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30 अप्रैल, 4.30 प्रातः को खुलेंगे बदरीनाथ धाम के कपाट

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30 अप्रैल 4.30 प्रातःको खुलेंगे बदरीनाथ धाम के कपाट, आज नरेंद्रनगर राजमहल में बोलांदा बदरी टिहरी नरेश महाराजा मनुजेंद्र शाह ने बसंत पंचमी के पावन पर्व पर पंचाग व गणेश पूजा के उपरांत की कपाट खुलने की तिथि की घोषणा करी।

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उत्तराखण्ड में बसंत अपने साथ कई उम्मीदों को लेकर आता है जिसमें सबसे बड़ी उम्मीद चार-धाम यात्रा का प्रमुख स्थान श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि की घोषणा का दिन भी है। ये परम्परा प्राचीन काल से उत्तराखण्ड में चली आ रही है जिसे गढ़वाल का राजवंश बड़ी सिद्धत के साथ निभाता है। बसंत पंचमी का दिन नरेंद्रनगर राजमहल के लिये खासा महत्वपूर्ण होता है। राज परिवार का मुखिया विधिवत पूजा अर्चना के साथ कपाट खुलने की तिथि  घोषणा करता है ओर राजपुरोहित पंचांग और महाराजा की जन्मपत्री देख कर बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने का शुभ मुहर्त निकालते है। साथ ही गाडू-घडी की तिथि की भी घोषणा आज के ही दिन की जाती है जोकि इस साल 7 अप्रैल है। टिहरी राजदरबार में महारानी व अन्य सुहागिन महिलाओं के द्वारा भगवान बदरी विशाल के लिए तिलों का तेल बनाया जाता है। आज राजदरबार में महारानी व टिहरी सांसद माल्या राज लक्ष्मी, बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष गणेश गोदियाल आदि मौजूद थे।

उत्तराखंड के चारधामो में एक प्रमुख धाम भगवान विष्णु के वास बद्रीनाथ धाम के कपाट 30 अप्रैल  ब्रह्म मुहर्त पर सुबह 4.30 मिनट को खुलेंगे। टिहरी राजवंश, बसंत पचमी के दिन विधिवत पूजा-अर्चना के साथ तिथि की घोषणा करता है। टिहरी के राजा को बोलंदा बद्री की उपाधि से नवाजा गया था, सदियों से राजपरिवार इस परंपरा को निभाता आ रहा है। सुबह से ही राजमहल में बद्रीनाथ केदारनाथ समिति और डिमर गाँव से आये पुजारी गाडू-घडी लेकर आते है।

श्रधालुओ के लिए सुबह से ही नरेंदर नगर राजमहल में दूर-दूर से आये भक्तो में तिथि खुलने के लिए उत्साह देखने लायक होता है।  बद्रीनाथ धाम के धर्माधिकारी भुवन चंद्र डोंडरीयाल ने बताया कि, “2017 की ही तरह इस बार भी चार धाम यात्रा से राज्य को बड़ी उम्मीद है, जिसके लिए हर तरह की तैयारी की जा रही है और सुविधाओ पर जोर दिया गया है जिस से तीर्थ यात्रियों को सुविधा मिल सके।”

2017 की यात्रा में रिकॉर्ड तोड़ तीर्थयात्री देश विदेश से आए थे इस बार भी उम्मीद की जा रही है की 2018 की यात्रा भगवान बद्रीविशाल के दर्शनों के लिए शुभ और सुरक्षित होगी।

ऋषिकेश कोतवाली पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी हरियाणा से लाई जा रही 280 पेटी शराब पकड़ी

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ऋषिकेश, कोतवाली पुलिस को उस समय एक बड़ी सफलता हाथ लगी जब मुखबिर की सूचना पर कोतवाली पुलिस ने ऋषिकेश बाईपास में भारत भूमि गेस्ट हाउस के पास तहसील चौराहे में चेकिंग शुरू की चेकिंग के दौरान उत्तर प्रदेश नंबर के एक ट्रक को रोका और तलाशी लेने के दौरान उसके अंदर छिपाई गई 280 पेटी हरियाणा की शराब बरामद हुई

ऋषिकेश पुलिस द्वारा गढवाल मण्डल विकास निगम ऋषिकेश के सामने एक कन्टेनर (ट्रक) जिसका नम्बर UP724336 से 280 पेटी अग्रेजी शराब के साथ धर्मवीर पुत्र श्याम सिंह नि0 ग्राम कुठला वीरपुर, थाना सौरिख, जिला कन्नौज उत्तरप्रदेश को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है।

चमोली में चौपाल लगाकर पुलिस ने सुनी समस्याएं

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(गोपेश्वर)। जनता से सीधे संवाद करने और कानून, अपराध के साथ-साथ जन सरोकरों से जुडे मुद्दों के लिए चमोली पुलिस ने एक अनोखी पहल शुरू की है। ग्रामीण चौपाललगाकर पुलिस अधीक्षक तृप्ति भट्ट ने स्वयं इसकी शुरूआत नगर क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्र हल्दापानी में की।

पुलिस अधीक्षक ने महिलाओं से संबंधित अपराधों, साइबर क्राइम, बैंक, एटीए फ्राड संबंधी जानकारी जनता के बीच साझा की और बताया कि वे किस प्रकार से इन अपराधों से बचें। कन्या भू्रण हत्या और बालिका शिक्षा तथा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान में जनता की जागरूकता का आह्वान भी किया। थानाध्यक्ष गोपेश्वर कुंदन राम ने कानून संबंधी जानकारियों के साथ बताया कि किस तरह लोग जाने अंजाने में एटीएम फ्राड के चक्कर में आ जाते है। उन्होंने बारीखी से इस विषय पर जागरूक किया।

जनता ने भी चौपाल में अपनी समस्या रखी। तथा कहा कि इस तरह से पुलिस सीधे आम लोगो से खुद उनके द्वार पर आकर मिलेगी तो जनता का उन विश्वास और जगेगा। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि, “हर रविवार को इस तरह के कार्यक्रम अन्य थाना क्षेत्रों मे भी चलाया गया। इसके साथ ही रविवार को पुलिस लाइन क्षेत्र में एनसीसी, एनएसएस के छात्रों के साथ ही स्थानीय लोगों के साथ मिल कर सफाई अभियान चलाया तथा शीतकालीन पौधरोपण भी किया गया।”

टस्कर हाथी को काॅलर लगाकर जंगल में छोड़ा

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(हरिद्वार) गत 19 जनवरी को पिछले 3 महीने से भेल क्षेत्र में आतंक मचा चुके विशालकाय टस्कर हाथी को वन विभाग ने पकड़ लिया था। बता दें, गजराज को पकड़ने के लिए टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया हुआ था। जिसके बाद अब हाथी को होश आ गया है, जिसे टीम ने जंगल में छोड़ दिया है।

बता दें, वन विभाग की टीम ने हाथी को पौड़ी के मीठा वाली रेंज में रेडियो कॉलर लगाकर जंगल में छोड़ दिया। इस दौरान टीम को काफी मेहनत करनी पड़ी। हत्यारे हाथी को जंगल में छोड़ने के लिए उसके गले में रेडियो कॉलर बांधा गया। जिसकी मदद से उसे जंगल में छोड़ा गया। वहीं, टीम को ट्रक से टस्कर हाथी को उतारने में कड़ी मेहनत करनी पड़ी, लेकिन कुछ ही घंटों बाद उन्होंने कामयाबी हासिल कर ली। गौर हो कि, पिछले 3 महीने से भेल क्षेत्र में आतंक मचा रहा विशालकाय टस्कर हाथी को 19 जनवरी के दिन विभाग ने उसे पहले बेहोश किया। बड़ी कोशिशों के बाद वन विभाग और ट्रेंकुलाइज टीम दोनों ने संयुक्त रूप उसे ट्रेंकुलाइज किया। सफल रेस्क्यू करने के बाद वन विभाग के निदेशक सनातन सोनकर ने बताया कि वह काम टीम के लिए एक चैलेंज था। टस्कर को पकड़ने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे, शानिवार को मिशन में कामयाब हासिल कर ली गई।

आपको अवगत करा दें भेल क्षेत्र में पिछले तीन महीने में हाथी दो लोगों को मौत के घाट उतार चुका है, इतना ही नहीं दर्जनों लोग उसकी दहशत से चोटिल भी हो चुके हैं। आखिर काफी मेहनत के बाद हाथी को पकड़कर दो अन्य हाथियों की मदद से जंगल में छोड़ दिया गया है। जिसके बाद वन विभाग की टीम और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है।

मिसाल: रुद्रप्रयाग के छात्रों को अपनी मंज़िल तक पहुंचाने में मील का पत्थर साबित होगा डीएम का “लक्ष्य”

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अपने काम करने के अनोखे तरीकों से सुर्खियों में रहने वाले रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मंगेश धिल्डियाल एक बार फिर सुर्खियों मे हैं। इस बार मंगेश ने ज़िले में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिये तकनीक का इस्तेमाल किया है। उनकी इस कोशिश ने “लक्ष्य” नाम के ऐप्प का रूप लिया है। इस एप्प में जिले के क्लास 1 से 8 तक के छात्रों की शिक्षा प्रगति को नापने के लिये सभी विषयों के लिंक बनाये गये हैं। इन मनाकों पर छात्रों की प्रगति को सभी टीचर हर महीने इस एप्प में अपलोड करते हैं। इस डाटा को जिला स्तर पर एक साथ मोनीटर किया जा सकता है। हर महीने जिलाधिकारी की अध्यक्षता में इस एप्प पर आये डाटा की समीक्षा की जाती है। खास बात ये है कि इस एप्प पर न केवल छात्रों की बल्कि स्कूलों की परफॉर्मेंस को भी मॉनिटर किया जाता है।

शिक्षा में तकनीक के इस प्रयोग के बारे में डीएम मंगेश घिल्डियाल कहते हैं कि, “इस कवायद के पीछ मकसद था कि तकनीक के इस्तेमाल से हम ज़िले के सभी स्कूलों का सही तरह से आंकलन कर सके।क्लास 1 से 8 के छात्रों की प्रगति को मॉनिटर करने में ये एप्प काफी मददगार साबित होगी। इससे न केवल छात्र बल्कि टीचरों के भी पढ़ाई के तरीको का आंकलन आसानी से किया जा सकेगा।” 

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इस मोबाइल एप्प में फिलहाल ज़िले के सभी 548 प्राथमिक स्कूलों, 157 उच्च प्राथमिक स्कूलों के करीब 18000 बच्चों को जोड़ा जा चुका है। अच्छा प्रदर्शन करने वाले टीचरों के वीडियो को इस एप्प पर अपलोड किया जाता है जिससे और टीचर भी इन्हें देखकर उन तरीकों को अपने स्कूलों में ढाल सके। इसके साथ ही जिले के 112 अधिकारियों ने एक-एक राजकीय स्कूल को गोद लिया है, इसके चलते ये अधिकारी अपने-अपने स्कूलों के विकास और वहां की ज़रूरतों पर लगातार नज़र रखते हैं।

इस एप्प के ज़रिये कक्षा 5 के बच्चों के लिये नवोदय स्कूलों में प्रवेश परीक्षा के लिये मॉक टेस्ट भी लिये जा रहे हैं। कक्षा 11 और 12 के छात्रों के लिये मेडिकल, इंजीनियरिंग और सिविल सेवाओं की प्रवेश परीक्षाओं के लिये भी ऑफलाइन कोचिंग की व्यवस्था की गई है। इसके तहत रोज़ाना 8-10 बजे तक जिले के अधिकारी जैसे कि जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी, एआरटीओ ऐदि बच्चों को अलग अलग विषयों की क्लास लेते हैं।

ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इस मुहिम को पहुंचाने के लिये एक वीडियो भी तैयार किया गया है। इसे पांडवाज ग्रुप ने खास अपने अंदाज़ में बनाया है, खास बात ये है कि इस वीडियो को बनाने में सिर्फ 2-3 दिन लगे।

डीएम घिल्डियाल की पहल छोटी लेकिन अनूठी है। इसमें जिस तरह से ज़िले के अन्य अधिकारियों का सहयोग मिल रहा है वो भी काबिले तारीफ है। ऐसे में ये कहना गलत नही होगा कि जिला प्रशासन ने अपने संयुक्त प्रयासों से जहां चाह वहा राह की कहावत को सच कर दिखाया है।

वीडियो सौजन्य: “पांडवाज़”

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बने मुगेंबोंः आर्य

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काशीपुर, फिल्म ‘मिस्टर इण्डिया’ में खलनायक मुगेंबों की याद तो आपको होगी ही, जिनके दमदार किरदार से खलनायकी में मुगेंबों एक विलेन का सिम्बल बन गये थे, मगर कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सरीता आर्य को मुगेंबों के रोल मं देश के प्रधानमंत्री नजर आ रहे है।

मुगेंबों टायटल देते हुए देश के प्रधानमंत्री को सम्बोधित करते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि, “प्रधानमंत्री देश की जनता के साथ झुठे वायदे कर जनता को भ्रमित करने का काम कर रहे हैं।”

महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्य ने काशीपुर में पत्रकार वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना मोगेंबो से कर उत्तराखंड में विवाद को हरी झंडी दिखा दी है, महिला कांग्रेस से जुड़े पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को आगामी निकाय चुनाव की तैयारी को लेकर के जरूरी टिप्स देने पहुंची सरीता आर्य ने इस दौरान जनपद उधमसिंह नगर से काशीपुर पहुंची तमाम महिला कांग्रेस नेत्रियों को संबोधित करते हुए सोशल मीडिया में सक्रिय रहने की सलाह देते हुए जनता के मुद्दों को उठाने की बात कही।

उन्होंने मीडिया से बात करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमलावर होते हुए उनकी संज्ञा मोगेंबो से कर दी सरिता आर्य ने कहा कि, “नरेंद्र मोदी मोगेंबो की मानिंद बड़ी-बड़ी बातें तो कर रहे हैं प्रदेश में महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार और बलात्कार उत्पीड़न उनको नजर नहीं आता उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए महिला कांग्रेस रणनीति बना रही है और जल्द ही केंद्र व प्रदेश सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर कर अभियान चलाएगी।”

फरार किसानों के खिलाफ एनबीडब्लू  

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एनएच 74 मुआवजे घोटाले में एसआईटी के हाथ अब किसानों तक जा पहुचे है, करोड़ो रूपये का चूना लगा चुके ऐसे किसानों को एसआईटी बख्शने को तैयार नही है।

सूत्रों के अनुसार एसआईटी ने आधा दर्जन किसानों के खिलाफ एनबीडब्लू कोर्ट से ले लिया गया है। यही नही, एक निलंबित फरार पीसीएस अधिकारी एनएच नगन्याल के खिलाफ भी एनबीडब्ल्यू कोर्ट से प्राप्त कर लिया गया है। अब एसआईटी आगे की रणनीति बनाने में लगी है।

गौरतलब है कि लम्बे समय से आधा दर्जन से अधिक किसान अौर एक निलंबित पीसीएस अधिकारी फरार चल रहे है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एसआईटी द्वारा जगह-जगह छापे मारी भी की जा रही है, जिसके बाद से एसआईटी ने सभी फरार आरोपियों के खिलाफ एनबीडब्ल्यू कोर्ट से लेते हुए कार्यवाही शुरु कर दी है।

ऊधमसिंहनगर के एसएसपी सदानन्द दाते ने बताया कि, एनएच 74 में फरार किसानों ने अधिकारियों से मिलकर सरकार को करोड़ो रूपये का चूना लगाया है जिसपर कोर्ट से एनबीडब्ल्यू लेते हुए कार्यवाही सुरु कर दी गयी है अगर इसके बाद भी आरोपी एसआईटी के समक्ष पेश नही होते है तो उनके खिलाफ पहले कुर्की का नोटिस ओर बाद में आरोपियों की संपत्ति की कुर्की की जायेगी। ” 

विवाहिता की संदिग्ध परिस्थिति में मौत पर हंगामा

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काशीपुर, एक विवाहिता ने संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सूचना मिलने पर मौके पर मृतका के मायके वालों ने जमकर हंगामा किया। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया।

दरअसल कालागढ़ की रहने वाली काजल ने लक्ष्मीपुर पट्टी के रहने वाले रवि ठाकुर नामक युवक से डेढ़ साल पूर्व अगस्त 2016 में प्रेम विवाह किया था । काजल 4 भाई बहनों में दूसरे नंबर की थी , मृतका का परिवारहाल में मोहल्ला कविनगर में किराये के मकान में रहता है । मृतका काजल की माँ इंदुमाला के मुताबिक़ काजल का सबसे छोटा भाई नौ साल का कृष्णा अक्सरअपनी बहन से मिलने आता था ! कल काजल ने कृष्णा से आज माँ इंदुमाला से मिलने की बात कही थी जिसके बाद उसके माँ से मिलने से पहले ही उसकी मृत्यु हो गयी ।

काजल के बड़े भाई पंकज के मुताबिक़ काजल की मौत के बाद भी काजल के ससुरालियों में से किसी ने भी उन्हें किसी भी तरह की कोई इत्तला नहीं दी । काजल की मौत की सूचना अन्य किसी रिश्तेदार ने दी है । मृतका के देवर के मुताबिक़ उसका सुबह पेपर था, वह शौच करने ऊपर जब गया व जब वह नीचे आया तो वहां कमरे में झाँकने पर भाई अकेला सोया हुआ था । पहली मंजिल पर माँ लेटी थी, माँ से उसने भाभी के बावत पूछा तो मां ने नीचे और उससे ऊपर जाकर देखने को कहा ऊपर जाकर कमरे में देखने पर उसने देखा तो काजल फांसी पर झूली हुई थी । मृतका के मायके वालों के मुताबिक़ काजल ने फांसी नहीं लगाई बल्कि उसे मारकर फांसी पर लटकाया गया है !

उत्तराखंड को मिली तीन म्यूजियम और एक साइंस सिटी की सौगात

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राज्य के टिहरी, अल्मोडा और पौड़ी तीन संग्रहालय स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही साइंस सिटी भी स्थापित की जाएगी। केन्द्रीय संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री डॉ. महेश शर्मा के साथ रविवार को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री आवास पर केन्द्रीय संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री डॉ. महेश शर्मा के साथ वन, पर्यावरण एवं संस्कृति विभागों के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। बैठक में पौड़ी जनपद में वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली के जीवन पर 11 करोड़ की लागत से एक संग्रहालय, टिहरी में भागीरथी नदी के निकट 20 करोड़ की लागत से एक गंगा संग्रहालय और अल्मोड़ा में उदय शंकर अकादमी में एक संग्रहालय निर्माण पर केन्द्रीय राज्य मंत्री द्वारा सैद्धान्तिक सहमति प्रदान की गई। इसके साथ ही देहरादून में केन्द्र सरकार द्वारा शत प्रतिशत वित्तपोषित एक विशाल साइंस सिटी की सहमति भी प्रदान की गई है। राज्य सरकार द्वारा साइंस सिटी के लिए भूमि चयनित कर ली गई है। केन्द्र सरकार द्वारा देहरादून में साइंस सिटी के लिए 190 करोड़ रुपये प्रदान किए जाएंगे। इसके साथ ही अन्य शहरों में जनसंख्या के अनुसार दस से तीस करोड़ रुपये की लागत से साइंस सिटी की स्थापना के लिए भी केन्द्रीय राज्य मंत्री द्वारा सकारात्मक रुख दर्शाया गया।

वन विभाग के विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर हुई चर्चा
उत्तराखण्ड सरकार द्वारा केन्द्रीय राज्य मंत्री के समक्ष कोटद्वार-रामनगर कंडी मार्ग का विषय उठाया गया जिस पर उन्होने सकारात्मक रूख दिखाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कंडी मार्ग के लिए ग्रीन रोड सहित सभी पर्यावरण अनुकूल विकल्पों पर काम कर रही है। वाइल्ड लाइफ इन्स्टीट्यूट समेत अन्य विशेषज्ञ संस्थाओं की सलाह भी ली जा रही है।केन्द्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पर लाईन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (वास्तविक नियंत्रण रेखा) के 100 किमी के भीतर वन क्षेत्र से सम्बंधित विषय पर निर्णय लेने के लिए राज्य सरकार को अधिकार प्रदान किए जाने पर विचार किया जा रहा है।

भारत के खेतों में होगा जापानी धान

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नई दिल्ली, अब भारतीय खेतों में जापानी धान उगाया जा सकेगा। इस जापानी धान को भारत में ही प्रोसेस कर जापानी चावल बनाया जाएगा। जापानी कारोबारियों, कृषि विशेषज्ञों की उपस्थिति में जापानी धान भारतीय खेतों में रोपा गया और जापानी राइस मिल का उद्घाटन किया गया।

जापानी कंपनी ऑस्क निप्पन की हरियाणा के कैथल में शुरू हुई जापानी राइस मिल की क्षमता एक घंटे में 300 किलो जापानी धान को प्रोसेस करने की होगी। शुरूआत में 300 हेक्टेयर रकबे पर जापानी धान रोपा जाएगा। बाद में जापानी धान के रकबे को डेढ़ हजार हेक्टेयर तक बढ़ाया जाएगा। जिसमें जापान से लाया गया धान बोया जाएगा। इस पूरी परियोजना को 2024 तक पूरा कर लिया जाएगा, तब तक भारत के अलग-अलग इलाकों में 13500 हेक्टेयर रकबे पर जापानी धान बोने का लक्ष्य प्राप्त किया जाएगा। हरियाणा के कैथल के अलावा देहरादून और सुंदरनगर इलाकों में भी जापानी धान से जापानी चावल प्रोसेस करने की मिल लगाई जाएगी। इन इलाकों में सफलता के बाद भारत के अन्य राज्यों छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उड़ीसा, झारखंड, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश सहित कई राज्यों में भी जापानी धान की खेती की जाएगी। इन राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में काम चल रहा है।

जापानी कंपनी ऑस्क निप्पन के कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि भारतीय खेतों में जापानी धान की खेती के लिए मिट्टी और पानी की जांच की गई थी, जिसमें दोनों को जापानी धान के लिए उपयुक्त पाया गया। साथ ही जापानी धान के लिए उपयुक्त मौसम को देखकर फैसला लिया गया। जापानी धान के कारोबारियों को उम्मीद है कि वे भारतीय खेतों में 6 टन जापानी धान प्रति हेक्टेयर के हिसाब से पैदा कर सकेंगे। परियोजना के पूरा होने के बाद जापानी धान से निकले चावल की लागत 100 रूपये से 150 रुपये प्रति किलो पड़ेगी। प्रति हेक्टेयर उच्च पैदावार के चलते भारतीय किसानों को खासा मुनाफा होगा। इस पूरी जापानी धान परियोजना से करीब 35 हजार भारतीय किसान लाभान्वित होंगे।

एक बार जापानी धान परियोजना पूरी हो जाने के बाद जापानी कृषि विशेषज्ञ भारतीय बासमती चावल को लेकर प्रयास शुरू करेंगे। जिसके अंतर्गत जापानी कृषि तकनीक के उपयोग से बासमती चावल की प्रति हेक्टेयर पैदावार को बढ़ाया जाएगा। जापानी धान के अलावा जापानी कंपनी ऑस्क निप्पन सोयाबीन, पशुपालन, सब्जी उत्पादन सहित कृषि से जुड़े अन्य क्षेत्रों में भी प्रवेश करेगी।