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क्रिसमस से पहले मसूरी में शुरु हुआ ”केक मिक्सिंग फेस्टिवल” का दौर

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त्योहार आते हैं और साथ में सबको करीब लाते हैं, चाहे वो महीनों दूर ही क्यों न हो।हर साल की तरह इस साल भी केक मिक्सिंग सेरेमनी, जो मसूरी के सवॉय होटल के ग्रेंड डाइनिंग रुम में मनाई  गई। केक मिक्सिंग सेरेमेनी, क्रिसमस से 3-4  हफ्ते पहले पहाड़ों की रानी मसूरी के कई होटलों में मनाई  जाती है, इस साल सवॉय होटल मसूरी ने यह पहल करी।

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करीब 20 मिनट के इस समारोह में एक्जिक्यूटिव शेफ सभ्या साची दासमहापात्रा ने मेहमानों को बताया कि किस तरह से अलग-अलग व्यंजनों को मिलाकर यह केक हफ्तों पहले तैयार किया जाता है:  ब्लैक करंट, सुनहरा खुमानी, रम में भीगे अंजीर, किशमिश, खजूर, चीनी में भिगाई हुई नारंगी, अदरक,कद्दू , सूखी चैरी, टूटी-फ्रूटी, से एक उत्तम केक बनता है जिसे एक महीने तक रम और ब्रांडी में भिगा के रखने से बाद एक परफेक्ट, स्वादिष्ट,परंपरागत केक के रुप में तैयार किया जाता है।”

क्रिसमस का मज़ा परंपरागत केक के बिना अधूरा है, इसको बनाने में जल्दबाजी नहीं करी जा सकती और आसानी से नही बनाया जा सकता है। इसकी तैयारियाँ एक महीने पहले से शुरु हो जाती हैं, इस परंपरागत समारोह के दौरान सभी लोग बङ-चङ के भाग लेते है जिनको वहाँ पर मौजूद शेफ र्निदेष देते हैं।  परंपरागत केक मिक्सिंग पार्टी में लेखक बिल एटकन, गणेश सैली,आभा सैली और कुछ खास दोस्त उपस्तिथ हुये।

और जिन्होंने अभी तक इस परंपरागत केक मिक्सिंग सेरेमनी में अपना हाथ नहीं आजमाया है,उनके लिए खुशखबरी है, “इस समारोह के फल का आनंद- यानि की क्रिसमस केक का लुत्फ उठाने के लिये आप भी साल खत्म होने से पहले पहाड़ों की रानी मसूरी, में सवॉय होटल का रुख जरूर करे,” कहना है अमित कुमार, जेनरल मैनेजर, सवॉय होटल का।

संबद्धता का ‘खेल’ खेल रहा आयुर्वेद विवि

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देहरादून। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय विवादों से अपना नाता छुड़ाने में लगातार असफल हो रहा है। एक के बाद एक नए विवाद विवि में जन्म ले रहे हैं। नया विवाद नियमों की खानापूर्ती करने के लिए ‘जुगाड़’ की फैकल्टी को संबद्ध करने से जुड़ा है। मान्यता के लिए विवि प्रदेशभर के आयुर्वेद चिकित्सकों को अपने परिसरों से अटैच करता है। मान्यता मिलने के बाद उन्हें वापस मूल तैनाती स्थल भेज दिया जाता है लेकिन अब सीसीआईएम से मान्यता बरकरार रखने के लिए विवि की यह तकनीक अब अटैच हुए चिकित्सकों को नागवार गुजर रही है।

सेंट्रल काउंसिल फोर इंडियन मेडिसन (सीसीआईएम) के संबऋता मानकों को पूरा करने के लिए विवि ने प्रदेश भर के आयुर्वेद डॉक्टरों को एकत्र कर संबद्धता हासिल कर ली। संबद्धता मिलने के बाद फिर उन्हें वापस तैनाती स्थल भेज दिया गया। ऐसा एक नहीं कई कई बार किया जा रहा है। इसी क्रम में अब एक बार फिर विवि से अटैच डॉक्टरों की संबद्धता विवि से समाप्त करते हुए उन्हें मूल तैनाती की जगह भेज दिया गया है। जबकि विवि में अभी तक पर्याप्त फैकल्टी की कोई व्यवस्था नहीं है। आलम यह है कि अब नए सत्र में दाखिला लेने वाले छात्रों को पढ़ाने के लिए विवि के पास फैकल्टी उपलब नहीं हैं। दरअसल विश्वविद्यालय के तीन कैंपस है। हर्रावाला स्थित मुख्य परिसर सबद्धता के मामले में सबसे ज्यादा बुरे हाल है। इसके अलावा बाकी दो परिसरों गुरुकुल और ऋषिकुल परिसरों के हालात भी कुछ जुदा नहीं है। यहां फैकल्टी को लेकर हमेशा कमी बनी रहती है। जिस कारण छात्रों को भारी परेशानियां झेलनी पड़ती है।

मान्यता के लिए डॉक्टरों को किया जा रहा अटैच
पिछले काफी वक्त से विवि द्वारा संबद्धता हासिल करने के लिए प्रदेश भर के आयुर्वेद चिकित्सकों को बतौर फैकल्टी विवि से अटैच कर दिया गया लेकिन नई सरकार में आयुष मंत्री डॉ हरक सिंह रावत ने सभी अटैच किए गए चिकित्सकों को वापस मूल तैनाती स्थल भेजे जाने के निर्देश दिए। जिसके बाद चिकित्सकों को वापस भेज दिया गया। इसके बाद विवि में नए सत्र के लिए काउंसिलिंग और सीसीआईएम के निरीक्षण और संबद्धता हासिल करने के लिए एक बार फिर चिकित्सकों को वापस अटैच कर दिया गया लेकिन काउंसिलिंग प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही शासन ने फिर से चिकित्सकों को मूल तैनाती स्थलों पर भेज दिया।

चिकित्सकों में रोष व्याप्त
चिकित्सकों की माने तो बार बार विवि और मूल तैनाती स्थलों के बीच चक्कर काटते काटते अब वे भी परेशान हो गए है। चिकित्सकों का कहना है कि विवि में लंबे वक्त तक अटैच रहने के कारण ज्यादातर चिकित्सकों के बच्चों ने भी दून के स्कूलों में दाखिले ले लिए। परिवार भी यही रहने लगे। जिस कारण अब उनके लिए भी बार बार मूल तैनाती और विवि अटैच करने की प्रक्रिया बोझिल हो रही है।

पढ़ाई हो रही चौपट
मान्यता हासिल करने के लिए विवि भले ही इधर-उधर के चिकित्सकों के जरिए सीसीआईएम से अनुमति हासिल करता आ रहा है लेकिन इस पूरे खेल में बच्चों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। फैकल्टी की संख्या पर्याप्त न होने के कारण छात्र-छात्राओं पढ़ाई चौपट हो रही है। हालांकि विवि ने साल की शुरूआत में आयोजित हुए विधानसभा चुनावों के बाद फैकल्टी के लिए नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की थी लेकिन उस प्रक्रिया को लेकर भी अब तक कोई सकरात्मक पहल होती दिखाई नहीं दी है। मामले में विवि के कुलचसिव अनूप कुमार गक्खड़ का कहना है कि फैकल्टी संबद्धता मामले में शासन से अनुरोध किया जाएगा कि जब तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं होती तब तक के लिए चिकित्सकों को विवि से ही अटैच रखा जाए। इसके अलावा नियुक्ति प्रक्रिया में शासन की ओर से कुछ आपत्तियां हैं, उनका भी निस्तारण किया जा रहा है।

बोलेरो खाई में गिरी, एक की मौत तीन घायल

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उत्तरकाशी। उत्तरकाशी जिले के भटवाड़ी ब्लॉक के तहत गंगोत्री हाईवे से झाला के लिए ‌जाने वाले मोटर मार्ग पर शुक्रवार देर रात एक बोलेरो अनियंत्रित होकर करीब 15 मीटर गहरी खाई में गिर गई। जिसमें सवार एक व्यक्ति की मौत हो गई। जबकि चालक सहित तीन लोग घायल हो गये।

गंगोत्री राजमार्ग से झाला गांव के लिए करीब 400 मीटर का लिंक मार्ग है। शुक्रवार देर रात गंगोत्री हाईवे से झाला‌ के लिए एक बोलेरो जा रही थी। तभी लिंक मार्ग पर बोलेरो गाड़ी अनियंत्रित होकर करीब 15 मीटर खाई में गिरकर नदी के किनारे अटक गई। जिसमें छह लोग सवार थे। जिनमें से तीन लोक घायल हो गये ‌जबकि एक की उत्तरकाशी जिला अस्पताल लाते समय रास्ते में मौत हो गई।
थानाध्यक्ष हर्षिल सुरेंद्र सिंह ने बताया कि घायलों में चालक दिनेश, सुरेश और अरविंद हैं जिन्हें हर्षिल पीएचसी में प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई थी। जबकि अतर सिंह उम्र 38 वर्ष निवासी झाला की उत्तरकाशी जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई थी। उन्होंने बताया कि परिजनों पीएम कराने से मना कर दिया था जिसके बाद शव को उनके सुपुर्द कर दिया गया। 

यमुनोत्रीधाम में गिरी बर्फ, बूंदाबांदी से बढ़ी ठंडक

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उत्तरकाशी। उत्तराखंड के सीमांत जिला उत्तरकाशी में मौसम ने शनिवार को एक बार फिर से करवट ली। यहां यमुनोत्री धाम के साथ ही उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हिमपात हुआ है, जबकि गंगोत्री में भी हल्की बर्फ गिरी, लेकिन ज्यादा देर टिक नहीं पाई। वहीं निचले इलाकों में हल्की बूंदाबांदी ने मौसम में ठंडक पैदा कर दी है।

उत्तरकाशी जिले में शनिवार को तड़के सुबह से मौसम अचानक बदला। जिसमें निचले इलाकों में दिन में कई बार हल्की फुल्की बूंदाबांदी ने मौसम में ठंडक ला दी है, जिससे स्थानीय लोग अपने गर्म पकड़े निकालने पर मजबूर हो गये हैं। वहीं उच्च हिमालयी क्षेत्रों की चोटियों पर हिमपात हुआ है। बताया जा रहा है कि यमुनोत्री में हल्की बर्फबारी हुई है, जबकि गंगोत्री में बर्फ ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई है। यमुना वैली के खरसाली, जानकीचट्टी में हल्के ओले गिरे हैं। गंगा वैली में दिन भर मौसम अपना रूप बदलता रहा। कभी बांदलों के बीच से हल्की धूप निकली तो कभी बूंदा-बांदी हुई। शाम तक मौसम में ठंडक पहले कहीं ज्यादा बढ़ गई है। 

पहाड़ों पर बर्फबारी से मैदानी इलाकों में बढ़ी ठंड

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हरिद्वार। उत्तराखंड की पहाड़ियां पर बर्फबारी होने का असर प्रदेश के मैदानी इलाकों में भी देखने को मिला। मैदानी इलाकों में पारा गिरने से ठंड का एहसास हुआ और लोग गर्म कपड़े पहनने को मजबूर हुए।

बता दें कि प्रदेश के बद्रीनाथ, केदारनाथ व अन्य ऊंचाई वाले स्थानों पर बर्फबारी होने से मैदानी इलाकों खासकर तीर्थनगरी हरिद्वार में ठंड का प्रकोप बढ़ गया है, जिसके चलते शनिवार सुबह आसमान में बादल छाए रहे और लोगों को ठंड ने परेशान किया। दोपहर बाद धूप खिली, किंतु धूप में तपिश अन्य दिनों की अपेक्षा काफी कम थी। दोपहर बाद फिर से सूर्यदेव की तपिश कम हुई और ठंड का प्रकोप बढ़ गया। ठंड के कारण लोग गर्म कपड़े पहनने को मजबूर हो गए। शाम के समय भी ठंड के कारण बाजारों में चहल-पहल अन्य दिनों की अपेक्षा कम रही। जिस प्रकार से पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी हुई है, उसको देखते हुए अब ठंड का प्रकोप दिन प्रतिदिन बढ़ेगा।

ट्रेन आने पर फाटकों और स्टेशन पर हों विशेष इंतजाम

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किच्छा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस प्रदेश महामंत्री हरीश पनेरू व युवा व्यापार मंडलाध्यक्ष दुर्गेश गुप्ता के नेतृत्व में रेलवे स्टेशन पहुंचकर स्टेशन मास्टर को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि किच्छा रेलवे स्टेशन के आस पास लगभग छह  किमी के दायरे मे आचनक ही रेल गाड़ी आने से आए दिन हादसे होते रहते हैं, हादसों में प्रतिमाह चार से पांच व्यक्ति की मौत हो जाती है।

उन्होंने रेलवे प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि अगर रेलवे स्टेशन पर पर कोई विशेष गाड़ी आए तो उसकी जानकारी के लिए रेलवे फाटकों और स्टेशन पर विशेष इंतजाम किया जाएं ताकि रेलवे से होने वाले हादसों को कम किया जा सके। इस दौरान दीपक यादव, तस्लीम रजा सलमानी, जवेद मलिक आदि थे।

बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने से पहले सजने लगा मंदिर

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गोपेश्वर। बद्रीनाथ धाम के कपाट रविवार को बंद होने हैं। कपाट बंद होने से पूर्व मंदिर को फूलों से सजाया जाता है। मंदिर को फूलों से सजाने की तैयारियों में मंदिर समिति लग गई है।

यह एक भी एक अद्भुत संयोग है एक ओर मंदिर को फूलों से सजाया जा रहा है। दूसरी ओर पूरी बद्रीपुरी सफेद बर्फ से ढकी है। कपाट बंद होने के उत्सव को देखने के लिए देश-विदेश से भी यात्री, श्रद्धालु यहां पहुंचने लगे हैं। वाहनों की आवाजाही लगातार जारी है। बर्फ गिरने के कारण कुछ लोगों ने अपने प्रतिष्ठानों और आश्रमों के बाहर अलाव भी जलाये हैं। कपाट बंद होने से पूर्व बद्रीनाथ में बर्फबारी का यह नजारा कई वर्षों बाद दिख रहा है।

धाम में अभी कुछ व्यावसायिक प्रतिष्ठान खुले हैं कुछ बंद करने की तैयारी में लगे है। कपाट बंद होने पर गढ़वाल राइफल अपने बैंड की जो मधुर ध्वनि बजाती है। उसके लिए सेना के बैंड भी यहां पहुंच चुके हैं। माणा, बामणी गांव के लोग भी कपाट बंद होने के पल भगवान के दर्शनों और पूजा-अर्चना की तैयारी में लगे हैं।

मंत्री मदन कौशिक की राजनीति में फिट नहीं बैठ रहे मेयर

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हरिद्वार। हरिद्वार मेयर मनोज गर्ग के राजनीतिक गुरु कहे जाने वाले कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक और मेयर मनोज गर्ग के बीच आजकल कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इससे मेयर मनोज गर्ग के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगाने वाले मदन के ताजा राजनितिक आंकड़ों में मनोज गर्ग का कद घटता हुआ नजर आ रहा है।

मामले की सुगबुगहाट हाल ही में हुए दो बड़े कार्यक्रमों से हुई, जहां पर मदन ने मनोज गर्ग को सार्वजनिक रूप से न केवल लताड़ लगाई अपितु उनके ज्ञान पर भी सवाल खड़ा किया। मनोज गर्ग के लिए मंत्री का सार्वजनिक मंच पर इस तरह का व्यवहार किसी झटके से कम नहीं हैं। माना जाता है कि मदन कौशिक की भाषण शैली को देखकर मनोज गर्ग ने राजनीतिक क्षेत्र में कदम बढ़ाया है लेकिन आजकल मनोज गर्ग के ही राजनितिक गुरु को उनके भाषणों व उनकी जानकारियों पर ही संदेह होने लगा है क्योंकि कौशिक भरे मंच पर मनोज गर्ग को आईना दिखाने का काम भी किया है। इसकी एक झलक गुरुवार को गुघाल गेट पर सीवरेज योजना के शिलान्यास कार्यक्रम में देखने को मिली जब मेयर ने पूर्व की योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्हें बंद करने का दोष पूर्व की कांग्रेस सरकार पर लगाया तो मंच पर मौजूद मदन कौशिक इससे खासे खफा हो गए और उन्होंने मेयर की जानकारी पर उसी समय सवाल उठाते हुए जमकर लताड़ लगाई।
सार्वजनिक तौर पर इस तरह से मदन ने पहली बार मेयर मनोज गर्ग को लताड़ नहीं लगाई, इससे पहले प्रेस क्लब के कार्यक्रम में भी पत्रकार कॉलोनी को लेकर कौशिक मनोज गर्ग को सार्वजनिक तौर पर आड़े हाथों ले चुके हैं। वहीं अब कौशिक के इस तरह से मेयर को सार्वजनिक तौर पर आड़े हाथों लेने के राजनितिक मायने निकाले जा रहे हैं, जिसमें सबसे प्रबल संभावना दोनों के बीच राजनितिक गणित का गठजोड़ आने को लेकर लगाई जा रही है। कहा जा रहा है कि मेयर मनोज गर्ग अब मदन कौशिक की राजनितिक आंकड़ों में फिट नहीं बैठ रहें, इसलिए इस नीति पर काम किया जा रहा है। भाजपा के मेयर ने चुनाव को देखते हुए सक्रियता को तेज कर दिया है और यह संदेश देने का काम कर रहे हैं कि भाजपा उन्हीं को अपना मेयर पद का उम्मीदवार बनाएगी। यही वजह है कि मेयर कार्यक्रमों में कुर्सी लगाने से लेकर दरी बिछाने का काम भी आजकल बड़े चाव से कर रहे हैं।

उत्तराखंड में हल्की बारिश, चोटियों पर बर्फबारी

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गोपेश्वर। बद्रीनाथ के कपाट बंद होने से एक दिन पूर्व जमकर बर्फबारी हुई। सुबह रुड़की, देहरादून, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और कुमाऊं के रुद्रपुर में हल्की बारिश हुई। इससे मैदानी क्षेत्रों में भी पारा लुढ़कने लगा है।
शुक्रवार रात से शुरू बर्फबारी शनिवार की सुबह भी जारी रही। बद्रीनाथ में शुक्रवार देर शाम मौसम ने तेजी से करवट ली और रात्रि में बर्फबारी होने लगी। शनिवार की सुबह भी बर्फबारी जारी रही, लेकिन भगवान बद्रीनाथ के कपाट रविवार शाम 7.28 मिनट पर शीतकाल के लिए तय समय पर ही बंद होंगे। उनके दर्शन और कपाट बंद होने की अद्भुत व धार्मिक मान्यता के साक्षी बनने के लिए हजारों श्रद्धालु बद्रीनाथ पहुंच गए हैं।

युवक गिरफ्तार, 22 बोतल अवैध शराब बरामद

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गोपेश्वर। चमोली जिले के विकास खंड घाट पुलिस चौकी की पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से हरियाणा ब्रांड की 22 बोतल अवैध शराब बरामद हुई है।
पुलिस चौकी प्रभारी घाट विनोद कुमार गोला ने बताया कि शुक्रवार की देर शाम वाहनों की जांच अभियान के तहत भेटी पुल के पास एक युवक को रोककर जांच-पड़ताल की गई तो उसके पास से 22 बोलत हरियाणा ब्रांड की अवैध शराब बरामद हुई। आरोपी का नाम हरीश पुरोहित है। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।