नींद में खर्राटें की आवाज को न करें नजरअंदाज

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नींद में नाक या मुंह के रास्ते आने वाली अनेक तरीके की आवाजें, जिन्हें हम खर्राटे कहकर बुलाते हैं। ये खर्राटे कई तरह के होते हैं जैसे सीटी की आवाज वाले खर्राटे, गहरी आवाज वाले घर्र-घर्र करने वाले खर्राटे, रुक-रूक कर तेज आवाज फैलाने वाले खर्राटे आदि-आदि। ऐसे खर्राटों की आवाज़ को कभी हम काॅमेडी कर नजरअंदाज कर देते हैं तो कभी ज्यादा खास ध्यान नहीं देते। लेकिन, विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि खर्राटे खतरनाक भी हो सकते हैं। समय रहते इसकी जांच कराना ही समझदारी है।
नींद में खर्राटों के कारण और उसके दुष्प्रभावों को लेकर विशेषज्ञ डाॅ. जगदीश रावतका कहना है कि अनिंद्रा के कारण रोगी को आॅब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया बीमारी हो सकती है। इस बीमारी की वजह से मरीज को दिल की बीमारी, ब्लड प्रेशर बढ़ना, अचानक सोते समय दिल की धड़कन बंद होना, ब्लड शुगर का अनियंत्रित होना, अचानक दिमाग की नस फटना और लकवा मारना हो सकते हैं। ऐसे में इस बीमारी को नजरअंदाज करना किसी लिहाज से समझादारी नही है। उन्होंने कहा कि यदि इस प्रकार के खर्राटों की समस्या परिवार में किसी को भी हो इसे मजाक में न लेकर गंभीरता से इसका उपचार कराना उचित होगा।
एसएमआई ने लगाया निशुल्क कैंप
शुक्रवार को श्री महंत इंदिरेश अस्पताल परिसर में खर्राटे एवं अनिद्रा रोग सम्बंधित रोगियों के स्वास्थ्य परीक्षण हेतु निशुल्क शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में 110 रोगियों का परीक्षण किया गया, 19 रागियों को डाॅक्टरों ने स्लीप स्टडी का परामर्श दिया। अस्पताल की ओर से वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी भूपेंद्र रतूड़ी ने बताया कि शिविर में ऐसे मरीजों की संख्या अधिक थी जिन्हें खर्राटे, मोटापा, दिन में ज्यादा नींद आना, ड्राइविंग करते समय सोने की
शिकायत, सोते समय अचानक सांस रूकने के अहसास से नींद टूट जाना, अनिंद्रा, सैक्स से विरक्ति, नींद में चलना या बोलना आदि की शिकायत रहती है। डाॅक्टरों ने ऐसे मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उनकी आवश्यक जांचें की। उन्होंने बताया कि अस्पताल में उपलब्ध अत्याधुनिक स्लीप स्टडी मशीन के माध्यम से मरीजों की स्लीप स्टडी की जाएगी। शिविर में पंजीकृत रोगियों को खर्राटे व अनिद्रा रोग सम्बन्धित जांच पर 30 प्रतिशत की छूट भी दी जाएगी।