40 वर्षीय महिला अधिकारी करेंगी उत्तराखंड का नाम रोशन

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देहरादून, मंजिल उन्ही को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नही होता। होसलों से उड़ान होती है, पंखों से उडॉन होती है। इस बात को सच कर रही है उत्तराखंड की मेजर महिला शशि मेहता ने। उत्तराखंड की मैराथन खिलाड़ी मेजर शशि मेहता जो कि वर्तमान समय में सहारनपुर में पोस्टेड हैं और बहुत जल्द लद्दाख में होने वाली अल्ट्रा रेस में प्रतिभाग कर उत्तराखंड का नाम रोशन करने जा रही है ।इससे पहले वो 39 साल की उम्र में 74 किलोमीटर की दौड़ में प्रथम स्थान पा चुकी है और अब लद्दाक में 17500 फ़ीट की ऊँचाई पर जहाँ ऑक्सीजन की काफी कमी है, 111 किलोमीटर की दौड़ में हिस्सा लेने जा रही है और लोग उनके इस जज्बे को सलाम कर रहे हैं।

महिलाओं के अंदर अगर जोश और जज्बा हो तो दुनिया की कोई भी ताकत उन्हें रोक नहीं सकती, यह कहना उत्तराखंड की 39 महिला अधिकारी शशि मेहता का जो गढ़वाल रन को सफलतापूर्वक दौड़ने के बाद लद्दाक में होने वाली 111 किलोमीटर दौड़ के लिए मेजर शशि मेहता क्वालीफाई कर लिया है। 1,75,00 फीट की ऊंचाई में होने वाली यह दौड़ अगस्त महीने में लेह लद्दाख में होने जा रही है। दौड़ में सफलता हासिल करने के लिए पिथौरागढ़ निवासी शशि मेहता जीजान से प्रयास कर रही हैं। इससे पहले भी मेजर देहरादून से धनोल्टी तक 74 किलोमीटर की दौड़ में प्रथम स्थान हासिल कर चुकी हैं। उनका कहना है कि, बहुत कम समय में उन्होंने इस मुकाम को हासिल किया है।

उत्तराखंड के लिए कुछ कर गुजरने की चाहत अपने मन में लिए वह प्रतिदिन कई घण्टे प्रयास करती है औरलेह में 40 प्रतिशत ऑक्सीजन में भी इस दौड़ में हिस्सा लेकर उत्तराखंड की महिलाओं के लिए नई मिसाल बनने जा रही है। उनको इस खेल में कई पुरुस्कारों से भी नवाजा गया है, वही लद्दाक में होने वाली रेस में उत्तराखंड में मैराथन को और प्रचलित करना चाहती हैं, वह चाहती है ज्यादा से ज्यादा महिलाएं दौड़ना प्रारंभ करे और शारीरिक और मानसिक रूप से फिट रहे।

मैराथन खिलाड़ी होने के साथ-साथ दो बच्चों की मां भी है और उत्तराखंड की महिलाओं के लिए मिसाल बनी है वही रेस को लेकर उन्होंने सरकार से आर्थिक मदद की मांग की है वह चाहती है कि सरकार उनको आर्थिक तौर पर सहायता दे ताकि वह इस रेस में उत्तराखंड के नाम का परचम लहरा सके।