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स्कूली बच्चों की सुरक्षा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं: डीएम

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देहरादून, जिलाधिकारी ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर आवश्यक निर्देश देते हुए कहा कि बच्चों के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही कहा कि विद्यालय प्रबंधक अपने-अपने स्कूलों में सीसीटीवी कैमरा लगाए। साथ ही स्कूल में लगाए गए वाहन का मानक व उसके चालक का सत्यापन सही तरीके से करें।

शुक्रवार को जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में प्राइवेट स्कूलों के वाहनों में सुरक्षा अनुपालन सुनिश्चित करने के सम्बन्ध में निजी स्कूल संचालक, प्रबन्धक एवं सम्बन्धित अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। इस दौरान जिलाधिकारी ने स्कूल प्रबन्धकों को निर्देश देते हुए कहा कि वाहन संचालक, ड्राइवर, बस कण्डक्टर की पहले अच्छे से पहचान सुनिश्चित कर लें तथा वाहन की दशा, चालक व परिचालक का चरित्र इत्यादि जांचने के पश्चात ही संचालन की अनुमति दें।

जिलाधिकारी ने सहायक परिवहन अधिकारी को वाहन संचालन के मानक का अनुपालन करवाने तथा मुख्य शिक्षा अधिकारी को स्कूल प्रबन्धन के मानक का अनुपालन करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वाहनों में तय क्षमता से अधिक बच्चे नहीं बैठाए जाए और वाहन की गति मानक सही हो। इसके साथ चालक एवं परिचालक किसी प्रकार के व्यसन का सेवन न करें। इसे स्कूल प्रबन्धन यह सुनिश्चित कर लें कि जो लोग बच्चों को लाने-ले-जाने के लिए अधिकृत किए गए हैं, उनका व्यवहार बच्चों के साथ कैसा है। उन्होंने स्कूल प्रबन्धकों को स्कूली वाहन के साथ स्कूल परिसर में भी बच्चों की हर तरह से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाते हुए स्कूल परिसर में जगह-जगह पर सीसी टीवी कैमरे लगाने तथा स्कूल में आने वाले आगन्तुकों का वेरिफिकेशन के भी निर्देश दिये।

डीएम ने स्कूल प्रबन्धकों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि छोटे बच्चों को केवल उनके आईडेन्टिफाई अभिभावकों को ही सौंपा जाये तथा गाड़ी में क्षमता से अधिक बच्चे किसी भी तरह बैठने ना पाये, इसके लिए अभिभावकों व स्कूल प्रबन्धकों को सीनियर बच्चों से पूछने का प्रयास करने के भी निर्देश दिये। बैठक में अपरकारी प्रशासन अरविन्द पाण्डेय, मुख्य शिक्षा अधिकारी एसवी जोशी, सहायक परिवहन अधिकारी अरविन्द पाण्डेय, पुलिस उपाधीक्षक राकेश देवली सहित जनपद के विभिन्न निजी स्कूलों के संचालक एवं प्रबन्धक उपस्थित रहे। 

सदन के अंदर हंगामा, बाहर सन्नाटा

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भराड़ीसैण, विधानसभा सत्र के दूसरे दिन जहां सदन के अंदर किडनी कांड पर प्रतिपक्ष ने हंगामा खड़ा किया और राज्य मंत्री रेखा आर्य को बचाने का आरोप सरकार पर लगाया, वहीं विधानसभा भवन परिसर में अजीब सा सन्नाटा दिखा। पिछले विधानसभा सत्रों के दौरान जहां परिसर में अनुमति से आये लोगों की अच्छी खासी संख्या दिखती थी और सदन के अंदर क्या हो रहा है, इसकी जिज्ञासा के लिए स्थानीय लोगों के साथ-साथ अन्य लोग भी जुटे रहते थे। इस बार ऐसा नहीं दिखा।

विधानसभा परिसर से चार किमी पहले ही बिना प्रवेश-पत्र धारियों को रोक दिया गया था। पिछले तीन विधानसभा सत्रों के दौरान ऐसा माहौल था कि विधानसभा भवन तक विधायकों व अन्य के साथ लोग विधानसभा की कार्यवाही के साक्षी बनने और परिसर तक पहुंचने की अनुमति लेकर पहुंचे थे। मगर इस बार यह संख्या अपेक्षाकृत कम रही। आसपास के ग्रामीणों में इस बात का गुस्सा दिखा कि उनकी ही जमीन पर उन्हें नहीं आने दिया जा रहा है। पलवाड़ी, संणकोट समेत कई गांवों के प्रधान और महिलाओं ने कहा कि हमारे चारागाह की जमीन पहले विदेशी पशु प्रजनन केंद्र के लिए दी गई थी तब स्थानीय लोगों को रोजगार देने की बात कही गई थी, वह भी नहीं हुआ अब तो यहां आने भी नहीं दिया जा रहा है। ग्राम प्रधान बोले कि हमारे गांव का पानी भी हमें नहीं मिल पा रहा है।

विधानसभा परिसर के बाहर भले ही सन्नाटा था मगर सदन के अंदर खासी गर्मी दिखी। मीडिया के कैमरे सदन के बाहर परिसर में नेताओं के प्रतिक्रिया की बाट जोहते दिखे। इधर रास्ते में रोके गये आंदोलनकारियों का कहना था कि सत्र के साक्षी बनने के लिए जब उत्तराखंड के लोग ही नहीं तब यह कैसा सत्र।

माले के इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि राजधानी के मुद्दे पर कांग्रेस-भाजपा एक जैसे हैं। इसलिए स्थानीय लोगों को अब सत्र से कोई उम्मींद भी नहीं रही। राजधानी मसले पर यही हाल है। 

सड़क दुर्घटना में एक की मौत, सात घायल

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गोपेश्वर। चमोली जनपद के गोपेश्वर-पोखरी मोटर मार्ग पर शुक्रवार को संगुड गांव के समीप एक वाहन अंनियंत्रित होकर सड़क से नीचे जा फिसली। वाहन में सवार आठ लोगों में से एक की श्रीनगर बेस चिकित्सालय में उपचार के दौरान मौत हो गई, जबकि अन्य सात लोगों को हल्की चोटें आयी हैं। जिन्हें उपचार के बाद घर भेज दिया गया है।

पोखरी से गोपेश्वर आ रहा एक मैक्स वाहन संगुड़ गांव के निकट सड़क से नीचे की ओर उतर गया और पेड़ से जा टकराया। जिससे उसमे सवार देवखाल निवासी अवतार सिंह रावत को गंभीर चोटें आ गई जबकि अन्य सात को मामूली सी चोंटे आयी हैं। गंभीर घायल को 108 सेवा के माध्यम से कर्णप्रयाग सीएचसी में भर्ती किया गया, जहां चिकित्सकों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए बेस चिकित्सालय श्रीनगर को रेफर कर दिया लेकिन श्रीनगर में उपचार के दौरान घायल ने दम तोड़ दिया है।

घरेलू गैस में अवैध रिफिलिंग का भंडाफोड़

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आपूर्ति विभाग ने शुक्रवार को घरेलू गैस में चल रही अवैध रिफिलिंग का भंडाफोड़ कर 60 भरे सिलेंडर लदे वाहन को जब्द किया। इस दौरान एक कर्मचारी को पकड़ने में भी कामयाबी मिली।

शुक्रवार सुबह चकराता रोड स्थित दून गैस एजेंसी से दो गाड़ियों में 60 सिलेंडर लेकर एजेंसी कर्मी अलकापुरी निकट चोरखला में डिलिवरी के दौरान कर्मी अलकापुरी पार्क में गाड़ी रोककर गैस की अवैध रिफिलिंग कर रहे हैं। तभी इसकी सूचना स्थानीय लोगों द्वारा आपूर्ति अधिकारी विपिन कुमार को दी गई। सूचना पाते ही विपिन कुमार फौरन अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और सिलेंडर से लदी दो गाड़ियों समेत एजेंसी कर्मचारी को पकड़ लिया। इसके बाद एजेंसी के मैनेजर को मौके पर बुलाकर जांच पड़ताल शुरू कर दी है।

विभागीय अधिकारी सिलेंडर रिफिलिंग की जानकारी पुलिस को दी गई। निरीक्षण में जिला आपूर्ति अधिकारी विपिन कुमार, पूर्ति निरीक्षक सुनील देवली, अजय पाल रावत मौके पर मौजूद रहे।

डॉक्टरों ने अस्पताल में भर्ती करने से किया इंकार, वाहन में जन्मा बच्चा

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हरिद्वार, लक्सर क्षेत्र के सरकारी अस्पताल में मनमानी का मामला सामने आया है। महिला के परिजनों का आरोप है कि चिकित्सकों की मनमानी के चलते आज जच्चा-बच्चा की जान पर बन आयी। प्रसव पीड़ा झेल रही महिला को डॉक्टरों की असंवेदनशीलता के कारण निजी वाहन में बच्चे को जन्म देना पड़ा।

गुरुवार देर रात पीड़ित परिवार जल्दबाजी में खून की जांच रिपोर्ट साथ लाना भूल गए थे। इसी वजह से सीएचसी लक्सर में डॉक्टरों ने प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला को अस्पताल में भर्ती करने से मना कर दिया। घटना की गंभीरता को समझते हुए एसडीएम ने इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं।

लक्सर के खेड़ी खुर्द गांव निवासी आयशा को प्रसव पीड़ा के बाद परिजन सीएचसी लक्सर लेकर आये थे लेकिन जल्दबाजी में वो खून की जांच रिपोर्ट लाना भूल गये, जिसकी वजह से वहां मौजूद चिकित्सकों ने पीड़ा से तड़प रही महिला को भर्ती करने से मना कर दिया। इसके बाद उसे निजी अस्पताल ले जाने के दौरान महिला ने गाड़ी में ही बच्चे को जन्म दे दिया। पीड़ित महिला का आरोप है कि डॉक्टर ने उसके साथ बदसलूकी भी की। मामले में जब सीएचसी अस्पताल की चिकित्सक से बात करनी चाही तो वे खुद सामने तो नहीं आयी लेकिन अपनी स्टॉफ नर्स सारिका को आगे कर दिया।

सारिका का कहना है कि, “महिला के पास खून की जांच के कोई कागजात ही नहीं थे इसलिए उसे भर्ती नहीं किया गया।” इस मनमानी को एसडीएम लक्सर कौस्तुभ मिश्रा ने गम्भीरता से लेते हुए कहा कि मामले में वो खुद जांच कर कार्रवाई करेंगे। साथ ही स्वास्थ्य महकमे के अधिकारियों को भी ऐसी कोताही न बरतने के निर्देश दिये।

सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए भले करोड़ों रुपये खर्च कर रही हो लेकिन इन चिकित्सालयों में बैठे चिकित्सक अपनी मनमानी पर उतारू हैं, जिससे आए दिन मरीजों की जान पर बन आती है। अब देखना होगा कि अस्पताल प्रशासन की इस मनमानी के खिलाफ प्रशासन क्या ठोस कार्रवाई करता है, जिससे भविष्य में किसी मरीज की जिंदगी के साथ ऐसा खिलवाड़ न हो।

पेयजल निगम कर्मचारी महासंघ का जनवरी में आंदोलन

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देहरादून। सातवें वेतनमान के एरियर का भुगतान, विभिन्न वर्गो में कर्मचारियों की पदोन्नति, बोनस, डीए के भुगतान की स्वीकृति मिलने में देरी समेत कई मांगें को लेकर उत्तराखंड पेयजल निगम कर्मचारी महासंघ जनवरी में आंदोलन करेगा।

गुरुवार को उत्तराखंड पेयजल निगम कर्मचारी संघ के आयोजित प्रांतीय बैठक में प्रांतीय अध्यक्ष प्रवीण सिंह रावत ने पेयजल निगम के सातवें वेतनमान स्वीकृत होने पर मुख्यमंत्री व पेयजल मंत्री प्रकाश पंत का आभार जताया। उन्होंने कहा कि पेयजल निगम को जल्द ही सातवें वेतनमान का एरियर प्राप्त होगा। साथ ही उन्होंने अभी तक पेयजल निगम को बोनस एवं बीए का लाभ नहीं मिलने पर रोष प्रकट किया।
इस दौरान प्रांतीय महामंत्री विजय गोयल ने कहा कि अभी तक व्यक्तित्व सहायकों को ईपीसी का लाभ नहीं दिया गया। साथ ही प्रधान कार्यालय द्वारा कई महीनों से कर्मचारी की इसकी स्वीकृति नहीं की गई है। बीमार कर्मचारियों के हस्तांतरण में हिलाहवाली की जा रही है। यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो मुख्य अभियंताओं का घेराव किया जाएगा।
वरिष्ठ उपाध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी ने बताया कि काफी समय से संगणक की डीपीसी हो चुकी है, लेकिन उनकी तैनाती नहीं की जा रही है। जबकि जूनियर संगणक को पहले ही तैनाती दी जा चुकी है। यह गंभीर मामला है, उन्होंने कहा कि समयबद्ध तरीके से कर्मचारियों की पदोन्नति की जानी चाहिए तथा विभाग में 40 फीसदी ही कर्मचारी कार्यरत रह गए हैं। जिससे कार्यरत कर्मचारियों को अतिरिक्त समय में कार्यालय में रहकर कार्य करना पड़ता है। इसके लिए कर्मचारी मानसिक रुप से बीमार हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि विभाग में कार्यरत आउट सोर्स कंप्यूटर ऑपरेटर को कनिष्ठ सहायक के पद पर स्थाई नियुक्त या संविदा पर नियुक्त किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार को चेताते हुए कहा कि यदि महा दिसंबर तक बोनस का लाभ नहीं दिया गया, तो उत्तराखंड पेयजल निगम कर्मचारी महासंघ जनवरी में आंदोलन करेगा। इस मौके पर प्रांतीय अध्यक्ष प्रवीण सिंह रावत, प्रांतीय महामंत्री विजय खाली, धर्मेंद्र चौधरी, दीवान सिंह खनी, कुशाल सिंह राणा, गुलशन कुमार, अशोक सैनी, संतोष पवार, विक्रम सिंह, रमेश भंडारी, महेश जोशी, आदि मौजूद रहे।

नशे के लिए लूट का सहारा

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हल्द्वानी। नशे के खिलाफ पुलिस  द्वारा छेडी गयी जंग रंग लाने लगी है, पुलिस ने अब तक नशे के खिलाफ चलाये अभियान में कई सफतला अर्जित की है, उसी कडी में हल्द्वानी मे भी पुलिस को बडी कामयाबी मिली है, पुलिस ने नशे बीते दिनों हुई वृद्धा से लूट का खुलासा करते हुए बचाया ति नशे की लत के चलते वारदात को अंजाम दिया गया था जिसमे महानगर के दो युवकों को पकड़ा गया एक युवक एलएलबी का छात्र है, जबकि दूसरा बीकॉम पास है।

मंगलवार को हुई वृद्धा कमला जोशी को धक्का देकर पर्स लूट की वारदात का खुलासा करते हुे पुलिस ने बताय कि कमला जोशी अपनी बहू प्रीति के साथ जगदम्बा नगर स्थित बॉब के एटीएम से रुपये निकालकर लौट रहीं थी। तभी दो स्कूटी सवारो ने उनका पर्स लूट लिया और फरार हो गये, एसएसपी जन्मेजय खंडूड़ी ने बताया कि घटना को अंजाम मल्ला गोरखपुर निवासी सागर अधिकारी और गुसाईं नगर निवासी अभिषेक चद्र ने दिया था। सागर लामाचोड स्थित एक कॉलेज में एलएलबी प्रथम वर्ष का छात्र है, जबकि अभिषेक ने बीकॉम किया है। दोनों स्मेक पीने के लती है। दोनों स्मैक खरीदने के लिए लूट की वारदातों को अंजाम देते थे। सागर के पिता ग्रामीण बैंक लोहाघाट में प्रबंधक हैं, जबकि अभिषेक के पिता हल्द्वानी के बेस हॉस्पिटल में कार्यरत हैं।

तस्करी के तीन पशुओं के साथ एक आरोपी दबोचा

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हरिद्वार। महिला पुलिस ने चेंकिग के दौरान एक गौ एक तस्कर को गिरफ्तार कर लिया, जबकि दूसरा फरार हो गया। पुलिस ने निर्दयता से बंधे हुए तीन पशुओं से भरे वाहन को सीज कर आरोपी के विरुद्ध केस दर्ज किया है।

बुधावार रात्रि खड़खड़ी चौकी प्रभारी प्रियंका भारद्वाज को गौवंश तस्करी करके ले जाने की सूचना मिली। सूचना पर महिला दारोगा ने चेकिंग अभियान चलाया। इसी दौरान पुलिस को राजमार्ग पर एक टाटा सुपर वाहन आता दिखाई दिया। पुलिस ने वाहन चालक को रुकने का इशारा किया तो उसने गति तेज कर भागने की कोशिश की। पुलिस ने वाहन का पीछा कर उसे पकड़ लिया। वाहन रोकते ही उसमें सवार एक तस्कर भाग निकला, जबकि पुलिस ने एक को दबोच लिया। वाहन की तलाशी में तीन गौवंश निर्दयता से बंधे हुए मिले। पुलिस पूछताछ में पकड़े गए आरोपी ने अपना नाम वरीश पुत्र पीरू निवासी बहेड़ी राजपूतान बताया, जबकि फरार आरोपी का नाम रईश पुत्र महमूद निवासी मौहल्ला कस्साबान, ज्वालापुर बताया। पुलिस ने वाहन को सीज कर आरोपी के विरुद्ध केस दर्ज किया है।

युवाओं को देश प्रेम और देश भक्ति की सीख दे रहा यूथ फ़ाउंडेशन

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 देहरादून। देश सेवा, गौरवशाली परम्परा, वीरता और देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने की परिपाटी वाली गढ़वाल रायफल की चौथी बटालियन ने आज अपना स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया। बालावाला स्थित सरदार भगवान सिंह बायोमेडिकल साइंस कॉलेज में आयोजित एक भव्य समारोह में सेना में भर्ती का प्रशिक्षण ले रही यूथ फ़ाउंडेशन की सैकड़ों लड़कियों ने विभिन्न प्रस्तुतियाँ देकर उपस्थित लोगों का दिल जीत लिया।
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 इस अवसर पर मुख्य अतिथि सरदारनी हरेंद्र पाल कौर थीं। इसके अलावा सरदार भगत सिंह इंस्टिट्यूट के चेयरमेन एसपी सिंह,ब्रिगेडियर (रि) राजू रावत, आईजी (रि) एसएस कोठियाल, कर्नल अजय कोठियाल ने चौथी गढ़वाल के शहीद हुए सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। भर्ती प्रशिक्षण ले रही लड़कियों ने खुख़री डाँस, पिरामिड, बेम्बों क्लाइमिंग एवं एरोबिक्स का प्रदर्शन किया। जिसे उपस्थित लोगों ने ख़ूब सहारा। इस अवसर पर कर्नल कोठियाल ने चौथी गढ़वाल के इतिहास के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस पलटन ने अपनी शौर्य और वीरता के दम पर 1962 के भारत-चीन युद्ध की तस्वीर बदल दी थी। इस युद्ध में चौथी गढ़वाल के तीन अफ़सर, चार जेसीओ, 147 सैनिक और 7 असैनिकों ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देकर देशभक्ति में स्वर्णिम अध्याय जोड़ा, जो आज भी हमारा मस्तक ऊँचा किए हुए है।
नूरानांग की लड़ाई में महावीर चक्र विजेता शहीद रायफलमेन जसवंत सिंह व चौथी गढ़वाल ने चीन के इरादों को धूल में मिला दिया। इस एतिहासिक युद्ध में चौथी गढ़वाल को बैटल आँनर नूरानांग की मानद उपाधि मिली।
ग़ौरतलब है कि कर्नल अजय कोठियाल भी चौथी गढ़वाल से हैं और उन्हें कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र और विशिष्ट सेवा मेडल हासिल हुआ है। यूथ फ़ाउंडेशन कर्नल अजय कोठियाल की एक दूरदर्शी सोच है, जो युवाओं को देश सेवा में जाने के लिए प्रेरित और प्रशिक्षित करती है। इस समारोह में कर्नल (रि) वीएस नेगी, पूर्व विधायक ओम गोपाल रावत, सूबेदार मेजर तेजपाल सिंह नेगी, गंगोत्री से स्वामी सुन्दरा नंद, कर्नल (रि) आईपी सिंह, ओनरेरी कैप्टन नंदन सिंह रावत, ओनरेरी कैप्टन चौधरी विक्रम सिंह, महिपाल सिंह बुटोला, हवलदार मोहन सिंह समेत कई लोग मौजूद थे।

महिला अस्पताल के एक बेड पर दो-दो मरीज, वेंटिलेटर और वार्मर मशीनें भी खराब

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देहरादून। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष सरोजनी कैंतुरा ने राजकीय दून महिला चिकित्सालय में औचक निरीक्षण कर महिला एवं शिशुओं के उपचार की व्यवस्थाएं जाननी चाही तो पाया कि अस्पताल की चरमराई व्यवस्थाएं मरीजों की जान पर हावी हैं। राजकीय दून महिला चिकित्सालय में औचक निरीक्षण को पहुंची राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष सरोजनी कैंतुरा अस्पताल में मौजूद तमाम खामियों पर बिफर पड़ी। अस्पताल में एक बैड में दो-दो महिला मरीज लेटी हुई मिली। जबकि अस्पताल में 22 वार्मर में महज 12 ही चलती स्थिति में पाए गए। वहीं, दो वेंटिलेटरों में दोनों ही खराब स्थिति में मिले। जिसपर उन्होंने महिला एवं शिशुओं के उपचार के लिए पर्याप्त इंतजाम करने के निर्देश दिए।

गुरुवार को महिला आयोग की अध्यक्ष सरोजनी कैंतुरा व सचिव रमिंद्री मंद्रवाल के नेतृत्व में टीम ने दून महिला अस्पताल में पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। अस्पताल में मौजूद व्यवस्थाओं पर आयोग की टीम नाखुश नजर आई। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि अस्पताल में 29 बैड हैं, जिन पर 41 महिला मरीजों को लिटाया गया था। जबकि अस्पताल में वार्मर मशीनों की स्थिति जानीं गई तो 22 वार्मर में से 12 मशीनें ही चलती हालत में मिली। शेष 10 मशीनें खराब थी। अस्पताल में दो वेंटिलेटर में एक भी चलती स्थिति में नहीं मिला। उन्होंने इसे महिला एवं शिशुओं की जान के साथ समझौता करने जैसा बताया है। इसके बाद टीम ने कर्मचारियों से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि अस्पताल में करीब 50 बैडों की आवश्यकता है। 21 बैड नाकाफी हैं। बताया कि अस्पताल में रोजाना 200 से 250 मरीज रोजाना आते हैं। लेकिन इस हिसाब से यहां पर्याप्त संसाधन मौजूद नहीं हैं। इससे मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आयोग की अध्यक्ष कैंतुरा ने अस्पताल प्रशासन को मशीनों के संचालन व बैडों की पर्याप्त व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।
शौचालय की भी जांची व्यवस्था
आयोग की टीम ने महिला अस्पताल के शौचालय की स्थिति की भी जांच की। दरअसल, कुछ ही समय पूर्व अस्पताल में नवजात शिशु का शव भी मिला था। आयोग ने इस तरह की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए अस्पताल प्रशासन द्वारा किए इंतजामों को भी जांचा।

वहीं राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष सरोजनी कैंतुरा से टीम न्यूजपोस्ट की बातचीत में उन्होंने कहा कि राजधानी के सरकारी अस्पताल में बेडों की संख्या बढ़ाने पर सरकार को सोचना होगा साथ ही महिलाओं के बेहतर सुविधा के लिए नर्स और डॉक्टरों की संख्या बढ़ानी भी जरुरी है।