बागेश्वर के एक गांव मे डोली पर आते हैं बीमार, पहाड़ के गांवों की खस्ताहाल स्वास्थ्य सेवाएं

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पहाड़ की खस्ताहाल स्वास्थ्य सेवाओं से जूझ रहें निवासी । सड़क से दूर गांव के लोग आज भी मरीज को डोली में रखकर अस्पताल तक लाने को मजबूर हैं। वहां डाक्टरों की कमी होने से मरीज को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। कारणवश रोगी की ठीक होने के बजाए और बीमार हो जाता है। बदलती सरकारों ने पहाड़ की स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान नहीं दिया है। भाजपा और कांग्रेस की सरकार यहां बदल-बदल कर आती है, लेकिन अस्पतालों में डाक्टरों का टोटा यूपी के समय से अधिक है। जिन गांवों में स्वास्थ्य केंद्र हैं, वहां डाक्टर नहीं हैं। डाक्टर नहीं होने से दवा आदि की खेप भी कागजों पर उतरती है। फार्मासिस्ट या वार्डबॉय इन अस्पतालों को खोलते और बंद करते हैं।
डाक्टर का टोटा होने से मरीजों को यहां से जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। जिला अस्पताल में भी फिजिशियन समेत तमाम डाक्टर नहीं होने से उन्हें अल्मोड़ा और फिर हल्द्वानी का रूख करना पड़ रहा है। झूनी गांव के लोग आज भी दस किमी पैदल चलकर मरीज को डोली पर अस्पताल पहुंचा रहे हैं। गांव में कोई बीमार हो जाए तो उसे अस्पताल तक लाने के लिए ग्रामीण पहले डोली का इंतजाम करते हैं। डोली नहीं मिलने पर लकड़ी के डंडों पर कपड़ा और रस्सी बांधकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाते हैं। गरुड़, कपकोट, कांडा, काफलीगैर आदि गांवों की स्वास्थ्य सेवाएं पटरी से उतर गई हैं।