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गुटखा आैर तंबाकू की सार्वजनिक बिक्री पर नौ दुकानों का चालान

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गोपेश्वर। चमोली जिले के नंदप्रयाग, तेफना व थिरपाक बाजार में स्वास्थ्य विभाग, पुलिस व संस्था के सदस्यों ने गुटखा, तंबाकू का सार्वजनिक तौर पर बिक्री करने के जुर्म में 09 दुकानों का चालान कर 900 रुपये का अर्थदंड वसूला।

शुक्रवार को नोडल अधिकारी डॉ नीरज कुमार सिन्हा के नेतृत्व में पुलिस व हिमाद संस्था के सदस्यों की एक टीम ने नंदप्रयाग, तेफना व थिरपाक के बाजारों में सार्वजनिक तौर पर प्रदर्शन कर गुटका व तंबाकू को बेचने के जुर्म में 09 दुकानदारों का चालान किया तथा उनसे अर्थदंड के रूप में 900 रुपये भी वसूल किए। साथ ही अन्य दुकानदारों को चेतावनी दी कि यदि कोई दुकानदार ऐसा करता हुआ पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लायी जाएगी तथा दुकानदारों को यह भी हिदायत दी गई कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों को नशीले पदार्थों को न बेंचे। टीम में चिकित्सा विभाग के डॉ नीरज कुमार सिन्हा, संदीप कंडारी, हिमाद के सुभाष कुमार, पुलिस से सिपाही महेश त्यागी व विनोद थपलियाल आदि शामिल रहे। 

औली में कृत्रिम बर्फ बनाने का काम शुरू

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गोपेश्वर। चमोली जिले के औली में फिस रेस से पहले औली की ढलानों पर जंक खा रही कृत्रिम स्नो गन फ्रेंच एवं स्पेन के विशेषज्ञों के अथक प्रयास के बाद अब ठीक हो गई है। गुरुवार की देर सांय को ट्रायल लिया गया, जिसमें कृत्रिम स्नो गनो ने बर्फ बनाना शुरू कर दिया है।
औली में 15 से 21 जनवरी तक फिस रेस का आयोजन होना है, जिसके लिए जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक के मंत्रियों से लेकर अधिकारियों की लगातार हो रही मैराथन बैठकों में फिस रेस को सफलतापूर्वक संचालित किये जाने के लिए विचार मंथन किये जा रहे हैं। इसी कड़ी में यदि आयोजन के दौरान औली में बर्फबारी नहीं हो पाती तो उसके लिए पूर्व में लगी कृत्रिम बर्फ बनाने वाले उपकरणों को ठीक करने के लिए पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के प्रयासों के बाद फ्रेंच तथा स्पेन से तीन सदस्यीय तकनीकी विशेषज्ञों की टीम औली पहुंची है, जो फिस रेस के आयोजन तक औली में ही रहेगी। उनके प्रयासों से गुरुवार को देर रात्रि को कृत्रिम बर्फ बनाने वाली मशीनों को ठीक करने के बाद ट्रायल लिया गया, जिसमें वे सफल रहे। हालांकि गुरुवार को देर सायं को तापमान उतना कम नहीं था, जितना की बर्फ बनाने के लिए जरूरी है परंतु अंदाजा लगाया जा रहा है कि तापमान में गिरावट आ सकती है और कृत्रिम बर्फ के माध्यम से भी फिस रेस का आयोजन किया जा सकता है। कृत्रिम बर्फ बनाने वाली मशीनों से बर्फ बनने के बाद आयोजकों के चेहरे भी खिल उठे हैं। आशा की जा रही है कि यदि समय से बर्फ ना भी गिरे तो फिस रेस का सफलता पूर्व संचालन किया जा सकता है।

डीपीआर के कारण 35 योजनाओं का काम अधर में लटका

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देहरादून। राज्य में शहरों से लगे ग्रामीण इलाकों में प्रति व्यक्ति 135 लीटर पानी उपलब्ध कराने की राह में पेयजल निगम व जल संस्थान की लापरवाही आड़े आ रही है। स्थिति ये है कि वर्ल्ड बैंक की ओर से छह माह पूर्व इन योजनाओं के प्रस्ताव पास कर दिए गए थे, लेकिन अब तक दोनों विभाग अपनी डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) ही नहीं भेजी है, जिस कारण निगम व जल संस्थान को योजनाओं के लिए बजट जारी नहीं किया गया।

बता दें कि शहर से लगे 35 इलाकों में योजनाओं का निर्माण होना है। इनमें से 25 योजनाओं का निर्माण जहां पेयजल निगम करेगा, वहीं दस योजनाओं को तैयार करने की जिम्मेदारी जल संस्थान के पास है। पिछले छह महीने से दोनों संस्थान डीपीआर पर काम कर रहा है, लेकिन हैरत की बात ये है कि अब तक पेयजल 25 में से मात्र छह ही डीपीआर भेज पाया है, लेकिन जल संस्थान की ओर से अब तक एक भी डीपीआर नहीं भेजी गई है। डीपीआर नहीं आने के कारण ही वल्र्ड बैंक की ओर से जारी किए जाने वाले 150 मिलियन डॉलर यानी 975 करोड़ रुपये जारी नहीं कर पाया है।
शहरों से लगे इन इलाकों में बनेगी योजनाएं
देहरादून-ऋषिकेश: ढालवाला, जीवनगढ़, सेंट्रल होपटाउन, रायपुर, नत्थनपुर, मेहूंवाला माफी, नथुवावाला, ऋषिकेश देहात, गुमानीवाला, प्रतीतनगर व खड़कमाफी।
हल्द्वानी-काठगोदाम: फतेहपुर रेंज, मुखानी, हल्द्वानी तल्ली और बिथोरिया नंबर एक, कुसुमखेड़ा, बामोरी तल्ली बंदोबस्ती और गौज्जाली उत्तर रेंज।
हरिद्वार-रुड़की: हरिपुर कलां, सैदपुरा, बंगेरी महाबतपुर, नगला इमरती, ढंडेरा, मोहनपुर मोहम्मदपुर, रवाली महदूद, बहादराबाद, जगजीतपुर।
खटीमा: उमरूखुर्द, महोलिया, बंदिया।
अतिरिक्त क्षेत्र: खटियारी, कंचल गुसाईं, नगला, पदमपुर, काशीरामपुर।

बच्चों को बेहतर पाठक बनाने के लिए चम्पावत में एक अनूठी पहल

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बच्चों को बेहतर पाठक बनाने के लिए चम्पावत में एक अनूठी पहल शुरु की गई है। जनपद में इस कार्यक्रम को एसईआरआई (Scaling up Early Reading Intervention) के नाम से जाना जाता है। साल 2016 में इस कार्यक्रम को 504 स्कूलों में शुरू किया गया था। इसका मकसद बच्चों को स्वतंत्र पाठक बनाना है। कार्यक्रम के तहत बच्चों में पढ़ने की आदत व बुनियादी पाठन सिखाया जा रहा है। जनपद के हर स्कूल में टीचर एक शिक्षण पद्धति के अनुसार कक्षा 1 और 2 के बच्चों के साथ हिंदी भाषा के सेशन लेते है। बच्चे इस सेशन में संस्था द्वारा दी गयी रोचक और आनंददायक किताबों को स्कूल में तो पढ़ते ही हैं साथ साथ घर ले जाकर वे अपने घरवालों के साथ भी इन किताबों की कहानियों को सांझा करतें हैं।

“सरकार के साथ गहन साझेदारी में बड़े पैमाने पर काम करने का जो मॉडल SERI कार्यक्रम के द्वारा चम्पावत में क्रियान्वित किया गया उसके परिणाम आशानुरूप बेहतर हैं! हमारा प्रयास होगा कि अब इस मॉडल को अन्य जिलों एवं अन्य राज्यों में दोहराया जाये,” यह कहना है सौरब बैनरजी, निदेशक का।

जनपद चम्पावत में इस कार्यक्रम से जुड़े लोगों का मानना है कि जनपद में प्राथमिक शिक्षा को लेकर इस समय खास ध्यान देने की ज़ररूत है। अगर आप प्राथमिक विद्यालयों में जाते हैं तो आपको बच्चे आसानी से किताबों के साथ दिख जाएँगे लेकिन शायद ही कोई बच्चा क्लास 1 औऱ 2 का होगा जो आसानी से किताब को पढ़ते हुए मिल जाये। लेकिन अब ये सब बदल रहा है।इस कार्यक्रम के पीछे USAID (United States Agency for International Development), सर्व शिक्षा अभियान, जिला प्रशासन और रूम टू रीड द्वारा किये गये प्रयास हैं जिसके माध्यम से बच्चों में पढ़ने की आदत का विकास हुआ है।

DM Addressing audience on SERI Luanch Event (2)

आज तक इस कार्यक्रम से लगभग 15,000 बच्चे लाभांवित हुए हैं और लगभग 815 टीचरों को भी ट्रेनिंग दी गई है।इस  साल केवल तीन महीने (अगस्त, सितम्बर व अक्टूबर) में ही बच्चों ने 1,56,997 बार पुस्तकालयों की किताबों का लेन-देन किया है।

इस पूरे कार्यक्रम को जिलाधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) व जिला शिक्षा एवों प्रशिक्षण संस्थान की निगरानी औऱ देखरेख में चलाया जा रहा है। जिला स्तर पर SERI की सफलता का एक प्रमुख कारण अहमद इकबाल, जिलाधिकारी चम्पावत है।अहमद बताते हैं कि “रूम टू रीड की सफलता देखकर इस मॉडल को अन्य जिलों और राज्यों में भी लागू किया जा सकता है। मुझे ये देखकर काफी खुशी होती है कि इस पहल से बच्चों में पढ़ने की क्षमता इतनी तेजी से विकसित होती है।” 

2017 घोटालों के नाम रहा जिला उधमसिंहनगर

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वर्ष 2017 अब विदाई की ओर है। लोग नए साल के स्वागत की प्रतीक्षा में हैं। गुजरा साल अब इतिहास बन जाएगा। मगर ऊधमसिंह नगर जिले के ये साल हमेशा यादगार रहेगा, क्योकि यहां एक नहीं बल्कि कई बड़े घोटालों का खुलासा, जांच और बडी कार्यवाही भी इसी जिले में अमल में लायी गयी। हालांकि जीरो टारलेंस का दावा करने वाली सरकार भी इसी साल अस्तित्व में आयी, जिसने इन मामलों की जांच तो कराई।

साल 2017 जनपद उधमसिंहनगर में घोटालों के लिए यादगार बन गया है, और एसी यादगार जिसने प्रदेश ही नहीं बल्कि देश में भी घोटालों के रुप में बदनामी अपना नाम रोशन किया, कई घोटाले उजागर हुए तो कई घोटालों में जांच भी हुई, सिर्फ एनएच 74 में हुए करोड़ों के घोटाले में दो पीसीएस अफसरों समेत दस लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जबकि टीडीसी घोटाले में सिर्फ एफआईआर हुई है, लेकिन आरोपी अभी बाहर हैं। इसी तरह खाद्यान्न घोटाले में जांच हुई, मगर घोटाला सामने आने के बावजूद आज तक एफआईआर नहीं हुई। साल खत्म होता उससे पहले सिडकुल घोटाला भी सामने आ गया है। इस मामले में भी जांच के आदेश भर ही हुए हैं। वहीं इन घोटालों पर प्रदेश की भाजपा सरकार जहां अपनी उपलब्धि के रुप में बयां कर रही है तो कांग्रेस अब घोटाले की जांच में ही खामियां तलाश कर राजनैतिक रोटियां सेक रही है, भाजपा जीरो टालरेंस का नारा देकर जहां अपना कार्यकाल निभा रही है तो कांग्रेस भी इन घोटालों की जांच में पारदर्शीता ना होने की बात कह कर सरकार को घेरने की पुरी कोशिश कर रही है। विपक्ष चीखता रहा कि बड़ी मछलियों को बचाया जा रहा है, मगर उनकी आवाज को दबा दिया गया।एसआईटी ने अब तक की विवेचना में दो पीसीएस अफसरों समेत दस लोगों को गिरफ्तार किया है। सभी जेल में हैं। हालांकि इतने बड़े घोटाले में दर्जनों की संख्या में अधिकारी, कर्मचारी, किसान व बिचौलिए शामिल थे, लेकिन महीनों से चल रही पुलिस की कार्रवाई को नाकाफी कहा जा सकता है। घोटालों की इसी कड़ी में टीडीसी के घोटाले का राजफाश हुआ। करीब 16 करोड़ के इस घोटाले में टीडीसी के तत्कालीन प्रबंध निदेशक समेत नौ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। इसकी जांच के लिए भी एसआईटी को सौंपी गई है। इस साल में सैकड़ों करोड़ का खाद्यान्न घोटाला प्रकाश में आया। इसकी जांच के लिए एसआईटी का गठन हुआ। एसआईटी ने जांच रिपोर्ट सरकार को दे दी। साल के अंतिम महीने में सिडकुल घोटाला भी सामने आ गया। इसमें मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दे दिए हैं। यह भी कहा है कि यदि जरूरत पड़ी तो एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। फिलहाल करोड़ों के इस घोटाले की जांच भी शुरू नहीं हो सकी है।

साल 2017 घोटालों का जिला बनकर रह गया उधमसिंहनगर, आधा दर्जन घोटालों को जन्म देने वाले इस जिले में घोटाले भी उजागर हुए और की घटालों में जांच भी हुई कुछ में कार्यवाही हुई तो कुछ में आज भी कार्यवाही लम्बित है, फिलहाल घोटालेबाजों का जो भी हो मगर सत्तापक्ष और विपक्ष को जरुर एक दुसरे की टांग खींचने का मौका दे दिया, वहीं 2018 में देखना होगा कि
आखिर जीरो टालरेंस की सरकार में घोटाले कितने प्रभावी रुप से खुलते हैं और क्या घोटाले में संलिप्त बडे नामों को दबा दिया जाता है या फिर उजागर होते हैं।

वन दरोगा भर्ती के विरोध में संघ पहुंचा वन मंत्री के पास

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देहरादून। वन विभाग में वन दरोगा के पदों पर सीधी भर्ती का कर्मचारियों ने विरोध शुरू कर दिया है। वन बीट अधिकारी और वन आरक्षी संघ का एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को इस मांग के साथ वन मंत्री डा. हरक सिंह से उनके आवास पर मुलाकात की।

गुरुवार को वन बीट अधिकारी संघ प्रांतीय अध्यक्ष वीरेंद्र पांडे ने बताया कि वन विभाग में वन आरक्षी से लेकर उप वन क्षेत्राधिकारी तक की सेवा नियमावली में संशोधन की कवायद चल रही है। जिसका कि वन कर्मचारी विरोध करते हैं। उन्होंने मांग की कि सेवा नियमावली में शैक्षिक और आयु की योग्यता में बदलाव ना किया जाए। इस पर वन मंत्री डा. रावत ने उन्हें बताया कि शैक्षिक योग्यता और आयु सीमा में बदलाव के लिए उन्होंने शासन को प्रस्ताव बनाने को कहा है।लेकिन अभी वह प्रस्ताव उनके पास नहीं आया है। वन मंत्री ने कर्मचारियों को ये भी बताया कि वन दरोगा के लिए सीधी भर्ती के लिए उन्होंने शासन को कोई निर्देश नहीं दिए हैं। कर्मचारियों ने उनसे मांग की कि वन दरोगा के पदों को शत प्रतिशत पदोन्नति से ही भरा जाए। ताकि सभी वन रक्षकों को प्रमोशन का अवसर मिले। इस पर वन मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वे इस पर कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखेंगे। वार्ता के दौरान वन फील्ड कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप पंवार, वन बीट अधिकारी संघ के संरक्षक इंद्रमोहन कोठारी,प्रदेश महामंत्री अनिल पवार, आशीष कोठारी,बृज मोहन सिंह रावत, अनिल कुमार चौहान, राकेश रत्नाकर,प्रकाश नेगी,राम चंद्र पांडे और राजेंद्र रावत आदि मौजूद थे।

मुख्य सचिव ने पुलिस चैंपियनशिप के विजेताओं को मेडल प्रदान किये

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मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में 66वें अखिल भारतीय पुलिस चैंपियनशिप के विजेताओं को मेडल प्रदान किया। इसके बाद अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि, “उत्तराखण्ड पहली बार अखिल भारतीय पुलिस चैंपियनशिप की मेजबानी कर रहा है, यह उत्तराखण्ड के लिए गौरव की बात है। इस सफल आयोजन के लिए उन्होंने उत्तराखण्ड पुलिस को बधाई दी। कहा कि राज्य के डीजीपी खुद भी राष्ट्रीय स्तर के एथलीट रहे हैं। इसलिए उम्मीद की जानी चाहिए कि पुलिस बल में खेल प्रतिभा को बढ़ावा मिलेगा।”
मुख्य सचिव ने 25 राज्यों और 7 केंद्रीय बलों से प्रतिभाग करने वाली सभी 32 टीमों को बधाई दी। आशा व्यक्त की कि इनमें से कईं एथलीट अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। इससे पहले एडीजी लॉ एंड आर्डर अशोक कुमार ने मुख्य सचिव का स्वागत किया और चैंपियनशिप के बारे में जानकारी दी।
इस अवसर पर डीजीपी अनिल कुमार रतूड़ी, सचिव खेल  भूपिंदर कौर औलख, डी.आई.जी. श्री पुष्पक ज्योति, अपर सचिव खेल विम्मी सचदेव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

सायरा बानों को किया सम्मानित

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संसद में ट्रिपल तलाक बिल पास के बाद ट्रीपल तलाक के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाली सायरा बानों को उनके गृह क्षेत्र में सम्मानित किया गया। यहां भाजपा के कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत ने सायरा बानों को सम्मानित करते हुए कहा कि, “सायरा बानो देश के लिए मिसाल बनी है जिन्होने एसी लडाई लडी जिसमें कामयाबी मिलना अंधेरे में रोशनी तलाशने के बराबर था मगर सायरा के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होने हिम्मत नहीं हारी और समाज में फैली कुरीति को दूर करने के लिए जंग लडी जिसमें उनको कामयाबी मिली है।

सायरा बनानो ने इस मौके पर कहा कि, “महिलाओं के अधिकार के लिए अपनी लड़ाई आगे भी जारी रखेंगी। ट्रिपल तलाक के बाद उनको लगा कि बहु-विवाह, निकाह, हलाला जैसी कुप्रथाएं भी हमारे समाज में प्रतिबंधित होनी चाहिए। जिसके नाम पर महिलाओं के साथ जिस तरह से अत्‍याचार होता है, वह बंद होना चाहिए।”

बानो ने यह भी कहा, ‘मैं एक बार फिर बहु विवाह और निकाह हलाला पर प्रतिबंध लगाने के लिए शीर्ष अदालत में याचिका दायर करूंगी।’

मुख्यमंत्री राहत कोष से पीड़ितों को मिली आर्थिक मदद

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देहरादून, मसूरी विधायक गणेश जोशी द्वारा चलचला गांव के पीड़ित परिवारों से किए गए वादे को पूरा किया गया। उन्होंने विधानसभा क्षेत्र सुवाखोली में मुख्यमंत्री राहत कोष से मिली राशि से पीड़ितों को 25-25 हजार रुपये की चेक वितरित की।

बता दें कि विगत बारिश के समय चलचला गांव में बादल फटने से कई लोग बेघर हो गये थे, जिसके बाद मुख्यमंत्री के प्रतिनिधित्व के तौर पर विधायक जोशी ने सभी पीड़ित परिवारों को प्रशासन द्वारा तुरन्त राहत प्रदान करवाई गई थी। इस दौरान जोशी द्वारा सभी परिवारों को मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक मदद देने की घोषणा की थी, जिसे उन्होंने पूरा किया।

मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक सहायता पाने वालों में हुकुम सिंह पुत्र इन्दर सिंह, जगत सिंह पुत्र उत्तम सिंह, आशा देवी पत्नी गम्भीर सिंह, कुन्दर सिंह पुत्र कृपाल सिंह, चन्दन सिंह पुत्र मोहर सिंह, दीवान सिंह पुत्र मान सिंह, बसंती देवी पत्नी शेर सिंह एवं महेन्द्र सिंह पुत्र कुवंर सिंह को 25-25 हजार की राशि के चेक प्रदान किए। इसके लिए सभी पीड़ित परिवारों ने विधायक जोशी एवं मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत का आभार प्रकट किया।

इस मौके पर जोशी ने कहा कि भाजपा सरकार गरीबों के हितों के लिए लगातार कार्य कर रही है। सरकार ने गरीबों के हितों को ध्यान में रखते हुए किसानों को कृषि ऋण वितरित किया है। सीएम एवं केन्द्रीय मंत्री भी इस मुहिम में स्वयं शामिल होकर किसानों के हितों के लिए कार्य कर रहे हैं। 

वायू प्रदूषण लोगों की आखों पर ढा रहा सितम

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ऋषिकेश, श्वांस, गला और फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने के साथ ही वायु प्रदूषण आंखों पर भी सितम ढा रहा है। महानगरों के बाद यह समस्या अब छोटे शहरों मे भी नजर आने लगी हैं।

ऋषिकेश की बात करें तो पिछले चंद वर्षो मे ही नेत्र रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। जिसका एक बड़ा कारण वायू प्रदूषण को बताया जा रहा है। तीर्थ नगरी मे वाहनों की रेलमपेल और पर्यावरण प्रदूषण से हालात लगातार चिंताजनक होते जा रहे हैं। इसका असर एम्स हास्पिटल समेत तमाम नेत्र रोग विशेषज्ञों के यहां पहुंच रहे रोगियों की कतारों के रूप मे देखने को मिल रहा है।

प्रदूषण की चपेट मे आकर लोगों मे आंखों से पानी आना, लाल होना और रेशे की तरह से कीचड़ निकल रहा है। ध्यान न देने पर स्थिति गंभीर हो रही है। इसकी वजह से थकान की समस्या परेशान कर रही है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. राजे नेगी के मुताबिक प्रदूषण की वजह से आंखों में सूखापन आ रहा है, ध्यान न देने पर यह आंखों के लिए घातक हो सकता है, आंखों में छोटे-छोटे दाने हो रहे हैं, जिससे बहुत जलन होती है, दानों की संख्या बढ़ती चली जाती है। वाहनों के धुएं की वजह से कार्निया में जख्म हो जाता है। अनदेखी पर यह समस्या बढ़कर अल्सर का रूप ले लेती है। अधिकतर यह दिक्कत टू व्हीलर सवार लोगों को आती है।

बकौल डॉ. नेगी के अनुसार हेलमेट पहनकर दोपहिया वाहन चलाएं।आंखों पर चश्मा पहनें और आंखों में जलन होने पर पानी से धोएं। उन्होंने बताया कि आखों मे किसी भी प्रकार की समस्या होने पर घर का हकीम न बने और बिना परामर्श के आई ड्रॉप न डालें।