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हिना खान पर भड़कीं गौहर कहा, अच्छाई और तमीज तो सीखी नहीं

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रियल्टी शो बिग बॉस की प्रतिभागी हिना खान का सहप्रतिभागी अर्शी खान और विकास गुप्ता से हुई एक बातचीत का विडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें वो ये कहती हुई नजर आ रही हैं कि साक्षी तंवर भैंगी है और गौहर खान की फैन फॉलोविंग उऩसे बहुत कम है।

इसके बाद बिग बॉस सीजन-7 की विजेता गौहर खान ने ट्विटर पर हिना खान को जवाब देते हुए कहा कि अच्छाई और तमीज तो सीखी नहीं, मैथ करना सीखा होता तो आज झूठे घमंड में आके कही गई बात पर लोग इतना हंसते नहीं, अल्लाह सबको तरक्की दे … आमीन !! घमंड से आज तक किसी का कुछ भला नहीं हुआ है। साक्षी तंवर आप खूबसूरत हैं।

टीवी कलाकार और बिग बॉस सीजन-7 की प्रतिभागी काम्या पंजाबी ने ट्विटर पर कहा कि ओह माई गॉड… मैने जो देखा क्या वो सच है, क्या वो सच है? क्या यह सच में हिना खान है? कौन है ये? कहां से आई है? गौहर खान आई लव यू| मुझे आप पर गर्व है। साथ ही काम्या ने कहा कि हिना खान पहले सांक्षी तंवर की तरह बनकर दिखाओ।

गौहर खान और काम्या पंजाबी के अलावा बिग बॉस सीजन 9 की प्रतिभागी किश्वर मार्चेन्ट, सीरियल ‘ये हैं मोहब्बतें’ के करन पटेल, उर्वशी ढोलकिया सहित कई अन्य टीवी कलाकारों ने हिना खान की आलोचना की है।

‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ की दयाबेन ने दिया बेटी को जन्म

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सब टीवी पर आने वाले सुप्रसिद्ध सीरियल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में दायाबेन का किरदार निभाने वाली दिशा वकानी ने एक बेटी जन्म दिया है। दिशा वकानी ने 24 नवम्बर 2015 को मुंबई में रहने वाले चार्टेड अकाउंटेन्ट मयूर पाडिया से शादी की थी। पैदा होने वाली बिटिया दोनों की पहली है।

उल्लेखनीय है कि दिशा वकानी सब टीवी पर आने वाले पापुलर कॉमेडी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में दया जेठालाल गड़ा का मुख्य किरदार निभाती हैं। यह शो अब तक हर आयु वर्ग के लोगों के बीच काफी पापुलर है। इस शो में दयाबेन के भाई सुंदर का किरदार निभा रहे कलाकार का वास्तविक नाम मयूर वकानी है। वे दया उर्फ दिशा के वास्तविक जीवन में भी भाई हैं।

दिशा वकानी फिल्म देवदास और जोधा अकबर में सपोर्टिंग रोल में भी काम कर चुकी हैं। 

काशीपुर नैनीताल हाईवे पर अतिक्रमण पर हाइकोर्ट के निर्देश

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नैनीताल, अतिक्रमण पर एक बार फिर हाई कोर्ट ने सक्त रवैय्या दिखाया है। हाई कोर्ट ने रामनगर-काशीपुर मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग पर अतिक्रमण मामले में सरकार को दो सप्ताह में स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। एन एच पर हो रहे अतिक्रमण को हटाने के लिए प्रसादं द्वारा कारवाही के नाम पर महज इतिश्री ही कि जाति रही है।

रामनगर निवासी मोहम्मद सुलेमान ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि रामनगर-काशीपुर मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग-121 चिलकिया-टांडा मल्लू पर अतिक्रमण किया गया है। याचिका में कहा गया है कि टांडा चौराहे पर स्कूल बसें, ट्रैक्टर-ट्रॉली, सवारी बस, डंपर तथा ट्रकों की हर समय आवाजाही बनी रहती है। जिस कारण लगातार जाम लगा रहता है, आए दिन हादसे होते रहते हैं।

याचिका में बताया गया है कि इस मामले में पूर्व में चंद्र सती की ओर से जनहित याचिका दायर की गई थी, कोर्ट ने दो साल पहले 12 अगस्त को याचिका निस्तारित करते हुए कहा था कि यदि फिर से अतिक्रमण किया गया तो फिर से याचिका दायर कर सकते हैं। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ व न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद दो सप्ताह में स्थिति साफ करने के निर्देश दिए गए।

कर्मचारियों और एसडीएम का निकला खून

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काशीपुर की आईजीएल फैक्ट्री में कर्मचारियों और प्रबन्धन के अधिकारियों का खूब खून निकला, यही नहीं मौके पर पहुंचे उपजिलाधिकारी ने भी खून निकला, जी हां काशीपुर की आईजीएल फैक्ट्री में बडे स्तर पर रक्त दान शिविर का आयोजन किया गया, जहां तीन सौ के करीब कर्मचारियों ने रक्तदान किया, यही नहीं इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि उपजिलाधिकारी विनीत तोमर ने भी रक्त दान कर लोगों को रक्तदान करने के लिए प्रेरित किया।

हर वर्ष कमपनी द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाता है जिसमें सैंकडों कर्मचारियों द्वारा सरकारी अस्पताल की मदद लेकर ब्लड बैंक में ब्लड की कमी को पुरा जाता है। एम के राव ने बताया कि कम्पनी द्वारा हर साल रक्त दान शिविर का आयोजन किया जाता है और हर कर्मचारी को स्वेच्छा से रक्त दान करने के लिए प्रेरित किया जाता है, यही नहीं कर्मचारियों के परिजनों द्वारा भी रक्तदान शिविर में बडचढ कर भाग लिया जाता है।

मसूरी में बिल्डिंग ना हुई सील तो मजदूर संघ करेगा हड़ताल

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मसूरी के मजदूर संघ (मजदूर संगठन) ने मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण को चिट्ठी के माध्यम से उन्हें पहाड़ी शहर के कुलरी इलाके में अपने ऑफिस के पास एक “अनधिकृत” निर्माण को रोकने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चिट्ठी में अनिश्चितकाल विरोध पर जाने की धमकी दी और कहा कि असफल कार्रवाई पर उन्हें यह करना पड़ेगा।  उन्होंने चिट्टी में यह बात साफ की है कि यह निर्माण ना केवल अवैध है बल्कि उनकी अनुमति के बिना किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चूंकि यह इमारत उनकी बिल्डिंग के बगल में हैं, इसलिए नई बनाई जा रही बिल्डिंग सामने से आने वाली स्वच्छ हवा और सूरज की रोशनी  ब्लॉक कर रहा है।

यूनियन मार्च के लगभग 50 सदस्यों की एक भीड़ एमडीडीए के कार्यालय के बाहर एक लिखित शिकायत देने के लिए मिला, यूनियन के सदस्यों ने कहा कि एमडीडीए को इस पत्र को सौंपने का यह तीसरा प्रयास था।

वह बिल्डिंग जिसमें श्रमिक संघ का कार्यालय है, वह लगभग 100 साल पुरानी है और उसमें 500 से ज्यादा सदस्य हैं जिसमें  शहर में रिक्शा चालक, कूलि और अन्य श्रमिक शामिल हैं।

मजदूर संघ के सचिव गंबीर सिंह पंवार ने कहा कि, “जिस जमीन पर भवन निर्माण किया जा रहा है वह कई सालों से विवादों में रहा है। दिलचस्प बात यह है कि जिस व्यक्ति ने यह केस हारा था उसने इस जमीन को वीरेंद्र जदवान जोकि नगर परिषद के एक कर्मचारी के रूप में काम करते हैं उन्हें बेच दिया है, जो इसपर नई बिल्डिंग बना रहा है। नई बिल्डिंग बनाने के लिए हमारे पास से कोई अनुमति नहीं ली गई है, एक तो यह हमारे बिल्डिंग में आने वाली सूरज की रोशनी और हवा को अवरुद्ध करेगा दूसरा हमसे बिना पूछे हम इमारत को नहीं बनने दे सकते। गंबीर सिह ने कहा कि, “हमने एमडीडीए को चेतावनी दी है कि अगर वह इमारत को सील करने में असफल रहे तो मजबूरन हमें हड़ताल पर जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। “

यूनियन के सदस्य देवी गोदियाल ने कहा कि, “कोई रास्ता नहीं है कि भवन योजना एमडीडीए द्वारा पारित होनी चाहिए, और अगर ऐसा है तो नगर परिषद क्या कर रही थी?”

वहीं दूसरी तरफ मसूरी में एमडीडीए अधिकारियों से संर्पक स्थापित करने के कई प्रयासों के बाद कोई भी कॉल लेने के लिए उपलब्ध नहीं था।

सोशल मीडीया पर एंटी सोशल होते उत्तराखंड के अधिकारी

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डिजीटल मीडिया के दौर में सोशल मीडिया अभिव्यक्ति का मुख्य माध्यम है लेकन अभी भी बहुत से लोग सोशल मीडिया के इस्तेमाल से बच रहे हैं।आइये आपको उत्तराखंड राज्य के अधिकारियों का लेखा जोखा बताते हैं।

अगर हम उत्तराखंड के आईएएस और पीसीएस की बात करें तोः

1.देहरादून डीएमः मई 2017 से टिव्टर पर हैं लेकिन सक्रियता कम है। ्319 फॉलोवर है और खुद 2 लोगों को फॉलो कर रहे हैं।हालांकि पिछले 6 महीने में केवल 54 टिव्ट किए हैं।

  • देहरादून एसएसपीः मार्च 2017 से टिव्टर पर एक्टिव और दून पुलिस के नाम से फेसबुक पेज।दोनों ही माध्यमों पर एक्टिव।2,847 फॉलोवर और 798 टिव्टस के साथ दून एसएसपी सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं।

2. रुद्रप्रयाग डीएमः मई 2017 से टिव्टर पर अकाउंट और फेसबुक पर एक पेज पर हजारों फॉलोवर।मई से टिव्टर पर होने के बावजूद केवल 19 टिव्ट और 472 फॉलोवर।

  • रुद्रप्रयाग एसपीः अप्रेल 2017 से टिव्टर पर अकाउंट,734 फॉलोवर 101 टिव्ट।फेसबुक पर कोई पेज नहीं।

3. चमोली डीएमः मई 2017 से टिव्टर अकाउंट,आखिरी टिव्ट 16 अक्टूबर और केवल 67 फॉलोवर कारण सक्रियता ना होना।

  • चमोली पुलिसः अप्रैल 2017 से टिव्टर पर अकाउंट,579 फॉलोवर,696 टिव्ट।हर घंटे पर अपडेट होने वाला टिव्टर अकाउंट लोगों के बीच लोकप्रिय है।फेसबुक पर भी चमोली पुलिस का एक्टिव पेज है।
  • एसपी चमोलीः मई 2017 से टिव्टर पर एक्टिव,571 फॉलोवर,313 टिव्ट और एक्टिव पेज।

4.उत्तरकाशी डीएमः मई 2017 से टिव्टर अकाउंट,आज तक एक भी टिव्ट नहीं।केवल 45 फॉलोवर सक्रियता ना के बराबर।

  • उत्तरकाशी एसपीः मई 2017 से टिव्टर पर अकाउंट एक भी टिव्ट नहीं। फॉलोवर भी केवल 40।

6. टिहरी डीएमः मई 2017 से टिव्टर पर एक्टिव।एक भी टिव्ट नहीं,फॉलोवर भी ना के बराबर।

  • टिहरी एसएसपीः अप्रैल 2017 से टिव्टर पर अकाउंट,आज तक एक भी टिव्ट नहीं।केवल 39 फॉलोवर।

7.पौड़ी डीएमः मई 2017 से टिव्टर पर अकाउंट,65 फॉलोवर के साथ आजतक एक भी टिव्ट नहीं।

  • पौड़ी एसएसपीः मई 2017 से टिव्टर अकाउंट,617 फॉलोवर।टिव्टर पर एक्टिव,फेसबुक पेज सक्रिय नहीं।

8. हरिद्वार डीएमः फेबुक पर सबसे एक्टिव रहने वाले हरिद्वार डीएम टिव्टर से कोसों दूर।मई 2017 से टिव्टर पर अकाउंट लेकिन आज तक एक भी टिव्ट नहीं।

  • हरिद्वार पुलिसः मई 2017 से टिव्टर अकाउंट,56 फॉलोवर,एक भी टिव्ट नहीं।फेसबुक पर हरिद्वार पुलिस पेज लेकिन कोई सक्रियता नहीं।
  1. अल्मोड़ा डीएमः मई 2017 से टिव्टर अकाउंट लेकिन अक्टूबर 19 के बाद एक भी टिव्ट नहीं,617 फॉलोवर लेकिन सक्रियता ना के बराबर।
  • अल्मोड़ा पुलिसः मई 2017 से अकाउंट लेकिन अक्टूबर 19 के बाद एक भी टिव्ट नहीं।फेसबुक पर कोई अकाउंट नहीं।
  1. उधमसिंह नगर पुलिसः अप्रैल 2017 से अकाउंट लेकिन एक भी टिव्ट नहीं।
  • उधमसिंह नगर एसएसपीः मई 2017 से टिव्टर अकाउंट,985 फॉलोवर,अपडेटेड अकाउंट।फेसबुक पर भी अपडेटेड पेज।
  1. चंपावत डीएमः मई 2017 से टिव्टर पेज। 443 फॉलोवर,खबरों से अपडेटेड। फेसबुक पर कोई पेज नहीं।
  • चंपावत एसपीः मई 2017 से टिव्टर पेज,485 फॉलोवर,तथा एक्टिव टिव्टर पेज।
  1. नैनीताल डीएमः मई 2017 से टिव्टर पेज,59 फॉलोवर,एक भी टिव्ट नहीं फेसबुक पर भी कोई पेज नहीं।
  • नैनीताल एसएसपीः मई 2017 से टिव्टर पर पेज,20 जुलाई को आखिरी टिव्ट,850 फॉलोवर होने के बाद शून्य सक्रियता।
  1. पिथौरागढ़ डीएमः मई 2017 से टिव्टर पर अकाउंट,533 फॉलोवर,सितंबर 30 को आखिरी टिव्ट।
  • पिथौरागढ़ पुलिस का टिव्टर पर कोई पेज नहीं ना ही फेसबुक पर।
  1. बागेश्वर डीएमः जून 2017 से टिव्टर अकाउंट,67 फॉलोवर,कम फॉलोवर होने के बाद हरदम सक्रिय।फेसबुक पर कोई पेड नहीं।
  • बागेश्वर पुलिसः मई 2017 से टिव्टर अकाउंट,646 फॉलोवर,हरदम अपडेटेड होने के साथ सक्रिय।फेसबुक पर कोई पेज नहीं।

 

टिहरी की मनीषा के लिए एक वरदान बनकर आई ”सोच संस्था”

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बहुत पुरानी कहावत है कि हम किसी को कुछ ना दे सकते ना ले सकते,लेकिन किसी की मदद जरुर कर सकते हैं।बस इसी सोच के साथ टिहरी जिले के कलेथ गाँव में रहने वाले एक परिवार के बारे में जब ‘सोच’ संस्था को पता चला तो उन्होंने इस परिवार की मदद करने की ठान ली। परिवार के मुखिया दिगंबर सिंह बहुत गरीब होने के साथ -साथ गूंगे और बहरे हैं, और उनकी बेटी “मनीषा” भी गूंगी और बहरी है। इस पूरे परिवार में दिगंबर सिंह की पत्नी और बाकी दो बेटियां भी गूंगे और बहरे हैं ।

मनीषा और उनके पिता
मनीषा और उनके पिता

मनीषा जो परिवार की सबसे बड़ी बेटी है उसकी शादी 19 नवंबर  को हुई जिसके लिए इस परिवार को कुछ आर्थिक सहायता चाहिए थी । सोच संस्था को जब इसके बारे में पता चला तो इस पुण्य काम में सोच संस्था ने उस असहाय परिवार की थोड़ी सी आर्थिक मदद देने के लिए छोटी सी मुहीम चलाई जिसमे बहुत से लोगों ने सहयोग किया और यह मुहीम सफल हुई।सोच  संस्था ने ना केवल अलग-अलग जगहों और लोगों से मदद ली बल्कि सोच संस्था की तरफ से ये छोटी सी आर्थिक मदद लड़की के पिता को दी गई।इस पहल के लिए बहुत से लोगों ने अपनी स्वेच्छा के अनुसार मनीषा की शादी के लिए अपनी समर्थ के अनुसार भेंट किया।

सोच संस्था की खुशियों को जोड़ने की कोशिश रंग लायी और 19 नवंबर को मनीषा की शादी सभी पहाड़ी रीती -रिवाज़ो से संपन्न हुई। सोच संस्था सभी दान करने वालों का आभारी रहेगा और दिल से धन्यवाद करता है। आपको बतादें कि मनीषा के परिवार को कुल मिलाकर Rs.23152 सोच संस्था की तरफ से दिए गए जिसमे से 18,452 रुपये का चेक और बाकी रुपये 4700 मनीषा के खाते में सीधे दानदाताओ द्वारा भेजे गए |

सोच की इस पहल को टीम न्यूजपोस्ट का सलाम और आशा करते है कि आगे जब भी कोई जरुरतमंद होगा सोच और जो लोग भी अपनी स्वेच्छा से दान करना चाहते हैं वह दिल खोल कर दूसरे की मदद करेंगे।

केदारनाथ के निर्माण कार्यों पर उठ रहे सवाल,निम से नहीं मिल रहा कोई जवाब

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देहरादून। केदारनाथ में वर्ष 2013 में आई प्राकृतिक आपदा के बाद से यहां के निर्माण कार्यों को लेकर धर्म से लेकर सत्ता के गलियारे के बीच आए दिन सवाल उठते रहते हैं। एक तरफ सत्ता में बैठी हर सरकारें कार्यों को गति देने की बात करती हैं, तो दूसरी ओर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठता रहता है, लेकिन इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी जवाब देने से हमेशा बचते रहते हैं।

केदारनाथ पुर्ननिर्माण के दौरान नेहरू पर्वतारोहण संस्थान को 200 किलोवॉट की एक अति लघु परियोजना बनानी थी, लेकिन यह समय पर पूरी नहीं हो पाई। इतना ही नहीं अब इस परियोजना की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाये जा रहे हैं। निम केदारनाथ में बन रही 200 किलोवॉट की अति लघु परियोजना को लेकर मुख्य सचिव के पास एक शिकायती पत्र पहुंचा है। पत्र खुद केदारनाथ के विधायक मनोज रावत ने लिखा है। जिसका संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव ने जांच के आदेश दिए हैं।
अपर सचिव वैकल्पिक ऊर्जा ने उरेडा के निदेशक को 22 नवम्बर को एक पत्र लिखा है। इस मामले की जांच 15 दिनों के अंदर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
उरेडा की ओर से कई बार निम को इस परियोजना को लेकर पत्र भी लिखे, लेकिन नेहरु पर्वतारोहण संस्थान की तरफ से इसका कोई जवाब नहीं मिला। इस पूरे मामले को लेकर अभी तक लगभग आठ पत्र निम के प्रधानाचार्य कर्नल कोठियाल को भेजे जा चुके हैं लेकिन उन्होंने एक भी पत्र का जवाब देना जरूरी नहीं समझा। इसके बाद खुद डीएम रुद्रप्रयाग ने 23 अक्टूबर को एक कड़ा पत्र कर्नल कोठियाल को भेजा, फिर भी इस पत्र का जवाब नहीं मिल सका है।
इस संबंध में केदारनाथ के विधायक मनोज रावत ने बताया कि उन्होंने इस परियोजना का जब जायजा लिया तो कई खामियां देखने को मिली। इस परियोजना से जून 2015 में बिजली उत्पादन होना था लेकिन अभी तक परियोजना पूरी नही हो पाई है। ऐसे में इस परियोजना पर सवाल उठना लाजमी है। 

अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ रही राजधानी की स्वास्थ्य सेवाएं

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देहरादून। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल यदि जानना है, तो किसी दुरुह क्षेत्र में जाने की जरूरत नहीं है। राजधानी दून में ही दिख जाएगा कि अव्यवस्था के मर्ज ने हेल्थ सिस्टम को किस कदर जकड़ लिया है। अब दून मेडिकल कॉलेज की महिला विंग (दून महिला अस्पताल) का ही उदाहरण लीजिए। बुधवार सुबह टीके लगाने जुटी भीड़ को उस वक्त मायूस होना पड़ा जब स्टाफ ने यह कह दिया कि सीरिंज खत्म है। टीका लगाना है तो सीरिंज बाहर दुकान से लानी पड़ेगी।

दरअसल गर्भवती व बच्चों को दून महिला अस्पताल में सप्ताह में तीन दिन टीके लगाए जाते हैं। बुधवार को भी अस्पताल में महिलाएं अपने बच्चों और कई गर्भवती टीका लगाने को पहुंची थीं। कुछ टीके लगाने के बाद मौजूद स्टाफ ने टीका लगाने से हाथ खड़े कर दिए। उन्होंने बताया कि सीरिंज खत्म हो गई है। टीकाकरण के लिए बाहर से सीरिंज लाने को कहा गया। सीरिंज खत्म होने के कारण कई लोग वापस लौट गए, तो कई ने बाहर से सीरिंज लाकर टीका लगवाया। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रदीप भारती गुप्ता का कहना है कि स्टॉक में सीरिंज की कमी नहीं है। टीकाकरण कक्ष में सीरिंज खत्म थे, तो वक्त पर इसकी डिमांड की जानी चाहिए थी। अस्पताल में इस तरह की संवादहीनता नहीं होनी चाहिए। इस मामले में स्टाफ से स्पष्टीकरण तलब कर लिया है। बहरहाल कॉलेज प्रशासन अब चाहे जो कहें, सवाल उठता है कि टीकाकरण के दिन इस तरह की कोताही आखिर क्यों बरती गई। वह भी तब जब टीकाकरण के लिए भारी भीड़ जुटती है। महिलाएं अपने छोटे छोटे बच्चों को लेकर व कई गर्भवती दूरदराज से टीका लगाने आती हैं। उन्हें सीरिंज जैसी चीज भी बाहर से खरीदना पड़े तो इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर ही सवाल खड़े होते हैं। 

देश के सबसे कुपोषित 504 जनपदों में हरिद्वार 253वां

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देहरादून। नीति आयोग की सर्वे रिपोर्ट में काफी चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक देश के सबसे कुपोषित 504 जनपदों में हरिद्वार 253वां कुपोषित जिला घोषित किया गया है। जनपद में कुल बच्चों की आबादी में 39.1 फीसद बच्चे कुपोषित पाए गए हैं। इससे उत्तराखंड के दामन पर निम्न लिंगानुपात दर के बाद एक और दाग लगा है।

केंद्र सरकार ने वर्ष 2022 तक देश को कुपोषणमुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए नीति आयोग ने देशभर में कुपोषण, अतिकुपोषण की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए सर्वाधिक कुपोषित और अतिकुपोषित जनपदों को चिह्नित किया है। शीर्ष 100 जनपद अतिकुपोषित व 404 जनपद कुपोषित घोषित किए गए हैं। इनमें पांच वर्ष तक के बच्चों को शामिल किया है। रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश के बहराइच 65.1, स्वस्ति 62.8, पश्चिमी सिंगभूम 59.4 प्रतिशत कुपोषित बच्चों की दर के साथ क्रमश: पहले, दूसरे, तीसरे स्थान पर हैं। इनमें हरिद्वार जनपद 39.1 की दर के साथ 253वें स्थान पर है, जो कि कुपोषित जनपद की श्रेणी में है। रिपोर्ट के अनुसार, हरिद्वार में कुल बच्चों 1,83,440 बच्चें हैं। इनमें करीब 32 फीसद बच्चे कुपोषित पाए गए हैं। जबकि 7 फीसद बच्चे अतिकुपोषित हैं।
इस दौरान महिला एवं बाल विकास के उपनिदेशक सुजाता सिंह ने बताया कि भारत सरकार ने 504 सर्वाधिक कुपोषित जनपदों में हरिद्वार को भी शामिल किया है। हरिद्वार में 39 फीसद बच्चे कुपोषित एवं अति कुपोषित मिले हैं। जो कि बेहद गंभीर स्थिति है। हरिद्वार को कुपोषणमुक्त करने की दिशा में विभाग गंभीरता से कार्य करेगा ।
रैंक, जनपद, कुपोषित दर
1, बहराइच (उत्तर प्रदेश), 65.11
2, स्वस्ति (उत्तर प्रदेश), 63.5
3, पश्चिमी सिंगभूम (झारखंड), 59.4
कुपोषित जनपद श्रेणी
253, हरिद्वार (उत्तराखंड), 39.1
346, फरीदकोट (पंजाब), 34.8
504, लक्षदीप (केंद्रशासित प्रदेश), 27
निम्न लिंगानुपात दर वाले जनपदों में भी था हरिद्वार
केंद्र सरकार की देश के नि न लिंगानुपात दर वाले 161 जनपदों की सूची में भी हरिद्वार शामिल था। इसमें प्रदेश से चार जनपद चुने गए थे। इनमें हरिद्वार 835 लिंगानुपात दर (प्रति 1 हजार बेटों की तुलना में) के साथ सबसे ऊपर था।