रांची, चारा घोटोले में राजद प्रमुक लालू प्रसाद यादव को पेशी के मद्देनजर पूरा कोर्ट परिसर पुलिस छावनी में तब्दील था। चार डीएसपी और लगभग 400 जवानों को कोर्ट परिसर की सुरक्षा में लगाया गया था। सुरक्षा को लेकर कोर्ट परिसर में किसी भी कार्यकर्ता या अन्य बाहरी लोगों को प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा था। कोर्ट परिसर में सिर्फ अधिवक्ता, मीडिया और मुकदमे से जुड़े लोगों को ही कोर्ट परिसर में जाने दिया जा रहा था। अपने मुकदमे के लिए आये कई लोगों को भी गेट से ही लौटना पड़ा। कोर्ट के बाहर राजद कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ जमा हो गयी थी। सुरक्षा के लिहाज से कोर्ट के दोनों गेट पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये थे। साथ ही कोर्ट के मेन गेट पर लगने वाले चाय सहित अन्य खाने-पीने की दुकानों को भी नहीं लगने दिया गया था।
विधायक को रोका तो हुई बकझक
राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह और विधायक भोला यादव कोर्ट परिसर में अपने काफिले के साथ सीधे चले आ रहे थे। गेट के पास आते ही पुलिस के जवानों ने रोक दिया। इस पर विधायक और कार्यकर्ता भड़क उठे और काफी हो हंगामा होने लगा। इसके बाद मेन गेट के बाहर तैनात सिटी डीएसपी राजकुमार मेहता ने बातचीत की और दोनों नेताओं को अंदर जाने दिया गया।
तेजस्वी तेजप्रताप नही आए रांची
लालू प्रसाद यादव के पुत्र तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव में कोई भी रांची नही आए थे जबकि इससे पहले 23 दिसम्बर को सुनवाई में तेजस्वी रांची आए थे। कोर्ट ने तेजस्वी को भी अवमानना का नोटिस भेजा है। इस मामले में जब रघुवंश प्रसाद सिंह से पूछा गया कि लालू के पुत्र नहीं आए है तो उन्होंने कहा कि मौसम खराब होने के कारण फ्लाइट और ट्रेन लेट चल रही हैं। इसी कारण से दोनों नहीं आ सके।
पार्टी की बैठक में रणनीति तय होगी
पत्रकारों से बात करते हुए राजद उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद ने बताया कि पार्टी की बैठक में रणनीति तय की जाएगी। कई बार इस तरह की परिस्थिति को झेल चुके हैं। इस विषम परिस्थिति में पार्टी का जनाधार बढ़ा है। राजद एक परिवार है। पार्टी के सिद्धांत के तहत ही बैठक में चर्चा की जाएगी।
भाजपा करेंगे ध्वस्त
राजद के उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद ने एक सवाल के जबाब में कहा कि बीजेपी का सब किया धरा है। हम लोगों की भाजपा से लड़ाई है। नीतीश से लड़ाई है। जनता एकजुट है। दोनों को सबक सिखायेंगे। सभी गैर भाजपा दलों को एकजुट किया जाएगा। उसके बाद बीजेपी को ध्वस्त कर देगे। राजद मुकाबले को तैयार है। यह जनता की लड़ाई है। हमलोग इन्फैन्ट्री के जवान हैं। झटका लगने से हमारी ताकत बढ़ती है।




















































उत्तराखंड में उगने वाली फसल कोदे को जिस तरह से इन युवाओं ने पलायन के खिलाफ इस्तेमाल किया है वह वाकई प्रशंसनीय है। संदीप सकलानी, जो की राजस्थान में एक सिविल इंजीनियर थे मूल रूप से टिहरी के निवासी हैं। रिवर्स माइग्रेशन के प्लान से फ़रवरी 2016 वापस उत्तराखंड आये और उन्हें कुलदीप रावत मिले जो की एचएनबी गढ़वाल यूनिर्वसिटी से ग्रेजुएट हैं। एक जैसी सोच होने की वजह से इन दोनों ने साथ काम करने का फैसला किया। इतना ही नहीं उन्होंने नगर पालिका के स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को इसके जरिये रोजगार दिया।संदीप कहते हैं कि, “आगे देवकौश आर्गेनाइजेशन रिवर्स माइग्रेशन के लिए 2018 के अंत तक 100 लोगों को रोजगार देने का टारगेट है।” संदीप और कुलदीप को उनकी इस पहल के लिए सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा ‘हिल-रत्न पुरस्कार’ से भी नवाजा गया है। 26 साल के संदीप सकलानी और 25 साल के कुलदीप रावत ने ना सिर्फ रिवर्स पलायन के रास्ते खोलें हैं बल्कि उत्तराखंड की दम तोड़ती मिठाईयों को एक नई पहचान भी दिलाई है।टीम न्यूजपोस्ट कुलदीप और संदीप को उनकी इस पहल के लिए सलाम करता है और उन्हें आगे बढ़ने के लिए शुभकामनाएं देता है।












