उत्त​राखंड को 130 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत

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ऑक्सीजन
उत्तराखंड में एक ऑक्सीजन सपोर्टेड बेड में 10 लीटर प्रतिमिनट दर से और आईसीयू बेड के लिए 24 लीटर प्रति मिनट की दर से ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। अभी जो बेड उपयोग में आ रहे हैं, उनके लिए 130 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत है। इन बेड्स के लिए राज्य सरकार को 165.18 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आवश्यकता होगी। राज्य में मोबाइल टेस्टिंग वैन भी शुरू किया जाएगा, जो दूरस्थ ग्रामीण में काम करेगी।
सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में सोमवार को मुख्य सचिव ओमप्रकाश ने अपने अधिकारियों संग कोरोना बचाव के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे कार्यो की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार संक्रमण चेन को तोड़ने के लिए आमजनों को हित में एक के बाद एक ठोस और प्रभावी कदम के साथ त्वरित दिशा में आगे बढ़ रही है।
मुख्य सचिव ने बताया कि भारत सरकार ने 183 मीट्रिक टन उत्तराखंड को अलोकेट किया है। अभी जो बेड उपयोग में आ रहे हैं, उनके लिए 130 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत है और हमें प्रतिदिन 126 मीट्रिक टन ऑक्सीजन प्रतिदिन उपलब्ध होती है। हाॅस्पिटल्स में जो प्लांट लगे हैं, उनसे 5 मीट्रिक टन ऑक्सीजन उपलब्ध हो रही है। अस्पतालों में और भी प्लांट लग रहे हैं, जिनसे 4 मीट्रिक टन ऑक्सीजन उपलब्ध हो जाएगी।
उन्होंने बताया कि बहुत जल्द हम मोबाइल टेस्टिंग वैन भी शुरू करेंगे, जो दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में जाकर मरीजों की पहचान करेगी और वहीं उनकी जांच करेगी, इससे उन्हें उपचार के लिए शहर आने की आवश्यकता नहीं होगी।
ओमप्रकाश ने जनता से अपील करते हुए कहा कि लक्षण दिखते ही तत्काल उपचार करवाएं। हमारी जागरुता मौत के आंकड़ों में कमी आ सकती है। जिन लोगों को आईसीयू की जरूरत नहीं है, और वे इसका उपयोग कर रहे हैं, उनकी निगरानी के लिए एक समिति गठित की गई है, जो हाॅस्पिटल्स की निगरानी करेगी।
उन्होंने बताया कि एक लाख वैक्सीनेशन प्रतिदिन के हिसाब से आवश्यकता है। हमने भारत सरकार को लिखा है कि राज्य सरकार अगर बाहर से सीधे वैक्सीन आयात कर सकती है तो उसके लिए हमें अनुज्ञा दी जाए।
एक साल में स्वास्थ्य सुविधाओं में हुई बढ़ोतरी 
सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा एक साल में लगातार स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाई गई हैं और और आगे भी इनमें वृद्धि करेंगे। राज्य में मार्च 2020 में ऑक्सीजन सपोर्टेड बेड्स 673 थे जो कि वर्तमान में 5500 के अधिक हैं। इसी प्रकार राज्य में मार्च 2020 में आईसीयू  216 थे जो कि अब 1390 है,  वेंटिलेटर्स मार्च 2020 में 116 से बढकर अब 876 हो गये हैं, ऑक्सीजन सिलेंडर्स मार्च 2020 में 1193 थै जो कि वर्तमान में  9900 हो गये हैं, ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर्स मार्च 2020 में 275 थे अब 1293 हैं, एंबुलेंस 307 और 64 टूनाड मशीन हैं। वहीं मार्च 2020 में केवल एक टेस्टिंग लैब थी, वर्तमान मे 10 सरकारी लैब और 26 प्रायवेट लैब हैं।  उन्होंने बताया है कि हल्द्वानी के सुशीला तिवारी राजकीय अस्पताल में 500 बेड का कोविड हाॅस्पिटल बन रहा है, जिसमें 100 बेड आईसीयू के होंगे। वहीं ऋषिकेश मे 500 बेड का कोविड अस्पताल बना रहे है। ऋषिकेश एम्स में 100 बेड का आईसीयू अस्पताल होगा। इसी प्रकार जाॅलीग्रांट में 200 से 300 बेड वैकल्पिक रूप से तैयार करेंगे। साथ ही जितने भी सरकारी अस्पताल हैं, उनमें भी ऑक्सीजन बेड करने की तैयारी है।
रेमडिसिविर को क्लिनिकल प्रोटोकाॅल के अनुसार ही उपयोग किया जाएगा। प्रतिदिन 25 से 30 हजार लोगों की जांच की जा रही है और हम इसे बरकरार रखेंगे। हमारा प्रयास है कि आरटीपीसीआर के साथ ही रैपिड एंटीजन टेस्ट ज्यादा करे, जिससे लक्षण वाले लोगों को 15 मिनट में रिपोर्ट मिल सकेगी।
वेबसाइट पर नंबर  अपडेट
उन्होंने बताया कि हाॅस्पिटल्स को निर्देश दिए हैं कि ऑक्सीजन बेड की उपलब्धता कि स्थिति को लगातार अपडेट करते रहें। पब्लिक को परेशानी न हो, इसके लिए अस्पतालों की वेबसाइट पर लिखे गए सभी पीआरओ के नंबर भी अपडेट किए जाने चाहिए। हमने एक टास्क फोर्स का भी गठन किया है, जिसमें डीएम, पुलिस, मेडिकल डिपार्टमेंट के स्पेशलिस्ट होंगे, जो सभी शिकायतों पर संज्ञान लेकर आगे कार्रवाई करेंगे।
रिजल्ट का इंतजार नहीं करेंगे
सचिव पंकज पांडे ने बताया कि टेस्टिंग और रिजल्ट में अंतर आने को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि जो भी टेस्ट करवाएगा, उसे तुरंत दवाई दे देंगे, उसके लिए रिजल्ट का इंतजार नहीं करेंगे। यह व्यवस्था हर जनपद में लागू हो गई है और किट बंटना शुरू हो गई है। रेमडिसिविर के भाव भारत सरकार ने तय किए हैं। जितने रूपए में सरकार को यह उपलब्ध हो रहा है, उतने ही रूपयों में निजी अस्पतालों को भी ट्रांसफर हो रहा है। हमने निजी अस्पतालों को भी निर्देश दिए हैं कि जनता को भी उतने ही रूपए में रेमडिसिविर उपलब्ध करवाए जाएं।
1150 सूचनाओं पर धरपकड़ 
आईजी अमित सिन्हा ने बताया कि अब तक 1150 सूचनाओं पर धरपकड़ की जा चुकी है। मिशन हौसला के अंतर्गत डीएम के साथ पुलिस सामंजस्य कर ऑक्सीजन और अन्य सुविधाएं जनता को उपलबध करवा रही है।  अब तक 22 एफआईआर हो चुकी है। जिसके तहत 33 आरोपी गिरफ्तार हुए हैं और 194 रिकवरी हुई है।