साइबर फ्राड का एसटीएफ और साइबर पुलिस ने किया खुलासा, दो गिरफ्तार

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एसटीएफ और साइबर पुलिस ने देश में फिल्मों के माध्यम से संचालित मनी लांडरिंग पर सनसनीखेज कार्रवाई की गई है, जिसमें फिल्म इंड़स्ट्री के एक तथाकथित प्रॉडूसर को गिरफ्तार किया गया है। प्रथम दृष्टया विभिन्न कम्पनियों के माध्यम से एक अरब से अधिक की धोखाधड़ी की धनराशि प्रकाश में आयी है।

उत्तराखंड एसटीएफ और साइबर पुलिस ने विदेशी नागरिकों के भारत में नए तरीके से चला रहे साइबर फ्रॉड का खुलासा किया है। इसके तहत फर्ज़ी वेबसाइट को हांगकांग से बनाया गया था और इससे कंबोडिया से जुड़े साइबर अपराधियों के संबंध है। एसटीएफ और साइबर क्राइम पुलिस द्वारा देर रात भोपाल मध्य प्रदेश में दो संदिग्ध अभियुक्तों की धरपकड़ की गई। जीएलसी प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी ऑनलाइन ट्रेडिंग में निवेश के नाम पर 15 लाख की धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के दो संदिग्ध अभियुक्त की गिरफ्तारी की गई है। इससे पहले भी जनवरी में फरीदकोट पंजाब से एक अभियुक्त को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है।

इसी क्रम में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन को अमित कुमार पुत्र रामेश्वर प्रसाद निवासी सुभाषनगर ज्वालापुर जनपद हरिद्वार ने शिकायत की। शिकायत के तहत अज्ञात आरोपितों ने ऑनलाइन ट्रेडिंग कम्पनी जीएलसी प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी बनाकर शिकायतकर्ता से धनराशि दोगुना करने का लालच देकर 15 लाख रुपये की धोखाधड़ी की, जिसकी विवेचना त्रिभुवन रौतेला को सौंपी गई।

छानबीन में पता चला कि अभियुक्तों द्वारा विदेशी सहअभियुक्तों कंबोडिया और हांगकांग निवासियों के साथ फर्जी वेबसाइट बनाकर सोना मसाले शराब का ऑनलाइन कारोबार का झांसा देकर आईसीआईसीआई व ग्लैक्सी व्हाइट के नाम से खाते खुलवाकर धोखाधड़ी की गई। जनवरी में आरोपित रोहित कुमार को जेल भेजा गया और पुलिस टीम द्वारा पहली बार उत्तराखंड राज्य में भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के माध्यम से मनी लांडरिंग का प्रकरण उजागर किया गया। इसी प्रकरण में शुक्रवार को दो संदिग्ध आरोपितों को भोपाल से गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के पास से एटीएम कार्ड, 15 लाख रुपये की धनराशि एक 21 लाख की लग्जरी गाड़ी बरामद की गई है। आरोपी दर्जनों बैंकों में फर्जी खाते खुलवाते थे और विदेशी फिल्मों को भारत में प्रसारित करने हेतु झूठे दस्तावेज बनाते थे।

भोपाल से गिरफ्तार रचित शर्मा पुत्र जयप्रकाश शर्मा तथा सुरेश यादव पुत्र मनरूप यादव दोनों की उम्र 42 वर्ष दोनों को हिरासत में लिया गया है। इनके पास से तीन मोबाइल 20 एटीएम डेविट कार्ड लैपटाप तथा लग्जरी गाड़ी शामिल है। पुलिस उपाधीक्षक अंकुश मिश्र तथा निरीक्षक त्रिभुवन रौतेला के साथ टीम ने आरोपितों को हिरासत में लिया है। इस टीम ने लोगों से आग्रह किया कि वह धन दुगना करने तथा पैसे लगवाने के फर्जी विज्ञापनों से प्रभावित न हो।