चार धाम यात्राः अब आखिरी चरण से ही कुछ आस

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चार धाम
चार धाम यात्रा के लिहाज से अनलाॅक-2 में सरकार ने छूट का दायरा तो बढ़ा दिया है लेकिन अभी तुरंत बात बनने की स्थिति नहीं दिखती। मानसून की दस्तक के साथ ही चार धाम यात्रा के हिसाब से सर्वोत्तम माने जाने वाला अप्रैल से जून तक का समय कोरोना की छाया में गुजर चुका है। अब यात्रा के लिहाज से सितंबर से कुछ उम्मीद की जा सकती है। चार धाम यात्रा का आखिरी चरण सितंबर से नवंबर मध्य तक चलता है। कोरोना संक्रमण के चलते यूं तो यात्रा को बहुत बड़ा नुकसान हो चुका है लेकिन सितंबर तक यदि स्थिति संभलती है, तो उत्तराखंड को थोड़ा मुस्कुराने का मौका जरूर मिल जाएगा।
-सितंबर से नवंबर मध्य तक चलता है यात्रा का एक और दौर
-बाहरी राज्यों के लोगों को मिलेगी अनुमति, तो बनेगी बात
कोरोना संक्रमण की स्थिति न होती तो चार धाम यात्रा के पक्ष में इस बार बहुत सारी बातें थीं। मसलन, यात्रा इस बार बहुत ही सही समय पर शुरू हो रही थी। कई बार यात्रा की शुरुआत मई के पहले सप्ताह में हो पाती है। तब तक पूरे देश में स्कूल-काॅलेजों में छुट्टी पड़ चुकी होती है और लोगोें के घूमने-फिरने के कार्यक्रम तय हो जाते है। यात्रा में लोग फिर भी काफी आते हैं लेकिन यदि यही यात्रा अप्रैल के आखिरी सप्ताह में शुरू होती है, तो नतीजे और बढ़िया निकलकर आते हैं। इस बार भी यात्रा शुरू करने का मुुहूर्त अप्रैल आखिरी सप्ताह में निकलकर आया था। इसके अलावा यात्रा के पक्ष में दूसरी अच्छी बात ये थी कि पिछले सीजन में रिकार्ड यात्रियों के उमड़ने की वजह से यात्रा लायक बेहतर माहौल बना था। खास तौर पर केदारनाथ धाम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ध्यान साधना के कारण लोगों का चार धाम यात्रा के लिए खासा उत्साह जगा था।
कोरोना संक्रमण और अनलाॅक की प्रक्रिया के बीच राज्य सरकार यात्रा के मामले में फूंक-फूंककर कदम आगे बढ़ा रही है। अनलाॅक-1 में सिर्फ संबंधित जिलों वालों को ही चार धाम यात्रा की अनुमति दी गई। अनलाॅक-2 में अब उत्तराखंड के स्थानीय नागरिक ही चार धाम की यात्रा कर सकते हैं। कोरोना की स्थिति संभले तो सरकार बाहरी राज्यों के लोगों के लिए भी यात्रा के रास्ते खोलने में देर नहीं करेगी। पर्यटन और तीर्थाटन मंत्री सतपाल महाराज कह रहे हैं कि स्थिति सामान्य होने पर बाहरी राज्यों के ग्रीन जोन में रहने वाले लोगों को यात्रा की अनुमति दी जाएगी। वैसे सरकार भी जानती है कि मानसून की दस्तक के बाद जुलाई-अगस्त में बहुत कम लोग ही यात्रा को जाएंगे। ऐसे में निगाहें सितंबर पर जाकर ही टिक रही हैं। चार धाम यात्रा के आखिरी चरण में बंगाली श्रद्धालु भी बहुत बड़ी संख्या में उत्तराखंड आते हैं।