अंतरिक्ष तकनीक की सहायता से कृषि क्षेत्र में बढ़ेगा स्वरोजगार : राज्यपाल

0
16

देहरादून,  पर्वतीय राज्य होने के कारण उत्तराखण्ड में बागवानी और जड़ी-बूटी उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। ऐसे में अन्तरिक्ष तकनीक की सहायता से कृषि तथा बागवानी के क्षेत्र में स्वरोजगार पैदा करके पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन को कम किया जा सकता है। अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का अधिक से अधिक लाभ किसानों और आम नागरिक को मिल सके इसके लिए प्रयास करने होंगे।

यह बातें प्रदेश की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने बुधवार को राजभवन में उत्तराखण्ड अन्तरिक्ष उपयोग केन्द्र की ओर से प्रकाशित पुस्तकों का लोकार्पण करते हुए कहीं। इस दौरान राज्यपाल ने तीन पुस्तकों ‘‘रिमोट सेंसिंग एण्ड जीआईसी बेस्ड एप्लीकेशंस इन एग्रीकल्चर सेक्टर’, “जियोस्पाशियल टैक्नीकस फॉर फॉरेस्ट, इकोलॉजी एण्ड कलाइमेंट चेंज सेक्टर्स ऑफ उत्तराखण्ड’ तथा ‘एन एटलस ऑफ वाटर एण्ड स्नो कवर स्टडीज ऑफ उत्तराखण्ड’ का लोकापर्ण किया। साथ ही उन्होंने लैण्ड यूज, लैण्ड कवर एटलस ऑफ उत्तराखण्ड तथा टूरिस्ट डेस्टिनेशन ऑफ उत्तराखण्ड पुस्तकों का भी विमोचन किया। कार्यक्रम में एक डॉक्यूमेंटरी फिल्म ‘‘ज्योस्पाशियल स्टडी ऑफ रिस्पना रिवर’ भी रिलीज की गई।

राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने कहा कि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी राज्य की दुर्गम भौगोलिक स्थिति के सन्दर्भ में अत्यन्त लाभकारी हो सकती है। रिमोट सेंसिंग और जीआईएस राज्य में कृषि, बागवानी एवं वन संसाधनों के अध्ययन और सर्वे के लिए प्रभावी तकनीक सिद्ध होगी। लैण्ड यूज और लैण्ड कवर एटलस ऑफ उत्तराखण्ड हमारे प्राकृतिक संसाधनों की वास्तविक स्थिति के आकलन, प्रबंधन एवं अनुश्रवण में मदद करेगी। इससे राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के कारण भू-संसाधनों में होने वाले बदलावों के बारे में भी पता चलेगा। साथ ही शहरी क्षेत्रों में हो रहे विस्तारीकरण की जानकारी भी मिलेगी। यह भूमि प्रबंधन एवं नियोजन में उपयोगी सिद्ध होगी।

राज्यपाल ने कहा कि आपदा प्रबन्धन को प्रभावी बनाने में अन्तरिक्ष तकनीकों का प्रयोग किया जाना चाहिए। ग्लेशियरों के अध्ययन और पर्यावरणीय अनुश्रवण में अन्तरिक्ष तकनीक हमारी सहायता करेगी। अंतरिक्ष तकनीक की सहायता से राज्य के विकास एवं प्रगति को कैसे तीव्र किया जा सकता है, इस पर कार्य किया जाना चाहिए।

कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि उत्तराखण्ड अन्तरिक्ष उपयोग केन्द्र से प्राप्त जानकारी और डेटा से सभी विभाग लाभ उठा रहे हैं। अन्तरिक्ष प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी की सहायता से हमें राज्य के कृषि एवं बागवानी क्षेत्र को सुदृढ़ करने के प्रयास करने होंगे। कृषि क्षेत्र की प्रगति होने से पलायन पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।

सचिव सूचना एवं प्रौद्यागिकी रमेश कुमार सुधांशु ने कहा कि प्रधानमंत्री ने भी अंतरिक्ष प्रौद्यागिकी को विशेष महत्व दिया है। सुनियोजित नगरीय विकास सुनिश्चित करने में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी अत्यन्त सहायक सिद्ध होगी। सुनियोजित विकास के लिए डेटा उपलब्ध होना बहुत जरूरी है। स्वच्छता अभियान में जियो टैगिंग से पारदर्शिता बढ़ी है। उत्तराखण्ड में ड्रोन एप्लीकेशन का एक अच्छा शोध संस्थान स्थापित हो इसके लिए प्रयास किए जाएंगे।