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प्रदेश के अस्पताल झेल रहे डॉक्टरों की किल्लत

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देहरादून। पहाड़ की बात छोडि़ए, डॉक्टर दून तक में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे। प्रदेश के सबसे बड़े अस्पतालों में शुमार दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय तक उन्हें आकर्षित नहीं करता। हालिया स्थिति तो कम से कम यही बयां कर रही है। अस्पताल की इमरजेंसी में डॉक्टरों का बोझ कम करने को चार इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर (सीएमओ) की नियुक्ति हुई थी। जिसमें मात्र एक ने ही ज्वाइन किया है।

दरअसल, आपातकालीन सेवा 24 घटे तीन पालियों में चलती है और इस दौरान 450 से 500 मरीज यहां उपचार के लिए पहुंचते हैं। इन मरीजों के उपचार के लिये इमरजेंसी में पर्याप्त ईएमओ तक नहीं हैं। इन विशेषज्ञों के अभाव में अन्य डॉक्टरों की मदद लेनी पड़ रही है। अभी कुछ वक्त पहले दून मेडिकल कॉलेज में ईएमओ के रिक्त पद भरने के लिए कवायद शुरू की गई। जिसके तहत चार डॉक्टरों की नियुक्ति की गई। लेकिन इनमें महज एक डॉ. नरेश ने ही ज्वाइन किया। अन्य तीन डॉक्टरों के ज्वाइन न करने से अस्पताल में संकट अब भी बरकरार है और इस स्थिति से उबरने के लिए अन्य डॉक्टरों की आपातकालीन ड्यूटी लगाई जा रही है।
कार्यकारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केसी पंत का कहना है कि इमरजेंसी में दिक्कत को देखते हुए ही चार डॉक्टर की नियुक्ति की गई थी। उम्मीद थी कि इससे स्थिति सुधर जाएगी, लेकिन इनमें से एक ही डॉक्टर ने ज्वाइन किया है। इसके अलावा एक अन्य कुछ दिन में ज्वाइन करेंगे। बाकी ने ज्वाइनिंग क्यों नहीं ली, यह बता पाना मुश्किल है। 

अब नए लुक में नज़र आएगी उत्तराखंड की यह मशहूर ”पहाड़ी टोपी”

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नवंबर में पहाड़ों की रानी मसूरी के 18वें जन्मदिन पर ‘सोहम हैरिटेज और आर्ट सेंटर’ द्वारा बनाई गई पहाड़ी टोपी ने बहुत ही जल्दी लोगों के दिलों में अपनी जगह बना ली है, नवंबर से अब तक लगभग पांच सौ टोपियों को लोगों ने सराहा और खरीदा है।

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इसी कड़ी में ‘सोहम हैरिटेज और आर्ट सेंटर’ के समीर शुक्ला पहाड़ी टोपी की एक और रेंज लेकर आने वाले हैं।जी हां, अब पहाड़ी टोपी आपको उत्तराखंड के लोकल फसल के ही फैब्रिक से बनी हुई मिलेगी। उत्तराखंड के क्षेत्रीय फ़सल बिच्छु घास,पहाड़ी सिल्क और हैंप यानि की भांग के फैब्रिक से बनाई हुई टोपी जल्द ही आपके बीच होगी।अगर आप उत्तराखंड के हैं तो आपको बिच्छु बूटी का पता ही होगा कि यह उत्तराखंडियों के जीवन में एक महत्तवपूर्ण जगह रखती है।इन्हीं सभी फसलों के रेशें से बनाई जाएगी यह नई पहाड़ी टोपी जो अपने आप में बेहतरीन शुरुआत है उत्तराखंड की परंपरा को आगे बढ़ाने का।

इस विषय में टीम न्यूज़पोस्ट से बातचीत करते हुए समीर शुक्ला ने बताया कि, “हमारी बनाई हुई पहाड़ी टोपी की लोकप्रियता को ध्यान में रखते हुए हम पहाड़ी टोपी की एक और रेंज लेकर आ रहे हैं, हालांकि इस रेंज की खास बात है कि इसमें हम हिमालय के क्षेत्रों में होने वाली फसल के फैब्रिक का इस्तेमाल करेंगे। इस बार हम पहले से महंगे कपड़ों के इस्तेमाल से टोपी बना रहे हैं तो यह पहले वाली टोपी से थोड़ी महंगी जरुर होगी लेकिन इसकी गुणवत्ता भी बेहतर होगी। उन्होंने बताया कि, “यह फैब्रिक बहुत ही रिफाईंड और थोड़ी महंगी होगी जिसकी वजह से टोपी पहले से महंगी है, लेकिन पहाड़ी फसल होने की वजह से जो भी मुनाफा है वह पहाड़ के लोगों को ही होगा।” पलायन को रोकने के लिहाज़ से भी यह पहल सराहनीय है।समीर ने कहा कि, “हमारे पहाड़ में मैन्फेक्चरिंग की कमी नही हैं लेकिन यहां पर चीजों को मार्केट करने की कमी है जिसकी वजह से लोगों को उनके प्रोडक्ट का सही पैसा नहीं मिलता। हमारी इस पहल से ऊचाईं वाले क्षेत्रों में होने वाले इन फसलों के इस्तेमाल से लोगो को रोज़गार तो मिलेगा ही साथ में इन सभी फसलों को एक नई पहचान मिलेगी।”

आपको बतादें कि समीर शुक्ला और उनकी पत्नी कविता शुक्ला जोकि मसूरी में ‘सोहम हैरिटेज और आर्ट सेंटर’ चलाते हैं, पिछले कई सालों से इस दंपत्ति ने मिलकर उत्तराखंड की परंपरा और यहां की जीवनशैली को बढ़ावा दिया है। चाहे वह उत्तराखंड के पारंपरिक गहने हो, या फिर पहाड़ी वाद्य यंत्र, पहाड़ी कला हो या फिर शिल्प।

समीर शुक्ला की इस नई पहाड़ी टोपी का हर पहाड़ी को बेसब्री से इंतजार रहेगा और मार्च के आखिरी तक यह टोपी मार्केट में होगी।

सही साबित हुआ मौसम विभाग का पूर्वानुमान, दून में हुई बारिश

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देहरादून। मौसम विभाग का पूर्वानुमान सही साबित हुआ, राजधानी देहरादून सहित आस-पास के क्षेत्रों में बारिश शुरू हो गई है। मौसम विभाग द्वारा सूबे में मंगलवार को बारिश और बर्फबारी की संभावना व्यक्त की गई थी।

सूबे में 3000 मीटर और उससे अधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर बर्फबारी हो सकती है। विशेषकर चकराता, मसूरी, नई टिहरी, नैनीताल, भुक्तेश्वर और पिथौरागढ़ में ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है।माना जा रहा है कि प्रदेश में बारिश एवं बर्फबारी से किसानों-बागवानों को लाभ मिलेगा। राजधानी देहरादून का अधिकतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है।

मंगलवार को दोपहर लगभग बारह बजे तक आसमान में कहीं बादल तक नहीं दिखाई दिए। बारह बजे के बाद आसमान में बादल की हल्की लकीरें दिखाई देने लगीं, लगभग दो बजे रिमझिम बारिश शुरू हो गई।

बता दें कि सर्दी के इस सीजन में बारिश का लोगों को इंतजार था। बारिश अगर तेज होती हुई तो इससे किसनों और बागवानों को लाभ मिलेगा, साथ ही सूबे के जल स्रोतों भी रिचार्ज होंगे। बारिश के कारण दून में एक बार फिर से ठिठुरन बढ़ गई।अगले 24 घंटे में बारिश के कारण दून में एक बार फिर से ठिठुरन और बढ़ सकती है।

ऑस्ट्रेलियाई ओपन के क्वार्टर फाइनल में पहुंची बोपन्ना-बाबोस की जोड़ी

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मेलबर्न, भारतीय टेनिस खिलाड़ी रोहन बोपन्ना ने मंगलवार को अपने हंगेरियन साथी टीमिया बाबोस के साथ ऑस्ट्रेलियन ओपन के मिश्रित युगल स्पर्धा के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया है।

बोपन्ना-बाबोस की जोड़ी ने अमेरिका की वानिया किंग और क्रोएशिया के फ्रांको स्कूगोर की जोड़ी को सीधे सेटों में 6-4, 6-4 से हराकर प्रतियोगिता से बाहर का रास्ता दिखाया।

अंतिम आठ में पांचवीं वरीय बोपन्ना-बाबोस की जोड़ी का सामना गत चैम्पियन कोलम्बिया के हुआन सेबास्तियन कबाल और अमेरिका की अबीगैल स्पीयर्स की जोड़ी के साथ होगा।

कबाल और स्पीयर्स की जोड़ी ने पिछले साल भारत की सानिया मिर्जा और क्रोएशिया के इवान डोडिग की जोड़ी को हराकर ऑस्ट्रेलियन ओपन का खिताब जीता था।

जल प्रबंधन के लिए तीन दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन

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ऋषिकेष, परमार्थ निकेतन में मंगलवार से जल प्रबंधन के लिए तीन दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में केन्या, युगांडा, तंजानिया, लाइबेरिया, नाइजीरिया, जाम्बिया, नामीबिया, मोजाम्बिक, मेडागास्कर अन्य अफ्रीकी देशों के जल विशेषज्ञों ने सहभाग किया।

अफ्रीकी देशों से आए जल राजदूतों के दल ने परमार्थ निकेतन में वेद मंत्र, प्राणायाम, ध्यान, सूर्य नमस्कार, योग आसनों का अभ्यास कर ‘जल प्रबंधन के साथ जीवन प्रबंधन के गुर’ भी सीखे। साथ ही जल राजदूतों ने विश्व शौचालय काॅलेज का भ्रमण कर ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस एवं गंगा एक्शन परिवार के माध्यम से जल प्रबंधन, जल की स्वच्छता एवं पर्यावरण स्वच्छता में सुधार लाने हेतु किये जा रहे व्यापक प्रयासों, विचारों एवं अनुभवों का आदान-प्रदान किया।

जीवा के विशेषज्ञों ने जल संरक्षण एवं स्वच्छता पर बनाई शॉर्ट फिल्मों एवं पाठ्यक्रमों के माध्यम से भारत की जल समस्या के विषय में जल राजदूतों को अवगत कराया ताकि मिलकर इस वैश्विक समस्या का समाधान किया जा सके।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने अपने लाइव संदेश में कहा, ‘अफ्रीका को मानव सभ्यता की जन्मभूमि माना जाता है और भारत मानव संस्कारों की भूमि है मुझे लगता है अब दोनों देशों के जल विशेषज्ञ मिलकर इस वैश्विक जल समस्या का समाधान अवश्य खोज लेंगे।’

अफ्रीकी संस्कृति विविधता की संस्कृति है और भारत की संस्कृति विविधता में एकता की संस्कृति है, वसुधैव कुटुम्बकम की संस्कृति है दोनों संस्कृतियां मिलकर एक नई जल संस्कृति को जन्म देगी जो दुनिया के लिये मिसाल बनेगी।

प्रोफेसर डाॅ डीएस आर्य ने कहा कि, ‘जल के संरक्षण के लिये तकनीकी, मार्गदर्शन, सहकारिता और जन सहभागिता नितांत आवश्यक है। जल का अशुद्ध होना प्रकृति प्रदत्त समस्या नहीं मानव निर्मित समस्या है। मानव व्यवहार में परिवर्तन कर कुछ हद तक हम समाधान प्राप्त कर सकते है।’

केन्या से आये जल विशेषज्ञ फिलिप विल्सन ने कहा, ‘जहां तक मैने जाना कि भारत की जल समस्या के लिये तकनीकी के साथ जागरुकता नितांत आवश्यक है। नाइजीरिया से आये प्रोफेसर ग्रेगरी एसी ने जीवा द्वारा स्वच्छता एवं शौचालय के लिए चलाए जा रहे अभियान की सराहना करते हुए कहा कि निश्चित ही रोचकता से पूर्ण जागरुकता का अभियान है।’

इस सम्मेलन में आईआईटी रुड़की के जल विज्ञान विभाग के प्रमुख, प्रोफेसर डाॅ डीएस आर्य के मार्गदर्शन में विश्व के 13 देशों के 25 विश्व स्तरीय जल राजदूत, जल वैज्ञानिक एवं विशिष्ट अधिकारियों व छात्रों ने सहभाग किया।

तीर्थ नगरी में यातायात नियमों को दिखाया जा रहा ठेंगा

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ऋषिकेश। आये दिन सड़क हादसों में हो रही युवाओं की मौत के बावजूद तीर्थ नगरी ऋषिकेश में यातायात नियमों के प्रति लोगों में जागरुकता का अभाव देखने को मिल रहा है।

यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने में युवाओं के साथ-साथ स्कूलों मे पढ़ने वाले किशोर अधिकांशतः शामिल हैं, जो कि ट्रैफिक सेंस की कमी के चलते न सिर्फ अपनी बल्कि लोगों की जिंदगी को भी खतरे में डाल रहे हैं। उधर नगर में यातायात सेंस की कमी के चलते सड़क हादसों के ग्राफ को लेकर मैती संस्था ने जागरुकता अभियान चलाने की बात कही है।
नगर की प्रमुख समाज सेविका कुसुम जोशी का कहना है कि बिना जागरुकता के सड़क हादसों को रोका जाना मुमकिन नहीं है। उन्होंने कहा कि आंकड़े बताते हैं कि ज्यादातर दुर्घटनाएं तेज रफ्तार और अनियंत्रण के कारण होती हैं। यातायात नियमों का उल्लंघन भी एक बड़ा कारण है। यातायात के निर्देशों का पालन करने से खुद भी सुरक्षित रहेंगे और दूसरे भी। जल्द ही शहर में यातायात नियमों को लेकर जागरुकता कार्यक्रम चलाया जायेगा।

26 जनवरी को होगा मैड का कार्यक्रम ”रिस्पना रिवाइवल”

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शहर में सफाई और अलग-अलग विषयों पर काम करने वाला ग्रुप मैड यानि मेकिंग ए डिफ्रेंस बाई बिंग ए डिफ्रेंस एक बार फिर कुछ अलग कर रहा है, आने वाले 26 जनवरी यानि गणतंत्र दिवस पर मैड ‘रिस्पना रिवाइवल’ नाम से एक आयोजन कर रहा है।यह कार्यक्रम जहां एक तरफ सात साल तक मैड ग्रुप के मूल प्रयासों से निष्ठुर रूप से प्रयासों का जश्न है।और अब रिस्पना के कायाकल्प पर अधिक से अधिक सरकारी ध्यान के लिए सफलतापूर्वक अभियान चलाया गया है।वहीं दूसरी ओर इस तरह की यह पहली बैठक है जो नदी के बारे में हेैं, जिसके बाद हर भागीदार से यह उम्मीद की जा रही है कि वह मरने वाली धारा को फिर से जीवंत करने में स्वयंसेवक बनेगा।

जी हां, जैसा कि हम सब जानते हैं कि पढ़े-लिखे छात्रों का यह ग्रुप आए दिन शहर में बढ़ रही परेशानियों को लेकर कुछ ना कुछ करता रहता है चाहे वो शहर की सफाई हो,जरुरतमंदो में कपड़े बांटना हो,नदियों के आसपास की सफाई या दीवारों पर पेंटिंग करना हो।आपको बतादें कि साल 2016 में, मैड ग्रुप ने उस समय के केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावेड़कर को रिस्पना की स्थिति पर विस्तृत प्रस्तुति दी थी। प्रकाश जावडेकर प्रस्तुति के बाद, पर्यावरण और वन मंत्रालय के एक विशेष दल ने मैड के दावे का सत्यापन किया कि रिस्पाना वास्तव में गंगा नदी बेसिन का एक हिस्सा है और इसकाीमुख्य सहायक नदी है। उसी में वास्तविक सटीकता प्राप्त करने के बाद, मंत्रालय ने मैड ग्रुप की याचिका को स्वीकार किया और घोषित किया कि रिस्पाना अब गंगा नदी बेसिन का हिस्सा है और इसलिए सुरक्षा के उन्नत स्तर के लिए हकदार हैं।

2018 में, मैड ने नमामी गांगे परियोजना में देहरादून को शामिल करने की मांग करने में एक बार फिर वह सफल रहे जिससे कि धारा को फिर से जीवंत करने के लिए संसाधनों के दरवाजे खोलता है।

इस साल ग्रुप मैड गणतंत्र दिवस के दिन शाम 4 बजे ‘रिस्पना रिवाइवल’ कार्यक्रम का आयोजन करेगी।

इस कार्यक्रम के बारे में टीम न्यूजपोस्ट से बातचीत में मैड के सदस्य करन कपूर ने बताया कि, ”हमने 26 जनवरी को रिस्पना रिवाइवल कार्यक्रम करने का सोचा है।यह दो से ढ़ाई घंटे का कार्यक्रम होगा जो सीएम हाउस में आयोजित होगा और इसमें खुद सीएम रावत भाग लेगें।रिस्पना रिवाइवल कार्यक्रम की तैयारी पहले से शुरु हो चुकी है आने वाले 22 जनवरी को ग्रुप मैड शहर के सभी सीबीएसई और कुछ आईसीएससी स्कूलों में ड्राइंग कम्पटिशन करवाऐगा और 23 जनवरी को शहर के सभी केंद्रीय विद्यालयों में भी यह कम्पटिशन आयोजित किया जाएगा।इसमें में कुछ बेहतरीन पेंटिंग को रिस्पना रिवाइवल कार्यक्रम के दौरान सीएम हाउस में जगह दी जाएगी।साथ ही कार्यक्रम में कल्चरल प्रोगाम जैसे कि डांस,सिंगिंग ,कविता वाचन आदि होंगे।”

ग्रुप मैड के सदस्य करन ने बताया कि इस कार्यक्रम के माध्यम से हम लोगों में रिस्पना नदी के बारे में जागरुकता फैलाऐंगे और रिस्पना से संबंधित तथ्य लोगों के सामने लेकर आऐंगे।

आपको बतादें कि शहर का यह ग्रुप मैड अपनी अलग-अलग कार्यो के लिए मशहूर है, इस ग्रुप के लगभग सभी सदस्य पढ़ने वाले छात्र है लेकिन यह समाज के लिए एक मिसाल बनकर सामने आए हैं।

पलायन आयोग प्रदेश के 12 जिलों में करेगा पलायन पर सर्वे

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राज्य में चिंता का विषय बने हुए पलायन को रोकने के लिए पहले उसकी स्थिति और कारणों को जानने के लिए पलायन आयोग राज्य के 12 जिलों में ग्राम स्तर पर सर्वे करा रहा है। इसकी रिपोर्ट 15 अप्रैल तक सरकार को भेज दी जाएगी। इस सर्वे के बाद प्रदेश में पलायन रोकने के उपाय किए जाएंगे।
राज्य पलायन आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एसएस नेगी ने शुक्रवार को आईटी पार्क स्थित एक रेस्टारेंट में ये जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देहरादून को छोड़कर प्रदेश के बाकी 12 जिलों में आयोग एक बृहद सर्वे करा रहा है। इसमें ये पता लगाया जाएगा कि किस जिले में कितना पलायन हुआ है। उसके कारण क्या क्या हैं। पलायन के बाद लोग वहां से सबसे ज्यादा कहां जा रहे हैं इसका भी पता लगाया जाएगा। ये पूरी रिपोर्ट तैयार होने के बाद 15 अप्रैल तक सरकार को भेजी जाएगी। इसके बाद आयोग पलायन को कैसे रोका जाए इसके उपाय करेगा। डॉ. नेगी के अनुसार राज्य में पर्यटन, वन और कृषि के जरिए पलायन रोका जा सकता है। इसके अलावा प्रदेश में नए उद्योग लगाकर पलायन को रोका जाएगा।
वर्ल्ड बैंक के साथ मिलकर चलाए जाएंगे प्रोजेक्ट
डॉ. नेगी के अनुसार पलायन रोकने के लिए प्रदेश में वर्ल्ड बैंक के साथ मिलकर कुछ प्रोजेक्ट चलाए जाने हैं। जिन्हें लेकर वर्ल्ड बैंक से आर्थिक मदद ली जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में ग्रीन रोड (कंडी मार्ग) के अलावा ईको टूरिज्म और जड़ी बूटी की खेती को विकसित कर पलायन रोकने की योजना है। इसके लिए पतंजलि आयुर्वेद से भी आयोग वार्ता करेगा। ताकि उन्हें जो जड़ी बूटी चाहिए यहीं पर उसका उत्पादन किया जा सके। प्रदेश कहां किस तरह की जड़ी बूटी की पैदावार हो सकती है इसका भी एक सर्वे डब्ल्यूआईआई की मदद से कराया जाएगा। अभी कुछ जगहों पर सर्वे कराया गया है, जिसे लेकर जल्द आयोग डब्ल्यूआईआई से रिपोर्ट लेगा।
पौड़ी और अल्मोड़ा में पलायन चिंताजनक
प्रदेश में 2011 की जनगणना के अनुसार पौड़ी और अल्मोड़ा में पलायन की स्थिति सबसे चिंताजनक है। इन दोनों जिलों में जनसंख्या 2011 के मुकाबले घटी है। जबकि टिहरी में मामूली बढ़त है। इसी तरह प्रदेश के अन्य पहाड़ी जिलों में जनसंख्या के आंकड़े पलायन के लिहाज से चिंताजनक हैं।
शिक्षा और स्वास्थ्य सबसे बड़ी समस्या
डॉ. नेगी के अनुसार प्रदेश में पलायन का सबसे बड़ा कारण पहाड़ों पर शिक्षा और स्वास्थ्य की बदहाली है। वे मानते हैं कि राजधानी गैरसैंण करने के बजाए इसके लिए खर्च किया जाना वाला करीब 500 करोड़ का बजट अगर पहाड़ों पर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में लगाया जाए तो पहाड़ का विकास हो सकता है।

अब दून के सिटी बसों में मौजूद होगी पुलिस की ”आवाज”

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अगर आप दून के निवासी हैं और शहर में एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करते है तो यह खबर आपके लिए है।बीते सोमवार को देहरादून ट्रैफिक पुलिस ने एक महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक नई पहल की है।अगर आप शहर में चल रहे सिटी बसों का प्रयोग कर रहे हैं तो अब आपकों शहर के लगभग सभी सिटी बसों में हर सीट यानि की कुल 40 सीटों पर उत्तराखंड की विसिल यानि की सीटी टंगी मिलेगी।यह सीटी बस में सफर करने वाले महिलाओं और लड़कियों के लिए लगाई गई है। सफर के दौरान अगर आपके साथ कोई छेड़-छाड़ या बदसलूकी करता है तो आप उस सीटी को बजा सकते हैं।

यातायात निदेशालय, उत्तराखण्ड पुलिस ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिये “आवाज” नाम से एक नई पहल की है, जिसमें देहरादून जनपद की 60 सिटी बसों ( सार्वजनिक यातायात वाहनों ) में प्रत्येक सीट के आगे एक सीटी (whistle) लगायी गयी ।हर एक सीटी (whistle) पर उत्तराखण्ड पुलिस लिखा गया है । सिटी बस में किसी भी महिला से किसी भी प्रकार की छेङछाङ की घटना होने पर वे अपनी आवाज ( इस whistle को बजाकर) उठा सकती है । मनोवैज्ञानिक रूप से भी छेङछाङ करने वालों पर इससे रोक लगेगी व ड्राइवर/परिचालक व यात्रि भी इससे अलर्ट होगें।।

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आए दिन देहरादून के ट्रैपिक को बेहतर बनाने के लिए यातायात निदेशालय, उत्तराखण्ड पुलिस कुछ ना कुछ नया कर रही है जिसमें शहर में ट्रैफिक के साथ-साथ महिलाओं की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जा रही है।ट्रैफिक पुलिस उत्तराखंड की इस पहल को लोगों से भरपूर सहयोग मिल रहा है।ट्रैफिक डायरेक्टरेट उत्तराखंड पुलिस ने अपनी इस पहल को फेसबुक पेज के माध्यम से लोगों से सांझा किया और पोस्ट पर लोगों ने पुलिस की इस पहल की सराहना की है।

ट्रैफिक निदेशक केवल खुराना ने टीम न्यूजपोस्ट से बातचीत में बताया कि, “आवाज पहल से हम आए दिन सिटी बसों में हो रही छेड़-छाड़ पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहे हैं।सीटी की आवाज और इसके बजने के डर से अब सिटी बसों में सफर करने वाले मनचले डर कर रहेंगे।हम आशा करते हैं कि अब बसों में महिलाएं बिना किसी डर के सफर कर सकती और यह प्रोजेक्ट “आवाज” महिला सुरक्षा व सशक्तिकरण के लिये एक मील का पत्थर साबित होगा ।”

आने वाले कुछ दिनों में ही इस पहल की मॉनिटरिंग की जाएगी कि इससे कितना फायदा हुआ है।हांलांकि अब महिलाओं को सिटी बसों में सफर के दौरान डरने की जरुरत नहीं हैं और किसी भी र्दुव्यवहार की आशंका होने पर अपनी आवाज़ बुलंद करनी हैं और बस में मौजूद सिटी को बजाना है।

पांच महीने से तनख्वाह को तरस रहे हैं बीआरसी-सीआरसी समन्वयक

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(देहरादून) सर्व शिक्षा अभियान में काम कर रहे सीआरसी-बीआरसी समन्वयकों को पिछले पांच माह से तन्ख्वाह नहीं मिली है। जिससे यह लोग आर्थिक तंगी झेल रहे हैं। ऐसे में इन्होंने अब बिना वेतन काम न करने का ऐलान किया है। उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष विरेंद्र सिंह कृषाली ने कहा कि “उत्तराखंड राज्य सर्व शिक्षा अभियान में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी रहा है। जिसका श्रेय सर्व शिक्षा अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में बीआरसी-सीआरसी समन्वयकों को जाता है। लेकिन इन्हें पिछले पांच माह से वेतन ही नहीं मिला। शैक्षिक सत्र में आकस्मिक व्यय की धनराशि भी अवमुक्त नहीं हुई है। जिस कारण बीआरसी-सीआरसी समन्वयक बिना धन काम करने को मजबूर हैं। ऐसे में अब एक मत होकर दाम नहीं तो काम नहीं की रणनीति अपनाने का निर्णय लिया गया है।”

कर्मचारियों ने विभाग को 22 जनवरी तक का अल्टीमेटम दिया गया है। यदि इस दिन तक वेतन जारी नहीं किया गया, तो 23 जनवरी से मुख्य शिक्षाधिकारी कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया जाएगा।