जोशीमठ भू धंसाव : केन्द्र के तकनीकी संस्थानों को अध्ययन रिपोर्ट देने के लिए तय की गई टाइमलाइन

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    जोशीमठ
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    केन्द्र के तकनीकी संस्थानों को जोशीमठ भू-धंसाव के अर्न्तगत आपदाग्रस्त क्षेत्र की अध्ययन रिपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए टाइमलाइन दी गई है। राहत की बात है कि पानी का डिस्चार्ज 540 एल.पी.एम से घटकर 123 एल.पी.एम हो गया है। अभी तक 849 भवनों में दरारें आई हैं और 167 भवनों को असुरक्षित चिह्नित किया गया है।

    मंगलवार को सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में सचिव, आपदा प्रबंधन डा.रंजीत कुमार सिन्हा ने पत्रकारों को बीफ्रिंग दी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के स्तर पर केन्द्र के तकनीकी संस्थानों को जोशीमठ के अर्न्तगत आपदाग्रस्त क्षेत्र की अध्ययन रिपोर्ट उपलब्ध कराये जाने को टाइमलाइन दी गई है।

    उन्होंनेबताया कि सीबीआरआई के 10 वैज्ञानिकों की टीम को तीन सप्ताह, एनजीआरआई के 10 वैज्ञानिकों की टीम को प्रारम्भिक रिपोर्ट दो सप्ताह और अन्तिम रिपोर्ट तीन सप्ताह में देनी है। इसी के साथ वाडिया संस्थान के 07 वैज्ञानिकों की टीम को प्रारम्भिक रिपोर्ट दो सप्ताह और अन्तिम रिपोर्ट दो माह, जीएसआई के सात वैज्ञानिकों की टीम को प्रारम्भिक रिपोर्ट दो सप्ताह व अन्तिम रिपोर्ट दो माह, सीजीडब्ल्यूबी के 04 वैज्ञानिकों की टीम को प्रारम्भिक रिपोर्ट एक सप्ताह और अन्तिम रिपोर्ट तीन सप्ताह में देनी है। आईआईआरएस को एक सप्ताह में प्रारम्भिक रिपोर्ट और तीन माह में अन्तिम रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    राहत की खबर है कि जोशीमठ में प्रारम्भ में निकलने वाले पानी का डिस्चार्ज जो कि 6 जनवरी को 540 एल.पी.एम. था, वर्तमान में घटकर 123 एल.पी.एम. हो गया है।

    मॉडल प्री-फेब्रिकेटेड के लिए भूमि चिन्हित-

    सचिव, आपदा प्रबन्धन सिन्हा ने जानकारी दी कि टी.सी.पी. तिराहा जोशीमठ के पास उद्यान विभाग की भूमि को मॉडल प्री-फेब्रिकेटेड हट बनाने के लिए चिन्हित किया गया है। जे.पी. के 15 भवनों को चिन्हित किया गया है,जिन्हें तोड़ने का कार्य प्रारम्भ किया जा रहा है।

    849 भवनों में दरारें,167 भवन असुरक्षित-

    सचिव, आपदा प्रबन्धन ने बताया कि अभी तक 849 भवनों में दरारें दृष्टिगत हुई हैं। गांधीनगर में 01,सिंहधार में 02, मनोहरबाग में 05, सुनील में 07 क्षेत्र/ वार्ड असुरक्षित घोषित किए गए हैं। 167 भवन असुरक्षित क्षेत्र में स्थित है। 250 परिवार अस्थायी रूप से विस्थापित किये गये हैं। विस्थापित परिवार के सदस्यों की संख्या 838 है।

    प्रभावित परिवारों को 3.10 करोड़ वितरित-

    राज्य सरकार की ओर से विस्थापन के लिए अग्रिम के रूप 207 प्रभावित परिवारों को 3.10 करोड़ की धनराशि वितरित कर दी गई है। अस्थायी रूप से चिन्हित राहत शिविरों में जोशीमठ में कुल 615 कक्ष हैं जिनकी क्षमता 2190 लोगों की है। पीपलकोटी में 491 और जिनकी क्षमता 2205 लोगों की है। सर्वेक्षण का कार्य चल रहा है।

    इस दौरान अपर सचिव आपदा प्रबन्धन, निदेशक उत्तराखण्ड भूस्खलन प्रबन्धन एवं न्यूनीकरण संस्थान, निदेशक वाडिया संस्थान, निदेशक आईआईआरएस देहरादून, निदेशक एनआईएच तथा निदेशक आईआईटीआर उपस्थित थे।