलिस टीम का विवरण:-

  •  मुकेश त्यागी, थानाध्यक्ष, थाना प्रेमनगर
  • प्रवीण सैनी, उप निरीक्षक 3) आरक्षी चमन
  • आरक्षी परविंदर

सरकारी विभागों में तालमेल के अभाव में हजारों लोगों को नहीं मिल रहा पानी

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देहरादून। चाहे सरकार राज्य में कितनी भी गुड गर्वनेंस की बात करें, लेकिन सच्चाई यह है कि यहां सरकारी विभागों में ही आपस में तालमेल नहीं है। इसी का परिणाम है कि जल संस्थान के आवेदन करने के छह माह बाद भी ऊर्जा निगम ने बिजली का कनेक्शन उपलब्ध नहीं कराया है। जबकि बाकी जगहों की बात तो दूर, तालमेल के इस अभाव के कारण तीन हजार लोग पानी के संकट से जूझ रहे हैं।

जल संस्थान ने मई 2017 में राजेश रावत कॉलोनी व आसपास के क्षेत्र के लिए सूरज बस्ती में नलकूप का निर्माण किया। इस नलकूप से क्षेत्र की करीब तीन हजार की आबादी का पानी का संकट खत्म होना था। जल संस्थान निर्माण करने के बाद विद्युत विभाग में बिजली के कनेक्शन के लिए मई में ही आवेदन कर दिया। बाकायदा अधिकारियों ने जरूरी शुल्क भी उसी समय जमा कर दिया था, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि अब तक जल संस्थान को बिजली का कनेक्शन नहीं मिला है। जिस कारण न नलकूप चालू हो पा रहा है और न लोगों को पानी की आपूर्ति सुचारू हो पा रही। क्षेत्र की स्थिति ये है कि जल संस्थान इस मौसम में भी टैंकरों के जरिए लोगों को पानी पिलाना पड़ रहा है। बुधवार को स्थानीय लोगों ने जल संस्थान के कार्यालय पहुंचकर अधिशासी अभियंता मनीष कुमार से इस संबंध में शिकायत की। जिसके बाद अधिशासी अभियंता ने विद्युत विभाग के अधिकारियों से फोन पर वार्ता कर बिजली का कनेक्शन शीघ्र देने की मांग की।
जल संस्थान के धिशासी अभियंता मनीष सेमवाल ने बताया कि लोगों की शिकायत के बाद इस संबंध में ऊर्जा निगम के अधिकारियों से वार्ता की गई हैं, उन्होंने कहा है कि बिजली का कनेक्शन शीघ्र जारी कर दिया जाएगा।

हरिद्वार के विभिन्न क्षेत्रों में चलाया गया सफाई अभियान

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हरिद्वार, समाजसेवी नरेश गिरि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छता अभियान से प्रेरित होकर लगातार ‘स्वच्छ भारत स्वस्थ्य भारत’ अभियान के तहत विभिन्न क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान चला रहे हैं। गिरि की टीम विभिन्न क्षेत्रों में सफाई अभियान चलाते हुए गायत्री विहार भूपतवाला, कनखल, संन्यास मार्ग पर फैली गंदगी को अपने संसाधनों से साफ कर रहे हैं।

भारत के पीएम नरेंद्र मोदी पूरे देश में स्वच्छ भारत स्वस्थ्य भारत अभियान के प्रति जनचेतना फैला रहे हैं। ऐसे में हमारा भी कर्तव्य बनता है कि अपने आस-पास फैली गंदगी को साफ करें। नरेश गिरि ने क्षेत्र के लोगों से आह्वान करते हुए कहा कि अपने आस-पास साफ सफाई रखे। डेंगू बड़े पैमाने पर फैल रहा है। सड़कों पर जलभराव ना होने दें, संक्रामित रोेगों की रोकथाम के उपाय हमें स्वयं ही करने होंगे। उनसे प्रेरित होकर अन्य लोग भी सेवा भाव से इस कार्य में लगातार जुड़ रहे हैं। 

मलिन बस्ती को गृहकर में 45 प्रतिशत की छूट

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देहरादून, अब मलिन बस्ती वासी अपने मकान के मालिक बन जाएंगे और उन्हें गृहकर देना होगा। नगर निगम इस संदर्भ में विशेष कसरत कर रहा है। यह कसरत मलिन बस्तीवासियों को राज्य स्थापना दिवस का तोहफा होगी। इससे जहां उनका मालिकाना हक बनेगा वहीं वे तमाम दबावों से भी बच जाएंगे। साथ ही साथ नगर निगम में एक और योजना बनाई है। मलिन बस्ती वासियों को नगर निगम गृहकर में लगभग 45 प्रतिशत छूट देने का मन बना रही है। इसके अनुसार बस्तीवासी कर से भी बचेंगे और स्वामित्व भी पक्का हो जाएगा।

इस संदर्भ में नगर निगम की ओर से एक विशेष पहल की जा रही है। जानकारी देते हुए नगर निगम के एक प्रवक्ता ने हाउस टैक्स में तकरीबन 45 फीसदी की छूट देने का फैसला किया है। निगम 19 साल बाद इसी माह से बस्तियों से हाउस टैक्स वसूलने की तैयारी कर रहा है। इसके दायरे में मलिन बस्तियों के करीब 40 हजार घर आएंगे। 

दून से आने-जाने वाली चार ट्रेनों के समय-सारिणी में बदलाव

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देहरादून। उत्तर रेलवे की ओर से देहरादून आने-जाने वाली चार ट्रेनों के समय में आंशिक बदलाव किया गया है, जो बुधवार से नई समय-सारिणी लागू हो गई है।

रेलवे अधीक्षक करतार सिंह ने बताया कि देहरादून से चार ट्रेनों के समय में बदलाव किया गया है। यह नई समय-सारिणी के अनुसार बुधवार से नंदा देवी एसी एक्सप्रेस अब साढ़े 11 बजे के बजाए 11:35 पर चलेगी। इसी तरह अगर आप रात को काठगोदाम एक्सप्रेस से जाना चाहते हैं तो पांच मिनट पहले खुलेगी। पहले यह ट्रेन रात 11 बजे जाती थी, मगर नए शेड्यूल में इसका समय रात 10:55 बजे कर दिया गया है।
मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को चलने वाली राप्ति गंगा/गोरखपुर एक्सप्रेस भी अब दोपहर दो बजे के बजाए पांच मिनट पहले 1:55 पर खुलेगी। वहीं वापसी में यह गाड़ी दोपहर साढ़े तीन बजे के बजाए पांच मिनट पहले यानी 3:25 पर रवाना होगी। उन्होंने बताया कि दिल्ली से आने वाली मसूरी एक्सप्रेस भी अब सुबह 8:10 बजे के बजाए 20 मिनट की देरी से 8:30 बजे चलेगी। हालांकि, वापसी में यह ट्रेन अपने निर्धारित समय पर ही जाएगी। सप्ताह में एक दिन चलने वाली चेन्नई एक्सप्रेस पांच बजे के बजाए सुबह 4:45 पर दून आएंगी। 

देहरादून में नाला बन चुकी रिस्पना नदी के दिन अब जल्दी ही बहुरेंगे

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ऋषिकेश, कहते हैं कि हंसती खेलती, खिलखिलाती नदियां पहाड़ों से उतरकर मैदानों का रुख करती है तो कहीं ना कहीं आबादी का बोझ इसके साफ और निर्मल जल पर अपना असर दिखाना शुरू कर देता है। जी हां, हम बात कर रहे हैं पहाड़ी नदी रिस्पना की जो मसूरी की हसीन वादियों के छोटे से गांव से निकलकर देहरादून तक आते-आते अपना अस्तित्व खो देती है।

30 किलोमीटर के इस सफर में रिस्पना नदी आखिर क्यों मृतप्राय हो गई है? यह सवाल बार-बार पहाड़ बन कर सामने खड़ा हो जाता है। पर्यावरणविद और वनस्पति वैज्ञानिक प्रोफेसर आर.डी गौड भी इस बात से चिंतित है आखिर क्यों नदिया हमारे जीवन शैली का बोझ उठाते हुए बार-बार गंदे नाले में तब्दील होती जा रही है? क्या सरकार सिर्फ अनियोजित विकास को बढ़ावा देकर पहाड़ पर जीवन रक्षक नदी, खाले, झरने और स्रोतों को यूं ही खत्म होने देगी? या इनका पुनरुद्धार करके भविष्य में होने वाले जल संकट से जूझती आबादी को पेयजल मुहैया कराने की दिशा में ठोस कदम उठाएगी?

कुछ इसी चिंता को लेकर  सेना के जवानों रिस्पना नदी के जीवन को बचाने के लिए भागीरथ प्रयास का बीड़ा उठाया है। पहाड़ो से खिलखिलाती रिस्पना नदी को देहरादून शहर में नाला हो चुकी नदी को सैना की ‘इको-टास्क फोर्स’ अब नया जीवन देगी। इको टास्क फोर्स के सीअो कर्नल हरी राज सिंह राणा के नेतृत्व में सेना के जवान राज्य सरकार की सहमति से रिस्पना नदी की साफ सफ़ाई और उसका फिर से विस्तार करने में जुटे। कर्नल हरिराज सिंह राणा का कहना है कि, “हमने सीएम साहब से बात करके इस प्रोजेक्ट को हाथ में लिया है, रिस्पना नदी के रिवाइव होने के लिए कम से कम चार-पांच साल का समय लगेगा और जब एक बार यह फिर से बहने लगेगी तब हम इसको स्टेट गवर्नमेंट के सुपुर्द कर देंगे। हम लोग इसके मुहाने पर ही अपना हेडक्वार्टर बनाएंगे और लगातार काम करेंगे। सेना के इस प्रयास से एक बार फिर रिस्पना के दिन बहुरने की उम्मीद बनी है, जो राज्य में दूसरी नदियों के लिए भी एक मील का पत्थर बनेगी।”

धरती मां को बंजर बना रही रसायनिक खाद्य

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रुद्रपुर, रसायनिक खाद के लगातार प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा क्षमता लगातार घटती जा रही है, धरा की दशा खराब होते देख जहां विशेषज्ञ चिंतित है तो लगातार उनके द्वारा किसानों को चेतावनी भी दी जा रही है, बावजूद इसके किसान समय पर नहीं चेता तो पैदावार पर तो असर पडेगा ही साथ ही खेत बंजर नजर आयेंगे।

जी हां रासायनिक खाद के अंधाधुंध प्रयोग के चलते मिट्टी की सेहत को नाजुक होती जा रही है। जिससे धरा की दशा खराब होने लगी है। समय रहते किसान नहीं चेता तो उपज की पैदावार तो कम होगी ही लागत बढ़ने से नुकसान उठाना पड़ेगा। हालांकि कृषि विभाग लगातार किसानों को मृदा परीक्षण करवा उसके मुताबिक खाद व पोषक तत्वों का प्रयोग करने के लिए लोगों को प्रेरित कर रहा है।

कृषि विभाग द्वारा जनपद में मृदा परिक्षण का कार्य युद्ध स्तर पर कराया जा रहा है। मृदा परीक्षण के बाद पोषक तत्वों की वास्तविक स्थिति सामने आने लगी है। जनपद में चालीस हजार से भी अधिक नमूने जांच के लिए रुद्रपुर स्थित मृदा परीक्षण लैब में पहुंचे तो उनकी जांच के बाद सहीं स्थिति सामने आने लगी है। जांच के दौरान भूमि में लौह पोषक तत्वों की काफी कमी पाई गई है। जो कि बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। हालांकि मृदा परीक्षण के माध्यम से इसका खुलासा होने के बाद किसान लौह तत्व का प्रयोग कर इस कमी को पूरा कर सकते है। नमूनों की रिपोर्ट पर नजर डाले तो काशीपुर व सितारगंज ब्लॉक में नाइट्रोजन व फॉस्फोरस की स्थिति भी न्यून पाई गई है। जनपद में लिए गए मिट्टी के नमूने के आंकड़ों पर नजर दौडायें तो चैंकाने वाले तत्थ सामने आयेंगे।

मृदा परीक्षण से भूमि में पोषक तत्वों की कमी का आंकलन होने के बाद किसान उन पोषक तत्वों का संतुलित प्रयोग कर लागत भी कम कर सकता है। साथ ही खेत में अनावश्यक रासायनिक खाद के प्रयोग से प्रभावित हो रही उर्वरा शक्ति को संतुलित कर सकता है। जिसका असर उसको कम लागत में अधिक पैदावार के रूप में हासिल हो सकता है। इसके लिए मृदा परीक्षण की जरुरत लगातार बढ़ती जा रही है। जिससे भूमि की सहीं स्थिति सामने आ सके।

डॉ. अभय सक्सेना, जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि, “क्षेत्र में किसानों को मृदा परिक्षण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जिससे मृदा में किस पोषक तत्व की कमी है इसका पता लगाया जा सके। मृदा परिक्षण के बाद सही रिपोर्ट सामने आने के बाद उसके मुताबिक ही पोषक तत्वों का प्रयोग किया जाए। जिससे अनावश्यक खाद का प्रयोग कम होने से लागत में भी कमी आएगी, इसका लगातार प्रयास किया जा रहा है।”

करोड़ों बकाया बिल वसूलने में ऊर्जा निगम के छूटे पसीने

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विकासनगर, पछवादून व जौनसार-बावर में ऊर्जा निगम का बीस करोड़ से ज्यादा का बिजली बिल बकाया है। कई सरकारी संस्थानों व सैकड़ों उपभोक्ताओं पर लंबित करोड़ों का बकाया बिल वसूलने में ऊर्जा निगम टीम को इन दिनों पसीने छूट रहे हैं।

आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो ऊर्जा निगम के विकासनगर, चकराता व हरर्बटपुर तीनों सब-डिवीजन से जुड़े 197 सरकारी संस्थानों पर निगम का करीब चार करोड़ बिजली बिल बकाया है। इसके अलावा पांच से दस हजार के बीच बकाएदारों की संख्या चार हजार के पार है। वसूली अभियान में तेजी लाने को ऊर्जा निगम अधिकारियों ने आधा दर्जन टीमें बनाई है।

बीते दस दिन में ऊर्जा निगम टीम ने रिकार्ड चार करोड़ की राजस्व वसूली की। साथ ही तीन सौ से ज्यादा लंबित बकाएदारों के बिजली कनेक्शन भी काटे।  अधिशासी अभियंता एसके गुप्ता ने बकाया बिल नहीं चुकाने वाले कई सरकारी संस्थानों व अन्य बड़े बकाएदारों को अंतिम नोटिस जारी किए हैं। बरहाल करोड़ों का बकाया बिल वसूलना ऊर्जा निगम के लिए बड़ी चुनौती है।

ऊर्जा निगम की टीम इन दिनों पछवादून व जौनसर-बावर में लंबित बड़े बकाएदारों की सूची खंगालने में लगी है। समय पर बिजली बिल नहीं चुकाने से विकासनगर, हरर्बटपुर व चकराता तीनों सब-डिवीजन से जुड़े विभिन्न सरकारी संस्थानों व सैकड़ों अन्य बकाएदारों पर ऊर्जा निगम का करीब बीस करोड़ बिजली बिल बकाया है।

निगम के आंकडे इस बात की तस्दीक भी कर रहे हैं। लंबे समय से बिजली बिल नहीं चुकाने वाले सरकारी संस्थानों की बात करें तो स्वास्थ्य विभाग पर ऊर्जा निगम का 25 लाख बकाया बिल है। इसके अलावा नलकूप खंड विभाग पर 22 लाख, शिक्षा विभाग पर 19 लाख, राजस्व विभाग पर आठ लाख, वन विभाग पर चार लाख, लोनिवि पर तीन लाख, परिवहन विभाग पर दो लाख, पुलिस विभाग पर डेढ़ लाख व कृषि विभाग पर करीब दो लाख बिजली बिल बकाया है।

सरकारी संस्थानों को छोड़कर पछवादून व जौनसार-बावर में पांच से दस हजार के बीच अन्य लंबित बकाएदारों की संख्या चार हजार के पार है। 197 सरकारी संस्थानों व चार हजार से ज्यादा अन्य बकाएदारों से करोड़ों का लंबित बकाया बिल वसूलने को ऊर्जा निगम अधिकारियों ने कसरत तेज कर दी है। वसूली अभियान में जुटी ऊर्जा निगम टीम को करोड़ों का बकाया बिल वसलूने में पसीने छूट रहे हैं।

निर्धारित लक्ष्य हासिल करने को ऊर्जा निगम देहरादून मुख्यालय के अधीक्षण अभियंता पीएस रावत ने पांच रोज पहले पछवादून क्षेत्र का दौरा कर वसूली अभियान की प्रगति रिपोर्ट जांची। अधीक्षण अभियंता रावत ने ईई विकासनगर व तीनों सब-डिवीजन के एसडीओ को वसूली अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।

इसी कड़ी में अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड विकासनगर एसके गुप्ता ने एसडीओ विकासनगर गुरुदीप सिंह, एसडीओ हरर्बटपुर अश्वनी कुमार व एसडीओ चकराता अशोक कुमार प्रजापति और तीन अन्य कनिष्ठ अभियंताओं की अगुवाई में आधा दर्जन टीमें बनाई है।