नरक चतुर्दशी पर लोगों ने गंगा में लगाई डुबकी

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हरिद्वार, दशहरे के साथ ही त्योहारों का मौसम शुरू हो जाता है। दशहरा पर्व के 20वें दिन दिवाली मनाई जाती है, शास्त्रों में ऐसा वर्णन है कि आज गंगा स्नान से पाप मिटने के साथ ही नरक जाने से जातक बचता है।

छोटी दीपावली को नरक चतुर्दशी के तौर पर मनाया जाता है। इसलिए माना जाता है कि आज के दिन गंगा स्नान से नरक के द्वार तक पहुंचना नहीं पड़ता है। इसलिए छोटी दिवाली के मौके पर लोग गंगा स्नान व अभ्यंग स्नान किया। गंगा में स्नान के लिए लोगों की भारी भीड़ गंगा के घाटों पर उमड़ी। लोगों ने गंगा स्नान के पश्चात दान-पुण्य आदी कर सुख-समृद्धि की कामना की। आज के दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था। छोटी दिवाली के दिन यम देवता की भी पूजा की जाती है।

दरअसल, नरकासुर नामक असुर और भगवान कृष्ण के बीच हुए युद्ध के कारण इस दिन नरक चतुर्दशी की पूजा होती है। शास्त्रों के अनुसार नरकासुर राक्षस ने 16,000 कन्याओं को अपना बंधक बना रखा था। भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध कर उन सभी कन्याओं को आज के ही दिन मुक्त करवाया था।

 छोटी दिपावली का पर्व मंगलवार को तीर्थनगरी में श्रद्धा के साथ मनाया गया। छोटी दिपावली को नरक चतुर्दशी, रूप चौदस और नरक चौदस के नाम से भी जान जाता हैं। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार इस दिन का खास महत्व होता है। मान्यताओं के अनुसार अगर आज के दिन विधि-विधान से पूजा की जाए तो सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।

मान्यता के अनुसार आज के दिन घर का सबसे बुजुर्ग पूरे घर में एक दीप जलाकर घुमाता है, फिर से घर के बाहर जाकर रख दिया जाता है। इसे यम दीप या यम दिया भी कहते हैं। इसके पीछे की कथाएं हैं कि दीप को पूरे घर में घुमाकर बाहर ले जाने से सारी बुरी शक्तियां घर से बाहर चली जाती हैं।

चार बत्ती वाला मिट्टी का दीपक अपने घर के मुख्यद्वार पर रखने से माना जाता है कि नरक और पाप दोनों से मुक्ति मिलती है। पुराणों के मुताबिक आज के ही दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध करके, देवताओं और ऋषियों को उसके आतंक से मुक्ति दिलवाई थी। रूप चौदस कहने के पीछे भी एक अलग धार्मिक कहानी है। इस दिन भगवान कृष्ण की पूजा से व्यक्ति को सौंदर्य की प्राप्ति होती है। साथ ही इस दिन दीपदान की प्रथा भी है, जिसे यमराज के लिए किया जाता है। मंगलवार को लोगों ने तीर्थनगरी में छोटी दीपावली यानि नकर चतुर्दशी श्रद्धापूर्वक मनाई। सायंकाल यम के नाम का दीपदान कर पापों व नरक से मुक्ति की प्रार्थना की। नरक चतुर्दशी पर लोगों ने इस दिन तिल का उबटन व तेल लगाया। इसके बाद सूर्य के निकलने से पहले स्नान किया।

उसके बाद तिल डालकर जल अर्पित कर यम तर्पण किया। देवी देवताओं की पूजा के बाद सांयकाल यम के नाम दीया जलाकर सुख समृद्धि की कामना की। नरक चतुर्दशी के दिन भगवान कृष्ण की भी पूजा जरूर की गई क्योंकि भगवान कृष्ण ने चतुर्दशी के दिन ही नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था।