उत्तराखंड मंत्रिमंडल: कर्मचारियों को महंगाई भत्ता के साथ लिए गए कई महत्वपूर्ण निर्णय

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में शुक्रवार को आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य कर्मचारियों और पेंशनरों को 11 प्रतिशत महंगाई भत्ता देने के साथ कुल 27 प्रस्तावों पर निर्णय लिया गया।

शुक्रवार को राज्य सचिवालय स्थित वीर चंद्र सिंह गढ़वाली सभागार में कैबिनेट बैठक संपन्न हुई। बैठक के पश्चात शासकीय प्रवक्ता सुबोध उनियाल ने मीडिया बीफ्रिंग में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बैठक में कर्मचारियों को 11 प्रतिशत महंगाई भत्ता एक जुलाई से देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस निर्णय से सरकार पर 18 सौ करोड़ रुपये का सालाना व्यय भार बढ़ेगा। इस फैसले से तीन लाख कर्मचारियों और पेंशनरों को लाभ मिलेगा। इसके अलावा उत्तराखण्ड की चतुर्थ विधानसभा 2021 के द्वितीय सत्र के सत्रावसान करने की अनुमति दी गई है।

राज्य के 7 इंजीनियरिंग संस्थानों में भारत सरकार की ओर से सहायता प्राप्त तकनीकि शिक्षा गुणवत्ता सुधार परियोजना के तहत संविदा पर कार्यरत शिक्षकों को अक्टूबर,2021 से 31 मार्च, 2022 तक कार्य करने की अनुमति दी गई। इसके फलस्वरूप पारिश्रमिक के रूप में अनुमानित कुल धनराशि 3.83 करोड़ रुपये का व्यय भार राज्य सरकार की ओर से वहन किया जाएगा। इसके अलावा उत्तराखण्ड भौगोलिक परिस्थितियों के दृष्टिगत जनहित में फिलिंग स्टेशन की स्थापना के लिए भवन निर्माण और विकास की उपविधि में संशोधन कर मानकों में छूट दी गई। ग्राम पंचायत नगला, जनपद उधम सिंह नगर को नगरपालिका परिषद बनाने की मंजूरी दी गई।

उत्तराखण्ड सम्मिलित राज्य सिविल,प्रवर अधीनस्थ परीक्षा 2012 के अन्तर्गत सामान्य श्रेणी,पूर्व सैनिक श्रेणी का एक अतिरिक्त पद डिप्टी कलेक्टर पद के लिए आयोग को भेजने की मंजूरी दी गई। राज्य में स्थापित चिकित्सा इकाइयों के आईपीएचएस मानकीकरण के क्रम में जनपदवार चिकित्सीय इकाइयों को, टाइप ए प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र, टाइप बी प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र, सामुदायिक चिकित्सा केन्द्र, उप जिला चिकित्सा केन्द्र और जिला चिकित्सा केन्द्र के रूप में पांच वर्गों में बांटने का निर्णय लिया गया।

उत्तराखण्ड राजस्व चकबन्दी (उच्चतर) सेवा नियमावली-2021 को प्रख्यापित करने का निर्णय लिए गए। एकल आवास एवं व्यवसायिक भवनों,आवासीय भू उपयोग में व्यवसायिक दुकान तथा आवासीय क्षेत्रों में नर्सिंग होम, क्लीनिक,ओपीडी, पैथोलॉजी लैब, नर्सरी स्कूल आदि के विनियमतिकरण हेतु एकल समाधान योजना 24 सितम्बर, 2021 से बढ़ाकर मार्च 2022 तक करने का निर्णय लिया गया है।

उत्तराखण्ड में स्थित उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद की परिसम्पितयों को सील किया गया था। इस सम्बन्ध में इसके विक्रय, निर्माण अथवा विकास कार्य पर रोक लगी थी, इस रोक को हटाने का निर्णय किया गया है। श्रीनगर को नगर निगम बनाने की अनुमति और उत्तराखण्ड पशु चिकित्सा सेवा नियमावली-2021 का प्रख्यापन पर निर्णय लिया गया। इसके साथ ही उपनल के सम्बन्ध में अगली कैबिनेट में मंत्रिमण्डलीय उपसमिति के निर्णय को रखने की मंजूरी दी गई।

लोहाघाट को नगर पालिका बनाने और टिहरी नरेन्द्रनगर तपोवन को नगर पंचायत बनाने का निर्णय लिया गया। उत्तराखण्ड नजूल भूमि प्रबन्धन,व्यवस्थापन एवं निस्तारण अध्यादेश-2021 के प्रख्यापन का बाद पट्टेधारकों को फ्री होल्ड कराने की अनुमति दी गई।

जिलास्तरीय विकास प्राधिकरण को अधिक सुदृढ़ एवं उपयोगी बनाने के लिये मंत्रिमण्डल उपसमिति का गठन किया गया। इसमें मंत्री बंशीधर भगत, अरविन्द पाण्डेय, सुबोध उनियाल होंगे। उत्तराखण्ड पुलिस आरक्षी एवं मुख्य आरक्षी (नागरिक पुलिस अधिसूचना एवं सशक्त पुलिस) सेवा नियमावली-2018 में संशोधन किया गया है। उत्तराखण्ड पुलिस उपनिरीक्षक एवं निरीक्षक (नागरिक पुलिस) सेवा नियमावली-2018 के संदर्भ में मुख्यमंत्री को निर्णय लेने का अधिकार दिया गया है।

उत्तराखण्ड स्टाम्प (सम्पति का मुल्यांकन) संशोधन नियमावली-2015 में प्रचलित सर्किल दरों में चमोली के बद्रीनाथ एवं बामणी में पेनाल्टी पांच गुना से कम करके दो गुना वन टाइम सेटलमेंट करने पर मुहर लगी। एविएशन टरबाइन फ्यूल की वैट दर 20 प्रतिशत से घटा कर 2 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया। उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति को दी जाने वाली टेलीफोन सुविधा स्वघोषणा के आधार वास्तविक व्यय का भुगतान किया जाएगा।

कांस्टेबल से हेड कांस्टेबल बनाने में रैंकर्स परीक्षा को समाप्त कर सौ प्रतिशत पदोन्नति से करने का निर्णय।सरकारी परियोजना में निवेशकों, पट्टेधारकों से सम्बन्धित संविदा के विवाद को सुलझाने के लिये कमेटी बनाये जाने के लिये सीएम को अधिकृत किया गया।

स्टोन क्रेशर, अवैध खनिज भण्डारों के वन टाइम सेटलमेंट के लिये नियमावली में संशोधन किया जाएगा। स्टोन क्रेशर, प्लान्ट स्वामियों/स्क्रीनिंग प्लांट स्वामी/अवैध खनन कर्ताओं पर आरोपित दंडारोपण के लिए नियमावली बनेगी । इस मामले को दो माह में निस्तारित करने होंगे और नियमावली बनने के बाद दो माह के लिये प्रभावी होगी।

केदारनाथ बद्रीनाथ में पुनर्निर्माण के तहत अधिप्राप्ति नियमावली में छूट दी गई। अब 75 लाख तक के कार्य सिंगल बिड से किए जा सकते हैं। उच्च न्यायालय राज्य वित्त अधिकारी से सम्बन्धित सेवा नियमावली संशोधन की मंजूरी दी गई है।