देहरादून, उत्तराखंड सरकार ने मेहमानों के चाय-नाश्ते पर बीते 9 महीने में सरकारी फंड से 68 लाख 59 हजार 865 रुपए खर्च कर दिए। एक आरटीआई में इस बात का खुलासा हुआ है, 18 मार्च 2017 को त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।
दिसंबर में लगाई गई थी एप्लिकेशन:
हेमंत सिंह गौनियां नाम के आरटीआई एक्टिविस्ट ने 19 दिसंबर 2017 को एप्लिेकशन लगाई थी। इसमें पूछा गया था कि त्रिवेंद्र सिंह रावत के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से अब तक चाय-पानी तक कितना सरकारी पैसा खर्च हुआ?नैनीताल के रहने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट ने सूचना के अधिकार के तहत यह जानकारी मांगी थी कि त्रिवेन्द्र सिंह रावत के मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद अतिथियों के लिए चाय-पानी कराने में कितना खर्च किया गया? उत्तराखंड की सचिवालय प्रशासन ने जवाब दिया है कि रावत के पद संभालने के बाद से अतिथि तक चाय-पानी में 68,59,865 रुपया सरकारी धन खर्च किया गया है। इस हिसाब से हर एक दिन लगभग 22 हजार रुपये चाय-नाश्ता कराने में खर्च किया गया, सचिवालय ने 22 जनवरी 2018 को यह जवाब दिया है।
चाय और नाश्ते को लेकर अब सियासत भी जोर पकड़ने लगी है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री आवास पर सरकारी खर्च का दुरुपयोग पर सवाल उठाए हैं कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत ने इस पर सफाई देते हुए कहा है कि, “भ्रामक प्रचार किया जा रहा है, इसमें कैबिनेट बैठकों का खर्च भी शामिल है।” लेकिन ऐसे में सवाल उठता है कि चाय नाश्ते में इतना फिजूलखर्ची आखिर क्यों?

















































27 साल के अंशू अग्रवाल फ्रील़ांसर फोटोग्राफर होने के साथ फिल्म हैरी पोर्टर के बड़े फैन हैं, एक फोटोग्राफर,एजुकेशनल ट्रेनर होने के साथ-साथ ट्रेवेलर भी हैं जो इस वक्त दिल्ली के ब्रिटिश काउंसिल में लैंग्वेज ट्रेनर हैं। लेकिन लगभग डेढ़ साल पहले उत्तराखंड के टोस वैली में स्थित कलाप गांव में अंशू मे वहा के बच्चों को एक एनजीओ के अंर्तगत पढ़ाया था। देहरादून से 200 किमी दूर कलाप के बच्चों को बहुत ही क्रिएटिव अंदाज़ में पढ़ाया व is दौरान अंशू ने अपने स्टूडेंट के साथ एक क्विडिच्च फोटो शूट भी किया ।यह फोटोशूट अपने आप में इतना नायाब हैं कि इसको देखने वाले को लगेगा यह किसी जादूई नगरी की फोटो हैं।हालांकि अंशू वेस्ट बंगाल के बाशिंदे हैं और उन्होंने अपना ज्यादा समय हैदराबाद में बिताया है।
बात को लगभग 2 साल हो गए हैं,मैं रविवार को बच्चों को इंग्लिश की क्लास दे रहा था और एक एक्टिविटी में मैने उन्हें हैरी पार्टर फिल्म दिखाई और इस फिल्म को देखकर बच्चें बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने मुझसे खुद जादूगर बनने की बात कही।बस तब मैने सोचा कि एक कोशिश की जा सकती हैं।”














